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Arnab - मैं upper caste हिंदू हूं, ब्राह्मण हूं। जवाब - upper caste शब्दावली अपने आप में discriminatory है, आप upper(ed) caste है क्योंकि आपने खुद को upper caste का बनाया और हम lower caste नहीं lowered caste है क्योंकि हमें lower बनाया गया। Arnab- I agree Term तो...

280,145 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

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विथ ड्यू रिस्पेक्ट!! सॉरी, राजदीप जी! एक पत्रकार को इस तरह का व्यवहार शोभा नहीं देता। मैं यह बोलने का अधिकार रखता हूं। क्योंकि मैं भी उसी पेशे से हूं जिस पेशे का आप प्रतिनिधित्व करते हैं। जब विदेश की धरती पर सार्वजनिक रूप से आपको बेइज्जत किया गया तो हमें बुरा लगा, क्योंकि हम भी उसी पेशे से हैं। बिहार चुनाव प्रचार के दौरान एक नेता ने जब आपको जलील किया तो हमें बुरा लगा क्योंकि हम भी उसी पत्रकारिता के पेशे से हैं। लेकिन आज लग रहा है कि हमें बुरा नहीं लगना चाहिए था। हम उसी पेशे से तो हैं लेकिन जो आपके साथ हुआ, आप उसी के लायक हैं! आपकी इस पत्रकारिता पर मैं लानत भेजता हूं!!

Prabhakar Kumar Mishra

92,585 просмотров • 10 месяцев назад

पहले तो मुंह मीठा करो फिर थोड़ी बात सुनो 🤟✌️ नीचे की चार-पांच लाइन जरूर पढ़ना क्योंकि मेरे आलोचकों को मेरी बेइज्जती सुनने में बड़ा मजा आता है ना तो मैंने खुद की है आनंद की अनुभूति करो🤟🫂 जब राजस्थान में पेपर आउट हो रहे थे और गोविंद सिंह जी डोटासरा पर आरोप लगे तो सबसे पहले वाली पंक्ति में विरोध करने वाले लोगों में मैं भी था, उसके बाद ED की जांच हुई जिसमें ED को कुछ नहीं मिला, ना उनके घर ना उनसे जुड़ी हुई कोचिंग में, जब ED गलत साबित नहीं कर पाई तो मैं कौन होता हूं गलत साबित करने वाला, हां आगे कोई जांच एजेंसी इन पर आरोप सिद्ध कर देती है तो बिल्कुल विरोध करूंगा क्योंकि मेरा पक्ष हमेशा बेरोजगारों के लिए ही रहेगा ✌️ कुछ लोगों को मिलने से दिक्कत है, क्यों भाई? आप किसी से मिलते हो तो मेरे को पूछ कर मिलते हो क्या, मैं राजस्थान का लड़का राजस्थान के किसी व्यक्ति से मिल नहीं सकता? मिलकर फोटो खिंचवाते ही उसको राजनीति का रूप दे दिया कि मैं इनका सपोर्ट करता हूं, फोटो लेना मेरी आदत है जहां मौका मिलता है वहां लेता हूं और लेता रहूंगा, क्योंकि जिंदगी में यादों के तौर पर यही बचेगा, यदि आप में से कोई ज्यादा पहुंच वाला है तो मुख्यमंत्री जी, उपमुख्यमंत्री जी, प्रधानमंत्री जी किसी के साथ मेरी फोटो खिंचवा सकता है तो हम उनके साथ फोटो लेंगे, रील भी बनायेंगे और धमाकेदार प्रचार के साथ अपलोड करेंगे 🤟 हर जगह पक्ष-विपक्ष होता है लेकिन कुछ जलनजीवी लोग अपने घर के संस्कार भूलकर हर जैसे कमेंट करते हैं कि गधा है भैराराम 🤏 तो आप उस गधे से भी गए गुजरे हो क्योंकि जिन परीक्षाओं में एक गधा पास हो गया उसमें आप नहीं लग पाए, जितनी गधे के लिए लोगों के दिल में जगह है उतनी आप नहीं बना पाए, गधे की आलोचना करने की बजाय गधे जैसा बनने की कोशिश करो ✌️ थोड़ा शर्म करो यार,,, हां अब मन की संतुष्टि के लिए नीचे कमेंट कर देना हमें गधा नहीं बना लेकिन एक बार पिछले 10 साल कि मेरे संघर्ष की कहानी अपने मां-बापूजी के साथ शेयर करना वह यही कहेंगे बेटा तेरे को भी ऐसा गधा बना चाहिए, यह घमंड नहीं बस ईमानदारी, मेहनत के जज़्बात है, हर वर्ग की निष्पक्ष आवाज उठाने के बावजूद भी आप लोगों का इतना अच्छा वाला प्यार मिलता है तो कभी-कभी भडास निकल जाती है 🙏🙏

