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BJP कहती है कि प्रियंक खरगे अपना मंत्रालय देखें। सवाल यह है कि जब RSS सड़कों पर मार्च निकालता है तो उसकी सुरक्षा कौन करता है? गृह विभाग। और गृह विभाग अगर सुरक्षा दे रहा है तो उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि वह किस संगठन को...

37,806 views • 2 months ago •via X (Twitter)

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🔍 अक्सर सवाल पूछा जाता है कि 100 वर्ष पुराने, 80,000+ शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का पंजीकरण क्यों नहीं है? 📜 तथ्य यह है कि भारतीय कानून किसी भी नागरिक संगठन के लिए पंजीकरण को अनिवार्य नहीं बनाता। संविधान का अनुच्छेद 19(1) नागरिकों को संगठन बनाने और शांतिपूर्ण ढंग से कार्य करने की स्वतंत्रता देता है। ⚖️ RSS एक अपंजीकृत "Body of Individuals" के रूप में कार्य करता है, जिसे भारतीय न्यायालयों और कानून के दायरे में मान्यता प्राप्त है। इसलिए इसका बिना रजिस्ट्रेशन चलना अवैध नहीं है। 🗣️ संघ का कहना है कि उसकी स्वैच्छिक एवं वैचारिक प्रकृति को बनाए रखने के लिए यही संरचना उपयुक्त है, जबकि आलोचकों का मत है कि इतने बड़े प्रभाव वाले संगठन को अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही दिखानी चाहिए। ✅ निष्कर्ष: RSS के पंजीकरण को लेकर बहस हो सकती है, लेकिन वर्तमान भारतीय कानून के अनुसार इसका बिना पंजीकरण कार्य करना गैरकानूनी नहीं है। #RSS #NationalVolunteerOrganization #Constitution #India #FactsMatter 🇮🇳

अखण्ड भारत संकल्प

21,097 views • 2 months ago

RSS और BJP इस देश को बेच खाएंगे! देवरिया में 60 करोड़ की साइबर ठगी… और नाम जुड़ रहा है भाजपा के नगर उपाध्यक्ष और RSS से जुड़े बताए जा रहे शख्स का। ये कोई इत्तेफाक नहीं है, ये उसी सिस्टम की पैदावार है जो ऊपर से “संस्कार” और “राष्ट्रवाद” का पाठ पढ़ाता है, और अंदर से ऐसे खेल चलता है। फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों की ठगी… बैंक खातों में काला पैसा… और सिस्टम को भनक तक नहीं? या सब कुछ जानते हुए भी आंख बंद रखी गई ? क्योंकि RSS और BJP का है। RSS और BJP खुद को ईमानदारी का चेहरा बताते हैं, लेकिन बार-बार ऐसे मामलों में उनके ही लोग क्यों पकड़े जाते हैं? क्या ये “संयोग” है या “संरक्षण”? अगर किसी विधायक के हाथों ऐसे ठगी के अड्डे का उद्घाटन हुआ है, तो मामला सिर्फ एक माखन गुप्ता का नहीं है ये पूरे नेटवर्क का मामला है। सवाल ये है कि क्या जांच सच में ऊपर तक जाएगी? या फिर हमेशा की तरह एक बलि का बकरा पकड़कर केस बंद कर दिया जाएगा? देशभक्ति के नाम पर सत्ता लेना आसान है, लेकिन ईमानदारी निभाना मुश्किल और यहां तो मामला उल्टा ही दिख रहा है। अब जनता को तय करना है नारे सुनने हैं या सच्चाई देखनी है। ✊

