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Baba Ramdev ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कहा कि 'देश में बहुत घपला है. सरकारी नौकरी में अपनी ही जात, धर्म, संगठन के लोग भरे जा रहे हैं.छोटे- छोटे बच्चे कह रहे कि कहीं लाइट नहीं है, पानी नहीं, किताबें नहीं है...बहुत घपला है. सुधर जाओ, नहीं तो...'...

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भगवान कभी नहीं चाहते है उनका भक्त परेशान हो, और उनके दरबार में कष्ट लेकर है, क्योंकि वह कष्टहर्ता हैं कष्टदायक नहीं। जितना हो सके उतना जल ले जाओ, जरुरी नहीं है आप 21-51 लीटर ले जाओ? हां श्रृद्धा है अलग बात है लेकिन अपनी क्षमता के अनुसार ले जाओ। अब इनसे 11 लीटर जल नहीं जा पा रहा है और रास्ते में ही भोलेनाथ के ऊपर जल चढ़ाना चाहते हैं तो भाई क्यों 11 लीटर ले जा रहे थे, भोलेनाथ के लिए एक बूंद ही काफी है। मैने देखा है भोलेनाथ के यहां बहुत से लोग खुद को पीढ़ा देकर पहुंचते हैं इससे क्या भगवान ज्यादा खुश हो जाएंगे, भगवान चाहते है उनका भक्त खुश रहे। अपनी क्षमता के अनुसार ही जल ले जाए।

Anuj Agnihotri Swatntra

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आज इस आवाज में दर्द है... राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों? क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही। राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं? वीडियो साभार Republic

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