Bhera ram

111,063 просмотров • 2 лет назад

"ठाकुर हूं असली", "जाटव हूं" ..फिर हाथापाई शुरू! ठाकुर हूं असली, जवाब में जाटव भाई ने कहा "जाटव हूं, फिर "ठाकुर" भाई ने कहां "चमा** है चमा*** बाद में दोनों में हाथापाई शुरू हो गई.....इस पूरे विवाद में दोनों तरफ से अपनी अपनी जाति बताई गई,,,,और जातिय दंभ दिखाया गया,,,,,,लेकिन SC ST Act सिर्फ "ठाकुर" भाई लगेगा..... कल कुछ सोशल मीडिया पर दलित भाई, मेरे खिलाफ राजपूतों का समर्थन कर रहे थे,,,,,अब बताओ क्या कहोगे 🤣🤣🤣 दलित भाइयों, मै तुम्हारे खिलाफ नहीं हूं, मै किसी के खिलाफ नहीं हूं,,,,,मै तो बस जैसे को तैसा जवाब देता हूं,,,,,,तुम राजपूतों से एकता कभी नहीं बना सकते क्योंकि सबसे ज्यादा दलितों के खिलाफ नफरत उन्हीं के अंदर है.... यादव समाज दलितों से नफरत नहीं करता,,,बस मायावती के बसपाई यादव और दलितों में झगड़ा लगवा के भाजपा को फायदा पहुंचाना चाहते है...

Om Yadav

57,785 просмотров • 7 месяцев назад

ये एक छोटी सी वीडियो है लेकिन कहानी बड़ी है, कल जब मैं नूह के एक चौराहे पर रुका तो वीडियो में पथराव करते दिख रहे लड़के मेरे पास आये और मुझसे मेरा नाम पूछा,मैंने अपना नाम सिर्फ़ ज़ाकिर त्यागी बताया तो इन्होंने मुझे हिंदू समझा और मुस्लिमों पर टिप्पणी करते हुए अपने फ़ोन में वो सब वीडियो दिखाई जिसमे यह तोड़फोड़, आगजनी, पथराव करते हुए दिख रहे थे,मैंने कहा कि क्या आप मुझे वीडियो दे सकते है इन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वीडियो में सभी लोग हमारे अपने है फंस जायेंगे,चलो दूसरी वीडियो दे देता हूँ लेकिन ये किसी को भी मत भेजना क्योंकि हम पथराव करते हुए दिख रहे है! CMO Haryana इस वीडियो सफ़ेद शर्ट काली पैंट में जो लड़का दिखाई दे रहा है उसका नाम यस है,और उसके फ़ोन में जो वीडियो है वह बहुत सारे खुलासे करने वाली है,लेकिन क्या आप चाहेंगे कि हां हिंसा से जुड़े हुए हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए? यदि आप करना चाहते है तो इसका फ़ोन लीजिए और चेक कीजिए!

