#100yearsofrss

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जुलाई 1949 को सरदार पटेल ने 3 शर्तों पर RSS से बैन हटाया गोपनीयता और हिंसा त्यागना तिरंगे और संविधान का सम्मान करना राजनीति छोड़ सांस्कृतिक भूमिका में आना पूर्व प्रचारक मोदी,अंध-भक्तों की टोली और गोदी मीडिया जब #100YearsOfRSS पर कूद-कूद कर महिमा मंडन कर रहा है तो मैं पूछना चाहती हूँ कि दशकों से इन शर्तों की धज्जियां उड़ाने वाले RSS की क्या वैधता है ? मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम को युद्ध का उद्घोष बना कर दलितों, वंचितों, पिछड़ों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वाले संघ की रगों में खून के साथ ‘हिंसा’ दौड़ रही है ! बाबा साहेब के संविधान की प्रतियां फाड़ कर मनुस्मृति को संविधान बनाने की मांग करने वाले संघी..400 पार कर के संविधान बदलने का नारा देने वाले भाजपायी..52 साल तक अपने दफ्तर पर तिरंगा न फहराने वाले संघी क्या संविधान और तिरंगे का संविधान का सम्मान करेंगे ? यदि RSS सांस्कृतिक संगठन है तो रोज़ शाम को राजनैतिक बहस में टीवी चैनल पर संघी क्यों बैठे होते हैं ? SPICMACAY भी सांस्कृतिक संगठन है, उसके प्रतिनिधि को तो टी वी चैनल debates के लिए नहीं बुलाते ?? जिन शर्तों के कारण RSS पर से बैन हटा, उनकी ऐसी अवमानना ??? तो हम क्यों न कहें कि उस Ban पर पुनर्विचार का समय आ गया है !!!

Dr. Ragini Nayak

45,259 görüntüleme • 9 ay önce

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