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"BJP हिंदुत्व की पिच पर खेलती थी, लेकिन किसी ने इन्हें सलाह दी कि जातिवाद पर खेलो। लेकिन यह राहुल की पिच है। भाजपा ने अपनी कब्र अपने आप ही खोद ली..." Abhay Kumar Dubey लोग अभी तक यह मान रहे हैं कि यह UGC के कारण हुआ है,...

43,415 views • 7 months ago •via X (Twitter)

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🛕 सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी ने खुद को बताया था गैर-हिंदू। राहुल गांधी की गैर-हिंदू की तरह एंट्री की गई है। एक बार फिर से बता दें, इस वक्त की यह बड़ी खबर है। राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर जाने पर विवाद हो गया है। सोमनाथ के रजिस्टर में राहुल ने खुद को गैर-हिंदू लिखा है। सोमनाथ मंदिर में एक नियम है कि जो गैर-हिंदू होते हैं, वहां उनको प्रवेश करने से पहले इजाजत लेनी पड़ती है। तो उसी के तहत राहुल गांधी और अहमद पटेल, इन दोनों ने ही सिग्नेचर किए। इन दोनों ने अपने-अपने को डिक्लेयर किया कि वे नॉन-हिंदू हैं और उसके बाद उनको इजाजत दी गई। उसके बाद उन्होंने दर्शन किए हैं। इसकी तस्दीक भी उन सिग्नेचर्स से की जा रही है जो आप देख रहे हैं। बाकायदा यहां के पुजारियों ने कन्फर्म किया कि यह तस्वीर और यह जो सिग्नेचर आए हैं, ये असली हैं। उन्होंने समझाया कि हां, ये सिग्नेचर सही हैं और चूंकि नॉन-हिंदू हैं, इसलिए उन्होंने ये सिग्नेचर किए हैं। उसके बाद जाकर उन्होंने दर्शन किए हैं और विजिटर बुक में बाकायदा एंट्री भी की। पूरे मामले को लेकर अब यह जो विवाद उठा है, जैसे कि मंदिर की विजिटर बुक में आपने बताया कि राहुल की गैर-हिंदू की तरह एंट्री का यह पूरा मामला है, इस बारे में क्या रिएक्शन अभी तक सामने आए हैं? लेकिन रिएक्शन सीधा सा यह है कि बीजेपी से जुड़े लोग इन सिग्नेचर्स को तमाम जगहों पर पहुंचा रहे हैं। अलग-अलग मीडिया ग्रुप्स, समर्थकों के पास। उनका यह कहना है कि राहुल गांधी इस बात को छुपाते क्यों हैं? 🤔 अगर वे नॉन-हिंदू हैं, तो सोमनाथ मंदिर सभी के लिए खुला है, लेकिन एक नियम यह है कि गैर-हिंदू को इजाजत लेनी पड़ती है। और यह नियम वहां ट्रस्ट ने सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते लागू किया था। कुछ साल पहले से ही वे यह सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी से जुड़े लोग पूछ रहे हैं कि राहुल यह बात छुपा क्यों रहे हैं? यह बात उनको जाहिर करनी चाहिए थी। और चूंकि चुनाव का मौका है, इसलिए छोटी-छोटी बातों को भी तूल दिया जा रहा है, एक नए तरीके से। तो अब यह भी एक बड़ा विवाद का मसला बनता जा रहा है। 🗳️ राहुल के मंदिर जाने को लेकर तो पहले से ही विवाद कई दिनों से चला आ रहा है। बिल्कुल देखिए, वह एक अलग मसला है। वहां पर तो सवाल उठ रहे थे कि राहुल गांधी "सॉफ्ट हिंदुत्व" की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन अब यह बात सामने आ गई कि जो बात छिपाई जा रही थी, सोमनाथ जाकर वह बात साबित हो गई। एक बात और है, जो आज से पहले भी लोग बताते आए थे, लेकिन ट्रस्ट का यह नियम नहीं था। यह नियम अभी दो-तीन साल पहले लागू किया गया है, सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते। 🙏 अब सिर्फ शुक्रिया। फिलहाल पूरी जानकारी के लिए।

