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उम्दा_पंक्तियां

@umda_panktiyaan • 212,623 subscribers

उम्दा_पंक्तियां का 2 लाख वाला पहला अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है साहित्य के प्रति प्रेम और सोशल मीडिया का प्रयोग मोहब्बत के लिए हो इसी लक्ष्य के साथ फिर से शुरू

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चींटी को कभी स्कूल जाते हुए देखा है..? नहीं न... फिर भी वो हार मानना नहीं जानती क्योंकि मेहनत डिग्री से नहीं आदत से होती है..!!

चींटी को कभी स्कूल जाते हुए देखा है..? नहीं न... फिर भी वो हार मानना नहीं जानती क्योंकि मेहनत डिग्री से नहीं आदत से होती है..!!

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करके लंकेश वध, तान केसरिया-ध्वज देखो राम की सेना अयोध्या चली । हर गली हर नगर दिव्य दीपें जलीं कार्तिक मास, अमावस अथ शुभ दीपावली। 🪔 ~ प्रह्लाद पाठक

करके लंकेश वध, तान केसरिया-ध्वज देखो राम की सेना अयोध्या चली । हर गली हर नगर दिव्य दीपें जलीं कार्तिक मास, अमावस अथ शुभ दीपावली। 🪔 ~ प्रह्लाद पाठक

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मैंने शेर बेटे को जन्म दिया था, मैं रोऊंगी नहीं, उसे सैल्यूट करूंगी। ~ शहीद मेजर आशीष धौंचक की मां

मैंने शेर बेटे को जन्म दिया था, मैं रोऊंगी नहीं, उसे सैल्यूट करूंगी। ~ शहीद मेजर आशीष धौंचक की मां

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मेहनत डिग्री से नहीं आदत से होती है...

मेहनत डिग्री से नहीं आदत से होती है...

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पापा कहते थे "यहां सब अपने हैं मगर"...... ये नहीं बताया सिर्फ़ तब तक, जब तक मैं "जिंदा" हूं .........!! ~ खामोश कलम

पापा कहते थे "यहां सब अपने हैं मगर"...... ये नहीं बताया सिर्फ़ तब तक, जब तक मैं "जिंदा" हूं .........!! ~ खामोश कलम

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सूर्य कुमार यादव आज यही सोच रहे होंगे

सूर्य कुमार यादव आज यही सोच रहे होंगे

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"बगावत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें, तबीयत इस अदा से और बिगड़ेगी वो क्या जानें! वो क्या जानें कि अपना किस कयामत का इरादा है, किसी पत्थर की मूरत से बगावत का इरादा है।"

"बगावत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें, तबीयत इस अदा से और बिगड़ेगी वो क्या जानें! वो क्या जानें कि अपना किस कयामत का इरादा है, किसी पत्थर की मूरत से बगावत का इरादा है।"

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ये दुनिया सपेरों की बस्ती है, ये रिश्ते बनाकर डसती है। यहाँ भरोसा बहुत मँहगा है, नफरत बिलकुल सस्ती है।।

ये दुनिया सपेरों की बस्ती है, ये रिश्ते बनाकर डसती है। यहाँ भरोसा बहुत मँहगा है, नफरत बिलकुल सस्ती है।।

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तू नहीं तो कोई और सही, कोई और नहीं तो कोई और सही, बहुत लंबी हैं जमीं, मिलेंगे लाख हंसी, इस जमाने मे सनम तू अकेली तो नहीं.! ~ मजरूह सुल्तानपुरी

तू नहीं तो कोई और सही, कोई और नहीं तो कोई और सही, बहुत लंबी हैं जमीं, मिलेंगे लाख हंसी, इस जमाने मे सनम तू अकेली तो नहीं.! ~ मजरूह सुल्तानपुरी

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“समय गूँगा नहीं बस मौन है, सही वक्त पर ही यह बताता है कि वो भी बोलना जानता है”

“समय गूँगा नहीं बस मौन है, सही वक्त पर ही यह बताता है कि वो भी बोलना जानता है”

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वो जो शाम को सारी खुशियां लेकर आता है, बहुत सारे दुःखों को सहकर सदा मुस्कराता है. वो होता है पिता..❤️

वो जो शाम को सारी खुशियां लेकर आता है, बहुत सारे दुःखों को सहकर सदा मुस्कराता है. वो होता है पिता..❤️

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वक्त ऐसे न दीजिए कि भीख़ लगे बाकी जो आपको ठीक लगें....!!

वक्त ऐसे न दीजिए कि भीख़ लगे बाकी जो आपको ठीक लगें....!!

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"मलाल है मगर इतना मलाल थोड़े है, ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़े हैं, मज़ा तो तब है कि हम हारकर भी हँसते रहे हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़े है..." ~ परवीन शाकिर

"मलाल है मगर इतना मलाल थोड़े है, ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़े हैं, मज़ा तो तब है कि हम हारकर भी हँसते रहे हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़े है..." ~ परवीन शाकिर

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मन के बहकावे मे न आ, मन राह भुलाये भ्रम में डाले तू इस मन का दास न बन, मन को अपना दास बनाले

मन के बहकावे मे न आ, मन राह भुलाये भ्रम में डाले तू इस मन का दास न बन, मन को अपना दास बनाले

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अपनी कहानी का इकलौता गवाह हूॅं मैं! सिर्फ़ मैं ही जानता हूॅं कि किस दौर से गुज़र रहा हूॅं।

अपनी कहानी का इकलौता गवाह हूॅं मैं! सिर्फ़ मैं ही जानता हूॅं कि किस दौर से गुज़र रहा हूॅं।

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“मैं कहानी तो नहीं हूं कि सदा रह जाऊं मैंने किरदार निभाना है फिर चले जाना है” ~ अतबाब साहब

“मैं कहानी तो नहीं हूं कि सदा रह जाऊं मैंने किरदार निभाना है फिर चले जाना है” ~ अतबाब साहब

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तुम मुझे मेरे अपनों से बचा लो दुश्मन से तो मैं खुद निपट लूंगा..♥️

तुम मुझे मेरे अपनों से बचा लो दुश्मन से तो मैं खुद निपट लूंगा..♥️

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