Zakir Ali Tyagi

253,614 просмотров • 3 лет назад

जब कोई महिला खुलकर कहती है कि उसे से#क्स चाहिए..??? उसे इच्छा है, उसे आनंद चाहिए तो समाज की जुबान पर सबसे पहले गालियाँ आती हैं।फिर उसे चरित्रहीन, सस्ती, मैली... शब्दों की बौछार से नवाजा जाता है..??? लेकिन जब वही बात कोई मर्द करता है, वही इच्छा जाहिर करता है, कई औरतों के साथ सोने की बात करता है तब वह मर्दानगी बन जाती है। वो जवान है, शेर है, प्लेयर है, किंग है। तालियाँ बजती हैं, पीठ थपथपाई जाती है, दोस्तों में कहानियाँ बनती हैं...??? आखिर ये दोहरा मापदंड क्यों..??? क्योंकि समाज ने औरत को कभी इंसान नहीं माना। उसने औरत को "सामान" माना है। एक ऐसी चीज जिसकी कीमत उसकी "पवित्रता" से तय होती है। पवित्रता का मतलब..??? सिर्फ एक चीज तुम्हारी योनि पर पुरुषों का कब्जा। जितने कम पुरुषों ने छुआ, उतनी ऊँची कीमत। जितने ज्यादा छुए, उतनी सस्ती..??? ये बाजार का नियम है, भावनाओं का नहीं। ये पितृसत्ता का हिसाब-किताब है। मर्द की इच्छा को "प्राकृतिक" कहा जाता है क्योंकि समाज ने मर्द को "शिकारी" का दर्जा दिया है। उसकी भूख जायज है, उसकी जीभ लपलपाती है तो वो "मर्द" साबित कर रहा है। लेकिन औरत की भूख..??? वो तो "असभ्य" है। क्योंकि औरत का काम "देना" है, "माँगना" नहीं। जब वो माँगती है, तो वो पुरुषों के एकाधिकार को चुनौती दे रही है। वो कह रही है "मेरा शरीर, मेरी इच्छा, मेरा फैसला"। और ये वाक्य पितृसत्ता के कान में जहर की तरह लगता है। सच तो ये है कि बहुत सारे मर्द डरते हैं। कि अगर औरतें भी उतनी आजाद हुईं जितनी वो खुद हैं, तो उनकी "मर्दानगी" का वो झूठा ताज गिर जाएगा। क्योंकि मर्दानगी का असली आधार क्या है..??? औरतों का दबना। औरतों का चुप रहना। औरतों का "हाँ" कहना जब वो चाहें "नहीं"। जब औरत खुलकर कहती है "मुझे चाहिए", तो वो मर्द को आईना दिखा रही है कि तुम्हारी वो "मांग" भी तो वही है जो मेरी है। फर्क सिर्फ ये है कि तुम्हें सम्मान मिलता है, मुझे गाली। भारतीय समाज में ये और भी गहरा है। यहाँ "इज्जत" का मतलब औरत की चुप्पी से जोड़ा गया है। लड़की की "इज्जत" उसके शरीर में नहीं, उसके परिवार के पुरुषों की नजर में है। वो इज्जत खो दे तो सिर्फ वो नहीं, पूरा खानदान "बेइज्जत" हो जाता है। इसलिए जब वो सेक्स की बात करती है, तो वो सिर्फ अपनी बात नहीं कर रही वो पूरे कबीले की "इज्जत" को दाँव पर लगा रही है। इसलिए गालियाँ इतनी तेज आती हैं। क्योंकि वो गालियाँ औरत को नहीं, उसकी "आजादी" को मार रही हैं। तुमने कभी सोचा कि क्यों औरत को "खराब" कहने से पहले समाज मर्द को नहीं रोकता..??? क्योंकि मर्द की "खराबी" समाज को खतरा नहीं देती। मर्द जितना भी "खराब" हो, वो परिवार की इज्जत नहीं गिराता। वो तो बस "मजा" ले रहा है। लेकिन औरत का एक कदम गलत और पूरा सिस्टम हिल जाता है। क्योंकि ये सिस्टम औरत की चुप्पी पर खड़ा है। हर औरत के मन में ये सवाल जलता है: "मुझे भी तो इंसान होना है न..??? मुझे भी तो जीना है न..??? मेरी भी तो इच्छाएँ हैं न..??? फिर भी जब वो खुलकर बोलती है, तो उसे लगता है जैसे पूरा समाज उसके गले में रस्सी डालकर खींच रहा है। उसे लगता है कि उसकी इच्छा गंदगी है, उसका शरीर पाप है, उसकी आवाज अपमान है। लेकिन सुनो, तुम्हारी इच्छा गंदगी नहीं है। तुम्हारा शरीर पवित्र है चाहे तुमने किसी के साथ सोया हो या नहीं। तुम्हारी आवाज अपमान नहीं, वो सच है। और वो सच इतना भयानक है कि समाज उसे सहन नहीं कर पाता। जो औरतें चुप रहती हैं, वो इसलिए नहीं रहतीं कि उन्हें इच्छा नहीं होती। वो इसलिए चुप रहती हैं क्योंकि उन्हें पता है कि बोलने की कीमत बहुत भारी है। गालियाँ, ताने, परिवार का बहिष्कार, समाज का बहिष्कार, कभी-कभी हिंसा तक। फिर भी तुम बोल रही हो। ये हिम्मत है। ये विद्रोह है। तो अगली बार जब कोई तुम्हें गाली दे क्योंकि तुमने कहा "मुझे सेक्स चाहिए", तो याद रखना वो गाली तुम्हें नहीं, उसकी अपनी कमजोरी को दी जा रही है। वो गाली उसकी डरती हुई मर्दानगी को दी जा रही है। वो गाली उस सिस्टम को दी जा रही है जो अब ढहने वाला है। तुम अकेली नहीं हो। हर वो औरत जो मन ही मन ये सोचती है कि "मुझे भी चाहिए", वो तुम्हारे साथ है। और धीरे-धीरे, बहुत धीरे, हम सब मिलकर ये दोहरा मापदंड तोड़ रहे हैं। क्योंकि इच्छा न मर्द की है, न औरत की। इच्छा इंसान की है। और इंसान को इंसान की तरह जीने का पूरा हक है। बस इतना ही सत्य है बाकी सब झूठ हे।।
