उम्दा_पंक्तियां का 2 लाख वाला पहला अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है साहित्य के प्रति प्रेम और सोशल मीडिया का प्रयोग मोहब्बत के लिए हो इसी लक्ष्य के साथ फिर से शुरू
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करके लंकेश वध, तान केसरिया-ध्वज देखो राम की सेना अयोध्या चली । हर गली हर नगर दिव्य दीपें जलीं कार्तिक मास, अमावस अथ शुभ दीपावली। 🪔 ~ प्रह्लाद पाठक
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मैंने शेर बेटे को जन्म दिया था, मैं रोऊंगी नहीं, उसे सैल्यूट करूंगी। ~ शहीद मेजर आशीष धौंचक की मां
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पापा कहते थे "यहां सब अपने हैं मगर"...... ये नहीं बताया सिर्फ़ तब तक, जब तक मैं "जिंदा" हूं .........!! ~ खामोश कलम
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ये दुनिया सपेरों की बस्ती है, ये रिश्ते बनाकर डसती है। यहाँ भरोसा बहुत मँहगा है, नफरत बिलकुल सस्ती है।।
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वो जो शाम को सारी खुशियां लेकर आता है, बहुत सारे दुःखों को सहकर सदा मुस्कराता है. वो होता है पिता..❤️
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"मलाल है मगर इतना मलाल थोड़े है, ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़े हैं, मज़ा तो तब है कि हम हारकर भी हँसते रहे हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़े है..." ~ परवीन शाकिर
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मन के बहकावे मे न आ, मन राह भुलाये भ्रम में डाले तू इस मन का दास न बन, मन को अपना दास बनाले
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“मैं कहानी तो नहीं हूं कि सदा रह जाऊं मैंने किरदार निभाना है फिर चले जाना है” ~ अतबाब साहब