अखण्ड भारत संकल्प

12,412 views • 3 months ago

अद्भुत घटनाक्रम 😅 #लखनऊ में इंकम टैक्स के जॉइंट डायरेक्टर का हाई वोल्टेज ड्रामा IRS की स्पोर्ट्स लीग के सेमीफाइनल में लखनऊ की टीम से नहीं खिलाया गया तो JD सहाब पिच पर ही लेट गए वीडियो में दिख रहे उनसे भी सीनियर एडिशनल कमिश्नर हटने की गुजारिश करते रहे, लेकिन डायरेक्टर साहब नहीं माने और सीनियर अधिकारियों के बारे में अंट शंट बोलते रहे जब 1 घंटे तक मैच शुरू नहीं हो पाया तो जोन के सबसे बड़े अधिकारी प्रिंसिपल कमिश्नर ने फोन पर बात की, लेकिन ज्वाइन डायरेक्टर साहब उन्हीं को ज्ञान देने लगे फिर जब प्रिंसिपल कमिश्नर ने चार्ज शीट फाइल करने की चेतावनी दी तो आखिरकार JD साहब हटे और मैच शुरू हुआ दिलचस्प बात यह है कि यहां कुछ ही देर पहले ओपनिंग सेरेमनी में Mos Finance खुद शामिल हुए थे घटना फरवरी की है, विभागीय जांच शुरू हो चुकी है #IncomeTax #IRS

Simer Chawla

14,169 views • 1 year ago

सुना कुछ लोगों ने चुनाव आयोग की धांधली का पर्दाफाश करने पर राहुल गांधी की निंदा की है 👉कौन हैं यह लोग? 140 करोड़ के देश में यह 272 लोग कितने प्रतिष्ठित हैं यह तो नहीं पता - लेकिन BJP रोज़गार एक्सचेंज में आवेदनकर्ता ज़रूर हैं! 👉वरना वोट चोरी के इतने सारे सबूत देखकर भी आँखों पर पट्टी बाँधना और उल्टी बात करने वालों में कोई भी पूर्व चुनाव आयुक्त क्यों नहीं है? पुलिस वाले क़ानून व्यवस्था पर बात नहीं कर रहे, पूर्व उच्चायुक्त फेल्ड विदेश नीति पर नहीं बोल रहे हैं, RAW वाले पहलगाम से लेकर दिल्ली बम ब्लास्ट की विफल intelligence पर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन सब के सब चुनाव आयोग की पैरवी कर रहे हैं ▪️इन लोगों में से कितनों के अंदर हिम्मत है कि फ़र्ज़ी पते, फेक आईडी, फ़र्ज़ी फोटो, एक छोटे से घर में सैकड़ों लोगों के रजिस्टर होने पर सवाल उठायें? ▪️इनमें से कितनों की हिम्मत है यह पूछने की कि चुनाव के बीचोंबीच सरकार पैसे बांटती रही और चुनाव आयोग मूक दर्शक क्यों बना रहा? ▪️इनमें से कितनों की हिम्मत है कि चुनाव आयोग की संदिग्ध भूमिका पर सवाल पूछ सकें? ▪️इनमें से कितनों की हिम्मत है कि BJP के नेताओं के अलग अलग जगहों पर एक से ज़्यादा वोट डालने पर सवाल उठायें? ▪️असलियत तो यह है कि 2014 के पहले ‘ज़िम्मेदार प्रतिष्ठित’ नागरिक चुनी हुई सरकार से सवाल पूछते थे, आख़िर जिसके पास सत्ता संसाधन संस्थाएं हैं - सवाल भी तो उन्हीं से होगा. लेकिन अब सवालों के घेरे में वो व्यक्ति है जो इस देश के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ने के ख़िलाफ़ मज़बूती से लड़ रहा है 👉और मीडिया वाले चरणचुम्बकों का तो क्या ही कहना?! यह तो नरेंद्र मोदी के दिन को रात कहने पर सियार की तरह हुआँ हुआँ करना शुरू कर देते हैं