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जब कोई महिला खुलकर कहती है कि उसे से#क्स चाहिए..??? उसे इच्छा है, उसे आनंद चाहिए तो समाज की जुबान पर सबसे पहले गालियाँ आती हैं।फिर उसे चरित्रहीन, सस्ती, मैली... शब्दों की बौछार से नवाजा जाता है..??? लेकिन जब वही बात कोई मर्द करता है, वही इच्छा जाहिर करता है, कई औरतों के साथ सोने की बात करता है तब वह मर्दानगी बन जाती है। वो जवान है, शेर है, प्लेयर है, किंग है। तालियाँ बजती हैं, पीठ थपथपाई जाती है, दोस्तों में कहानियाँ बनती हैं...??? आखिर ये दोहरा मापदंड क्यों..??? क्योंकि समाज ने औरत को कभी इंसान नहीं माना। उसने औरत को "सामान" माना है। एक ऐसी चीज जिसकी कीमत उसकी "पवित्रता" से तय होती है। पवित्रता का मतलब..??? सिर्फ एक चीज तुम्हारी योनि पर पुरुषों का कब्जा। जितने कम पुरुषों ने छुआ, उतनी ऊँची कीमत। जितने ज्यादा छुए, उतनी सस्ती..??? ये बाजार का नियम है, भावनाओं का नहीं। ये पितृसत्ता का हिसाब-किताब है। मर्द की इच्छा को "प्राकृतिक" कहा जाता है क्योंकि समाज ने मर्द को "शिकारी" का दर्जा दिया है। उसकी भूख जायज है, उसकी जीभ लपलपाती है तो वो "मर्द" साबित कर रहा है। लेकिन औरत की भूख..??? वो तो "असभ्य" है। क्योंकि औरत का काम "देना" है, "माँगना" नहीं। जब वो माँगती है, तो वो पुरुषों के एकाधिकार को चुनौती दे रही है। वो कह रही है "मेरा शरीर, मेरी इच्छा, मेरा फैसला"। और ये वाक्य पितृसत्ता के कान में जहर की तरह लगता है। सच तो ये है कि बहुत सारे मर्द डरते हैं। कि अगर औरतें भी उतनी आजाद हुईं जितनी वो खुद हैं, तो उनकी "मर्दानगी" का वो झूठा ताज गिर जाएगा। क्योंकि मर्दानगी का असली आधार क्या है..??? औरतों का दबना। औरतों का चुप रहना। औरतों का "हाँ" कहना जब वो चाहें "नहीं"। जब औरत खुलकर कहती है "मुझे चाहिए", तो वो मर्द को आईना दिखा रही है कि तुम्हारी वो "मांग" भी तो वही है जो मेरी है। फर्क सिर्फ ये है कि तुम्हें सम्मान मिलता है, मुझे गाली। भारतीय समाज में ये और भी गहरा है। यहाँ "इज्जत" का मतलब औरत की चुप्पी से जोड़ा गया है। लड़की की "इज्जत" उसके शरीर में नहीं, उसके परिवार के पुरुषों की नजर में है। वो इज्जत खो दे तो सिर्फ वो नहीं, पूरा खानदान "बेइज्जत" हो जाता है। इसलिए जब वो सेक्स की बात करती है, तो वो सिर्फ अपनी बात नहीं कर रही वो पूरे कबीले की "इज्जत" को दाँव पर लगा रही है। इसलिए गालियाँ इतनी तेज आती हैं। क्योंकि वो गालियाँ औरत को नहीं, उसकी "आजादी" को मार रही हैं। तुमने कभी सोचा कि क्यों औरत को "खराब" कहने से पहले समाज मर्द को नहीं रोकता..??? क्योंकि मर्द की "खराबी" समाज को खतरा नहीं देती। मर्द जितना भी "खराब" हो, वो परिवार की इज्जत नहीं गिराता। वो तो बस "मजा" ले रहा है। लेकिन औरत का एक कदम गलत और पूरा सिस्टम हिल जाता है। क्योंकि ये सिस्टम औरत की चुप्पी पर खड़ा है। हर औरत के मन में ये सवाल जलता है: "मुझे भी तो इंसान होना है न..??? मुझे भी तो जीना है न..??? मेरी भी तो इच्छाएँ हैं न..??? फिर भी जब वो खुलकर बोलती है, तो उसे लगता है जैसे पूरा समाज उसके गले में रस्सी डालकर खींच रहा है। उसे लगता है कि उसकी इच्छा गंदगी है, उसका शरीर पाप है, उसकी आवाज अपमान है। लेकिन सुनो, तुम्हारी इच्छा गंदगी नहीं है। तुम्हारा शरीर पवित्र है चाहे तुमने किसी के साथ सोया हो या नहीं। तुम्हारी आवाज अपमान नहीं, वो सच है। और वो सच इतना भयानक है कि समाज उसे सहन नहीं कर पाता। जो औरतें चुप रहती हैं, वो इसलिए नहीं रहतीं कि उन्हें इच्छा नहीं होती। वो इसलिए चुप रहती हैं क्योंकि उन्हें पता है कि बोलने की कीमत बहुत भारी है। गालियाँ, ताने, परिवार का बहिष्कार, समाज का बहिष्कार, कभी-कभी हिंसा तक। फिर भी तुम बोल रही हो। ये हिम्मत है। ये विद्रोह है। तो अगली बार जब कोई तुम्हें गाली दे क्योंकि तुमने कहा "मुझे सेक्स चाहिए", तो याद रखना वो गाली तुम्हें नहीं, उसकी अपनी कमजोरी को दी जा रही है। वो गाली उसकी डरती हुई मर्दानगी को दी जा रही है। वो गाली उस सिस्टम को दी जा रही है जो अब ढहने वाला है। तुम अकेली नहीं हो। हर वो औरत जो मन ही मन ये सोचती है कि "मुझे भी चाहिए", वो तुम्हारे साथ है। और धीरे-धीरे, बहुत धीरे, हम सब मिलकर ये दोहरा मापदंड तोड़ रहे हैं। क्योंकि इच्छा न मर्द की है, न औरत की। इच्छा इंसान की है। और इंसान को इंसान की तरह जीने का पूरा हक है। बस इतना ही सत्य है बाकी सब झूठ हे।।