A.K. Stalin

57,278 views • 4 months ago

कल जो डॉक्टर (HOD) पकड़ा गया है, SMS अस्पताल में 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते वह RSS का पदाधिकारी है, इनकी शाखाओं में जाता है और इनके चिकित्सा प्रकोष्ठ में पदाधिकारी है। RSS के लोग रिश्वत लेते हुए पकड़े जा रहे हैं, उस ओर तो इनका ध्यान नहीं है। और यह है कि RSS जो मर्जी करे, इस देश के अंदर उसका यदि कोई विरोध करता है तो उसे देशद्रोही कहा जाता है। यानी सरकार की बातों से सहमति नहीं रखना या असहमति व्यक्त करना ही अब देशद्रोह हो गया है इस देश में, इस राज्य में। डबल इंजन की सरकार है, तो डबल तरीके से जनता को कुचलने का काम करेगी और जो मन में आए वही करेगी। आज राजस्थान की हालत बहुत खराब है। कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब किसी न किसी व्यक्ति की जान नहीं जाती। चोरी, मर्डर, डकैती प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से शून्य हो चुकी है। रोजाना भ्रष्टाचारी पकड़े जा रहे हैं और आम जनता सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ने लगी है, लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहीं है। सरकार का ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि RSS का किस प्रकार से महिमामंडन किया जाए और उसकी विचारधारा को कैसे आगे बढ़ाया जाए।

Tika Ram Jully

92,386 views • 10 months ago

राजस्थान के चूरू में एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा को रोककर पहले RSS की परेड को प्राथमिकता दी गई, यह न सिर्फ गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि मानव जीवन की अवहेलना का भी प्रतीक है। जब जीवन और मृत्यु के बीच की दीवार एक एंबुलेंस होती है, वहां संघ की परेड पहले करवाना क्रूरता नहीं तो और क्या है? यह घटना यह साफ दर्शाती है कि RSS की सोच में आम नागरिक के जीवन की कोई कीमत नहीं है। जिन लोगों ने वर्षों सेवा, अनुशासन और राष्ट्रवाद की दुहाई दी, वही जब सड़कों पर अपनी परेड निकालने में इतने मग्न हैं कि एंबुलेंस को रास्ता देने लायक संवेदना तक नहीं रखते तो उनका असली चेहरा उजागर हो जाता है। क्या किसी संगठन की शक्ति प्रदर्शन आमजन की जान से ऊपर है? क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक स्वयंसेवी संगठन को इतनी छूट दी जा सकती है कि वह आपातकालीन सेवाओं को भी ठप कर दे?

Hansraj Meena

74,042 views • 1 year ago

अगर आप SC, ST या OBC हैं, तो आपको 10% EWS आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही आप आर्थिक रूप से गरीब हों। यह आरक्षण केवल उन वर्गों को दिया जा रहा है, जिनकी देश में कथित रूप से 10% आबादी है, और उनके गरीबों को अलग से 10% आरक्षण का लाभ मिल रहा है। लेकिन क्या यह सच्चाई है? उच्च जातियों की वास्तविक जनसंख्या का आकलन क्यों नहीं होने दिया जा रहा? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर उनकी आबादी वाकई 10% से अधिक नहीं है, तो उन्हें 10% "सुदामा कोटा" कैसे दिया जा सकता है? वहीं दूसरी ओर, जातिगत जनगणना की मांग को नकारा जा रहा है, क्योंकि इससे वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक असमानता की सच्चाई उजागर हो सकती है। जातिगत जनगणना से यह साफ हो जाएगा कि कौन सी जातियां हाशिये पर हैं और किन्हें वास्तव में समर्थन और संरक्षण की जरूरत है। लेकिन इन आंकड़ों को दबाने की कोशिश इस डर से की जाती है कि सच्चाई बाहर आ गई, तो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की असमानता और पक्षपात उजागर हो जाएगा। यह पूरी रणनीति सामाजिक न्याय और समानता के आदर्शों के खिलाफ है। गरीबों को जाति के आधार पर भेदभाव करना और उच्च जातियों के गरीबों को अलग से आरक्षण देना, जबकि अन्य वर्गों के गरीब इससे वंचित रहें, एक गहरी असमानता को जन्म देता है। "सुदामा कोटा" का यह प्रावधान सामाजिक न्याय के आदर्शों का मजाक बनाता है। अगर उच्च जातियों की आबादी 10% से अधिक नहीं है, तो जातिगत जनगणना से डरने का क्या कारण है? असल में, यह डर इस सच्चाई को दबाने की कोशिश है कि आरक्षण और अन्य नीतियों में असमानता बरती जा रही है। आज जरूरत है कि "सुदामा कोटा" की सच्चाई को समझा जाए और इसे चुनौती दी जाए, ताकि वास्तविक समानता और न्याय की स्थापना हो सके।

