
Tripti Soni
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ये बच्चा रायपुर के कृष्णा नगर से बिना चप्पल पैदल साइंस कॉलेज मैदान आया। मोदी की दीवानगी में सारे बैरीकेड लांघकर मंच के ठीक सामने तक आ गया, कहता है मोदी जी को देखने और गाना सुनाने आया हूँ। मोहम्मद बड़ी मुहब्बत से गीत गाता है आप भी सुनिए #Chhattisgarh BJP Chhattisgarh Narendra Modi Vishnu Deo Sai
Tripti Soni21,505 görüntüleme • 2 yıl önce

लोकतंत्र में यही भाषा और इसी तरह का प्रदर्शन मान्यता प्राप्त है, ऐसा बच्चे (अधिकतर छात्राएँ) मान लेते हैं, इसलिए उनकी दिमागी हालत भी ऐसी ही हो गई है। बच्चे नारे लगा रहे हैं "जूता मारो सालों को...!" वीडियो छत्तीसगढ़ के कवर्धा का है जहां दुल्लापुर स्कूल के बच्चे-बच्चियाँ रोकती हुई पुलिस को धक्का देते हुए कलेक्ट्रेट के भीतर घुस गए और नारेबाजी करने लगे। इनका कहना है कि स्कूल की प्रभारी प्राचार्या इनसे टॉयलेट साफ करवाती हैं और ऐसा नहीं करने पर टीसी देने की धमकी देती हैं। 7 जनवरी को भी कुछ स्टूडेंट ने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिया था और शिकायत की थी कि जिला शिक्षा अधिकारी, प्रभारी प्राचार्या को बचा रहे हैं, उन्होंने मांग रखी कि तत्काल प्रभारी प्राचार्या पर कार्रवाई की जाए। अब करीब पखवाड़े भर बाद स्कूली छात्र-छात्रा किसी राजनीतिक दल की तरह पेश आए। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बीते दिनों सरकार से पूछा था कि आखिर स्कूली बच्चों के सड़क पर प्रदर्शन की नौबत क्यों आई है? भले ही ये संदर्भ स्कूलों में टीचर्स की कमी का हो, लेकिन बात तो प्रदर्शन पर सटीक बैठती है कि आखिर क्यों बच्चों को नारे लगाने पड़ रहे हैं, वो भी ऐसे नारे जो शायद उन्हें कॉलेज में छात्रनेता बनने के बाद भी नहीं लगाने चाहिए। खैर जब देशभर में राजनीतिक दलों के नेताओं की जुबान ऐसी हो तो बच्चों से किस परहेज की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन इतनी उम्मीद लोकतांत्रिक और राजनीतिक व्यवस्था से जरूर की जानी चाहिए कि शिक्षा के साथ संस्कार, सभ्यता, तहजीब और विनम्रता की थोड़ी-बहुत तो बेहतर मिसाल स्थापित करें। - तृप्ति सोनी
Tripti Soni12,956 görüntüleme • 1 yıl önce

आज बीएड सहायक शिक्षकों की नौकरी जा चुकी है, लेकिन जिन्होंने साल भर काम किया है उनके साथ इंसाफ़ तो हो! सरकार को ये संभावना टटोलनी चाहिए कि दूसरे बेरोजगारों के समानता के अधिकार की हेठी किए बिना, जिन लोगों की नौकरी जा रही है, उन्हें किस तरह से काम दिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लगातार राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है कि छत्तीसगढ़ के सैकड़ों स्कूल एक शिक्षक या बिना शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के दसियों हजारों पद खाली हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि शिक्षकों की मांग को लेकर स्कूली बच्चों का सड़कों पर आंदोलन क्या एक अच्छी नौबत है? अदालत ने कहा है कि जिन बच्चों को पढ़ाई करनी चाहिए वे बच्चे पढ़ाने वाले शिक्षक न होने से आंदोलन को मजबूर है। अब राज्य सरकार के पास दसियों हज़ार शिक्षकों की भर्ती की एक बहुत बड़ी जरूरत है और अभी हटाए गए करीब तीन हज़ार शिक्षकों को रोज़गार की ज़रूरत है, इन दोनों स्थितियों को मिलाकर समाधान निकालना चाहिए। #BEd #Chhattisgarh
Tripti Soni10,345 görüntüleme • 1 yıl önce
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