#उत्तराखंड

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चरित्रहीन कौन है ? चेहरे पर हज़ारों झुर्रियाँ , झुकी हुईं कमर , लाठी के सहारे चलना , फटे पुराने कपड़े , दुकानों-होटलों से माँग कर खाना और बात बात में अंग्रेज़ी बोलना - एक बुजुर्ग महिला की ये तस्वीर #उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले के “नाचनी” क़स्बे में पिछले 25 साल से बहुत आम है और जब से मैं इनसे मिला हूँ , तब से बहुत विचलित हूँ। रात के दो बजे एक कूड़े के ढेर पर जब पहली बार मैंने इस निर्बल काया का साया देखा तो कुछ समझ नहीं आया। पहली नज़र में डर भी गया। लेकिन फिर अगले दिन क़स्बे के लोगों से बात की तो कई बिन माँगी सलाह मिली। “अरे वो बुढ़िया पागल है” “पता नहीं क्या हुआ है , 25 साल से यहीं है” “उसके पास मत जाना। शैतान है वो। गाली देती है।” “कभी-कभी पत्थर भी मारती है” “दिमाग़ ख़राब है उसका” हम सबके लिए किसी को जाने बिना उसके बारे में राय बनाना कितना आसान होता है। किसी को मानव नहीं , दानव कहना कितना सरल होता है। ऐसा ही 74 वर्षीय पार्वती देवी के साथ भी हुआ है और मेरे लिए ये यक़ीन करना मुश्किल था, जब उन्होंने मुझ से कहा कि आज 25 साल में पहली बार हो रहा है, जब कोई उनसे पूछ रहा है कि उनकी ये हालत कैसे हुई । मुझ से भी बात करने के लिए वो तभी तैयार हुई , जब उन्होंने मेरा आधार कार्ड देखा और जब उनको पता चला कि मैं सब कुछ रिकॉर्ड कर रहा हूँ तो उनका 25-30 साल पुराना दर्द एक के बाद एक करके बाहर आने लगा। “क्या मैं आपको ख़राब औरत दिखाई देती हूँ ?” “क्या आपने मुझे किसी होटल में देखा ?” “क्या आपने मुझे किसी आदमी के साथ देखा ?” पार्वती देवी का ये दर्द क्या है ? इस दर्द की पूरी कहानी क्या है ? ये तो ना उन्होंने ठीक से बताई और ना ही आस-पास के लोगों को ख़ास पता थी लेकिन जो समझ में आया, उसके मुताबिक़ -30 साल पहले तक पार्वती का जीवन एक सामान्य जीवन था , अच्छी पढ़ाई की , सरकारी नौकरी भी की , समाज में अच्छी पहचान बनाई , फिर एक दिन एक शैतान के छल ने , एक शैतान के विश्वासघात ने पार्वती को पूरी दुनिया के सामने हमेशा के लिए चरित्रहीन , शैतान बना कर छोड़ दिया। तब से पार्वती देवी की यही हालत है।कोई विक्षिप्त कहता है तो कोई कुछ और। ऐसी कहानियों और सच का सामने आना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि रिश्तों में मिला विश्वासघात एक अच्छे ख़ासे इंसान को शैतान और चरित्रहीन बना कर छोड़ देता है। गंभीर सवाल यह है कि इस पूरी कहानी में किस ने अपना चरित्र गँवाया ? पार्वती से छल करने वाले ने या पार्वती ने ? काश ! पार्वती की ये हालत देखकर उसे शैतान बनाने वालों का दिल पसीजे और कोई तो उनका अपना , उन्हें दर दर की ठोकरें खाने से बचा सके।

Vinod Kapri

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खून सि नि दिलोक बंधन मेरि सरूली कुछ रिश्ते जन्म जन्मांतर से भी परे होते हैं। ये सरस्वती है। मेरे पिता के बड़े भाई की बेटी। #उत्तराखंड के #पिथौरागढ़ ज़िले में गंगोलीहाट के पास नाग में रहती है। प्यार से हम इसे सरूली और पुतली भी कहते हैं। हम दोनों तक़रीबन एक ही उम्र के हैं , मैं 7-8 महीने बड़ा लेकिन हम दोनों एक दूसरे के पैर छूते हैं और बचपन से ही ( शायद 2-3 साल की उम्र से ही ) हम दोनों का एक-दूसरे के प्रति ऐसा लगाव है कि सरूली मेरे लिए कुछ भी कर सकती है और मैं सरूली के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। पहाड़ की बेटियों और पत्नियों की तरह सरूली ने भी इस जीवन में बहुत कुछ देखा है और सहा है। बचपन में ही पिता को खो दिया। बच्चे जब बहुत छोटे थे तो पति को खो दिया।लेकिन सरूली की ज़िंदादिली , हंसी और प्यार में कोई कमी नहीं आई और विनोद दा को तो देखते ही उसे लगता है कि उसने सब कुछ पा लिया। उसका विनोद दा भी हमेशा यही महसूस करता है। अपने दम पर पुतली ने चारों बच्चों को पढ़ाया लिखाया। बड़ा बेटा Coast Guard मेँ है। बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है। सबसे छोटा बेटा CDS की तैयारी कर रहा है और छोटी बेटी MSc Zoology करने के बाद स्कूल में पढ़ा रही है। इस बार बसंत पंचमी के दिन जब मैं सरूली से मिला तो आलू के गुटके , पूड़ी , खीर , खजूरें , देसी घी और बचपन के बहुत सारे क़िस्से पहले से मेरा इंतज़ार कर रहे थे। जीवन में इतना प्यार मिलता रहे , पुराने रिश्ते सहेजे रहें - और क्या ही चाहिए ❤️ कितना आत्मिक था अपनी पुतली से मिलना - मैं बयां ही नहीं कर सकता।

Vinod Kapri

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