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Bacccccheeeeeeee nahiiii haiiiiiiiiiiiiiii yeeeeeee

156,072 次观看 • 2 年前 •via X (Twitter)

8 条评论

DG 的头像
DG2 年前

Sachi

Serwer khan 的头像
Serwer khan2 年前

Fake hai Bsdk

Priyanka 🪷 的头像
Priyanka 🪷2 年前

kyu aate hai aise parents

DG 的头像
DG2 年前

Inse aur kya aasha hongi

Vacha Bhavsar 的头像
Vacha Bhavsar2 年前

Pr hindu neta hindu k peso se hindu bacho ko nahi inko benifits denge

मार्तण्ड 的头像
मार्तण्ड2 年前

आतंकवादी है साले

𝓜𝓸𝓸𝓷𝓫𝓸𝔀 的头像
𝓜𝓸𝓸𝓷𝓫𝓸𝔀2 年前

Venòmous 🐍 hain

DG 的头像
DG2 年前

Always

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🇩🇪 जर्मनी की यात्रा में दो दृश्य देखे… दोनों ने दिल को छू लिया! जर्मनी भ्रमण के दौरान एक दिन हमारी पूरी बस को जर्मन पुलिस ने घेर लिया। बस में हम सभी भारतीय यात्री थे। पुलिस हमें थाने लेकर गई। एक-एक यात्री को बस से उतारा गया। पासपोर्ट और वीज़ा चेक किया गया, सामान की तलाशी ली गई। विदेशी धरती पर पुलिस की यह कार्रवाई देखकर मन में स्वाभाविक रूप से थोड़ी चिंता थी। लेकिन फिर मैंने ऐसा दृश्य देखा, जिसे मैं शायद कभी नहीं भूल पाऊँगा। जर्मन पुलिस के जवानों ने हमारे लगेज को खुद अपने हाथों से उठाया। उसे बैगेज स्कैनर तक लेकर गए। एक-एक सामान की जाँच की। और जाँच पूरी होने के बाद वही लगेज खुद उठाकर बस में वापस रख दिया। मैं कुछ क्षण उन्हें देखता रह गया… 38 वर्षों से अधिक पुलिस सेवा में रहने के बाद भी उस दिन वर्दी को एक अलग नजर से देखने का अवसर मिला। कानून की सख्ती थी, जाँच थी, अनुशासन था… लेकिन उसके साथ सम्मान, संवेदनशीलता और सेवा का भाव भी था। तभी मन में एक बात आई— वर्दी की असली गरिमा सिर्फ अधिकार में नहीं, बल्कि उस अधिकार को इंसानियत के साथ निभाने में है। और जर्मनी में दूसरा दृश्य जिसने मुझे भीतर तक प्रभावित किया, वह था वहाँ का साफ-सुथरा वातावरण। सड़कें साफ, सार्वजनिक स्थान साफ, आसपास कहीं अनावश्यक कचरा नहीं… मैं इसके साथ एक-दो छोटे वीडियो भी साझा कर रहा हूँ। उन्हें देखकर मैं खुद सोचने लगा— आखिर इस सफाई का राज क्या है? क्या वहाँ सरकार हमसे ज्यादा सफाई करती है? शायद व्यवस्था का अपना योगदान है, लेकिन असली फर्क मुझे नागरिकों की सोच और जिम्मेदारी में दिखाई दिया। हम भारत में अक्सर सरकार से सवाल करते हैं— “सफाई क्यों नहीं है?” लेकिन कभी-कभी हमें आईना अपने सामने भी रखना चाहिए। सड़क पर कचरा कौन फेंकता है? दीवार कौन गंदी करता है? सार्वजनिक जगह को अपना घर समझकर साफ कौन रखता है? सरकार व्यवस्था दे सकती है, कर्मचारी लगा सकती है, अभियान चला सकती है… लेकिन देश को साफ रखने की आदत सरकार नहीं, हम नागरिक बनाते हैं। जर्मनी में पुलिस के जवानों को हमारे सामान उठाते देखकर मुझे वर्दी की जिम्मेदारी याद आई… और वहाँ की साफ-सफाई देखकर मुझे नागरिक की जिम्मेदारी याद आई। यही दोनों बातें मेरे मन में गहराई से बैठ गईं— पुलिस अपने अधिकार का इस्तेमाल सेवा के लिए करे और नागरिक अपनी आज़ादी का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करे… तो शायद किसी भी देश को बेहतर बनने से कोई नहीं रोक सकता। विदेश जाकर सिर्फ वहाँ की खूबसूरती देखकर लौटना आसान है। लेकिन अगर वहाँ से कोई अच्छी सीख लेकर अपने देश लौटें, तो शायद वही यात्रा वास्तव में सार्थक है। 🇮🇳❤️ मेरी जर्मनी यात्रा की ये दो यादें मेरे लिए सिर्फ तस्वीरें या वीडियो नहीं हैं… ये दो आईने हैं— एक हमें बताते हैं कि वर्दी कैसी हो, और दूसरा बताते हैं कि नागरिक कैसे हों। 🇮🇳 भारत को स्वच्छ और बेहतर बनाने की शुरुआत किसी और से नहीं—हमसे होनी चाहिए। #Germany #PoliceService #स्वच्छभारत

Rajindar Pathania

62,225 次观看 • 2 天前

अब इस खबर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर आते हैं । जंतर मंतर प प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज अपने हाथ में स्टील का एक मोटा और भारी कड़ा पहनकर गया था। इस वीडियो में वह खुद स्वीकार कर रहा है कि मैने इसी से नीशू आजाद के पिता का सिर फाड़ा था। दिल्ली पुलिस Delhi Police यह सुबूत तो काफी होना चाहिए इसकी गिरफ्तारी और सजा के लिए? बात यही नहीं रुकती। इस वीडियो में स्वतंत्र खुलेआम धमकी दे रहा है कि सीजेपी के प्रदर्शनकारियों और वन्देमातरम कानून का विरोध करने वालों को बेल्ट और लात घूंसों से ही नहीं कट्टे से मारने में भी संकोच नहीं करेंगे। मुझे याद आता है कि हापुड़ के अल्लाबख्शपुर में सद्दाम नामक अपराधी ने हाल ही में एक ढाबे पर कट्टे से लोगों को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस देश में दो तरह के कानून है एक आम आदमी के लिए एक बीजेपी समर्थकों के लिए।सोचकर देखिए यह आदमी पीएम के शपथग्रहण समारोह और स्वतंत्रता दिवस पर वीआईपी सत्कार पाता है।

Awesh Tiwari

164,429 次观看 • 2 天前