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ABCD के बाद आता है..G फॉर गन्ना
24 条评论

D और G के बीच में आता है E फॉर इज्जत वो आपने बेंच खाई😆

D फॉर डंडा होता है जो बीजेपी वालों ने मारा था

सहारनपुर रैली में अगर जयंत चौधरी जी मंच पर हाथरस वाला लाठीचार्ज वीडियो चला देते ना… फिर भाषण की जरूरत नहीं थी, मंच से वीडियो चलता और नीचे से नारे—“चौधरी साहब, वोट आपका पक्का!” 😄✊

इस बार चवन्नी आना बन जाएगी 😂

मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक सफर को देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। मुलायम सिंह चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक धारा से जुड़े और लोक दल में रहते हुए उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेजी से आगे बढ़े। 1980 में चुनाव हारने के बाद चौधरी चरण सिंह ने उन्हें विधान परिषद भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे नेता प्रतिपक्ष बने। 1985 के विधानसभा चुनाव में लोक दल के टिकट पर जीतकर मुलायम सिंह फिर नेता प्रतिपक्ष बने। यानी जिस राजनीतिक जमीन पर आगे चलकर मुलायम सिंह यादव ने अपनी मजबूत पहचान बनाई, उस जमीन को तैयार करने वालों में चौधरी चरण सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद लोक दल में उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष हुआ और मुलायम सिंह ने अपनी अलग राजनीतिक राह बनाई। इसके बाद 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की। खुद समाजवादी पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट भी मानती है कि पार्टी की स्थापना 4 अक्टूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव ने की थी। इसलिए अखिलेश यादव को यह नहीं भूलना चाहिए कि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक इतिहास 1992 से शुरू होता है, लेकिन मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक यात्रा उससे कई दशक पहले चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक धारा से जुड़ी हुई थी। आज अगर आप किसी ऐसी राजनीतिक विरासत को छोटा बताने की कोशिश करते हैं, जिसने आपके परिवार की राजनीतिक यात्रा को शुरुआती दौर में मजबूत आधार दिया, तो सवाल सिर्फ राजनीतिक मर्यादा का नहीं, इतिहास की समझ का भी है। चौधरी चरण सिंह के व्यक्तित्व, किसान राजनीति और राष्ट्रीय कद के सामने आपकी समाजवादी पार्टी को ‘चवन्नी छाप’ या किसी भी छोटे पैमाने से तौलना इतिहास के साथ न्याय नहीं होगा। बल्कि सच यह है कि चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत इतनी बड़ी थी कि उनकी बनाई जमीन पर खड़े होकर ही उत्तर प्रदेश की पिछड़ों और किसानों की राजनीति ने कई नए अध्याय लिखे। इसलिए अखिलेश यादव को बयान देने से पहले अपने पिता मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक इतिहास पढ़ लेना चाहिए। क्योंकि इतिहास बताता है कि जिन चौधरी चरण सिंह की विरासत को आज छोटा बताने की कोशिश हो रही है, वही चौधरी चरण सिंह मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक उत्थान के महत्वपूर्ण मार्गदर्शकों में थे। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इतिहास को सुविधानुसार बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। चौधरी चरण सिंह के कद को छोटा करके कोई अपनी राजनीतिक ऊंचाई साबित नहीं कर सकता।

C for CHAWANNI bhi aata hai

एक लाठी में जयंत की गान फट गई तो बीजेपी में टांके लगवाने पहुंच गया l

D se डंडा jo jayant ji bhul gaye ।।।

कर दी अनपढ़ों वाली बात, ABCD के बाद आता है.. E . 😂🤣

Jayant hai toh chawanni hi—kabhi khud chunav jeeta bhi hai usne? 😂

लेकिन ये चवन्नी अपने ऊपर क्यों के रहे है ये किसान के धरोवर के पौत्र है

ABCD के बाद आता है E फॉर इज्जत वो आप ने बेच खायी ।

Chwanni उछालो भाई 😭

ABCD के बाद आता है E फॉर इज्जत वो आप ने बेच खायी ।

चवन्नी को रुपया नहीं बनाया जा सकता है........ ये बात सब ध्यान रखें........

ABCD के बाद N L भी आता है, नामक का लौटा कहाँ है @jayantrld ? और हो सकता है चुनाव के बाद N L का मतलब तुम्हारे लिए ‘ना - लायक’ भी हो जाये @jayantrld । @yadavakhilesh

Australia se engineering ki padhayi kar k akhilesh ji ne yahi seekha ...G for ganna

ABCD के बाद आता है E, F and then comes G...और G से गन्ना नही आता S से Sugarcane आता है जिसका मतलब गन्ना होता है।

एक पुरानी कहावत है :- बड़ा कौर खालो लेकिन बड़ी बात न करो । लेकिन समाजवादी पार्टी की डिक्शनरी से ये कहावत शायद अछूती रह गई जिसका सीधा सीधा नुक्सान SP को उठाना पड़ सकता है ।

ये किसानों की बात करता है तो इसे लड़ना चाहिए किसानों के हक के लिए, किसानों की आय बढ़ाने के लिए, लेकिन ये लड़ रहा है विपक्ष के एक नेता से l इसे chavanni ही नहीं bh@dva बोलना चाहिए l

थूक के चाट लिए ना चवन्नी ।

Abhi kam ladi padi hai

अब इनका दुःख आएगा कल से बड़ा वीडियो बनाने का शौक है फिर इनके लोग भी रोयेंगे की फलाने के साथ ऐसा हुआ 😳😳😳

मा जयंत सिंह चौधरी जी आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ है