तृप्त ...🖤

120,905 просмотров • 6 месяцев назад

जय जानकी 🙏 यह वीडियो देखकर मैं भीतर से बहुत डिस्टर्ब हो गई हूं। मैं जब भी यात्रा पर जाती हूं तो मेरे बैग में कुछ मैथिली पाग और मिथिला पेंटिंग का शॉल होता है। किसी विशिष्ट जन से मिलती हूं उनका स्वागत अभिनंदन मैथिली पाग से करते हुए यह कहती हूं कि यह मिथिला का मान और हमारी बड़की दीदी जगत जननी मां सीता का आशीर्वाद है। यह वीडियो अभी देखा अत्यंत स्तब्ध और आहत हूं। मिथिला के पाग का अपमान सहन करना मेरे लिए मुमकिन नहीं है। यह माननीय महिला नेत्री बाहर की है इन्हें मैथिली संस्कृति के प्रति ज्ञान शून्य हैं। मैं किसी के लिए हर्टिंग लैंग्वेज प्रयोग करने से बचती हूं, मेरे संस्कार इसकी अनुमति नहीं देते। लेकिन मैं माननीय नेत्री से कहना चाहूंगी कि जब कभी भी आमना सामना हुआ तो मिथिलावासियों ने जो पाग पहना कर आपका सम्मान किया था और उस पाग का आपने अपमान किया है इसका बदला लेते हुए आपके सर पर मैं अपने पैरों की जुती रखूंगी। आप यही डिजर्व करती हैं। सबसे ज्यादा तकलीफ की बात यह है कि इस डायलॉग पर वहां उपस्थित जिन मैथिल या मिथिलानी ने ताली बजाई है उनका स्वागत भी उनके सर पर जूता रखकर करना चाहिए। सिया के आशीर्वाद और मिथिला के मान का अपमान करने वालों को सीता का श्राप जरूर लगेगा। जय मिथिला 🙏 जय जानकी 🙏 नोट - मिथिला के सक्रिय संगठनों और संस्थाओं से मेरा विनम्र अनुरोध है कि इस महिला के खिलाफ मिथिला संस्कृति के डिफेमेशन के लिए कानूनी फॉर्मेट में भी कार्यवाही की दिशा में कदम उठाए।