Supriya Shrinate

167,799 views • 10 months ago

इस मंच पर तक़रीर करने वाले ‘मुक़र्रिर’ को देखिए, सुनिए! फिर यह भी देखिए कि जब यह तक़रीर की जा रही थी तब ‘मुक़र्रिर’ क्या था! और आज क्या है। जिस शख्स को मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी, उस शख्स के परिवार पर ग़म का पहाड़ टूटा है, और यह एक बार नहीं कई बार हुआ है। सवा तीन साल पहले उस परिवार में 24 घंटे के भीतर तीन जनाज़े उठे, जिसमें एक जनाजा उस शख्स का भी था, जिसे इस मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी। बाकी दो जनाज़े उस शख्स के भाई और बेटे के थे। लेकिन वह मुक़र्रिर उस वक्त भी उन जनाजों पर सार्वजनिक तौर पर शोक प्रकट भी नहीं कर पाया था। बीते रोज़ उसी परिवार का एक और सदस्य सुपुर्द-ए-खाक हुआ है। लेकिन मजाल भला कि यह मुक़र्रिर जो अब ‘सांसद’ भी है वह उस दुर्घटना पर सार्वजनिक तौर पर ग़म का इज़हार भी कर पाता। जब कांधों पर चढ़कर ‘बड़ा’ बनना था, तब भरे मंच से उस शख्स को ‘बाप’ बता दिया था। और जब बारी कांधा देने की आई तो ‘बेख़बरी’ की चादर तान ली। क्यों? क्या यह ‘डर’ था कि इससे राजनीतिक ‘तरक्की’ रुक सकती? माना हालात ‘अच्छे’ नहीं हैं, लेकिन इतने भी बुरे नहीं हैं कि किसी ‘अपने’ की मौत पर ग़म का इज़हार भी ना कर सकें।

Wasim Akram Tyagi

43,951 views • 1 month ago

कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को जो अपने बारे में कहना चाहिए, वो भाजपा के बारे में कह रहे हैं। कांग्रेस पार्टी वो भस्मासुर है, जिसके संपर्क में जो भी पार्टी आती है, वो भस्म हो जाती है। वो हम पर आरोप लगाते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी को यह मालूम होना चाहिए कि TMC कांग्रेस से अलग हुई है और NCP भी कांग्रेस से अलग हुई है। लेकिन जो कांग्रेस बनी है, या जो अब कांग्रेस में आए हैं, वो कांग्रेस से ही अलग हुए हैं। तोड़ने और दूसरी पार्टियों को भस्म करने का काम कांग्रेस ही करती है। वो जो भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं कि शिवसेना, TMC और NCP को भाजपा ने तोड़ा है, तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि ये TMC और NCP कांग्रेस से अलग होकर ही बनी हैं। भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है, यह एक परिवार की पार्टी नहीं है। आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी है। यह पार्टी किसी को तोड़कर नहीं बनी है। हमने कांग्रेस की तरह गंदा खेल खेलकर यह पार्टी नहीं बनाई है। यह पार्टी काम करके आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी है। - श्री Kiren Rijiju

BJP

53,296 views • 1 day ago

यह कपिल सिब्बल है मनमोहन सिंह के समय में ताकतवर कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे यह विस्तार से वक्फ बोर्ड के बारे में बता रहे हैं और साथ में यह भी बता रहे हैं कि कैसे कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड को इतना मजबूत बना दिया कि वक्फ बोर्ड को कोई हिला नहीं सकता वैसे यह जो बता रहे हैं कि मुस्लिम लोग अपनी संपत्ति अल्लाह के नाम दान करते हैं जब भारत का बंटवारा हुआ तब पाकिस्तान से जितने सिख और हिंदू और जैन भारत आए उनकी प्रॉपर्टी वहां के मुसलमानो ने ले ली भारत से जितने भी मुस्लिम पाकिस्तान गए ज्यादातर ने सादे कागज पर लिख दिया कि मैं अपनी संपत्ति वक्फ कर दी और कईयों ने तो कहीं लिखा भी नहीं फिर भी वह संपत्ति वक्फ बोर्ड की हो गई और उस वक्फ संपत्ति का इस्तेमाल केवल मुस्लिम कर सकता है यानी की भारत और पाकिस्तान का बंटवारा जो इतिहास का सबसे बड़ा इंसानों का डिस्प्लेसमेंट है करीब 2 करोड लोग इधर से उधर गए तो दोनों जगह पर संपत्ति का मजा सिर्फ मुसलमान ने लिया आज वक्फ बोर्ड का विवाद सबसे ज्यादा उन जगहों पर है जहां नवाबों का राज हुआ करता था जैसे कर्नाटक आदि और वैसे भी भारत 1000 सालों तक मुगल शासन के अंतर्गत रहा यह लोग केवल ऐसे ही कह देते हैं कि फलाने बादशाह ने यह मकान वक्फ कर दिया था या फलाने बादशाह ने यह जमीन वक्फ को दिया था या फलाने बादशाह ने यह पूरा गांव वक्फ कर दिया था और इस बेसिस पर वक्फ बोर्ड अपना दावा ठोक देता है अभी ताजा मामला अहमदाबाद का है अहमदाबाद नगर निगम के 32 प्लॉट पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है जिनकी कीमत 5400 करोड रुपए हैं दावा यह है अहमदाबाद का सुल्तान अहमद शाह बेगड़ा ने यह जमीन वक्फ कर दिया था अब आप सोचिए इस तरह से भारत में कांग्रेस के कुकर्म की वजह से किसी भी हिंदू का ना जमीन बचेगा ना खेत बचेगा ना मकान बचेगा कपिल सिब्बल यह भी विस्तार से बता रहे हैं कि कैसे हमने यानी कांग्रेस ने 1995 में बेहद कड़ा कानून लाकर वक्फ बोर्ड को इतना मजबूत कर दिया कि अब दुनिया की कोई ताकत इसे हिला नहीं सकती

