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Vinay Sultan

@vinay_sultan • 35,704 subscribers

Journalist/Reporter/writer. News Editor @thenewspinch Urban Nomad. Old School. History Enthusiast.Rajasthani.नागौरी बळद.डांग माथे डेरा. patria o muerte.

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The ugly truth of so called Pakistani retaliation. Heavy shelling targeting civilians in Punchh. 10 innocent civilians lost their lives. 35 are injured. Even they fired artillery shells on Bus stand. This should be condemned in a loud and clear voice. #IndiaPakistanWar

The ugly truth of so called Pakistani retaliation. Heavy shelling targeting civilians in Punchh. 10 innocent civilians lost their lives. 35 are injured. Even they fired artillery shells on Bus stand. This should be condemned in a loud and clear voice. #IndiaPakistanWar

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🚨🚨🚨 Update Drone activiti in Jalipa, Barmer. ADS is on duty.

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भारत-पाकिस्तान की हालिया झड़प में ज्यादातर अटैक और काउंटर अटैक में ज़्यादा फोकस एयर फोर्स और एयर डिफेंस पर रहा। लेकिन 7 तारीख़ की रात से जारी LoC और इंटरनेशनल बॉर्डर पर जो हुआ उसकी चर्चा कम ही हुई है। -हमने दुश्मन की एक बैटरी तबाह की है। एक अफ़सर, एक जेसीओ और 10 की नफरी इस हमले में हताहत हुआ है। -जम्मू सेक्टर में दुश्मन को भारी कैजुअल्टी का सामना करना पड़ा हैकुछ इंडिपेंडेंट ऑब्जर्वर असेसमेंट है कि पाकिस्तानी आर्मी के कम से कम 60 जवान KIA और 100 से ज़्यादा घायल हुए हैं। -हालात यह थे कि पाकिस्तानी सेना BOP छोड़कर सिविलियन इलाकों में खंदक खोदकर मोर्चे लगा लिए थे। इतनी शेलिंग के बाद उनको डर था कि कहीं भारतीय सेना LoC पार करके उन पर हमला ना कर दे। -पाकिस्तानी सेना को सबसे ज़्यादा नुक़सान बाजवत और नीलम वैली वाले इलाके में हुआ है। धीरे-धीरे LoC और IB पर चली झड़प की तस्वीरें सामने आ रही हैं। यह वीडियो सांभा का है जहां हमारे जवानों ने दुश्मन की एक ऑब्जरवेशन पोस्ट तबाह की है।

भारत-पाकिस्तान की हालिया झड़प में ज्यादातर अटैक और काउंटर अटैक में ज़्यादा फोकस एयर फोर्स और एयर डिफेंस पर रहा। लेकिन 7 तारीख़ की रात से जारी LoC और इंटरनेशनल बॉर्डर पर जो हुआ उसकी चर्चा कम ही हुई है। -हमने दुश्मन की एक बैटरी तबाह की है। एक अफ़सर, एक जेसीओ और 10 की नफरी इस हमले में हताहत हुआ है। -जम्मू सेक्टर में दुश्मन को भारी कैजुअल्टी का सामना करना पड़ा हैकुछ इंडिपेंडेंट ऑब्जर्वर असेसमेंट है कि पाकिस्तानी आर्मी के कम से कम 60 जवान KIA और 100 से ज़्यादा घायल हुए हैं। -हालात यह थे कि पाकिस्तानी सेना BOP छोड़कर सिविलियन इलाकों में खंदक खोदकर मोर्चे लगा लिए थे। इतनी शेलिंग के बाद उनको डर था कि कहीं भारतीय सेना LoC पार करके उन पर हमला ना कर दे। -पाकिस्तानी सेना को सबसे ज़्यादा नुक़सान बाजवत और नीलम वैली वाले इलाके में हुआ है। धीरे-धीरे LoC और IB पर चली झड़प की तस्वीरें सामने आ रही हैं। यह वीडियो सांभा का है जहां हमारे जवानों ने दुश्मन की एक ऑब्जरवेशन पोस्ट तबाह की है।

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Don’t Shoot The Messenger 20 तारीख के बाद लगातार देख रहा हूँ। टीवी मीडिया के रिपोर्टर्स को प्रोटेस्ट कवर करने के दौरान घेरा जा रहा है। हूट किया जा रहा है। उनके साथ धक्का-मुक्की हो रही है। खबर गाँव के दो साथियों के साथ ऐसा हुआ। न्यूज़ 18 के रिपोर्टर साथी को भीड़ ने घेर लिया था। कल रात NCR खबर की दो महिला पत्रकार साथियों को भी लिंच करने के अंदाज़ में घेर लिया था। हालांकि वहाँ मौजूद कई वॉलेंटियर्स ने उन्हें जैसे-तैसे निकाला। मैंने मौके पर मौजूद भीड़ में कई लोगों से पूछा भी कि ये कौनसे मीडिया चैनल हैं। किसी को पता नहीं था। बस हूटिंग हो रही थी लोग शामिल हो गए। CJP ने प्रदर्शनकारियों से बार-बार अपील की है कि मीडिया के साथ बदसलूकी ना करें। लेकिन उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों के मन में टीवी मीडिया को लेकर भयंकर गुस्सा है। क्या ये बात उन खाए-अघाए संपादकों और मालिकों को समझ में आ पाएगी, जो देश के यशस्वी जी के साथ एक सेल्फी के लिए प्राण दे रहे हैं। लेकिन उनके किए को फील्ड रिपोर्टर भुगत रहे हैं। उनके साथ बदसलूकी हो रही है। यह तरीका सही नहीं है।

