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लोकल ट्रेन में एक मुस्लिम महिला का हाथ हिंदू लड़की से टच हो गया। मुस्लिम महिला ने माफ़ी भी मांग ली लेकिन हिन्दू लड़की की नफरत देखिए कैसे चिल्ला चिल्ला कर मुस्लिम महिला को सुना रही है। लोकल ट्रेन है भीड़भाड़ है तो ये आम बात है अब इनको इतना ही बुरा लगा तो लोकल में सफ़र क्यों कर रही है ? सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों से नफरत है।

लोकल ट्रेन में एक मुस्लिम महिला का हाथ हिंदू लड़की से टच हो गया। मुस्लिम महिला ने माफ़ी भी मांग ली लेकिन हिन्दू लड़की की नफरत देखिए कैसे चिल्ला चिल्ला कर मुस्लिम महिला को सुना रही है। लोकल ट्रेन है भीड़भाड़ है तो ये आम बात है अब इनको इतना ही बुरा लगा तो लोकल में सफ़र क्यों कर रही है ? सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों से नफरत है।

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जंतर मंतर पर आज कौन कौन अपने हक़ और हुकूक की आवाज़ बुलंद करने जायेगा।

जंतर मंतर पर आज कौन कौन अपने हक़ और हुकूक की आवाज़ बुलंद करने जायेगा।

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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि दीन में अलग से जोड़ी हर चीज़ बिदअत है, हर बिदअत गुमराही है और हर गुमराही जहन्नुम की तरफ ले जाती है। इस्लाम हमें बिदअत से रोकता है कि लोग दीन से दूर न हो जाएं। आज ये लोग जयमाला डाल रहे हैं, अल्लाह ना करे कल यही लोग आग के फेरे लेने लगे। अल्लाह हम सबको सीधा रास्ता दिखाए, आमीन 🤲

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि दीन में अलग से जोड़ी हर चीज़ बिदअत है, हर बिदअत गुमराही है और हर गुमराही जहन्नुम की तरफ ले जाती है। इस्लाम हमें बिदअत से रोकता है कि लोग दीन से दूर न हो जाएं। आज ये लोग जयमाला डाल रहे हैं, अल्लाह ना करे कल यही लोग आग के फेरे लेने लगे। अल्लाह हम सबको सीधा रास्ता दिखाए, आमीन 🤲

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गाजा के एक शख्स की चीखें जो मुसलमानों को पुकार रही है पढ़िए:- ऐ दुनिया! हम भी इंसान हैं... हमें भी जीने का हक़ है। ऐ अरब के हुक्मरानों, क्या तुम मेरी चीख़ नहीं सुन सकते? मैं तुम्हारा ही हूँ... मेरा ख़ून तुम्हारा ख़ून है, मेरी ज़मीन तुम्हारी ज़मीन है। फिर क्यों मैं अकेला मर रहा हूँ? और ऐ इसराइल के हुक्मरानों :- क्या तुम्हारी ताक़त सिर्फ़ हमारे बच्चों की लाशों पर चमकती है? क्या तुम्हारा इंसाफ़ सिर्फ़ हमारे खंडहरों पर टिका है? हम भी इंसान हैं... हमें भी अपनी औलाद की ख़ुशबू चाहिए, बारूद की नहीं। यह कोई सियासी बयान नहीं है यह एक माँ की चीख़ है, जिसका बच्चा मलबे में दब गया। यह एक बुज़ुर्ग की कराह है, जो अपनी ही राख पर बैठा है। यह एक जवान की पुकार है, जिसके हाथ टूट गए, मगर हौसला नहीं टूटा।

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