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

153,618 views • 1 year ago

भोपाल निवास पर ब्यावरा के बेटे सुरेंद्र सिंह चौधरी ‘बिट्टू तबाही’ से आत्मीय भेंट की। बिट्टू ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से सिर्फ अजनार नदी की सफाई ही नहीं की, बल्कि अपने प्रयासों से समाज को यह संदेश भी दिया है कि बदलाव के लिए बड़ी भीड़ नहीं, एक सच्ची पहल ही काफी है। आपकी यह पहल जल गंगा संवर्धन अभियान की भावना को भी मजबूत करती है, जिसका मूल उद्देश्य जनभागीदारी के साथ जल स्रोतों का संरक्षण एवं उनका पुनर्जीवन है। मुझे विश्वास है कि अजनार नदी से शुरू हुआ आपका यह संकल्प प्रदेश के युवाओं को अपने आसपास के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा। पूरे प्रदेश को आप पर गर्व है।

Dr Mohan Yadav

971,216 views • 14 days ago

शादियों का सीजन शुरू हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हर जगह बारातों की चहल-पहल और शोरगुल दिख रहा है। गांवों और पहाड़ों की बात करें तो वहां की शादियों का मज़ा ही अलग होता है, सादगी भी है और अपनी मिट्टी की खुशबू भी। लेकिन एक चीज़ आज तक नहीं बदली है। बारातियों का बस की छत पर बैठकर जाना। यह चलन कब शुरू हुआ, शायद किसी को ठीक से याद नहीं होगा। हो सकता है पहले बच्चों ने अपने बड़े या नौजवानों को ऐसा करते देखा हो और वही आदत आगे बढ़ गई हो। पर हैरानी की बात यह है कि आज के समय में भी यह ट्रेंड खत्म नहीं हो रहा, बल्कि कई जगहों पर और बढ़ रहा है। सुरक्षा की नजर से यह कितना खतरनाक है, यह सब जानते हैं। फिर भी बारात का जोश कई बार समझदारी पर भारी पड़ जाता है। शादी की खुशी ज़रूर मनाएं, लेकिन अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान भी रखें। खुशी वही अच्छी लगती है जो सुरक्षित घर वापस लेकर जाए।

Kumaon Jagran

25,394 views • 10 months ago

Breaking News 🔥 E20 पेट्रोल से मोदी सरकार पीछे हटने लगी है... आप जिद से परेशान कर सकते हो, लेकिन अंजाम बुरा भी भुगतना पड़ जाता है। रात-दिन गाड़ियों के खराब होने की शिकायत इतनी ज्यादा है कि जनता ने सरकार के कानों को फोड़ दिया है। बिना किसी तैयारी के नितिन गडकरी ने यह थोपा था। जबकि यह गडकरी के मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का मामला था ही नहीं। अब बड़ा हंगामा हुआ तो पेट्रोलियम मंत्री की नींद टूटी। इतनी जल्दबाजी की गई कि सरकार दो सालों में इथेनोल को ही फॉसिल फ्यूल का विकल्प बना देना चाहती थी। पहले मैकेनिकों, फिर ऑटोमोबाइल कंपनियों के हाथ खड़े करते ही सरकार के कानों पर जूँ रेंगी। यह आइडिया अच्छा हो सकता था अगर अच्छा होमवर्क किया होता, मगर आत्ममुग्धता से पीड़ित मोदी सरकार की डिक्शनरी में यह शब्द है ही नहीं। #E20Fuel #FuelCrisis #NitinGadkari

𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣

28,259 views • 2 months ago