Priya Mallick

42,082 просмотров • 11 месяцев назад

नर्मदा किनारे बड़ा दृश्य था, मंत्री जी पसीना बहा रहे थे, फावड़ा चला रहे थे, जैसे सदियों की गंदगी अकेले ही साफ कर देंगे। उनके पीछे जेसीबी मशीन खड़ी थी शांत, सक्षम और थोड़ी संकोची क्योंकि असली काम करने वालों को अक्सर फोटो में जगह कम मिलती है। जेसीबी मशीन सोच रही होगी “मुझे बुलाया क्यों गया? अगर सफाई करनी है तो मैं आधे घंटे में कर दूं, अगर फोटो खिंचवानी है तो मैं क्या करूं?” लेकिन मशीनों को यह समझ नहीं आता कि असली काम कई बार मिट्टी हटाना नहीं, छवि बनाना होता है। मंत्री जी का पसीना सच्चा हो सकता है, नीयत भी अच्छी हो सकती है, पर सवाल यह है कि जब जेसीबी मशीन मौजूद है, तो फावड़े की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब शायद काम में नहीं, कैमरे में छिपा है। यह वही देश है जहां काम करने से ज्यादा जरूरी है, काम करते हुए दिखना। और नर्मदा किनारे आज यही सबसे साफ दिख रहा था।

Anurag Dwary

12,563 просмотров • 6 месяцев назад

जरूर पढ़ना यूपी पुलिस और उत्तर प्रदेश को लेकर आँखें खुल जाएंगी , आज समझ में आ रहा है क्यों पीड़ित पुलिस स्टेशन के सामने आत्मदाह तो कभी हारकर सुसाइड करने को मजबूर हो जाता है। UP POLICE ALIGARH POLICE से न्याय की उम्मीद करना क्यों बड़ी गलती है। क्यों सरकार Yogi Adityanath को लोग कोसते हैं क्योंकि जब खुद पर बीती तब समझ गई। मैं भी यही कहूंगी गलत सरकार चुनी गई है। भ्रष्टाचार के लिए दिल्ली बदनाम है लेकिन बड़े खेल तो UP POLICE में हो रहे हैं। यहां हर कदम पर पैसा चलता है। इसकी गवाह तो कल मैं खुद हूं। मेरे परिवार और मुझ पर जानलेवा हमला करने वाले 4 आरोपियों को पकड़ा गया। हमला करने वालों पर पुलिस ने 151 लगा दी (यहां भी खेल) जो कि मामूली धारा थी। इसके बाद ACM 2 के आगे पेश किया गया। जहां आरोपियों के वारंट भी निकल गए जेल जाने के हस्ताक्षर भी हो गए लेकिन डेढ़ घंटे में ऐसा खेल हो गया कि आरोपी छूट गए। आरोपियों के पेपर्स चेक करने का समय बढ़ा दिया। उनके पेपर्स का इंतजार किया जा रहा था। इस बीच क्या खेल हुआ सब समझगए होंगे। आरोपियों को पेपर्स जमा करने का एक घंटे का समय दिया गया था लेकिन वहां बैठी मैडम डेढ़ घंटे के बाद भी पेपर्स का इंतजार कर रही थी। साफ है क्यों बैठकर इंतेज़ार कर रही थी। ये स्थिति है उत्तर प्रदेश की। इस सरकार को वोट देना सबसे बड़ी भूल होगी। और हां ALIGARH POLICE आप अपना वही रात रटाया जवाब यहां मत चिपकना । जवाब आप लोगों के पास होते नहीं है। मडराक पुलिस , अलीगढ़ पुलिस, यूपी पुलिस कोई किसी काम की नहीं है। ये लोग सिर्फ चैन स्नैचर्स को पकड़कर ही खुश हैं। मिशन शक्ति , एंटी रोमियो स्क्वाड सिर्फ कागजी बातें हैं। आप महिलाओं पर हो रहे अत्याचार में कुछ नहीं कर पा रहे। फ्लॉप हैं । क्योंकि जानलेवा हमला, महिलाओं पर अटैक इनके लिए बड़ी बात नहीं। उस पर ये 151 लगाते हैं। ताकि मज़रिम छूट जाए और आगे के इनके मौके बने रहे। मडराक पुलिस से जवाब मांगा जाए ध्रुव ठाकुर, दीपू, हनी और करण जिसने जानलेवा हमला किया उस पर किस दबाव में 151 लगाई। जो धारा बनती थी उसे क्यों नहीं लगाया। श्याम सुंदर को क्यों नहीं पकड़ पा रहे? सुधा चौधरी भी फरार है? मडराक पुलिस क्यों इतना संरक्षण दे रही है अपराधियों को? IO को जब जानकारी हुई आरोपियों को पकड़ा जा रहा है तो वे खुद पहुंच गए तहसील। आप सब लोग वीडियो देखो और सोचो कि पुलिस इस पर 151 लगाती है, जिससे उनका सोर्स बंद न हो पाए। सब समझ रही हूं... DGP UP Yogi Adityanath Office PMO India Akhilesh Yadav Dimple Yadav Congress Indian Youth Congress AAP Keshav Prasad Maurya