Vinay Sultan

99,667 просмотров • 2 месяцев назад

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आइए आपको असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर खैरथल-तिजारा, राजस्थान से मिलवाते हैं। इन्होंने 2022 में बतौर APRO ये नौकरी जॉइन की थी। स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि कलेक्टर महोदया की गुड बुक्स में है। इन्हें जिला प्रशासन की तरफ़ से गाड़ी मिली हुई है। इन्होंने 2019 इन्होंने अपनी ME की डिग्री पूरी की और 2021 में आई APRO की वैकेंसी में बैठ गए। जबकि परीक्षा की पात्रता में साफ़ लिखा था कि या तो आपके पास पत्रकारिता की ग्रेजुएशन डिग्री/डिप्लोमा हो। या फिर हिंदी/अंग्रेजी में PG हो। इसके साथ-साथ आपने किसी भी प्रतिष्ठित मीडिया हाउस में तीन साल का कार्य अनुभव हो। ये भाई साब पत्रकारिता में डिग्री/डिप्लोमा के बिना परीक्षा में बैठ गए। इंजीनियरिंग करने के महज़ दो साल बाद। तो तीन साल का अनुभव होने का सवाल ही नहीं उठता। कुल मिलाकर इनकी नियुक्ति ही संदेह के दायरे में है। लेकिन भाईसाब में एक प्रतिभा कूट-कूटकर भरी हुई है। रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार से PRO द्वारा जारी किए गए कागज माँगना। उसे धकेलना। उसका माइक पकड़ लेना। आखिर में पुलिस के जवानों/जन संपर्क अधिकारियों से एक विनम्र अपील। मतलब अपील ही समझिए। जब कोई पत्रकार अपना काम कर रहा हो, रिपोर्टिंग कर रहा हो तो प्लीज उसे अपना काम करने दें। उसे अफसरी ना दिखाएँ। क्योंकि हम पर्दे हटाते हैं तो सारे भरम उघड़ जाते हैं।

Vinay Sultan

78,423 просмотров • 8 месяцев назад

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जंतर-मंतर से लौटकर जंतर-मंतर पर आज बार-बार अन्ना आंदोलन की याद आ रही थी। उस दौर में पत्रकारिता पढ़ रहा था। छात्र था, लेकिन इतनी समझ थी कि देश की दूसरी आजादी की लड़ाइयां आखिरकार मोरारजी की गति को प्राप्त होती हैं। लिहाजा आंदोलन को बतौर छात्र ही देख रहा था। आंदोलन अपने उठान पर था। जनकवि विद्रोही मिल गए गंगा ढाबे पर। उन्होंने बहुत सटीक बात कही, “ग़रीबों पर अत्याचार हो रहा है, भ्रष्टाचार एक माध्यमवर्गी मुद्दा है।” प्रदर्शन में तफरी करते हुए एक तख्ती पर नजर पड़ी। अन्ना की क्रांति राम राज्य लाएगी। तस्वीर अब भी अभिषेक श्रीवास्तव के कंप्यूटर के किसी कोने दर्ज होगी। आज गोपाल राय मंच पर पहुंचे तो ऐसा लगा कि अन्ना आंदोलन का प्रेत जंतर-मंतर में भटक रहा है। उन्होंने अपने भाषण में आजादी की लड़ाई का जिक्र किया, भीड़ पूरे जोश में थी। उन्होंने जेपी आंदोलन का जिक्र किया, भीड़ ने पूरा समर्थन दिया। नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नारे लगे। फिर उन्होंने जन-लोकपाल आंदोलन का जिक्र किया, भीड़ ने कोई उत्साह नहीं दिखाया। एक दशक बाद अन्ना आंदोलन का यह हासिल था। वैसे भी आम आदमी पार्टी अन्ना आंदोलन का बाई प्रोडक्ट ही था। इसके असल लाभार्थी फ़िलहाल केंद्र की सत्ता में हैं। अब बात सोनम वांगचुक की। BJP आईटी सेल सोनम वांगचुक लगातार चीन/पाकिस्तान/सीआईए का एजेंट बताने में जुटी हुई है। लेकिन यह दांव भी बहुत कारगर साबित होता नहीं दिखाई दे रहा है। भूख हड़ताल आज भी सबसे कारगर राजनीतिक हथियार है। सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल के जरिए वो राजनीतिक और नैतिक गुरुत्व हासिल कर चुके हैं कि अब उन्हें विदेशी एजेंट कहकर ख़ारिज नहीं किया जा सकता। बीजेपी 12 साल पहले एंटी करप्शन आंदोलन की पीठ पर सवार होकर सत्ता में आई थी। फ़िलहाल सिलसिलेवार तरीके से उनकी छवि को धक्का लगा है। -UGC के चलते BJP के कोर वोटर का मोहभंग है। -E 20 की मार सबसे ज़्यादा उस निचले माध्यम वर्ग पर पड़ रही है जो इस देश का वर्क हॉर्स है। -राम मंदिर में चंदा चोरी जैसे विवाद के बाद हिंदुत्व के मोर्चे पर भी बीजेपी संदिग्ध हो गई है। फिलहाल BJP किसान आंदोलन के बाद सबसे टेढ़े राजनीतिक सवाल का सामना कर रही है। अगर आज रात जंतर-मंतर पर कोई लीक डाउन होता है तो पॉपुलर सेंटीमेंट सरकार के पूरी तरह ख़िलाफ़ हो जाएगा।

