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Big Big Breaking ‼️ CM Rekha Gupta embarrasses India रेखा गुप्ता जी को यह भी नहीं पता कि शहीद भगत सिंह आज़ादी से पहले के समय के क्रांतिकारी थे । उन्हें लगता है कि आज़ादी के बाद कांग्रेस के विरोध में उन्होंने बम्ब फेंका । स्कूल के बच्चे भी...

219,690 views • 7 months ago •via X (Twitter)

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जलियांवाला नरसंहार के अगले दिन एक 12 साल का बच्चा वहाँ गया था। उस वक्त उसे कोई नहीं जानता था। लेकिन उस मंजर का जो असर उस पर पड़ा, उसने बच्चे की सोच बदल दी। आज देश उस बच्चे को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के नाम से जानता है। फाँसी से एक हफ़्ता पहले उन्होंने ने अपने पिता सरदार किशन सिंह जी से कहा कि अंग्रेज़ों से माफ़ी नहीं माँगनी है। उन्होंने ने कहा कि उनकी कुर्बानी एक हफ़्ते में देश में आज़ादी की लहर पैदा कर देगी। और ऐसा ही हुआ। फाँसी के छह दिन बाद कांग्रेस का कराची अधिवेशन हुआ। l भगत सिंह की शहादत से जो माहौल बना, उसका सम्मेलन पर पड़ा और सम्मेलन में कराची प्रस्ताव पारित हुआ। इसमें गांधी-नेहरू ने आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की रूपरेखा देश के सामने रखी, जो बाद में संविधान का आधार बनी। आज़ादी अब एक ख़्वाब नहीं, मंज़िल बन गई। उस दिन कांग्रेस मंच पर एक बुजुर्ग व्यक्ति भी बोले थे। वो भगत सिंह के पिता सरकार किशन सिंह थे। शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को फाँसी के छह दिन बाद ही उन्होंने से कांग्रेस के मंच से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और देश से अपील की कि आज़ादी पाने के लिए अपने जनरल यानि गांधी जी के पीछे लाम बंद हो जाएँ। उन्होंने ने कहा कि सभी लोग कांग्रेस नेताओं का सपोर्ट करें, तभी स्वाधीनता मिल सकेगी। ये था कांग्रेस-गांधी-भगत सिंह का संबंध। और RSS के लोग इस बारे में भ्रम फैलाते हैं। स्थापना के बाद से ही RSS के नेताओं ने लिख लिख कर पोथियाँ भर दी, लेकिन 1925 में स्थापना से ले कर 1950 तक एक लाइन जलियांवाला नरसंहार के ख़िलाफ़ नहीं लिखी, एक लाइन भगत सिंह के पक्ष में नहीं लिखी, कभी भी बराबरी के अधिकार, प्रदर्शन प्रोटेस्ट के अधिकार, अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में नहीं लिखा। क्योंकि ये सब उनके एजेंडा में था ही नहीं। इसीलिए संविधान को उनसे खतरा है, क्यूंकि इस संविधान के एजेंडा में वही सब मूल्य हैं। इसीलिए राहुल गांधी संविधान की रक्षा की बात करते हैं। बैसाखी के अवसर पर करनाल जिला (शहरी) कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित बैसाखी मिलन कार्यक्रम में संबोधन के कुछ अंश। Rahul Gandhi Mallikarjun Kharge Congress

Gurdeep Singh Sappal

17,426 views • 4 months ago

बताओ ऐसे आईएएस प्रदेश में है जो शहीद भगत सिंह को ऐसे शब्द बोल रहे है... स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में IAS रिंकू सिंह राही के बिगड़े बोल, शहीद भगत सिंह को बताया “बेवकूफ”, बोले-“वह कभी अच्छे बच्चे नहीं थे” उरई कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया विवादित बयान IAS बोले “आज के समय के हिसाब से भगत सिंह सबसे बड़े बेवकूफ थे” स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों को लेकर की गई टिप्पणियों से मचा हड़कंप, स्वतंत्रता दिवस के मंच से दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, वर्तमान में उरई में SDM न्यायिक के पद पर तैनात हैं IAS रिंकू सिंह राही, जालौन के उरई स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में दिया विवादित बयान।

आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari

78,617 views • 16 days ago

1907 में अंग्रेजों के किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ सरदार अजीत सिंह जी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के पिता सरदार किशन सिंह जी ने ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन की अगुवाई की थी। उस दौर में चौधरी मातू राम हुड्डा जी भी इस संघर्ष में उनके साथ खड़े थे। इतना ही नहीं, अंग्रेजी हुकूमत से बचने के लिए सरदार अजीत सिंह जी ने कुछ समय चौधरी मातू राम जी के घर में रहकर भूमिगत जीवन बिताया था। आज कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए Deepender Singh Hooda जी पर सिख समाज के अपमान का आरोप लगा रहे हैं। उन्हें इतिहास के पन्ने भी पलट लेने चाहिए और पहले यह देखना चाहिए कि इस परिवार ने सिख समाज और किसान संघर्ष के साथ रिश्ता कब से निभाया है। सिखों के सम्मान की बात जुबान से नहीं, इतिहास और कर्म से साबित होती है। और हुड्डा परिवार का इतिहास इस बात का गवाह है।

Team Deepender INC

11,034 views • 8 days ago

यह वीडियो काफी चर्चा में है इन माता जी का नाम राजेश्वरी बिश्नोई है जो रविंद्र सिंह भाटी जी को संदेश देना चाहती है कि आपके पूर्वजों की वजह से पेड़ काटे थे और अमृता देवी विश्नोई के साथ 363 लोग शहीद हो गए आज वही लोग वोटो के लिए नक भाई बना रहे हैं जबकि रविंद्र सिंह भाटी ने कहा था मेरी विधानसभा में ज्यादा बिश्नोईयों के वोट भी नहीं है अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 1730 ई. में जोधपुर (राजस्थान) के खेजड़ली गाँव में 363 बिश्नोईयों द्वारा पेड़ों के लिए दिया गया बलिदान तत्कालीन मारवाड़ (जोधपुर) के राजा अभय सिंह के शासनकाल में हुआ था। वे राठौड़ वंश के राजा थे और उन्होंने मेहरानगढ़ किले में महल बनवाने के लिए लकड़ी की आवश्यकता के कारण यह आदेश दिया था जबकि रविंद्र सिंह भाटी तो राठौड़ नहीं भाटी है

Banwari Sheshma

31,830 views • 6 months ago

INDIA पार्टियों ने राज्य सभा से इसलिए walk-out किया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जी झूठ बोल रहे थे। वे कहते हैं कि हम संविधान के विरोध में हैं, बल्कि सच्चाई यह है कि BJP-RSS, जनसंघ और उनके राजनीतिक पुरखों ने भारत के संविधान का जमकर विरोध किया था। उन लोगों ने डॉ बाबासाहेब अंबेडकर व पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के उस समय पुतले फूंके थे। ये शर्मनाक बात थी। सच्चाई ये है कि डॉ बाबासाहेब अंबेडकर ने संविधान के प्रारूप बनाने का श्रेय कांग्रेस को दिया था। मुझे ये दो बातें भारत की जनता को सदन के माध्यम से बतानी थी। 1) RSS के मुखपत्र Organiser ने 30 नवंबर, 1949 के अंक में संपादकीय में लिखा था कि — “भारत के इस नए संविधान की सबसे बुरी बात यह है कि इसमे भारतीय कुछ भी नहीं है... प्राचीन भारत के अ‌द्भुत संवैधानिक विकास के बारे में इसमें कोई ज़िक्र ही नहीं है... आज तक मनुस्मृति में दर्ज मनु के कानून दुनिया की प्रशंसा का कारण हैं और वे स्वयंस्फूर्त आज्ञाकारिता और अनुरूपता पैदा करते हैं... हमारे संवैधानिक विशेषज्ञों के लिए यह सब निरर्थक है।" यहां आरएसएस साफ तौर पर भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता यानी अंबेडकर के विरोध में और मनुस्मृति के समर्थन में खड़ी है। 2) बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर ने संविधान का प्रस्ताव पेश करते हुए कांग्रेस की तारीफ करते हुए 1949 में कहा था कि — 66 मुझे बहुत आश्चर्य हुआ था जब प्रारूप समिति ने मुझे अपना अध्यक्ष चुना। समिति में मुझसे बड़े, मुझसे बेहतर और मुझसे सक्षम लोग थे। यह कांग्रेस पार्टी के अनुशासन का ही कमाल था कि प्रारूप समित, संविधान सभा में संविधान को हर धारा और हर संशोधन के बारे में निश्चित जानकारी के साथ प्रस्तुत कर सकी। इस लिए संविधान सभा के समक्ष, संविधान के प्रारूप को अबाध रूप से प्रस्तुत किए जाने के समस्त श्रेय पर कांग्रेस पार्टी का हक बनता है।“

Mallikarjun Kharge

155,505 views • 2 years ago