Tribal Army

12,256 views • 1 year ago

अंकिता भंडारी की हत्या कोई “दुर्घटना” नहीं थी, और न ही यह किसी एक व्यक्ति की विकृति का मामला था। यह सत्ता-संरक्षित दरिंदगी का उदाहरण है, जहाँ एक बेटी ने झुकने से इनकार किया और उसे उसकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। आज जब BJP के ही पूर्व विधायक सुरेश राठौर का ऑडियो सार्वजनिक होता है, तो सरकार द्वारा गढ़ी गई सारी “कहानी” बिखर जाती है। यह ऑडियो विपक्ष का बयान नहीं है, यह सत्ता के अंदर से निकली स्वीकारोक्ति है। इसमें साफ़ संकेत है कि अंकिता पर एक प्रभावशाली, शीर्ष राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला जा रहा था। सवाल सिर्फ़ “कौन” का नहीं है। सवाल यह है कि एक साधारण रिसेप्शनिस्ट लड़की को VIP मनोरंजन की वस्तु मानने वाली यह सत्ता किस मानसिकता से चल रही है? जिस रात अंकिता ने इनकार किया, उसी रात उसका भविष्य नहीं, उसका अस्तित्व मिटा दिया गया। और उसके बाद जो हुआ, वह न्याय नहीं था, वह अपराध के सबूतों का विध्वंस था। घटना स्थल पर बुलडोज़र चलाना, कमरे को तोड़ देना, बिस्तर जलाने की कोशिश करना, यह सब किस कानून के तहत किया गया? अगर अपराधी निर्दोष थे, तो सबूतों से डर किस बात का था? उत्तराखंड में बुलडोज़र न्याय की बात करने वाली BJP सरकार को तब याद नहीं आया कि वही बुलडोज़र एक बेटी की आख़िरी उम्मीद को रौंद रहा है। आज खुद BJP के पूर्व विधायक की पत्नी यह दावा कर रही हैं कि जिस तथाकथित “VIP गेस्ट” को सर्विस देने से मना करने पर अंकिता की हत्या की गई, वह कोई और नहीं बल्कि पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी था। यह आरोप मामूली नहीं है, यह सीधे सत्ता के शीर्ष पर बैठी नैतिक सड़ांध को उजागर करता है। और याद रखिए, उसी रिसॉर्ट के उसी कमरे में उस रात वही व्यक्ति ठहरा हुआ था। यह संयोग नहीं है। यह एक संगठित अपराध और संगठित संरक्षण की ओर इशारा है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाली सत्ता ने यह तो नहीं बताया कि जब बेटी ने अपनी अस्मिता बचाने की कोशिश की, तो सरकार किसके साथ खड़ी थी? बेटियों की सुरक्षा भाषणों से नहीं होती, नीयत से होती है। और BJP की नीयत बार-बार उजागर हुई है, कभी पहलवान बेटियाँ, कभी मणिपुर की महिलाएँ, और अब उत्तराखंड की अंकिता। यह कोई अपवाद नहीं है, यह एक पैटर्न है। जो लोग धर्म, मर्यादा और संस्कृति की ठेकेदारी करते हैं, उनके राज में बेटियाँ सबसे ज़्यादा असुरक्षित क्यों हैं? क्यों हर बार सत्ता का चेहरा अपराधी की ढाल बन जाता है? सच यही है, यह पार्टी सत्ता को सेवा नहीं, भोग समझती है। और स्त्री को सम्मान नहीं, उपभोग की वस्तु। यही BJP का असली चरित्र है, ऊपर से प्रवचन, अंदर से विकृति। ज़ुबान पर राम, और मन में आसाराम। अंकिता को न्याय आज भी अधूरा है। और जब तक सच सामने नहीं आएगा, यह देश चुप नहीं बैठेगा, क्योंकि सत्ता के सामने झुकना नहीं, सवाल पूछना ही लोकतंत्र है। #JusticeForAnkitaBhandaari #ankitabhandari

Alok Sharma

50,415 views • 8 months ago