Vinay Sultan

17,614 просмотров • 3 месяцев назад

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Manipur Files को ढाई दिन के भीतर दस लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। न्यूज़ पिंच की टीम ने बहुत जतन से ये डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। डर था कि इतने कॉम्प्लेक्स कॉन्फ्लिक्ट पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लोग देखेंगे भी कि नहीं? लेकिन जैसा समर्थन आप लोगों की तरफ़ से मिला, वो हौसला बढ़ता है। इस बात का सुकून है कि हम मणिपुर के लोगों की पीड़ा को हिंदी दर्शकों तक पहुंचा पाए, जहां इस पूरे कॉन्फ्लिक्ट का सरलीकरण हिंदू बनाम क्रिश्चियन टकराव के तौर पर कर दिया गया था। इस डॉक्यूमेंट्री में हमने मणिपुर कॉन्फ्लिक्ट के लगभग हर एंगल को कवर करने की कोशिश की है। अगर आपने अब तक #ManipurFiles नहीं देखी है तो ज़रूर देखें। उम्मीद है कि यह आपको पसंद आएगी। 🙏🙏🙏

Vinay Sultan

15,810 просмотров • 3 месяцев назад

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आतंकी हमला और नैरेटिव वॉर पहलगाम आतंकी हमले को राजनीतिक फायदे-नुकसान के हिसाब से नैरेटिव वॉर बना दिया गया है। जिस जगह पर यह घटना हुई, वहां सिक्योरिटी फोर्सेज को पहुँचने में कम से कम एक घंटे का समय लगता है। शुरुआती फायर के बाद लोगों को घेरकर, उनकी धार्मिक पहचान पूछकर गोली मारी गई यह बात सही है। आपको क्या लगता है कि जिन आतंकियों ने इस घटना को अंजाम दिया है, वो अपने आका के निर्देश के बिना यह सब कर रहे थे। इस पूरी वारदात को इस हिसाब से प्लान किया गया था कि बाद में इसी किस्म का नैरेटिव खड़ा हो। हम दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी हैं और एक सेकुलर डेमोक्रेसी हैं। और हमें अपनी इस पहचान पर गर्व है। यह पूरी घटना मानवता के ख़िलाफ़ जघन्यतम अपराध है । निहत्थे नागरिकों की टार्गेटेड किलिंग है। हमारे देश की अस्मिता को सीधी चुनौती है। अगर आप इस पूरी वारदात को हिंदू-मुस्लिम की बहस में घसीटेंगे तो आप इस अपराध के दायरे को संकीर्ण करने का काम कर रहे हैं। और कहीं ना कहीं इस आतंकी वारदात के हैंडलर्स के मंसूबों को पूरा करने में उनकी मदद कर रहे हैं। यह समय साथ खड़े होने का है। राजनीति करने के 50 दूसरे मौके हैं।

Vinay Sultan

50,809 просмотров • 1 год назад

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अच्छी कहानी है। देखी जा सकती है। लेकिन एक चीज पिछले तीन दिन से दिमाग़ में लगातार बज रही है। शिव शंकर स्त्रोतम। पंडित प्रेम नाथ शास्त्री की आवाज और सितार। क्या कमाल का तिलिस्म रचते हैं। आपको एक निर्वात में ले जाते हैं। दसवी में बोर्ड की तैयारी के दौरान सुबह चार बजे उठना होता था। करणी माता के मंदिर में महिला का कंठ रोज सुबह चिरजा गाता था। बहुत दूर से एक झीनी सी आवाज हवा के साथ बहती हुई आपके कान के पर्दे से टकराती हैं। बाद में गायक को ढूंढने की बहुत कोशिश लेकिन किसी को पता नहीं था। एक समय में यह भरोसा हो गया कि जोगमाया सिर्फ़ मेरे लिए यह चिरजा गवाती हैं। शिव शंकर स्त्रोतम की कम्पोजिंग भी ऐसी ही है। दूर किसी पहाड़ी मंदिर पर कोई उम्र दराज कंठ गा रहा है। निराकार शब्द हैं, एक ध्वनि है जो हवा के साथ बहती हुई आप तक पहुँच रही है। जैसे कोई जोगी अपने धूणे पर मगन बैठा अनहद नाद सुन रहा हो। अद्भुत।

Vinay Sultan

20,505 просмотров • 11 месяцев назад