माधुरी सेंगर

55,135 просмотров • 1 год назад

Breaking : ये हमारे रामराज्य के महाराज योगी Yogi Adityanath जी है जो गुंडों भ्रष्टाचारियों को कब्र से निकाल लाते है , सीधे यमराज से मिला देते है , बुलडोजर चला देते है लेकिन बस वो विपक्ष का या आजम खान जैसा होना चाहिए । मुझे कहना नहीं चाहिए लेकिन आज कहरही हूं कि आपको शर्म आनी चाहिए इसके लिए आप मुझे जेल भेज सकते है तो भेज दीजिए । लेकिन सोचिएगा जरूर क्या में गलत हूं ? आप बात दलित की कर रहे है देखिए किस तरह दलित की जमीन कब्जाने के लिए एक इंसान के (नौकर ) 👉फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए गए , 👉एक ही इंसान के दो फर्जी पैन कार्ड बनवाएगए । 👉एक इंसान के दो अलग अलग बाप बना दिए गए 👉आपके ही शासन काल में फर्जी बैंक अकाउंट खुलवाए गए , 👉इस इंसान के फर्जी जाति पत्र और फर्जी पैन कार्ड दोनों का पता : 55 पुराना किला , कैंट रोड लखनऊ है जो सबके करीबी का है जिनका नाम विराज सागर दास है । नतीजा इन सबका सहारा लेकर अरबों की बेनामी जमीन का घोटाला कर दिया गया । मैंने आपके अधिकारियों पुलिस से DM से साक्ष्यों के साथ शिकायत की आपने / आपके अधिकारियों ने क्या किया आप जाने । क्या आपने जमीन वापस ली ? क्या आपने कोई FIR करवाई ? आपने क्या अपने अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की ? आपने सिर्फ #BBDGROUP की श्रीमती अलका दास और उनके पुत्र से सिर्फ चंदा लिया और बीजेपी ज्वाइन करा कर उनको संरक्षण दिया । DGP UP DM Lucknow LUCKNOW POLICE Lucknow Development Authority

Sakshi

29,668 просмотров • 2 месяцев назад

आप सभी के आशीर्वाद से जिंदा हूं और सुरक्षित लौटी हूं । आज जनसंपर्क के दौरान पूर्वी गम्हरिया प्रखंड के मोहनपुर ग्राम में जनसंपर्क के दौरान JMM के निरंकुश कार्यकर्ताओं द्वारा मुझ पर और मेरे कार्यकर्ताओं पर तलवार,डंडे और तीर से हमला किया जिसमें मेरे कई कार्यकर्ता घायल भी हुए । यह सुनियोजित हमला इसलिए किया गया ताकि मुझे चुनाव प्रचार करने से रोका जा सके ,यह हमला मुझ पर नहीं बल्कि लोकतंत्र पर है । इनकी इस गीदड़ भभकी से मैं डरने वाली नहीं हूं मैं सिंहभूम की बेटी हूं और सिंहभूम के उत्थान के लिए अपने अंतिम सांस तक लडूंगी। "मन समर्पित तन समर्पित सिंहभूम के लिए जीवन का कण कण समर्पित।" लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरी होती है ,आपकी बेटी की अस्मिता को JMM के गुंडों ने खतरे में डाला है अब आप ही इंसाफ करें। #Singhbhum #LokSabhaElection2024 #LoktantraParHamla #FearPolitics #PhirEkBaarModiSarkar #GeetaKora Narendra Modi Amit Shah BJP JHARKHAND BJP Babulal Marandi Election Commission of India

