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Yasar Shah

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Office of Yasar Shah, former minister and former MLA - 284 Matera,Uttar Pradesh. Samajwadi Party.

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नरेंद्र मोदी जी ब्रिटेन में मसाला चाय पीते हुए उसे “भारत का स्वाद” कहते हैं, जबकि ये है के चाय न भारत की पैदाइश है, न हमारी परंपरा। ये तो अंग्रेज़ों की नंगी लूट, चीन से चोरी किए गए बीज, और असम की ज़मीन पर थोपे गए नरक जैसे बागानों की देन है। असम और बंगाल में ग़रीबों को फुसलाकर या उठा ले जाकर बंधुआ मज़दूरी में झोंका गया। चाय बागानों में काम कर रहे मज़दूरों को न घर लौटने की इजाज़त थी, न इंसानियत का जीवन मिलता था। 30% तक मरने की दर, रोज़ के कोड़े, औरतों के साथ संगठित बलात्कार, और गंदगी से भरा कैंप जहां कॉलेरा और भुखमरी आम बात थी ये है वो ‘cup of India’ का सच। बिचौलिये झूठे वादे देकर मज़दूर लाते थे, और अंग्रेज़ प्लांटर उन्हें जानवरों से भी बदतर हाल में रखते थे। कोई छुट्टी नहीं, कोई इलाज नहीं, कोई इंसानी हक नहीं बस चाय की हर पत्ती के पीछे एक टूटी हड्डी, एक चीख़, एक बर्बाद ज़िंदगी। और आज जब आप इसे राष्ट्रीय गर्व कहकर बेचते हैं, तो उस पूरे इतिहास पर सफेदी पोतते हैं उन लाशों, उन औरतों, उन मज़दूरों के जले हुए हाथों पर। शर्म आनी चाहिए आपको उन अंग्रेज़ों के तलवे चाटते हुए जिन्होंने 200 साल हम भारतीयों को जानवरों से बदतर रखा।

नरेंद्र मोदी जी ब्रिटेन में मसाला चाय पीते हुए उसे “भारत का स्वाद” कहते हैं, जबकि ये है के चाय न भारत की पैदाइश है, न हमारी परंपरा। ये तो अंग्रेज़ों की नंगी लूट, चीन से चोरी किए गए बीज, और असम की ज़मीन पर थोपे गए नरक जैसे बागानों की देन है। असम और बंगाल में ग़रीबों को फुसलाकर या उठा ले जाकर बंधुआ मज़दूरी में झोंका गया। चाय बागानों में काम कर रहे मज़दूरों को न घर लौटने की इजाज़त थी, न इंसानियत का जीवन मिलता था। 30% तक मरने की दर, रोज़ के कोड़े, औरतों के साथ संगठित बलात्कार, और गंदगी से भरा कैंप जहां कॉलेरा और भुखमरी आम बात थी ये है वो ‘cup of India’ का सच। बिचौलिये झूठे वादे देकर मज़दूर लाते थे, और अंग्रेज़ प्लांटर उन्हें जानवरों से भी बदतर हाल में रखते थे। कोई छुट्टी नहीं, कोई इलाज नहीं, कोई इंसानी हक नहीं बस चाय की हर पत्ती के पीछे एक टूटी हड्डी, एक चीख़, एक बर्बाद ज़िंदगी। और आज जब आप इसे राष्ट्रीय गर्व कहकर बेचते हैं, तो उस पूरे इतिहास पर सफेदी पोतते हैं उन लाशों, उन औरतों, उन मज़दूरों के जले हुए हाथों पर। शर्म आनी चाहिए आपको उन अंग्रेज़ों के तलवे चाटते हुए जिन्होंने 200 साल हम भारतीयों को जानवरों से बदतर रखा।

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जहां मुसलमानों की शहादत के वक़्त रक़्स हो रहा था वो अरब था, अरब था, अरब था।

जहां मुसलमानों की शहादत के वक़्त रक़्स हो रहा था वो अरब था, अरब था, अरब था।

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लक्कड़ शाह की स्थली पर बुलडोजर चलाकर किया गया ध्वस्त। कतरनिया घाट वन प्रभाग रेंज के घूमना जंगल में स्थित था लक्कड़ शाह की सैकड़ों साल पुरानी दरगाह। 500 वर्ष से लग रहे इस मेले का ज़िक्र 1903 के ज़िला बहराइच गजेटियर में भी मौजूद है।

लक्कड़ शाह की स्थली पर बुलडोजर चलाकर किया गया ध्वस्त। कतरनिया घाट वन प्रभाग रेंज के घूमना जंगल में स्थित था लक्कड़ शाह की सैकड़ों साल पुरानी दरगाह। 500 वर्ष से लग रहे इस मेले का ज़िक्र 1903 के ज़िला बहराइच गजेटियर में भी मौजूद है।

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फूलन देवी अगर पिछड़ी जाति की ना होती तो UN में उनका सम्मान होता, नोबेल पुरस्कार मिलता और देश में भारत रत्न मिलता।

फूलन देवी अगर पिछड़ी जाति की ना होती तो UN में उनका सम्मान होता, नोबेल पुरस्कार मिलता और देश में भारत रत्न मिलता।

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