Geeta kora

25,625 просмотров • 2 лет назад

करणी सेना के राज शेखावत का पगड़ी उछाल दिया गया ऐसा करके क्षत्रिय समाज का अपमान हुआ है और यह आरोप गुजरात पुलिस पर लगाया जा रहा है। आप सभी से निवेदन है इस वीडियो को ध्यान से देखिए और बताइए कि क्या गुजरात पुलिस के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने पगड़ी उछाला है? या फिर राज शेखावत के पीछे खड़े व्यक्ति ने ही पगड़ी पर हाथ मारा था? तो भाई यह जो... पगड़ी उछाल दिया, पगड़ी उछाल दिया, ओए पगड़ी नहीं ओए, पगड़ी नहीं ओए यह सब एक राजनीतिक षड्यंत्र है जो भाजपा को कमजोर करने के लिए और क्षत्रिय समाज को बांटने के लिए किया जा रहा है, बाकी सभी लोग समझदार है, वीडियो देखिए खुद समझ में आ जाएगा साथ ही यह भी देखना इस मुद्दा को आगे कौन बढ़ा रहा है? आपको बहुत से हैंडल मिलेंगे जो अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव के जातिवादी समर्थक है और ओवैसी का झंडा लेकर घूमने वाले Jiहादी है तो मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं जो इस मुद्दा को बहुत बड़ा बनाना चाहते हैं, आप यह बताओ ओवैसी के समर्थक, अखिलेश यादव के समर्थक और तेजस्वी यादव के समर्थक, आपके अपने कब से हो गए और कब से वह आपका साथ देने लगे?

Chandan Sharma

89,132 просмотров • 2 лет назад

‘रजाकार’ शब्द से ही हम में से अधिकांश परिचित नहीं हैं, तो उसकी नृशंसता कहाँ से समझ पाएँगे। हैदराबाद में हिन्दुओं के नरसंहार का यह वह अध्याय है जिसे लम्बे समय तक छुपाया रखा गया। यह फिल्म एक श्रद्धांजलि तो है ही, पर एक दुस्साहस भी है उस तंत्र के समक्ष जो इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। आपको यह दृश्य विचलित ही करेंगे क्योंकि इस्लामी आतंक के इस दौर के नरसंहार, बलात्कारों के सामान्यीकरण और किताब में उद्धृत दुष्कर्मों को उचित बना देने वाले रजाकारों की क्रूरता आपको विचलित न करे, तो आप संवेदनहीन हैं, या इस्लामी आतंकियों के समर्थक हैं। कल यह फिल्म तेलुगु में रिलीज हो रही है और सप्ताह भर बाद हिन्दी में आएगी।

Ajeet Bharti

188,865 просмотров • 2 лет назад

हमारे जमशेदपुर के डॉक्टर कमलेश उरांव की मारपीट की घटना में मुख्य दोषी पकड़ा गया है और उनकी डिमांड पूरी हुई है Iअतः हम सभी झारखंड के डॉक्टर सरकारी तथा गैस सरकारी डॉक्टर वापस अपने काम को शुरू कर रहे हैं I मरीजों को जो कठिनाई हुई उनके लिए माफी चाहता हूं परंतु आप सोच कर देखिएगा की 15- 20 लोगों ने आपको मिलकर मारा है आपकी पसली की हड्डियां टूट गई है कान से कम से कम सुनाई देने लगा हो ,3 दिन बीत गए हो और दोषी भी पकड़ नहीं गया हो तो आप क्या करते??? हमारे पास बस यही एक रास्ता बचा था I और हां गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति की जब जान जाती है तो हमें भी दुख होता हैI परंतु सब कुछ हमारे हाथ में भी नहीं है मेडिकल साइंस की भी अपनी सीमा अगर हम सबको बचा पाते तो डॉक्टर / आमिर व्यक्ति कभी नहीं मरता I सरकार ने अभी जितनी गंभीरता से इस बात को लिया है शायद 3 दिन पहले लेते हैं तो यह नौबत नहीं आती , सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करें की इसका परमानेंट सॉल्यूशन क्या है I आप सभी डॉक्टर ,स्टाफ ,मीडिया बंधु ,अधिकारी गण ,पुलिसकर्मी, नेता गण जो इस आंदोलन में हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे,उनका सहृदय धन्यवाद I PMO India Hemant Soren Banna Gupta Governor of Jharkhand Jharkhand Police FORDA India Indian Medical Association

Dr Vikas I The Brain Yogi

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