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Ana Sayfaya Dön

#BREAKING | भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल US संसद में पास, रूस से तेल खरीदने वालों पर US लगाएगा भारी टैक्स Aparna Moazzam | #USHouse #RussiaSanctions #Russia #DonaldTrump #America #Tariffs #ABPNews

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Subhash Kanojia18 gün önce

@aparna_journo तेल रूस से खरीदेंगे, टैरिफ अमेरिका लगाएगा, और असर भारतीय कारोबार पर पड़ेगा? जवाबदेही किसकी होगी? #RussiaOil #Tariff #BJP #IndianExports

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KHUSBOO MISHRA18 gün önce

@aparna_journo To my nirbhar rho n us pr??

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Adv. Bharat Boss (तटस्थ)18 gün önce

@aparna_journo इसके क्या नतीजे निकलेंगे वो भी समझाओ @ABPNews

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Anjali Chelawat18 gün önce

@aparna_journo Opposition starts blame game card! You are surrender- Not buying Russian oil- WE buy-price fluctuations in petrol stable-untill next war-Inflation Your friendship is over -Tariffs -Export people panic starts- Inflation Me thinking... We will pay high price in either case

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Amit Bhandari18 gün önce

@aparna_journo Birthday gift to modiji and taxes on bharatwasi

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Md Hakim18 gün önce

@aparna_journo Google or meta India me bahot se dhandhli karte hai, Meta ne to 1000s of crore jama kar rahe hai sellers ke, prepaid ad account deactivate kar deta hai or refund bhi nahi karta. Inke upar case laga do amrika ki buddhi khulegi

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sanjay sharma18 gün önce

@aparna_journo मोदी जी के जन्मदिन पे मोदी जी के मित्र अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने तोहफा दिया RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे के बाद

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Noble🇮🇳18 gün önce

@aparna_journo With gulf oil blocked due to hormuz..india buys more russian oil coz its cheap. But Us wants us to not buy russian oil as it gives movey for ukraine war. Truth is US wants to sell costlier Venezuelan oil to fill its own pockets not to stop ukraine russia war.

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Priyam Saxena18 gün önce

@aparna_journo मोदी की दोस्ती किसी काम नही आई मोदी ने देश डुबो दिया

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Parag Bedmutha18 gün önce

@aparna_journo Bday gift

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Jai Tripathi18 gün önce

@aparna_journo Wating for xi trip to usa

Benzer Videolar

अमेरिकी कांग्रेस ने रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंधों वाला बिल पास कर दिया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह बिल 262-159 वोट से पास हुआ, जबकि सीनेट इसे पिछले महीने 86-11 वोट से पहले ही पारित कर चुकी थी। अब राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। यह बिल रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से बड़ी मात्रा में खरीद करते हैं, उनके लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है। बिल में ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को भी और बढ़ाया गया है। भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है क्योंकि रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अब अमेरिकी दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि टैरिफ अपने-आप लागू नहीं होगा; बिल राष्ट्रपति को परिस्थितियों के हिसाब से ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है।

Ankit Kumar Avasthi

49,184 görüntüleme • 18 gün önce

अभी दो-तीन दिन पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अचानक निधन हुआ था। वह भारत-विरोधी रुख और विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने एक विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। अब उसी विधेयक का संशोधित संस्करण अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया गया है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस बिल लिंडसे ग्राहम की राजनीतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत किया है। इस बिल में भारत और चीन सहित पांच देशों पर, जो रूस से तेल खरीदते हैं, 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। तर्क यह दिया गया है कि रूस से तेल खरीदकर ये देश उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था को वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि रूस से गैस खरीदने वाले 15 यूरोपीय देशों को इस प्रस्तावित टैरिफ से छूट दी गई है।

Ankit Kumar Avasthi

100,071 görüntüleme • 2 ay önce

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया आज कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी और BJP के महामूर्ख कर रहे हैं यह लोग 18% ट्रेड डील पर जश्न मना रहे हैं - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सिर्फ़ विशुद्ध मूर्ख ख़ुश हो सकते हैं. यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए ख़राब है कि इसे एक देशद्रोही ही सही ठहरा सकता है इसीलिए BJP वालों को जश्न मनाते देख कोई आश्चर्य नहीं हुआ - महामूर्खों और राष्ट्र-विरोधियो का झुंड जो ठहरे खैर इस ट्रेड डील के मुताबिक • अमेरिका भारतीय export पर 18% टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिकी सामान पर zero मतलब शून्य टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत अमेरिका पर 30-100% तक टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पादों और कोयला ख़रीदेगा और अन्य चीज़ों की खरीद बढ़ाएगा • भारत रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा, इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल ख़रीदेगा अब कुछ ज़रूरी सवाल उठते हैं👇 👉सीजफायर की तरह, हमारी ट्रेड डील की घोषणा ट्रम्प ने पहले क्यों की? 👉 हमारे ऊपर औसतन 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% लगेगा. यह भारत की जीत कैसे है? 👉 जिन अमेरिकी चीज़ों पर भारत अभी तक 30-100% टैरिफ लगाता था उस पर ज़ीरो टैरिफ लगाना हमारी जीत कैसे है? 👉भारत ने अमेरिका के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई लगती है - इससे घरेलू भारतीय उद्योग और व्यापारियों की सुरक्षा कैसे होगी? 👉ज़्यादा अमेरिकी सामान खरीदने से 'मेक इन इंडिया' और हमारी मैनुफैक्चरिंग का क्या होगा? 👉जिस तरह से इस डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने ख़ुशी जतायी है उससे बिल्कुल साफ़ है कि अमेरिकी किसानों के तो बल्ले बल्ले हैं लेकिन हमारे किसानों पर इस तरह का हमला आख़िर कैसे होने के लिए आप राज़ी हुए मोदी जी? 👉अमेरिका कौन होता है यह निर्णय करने वाला हम रूस से तेल ख़रीदेंगे या नहीं? 👉ईरान के चाबहार पोर्ट में हम रहेंगे या नहीं? 👉मोदी ने यह देशविरोधी डील इतना नतमस्तक हो कर क्यों की है?

Supriya Shrinate

71,020 görüntüleme • 8 ay önce

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया... आज कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी और BJP के लोग कर रहे हैं। यह लोग 18% ट्रेड डील पर जश्न मना रहे हैं - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सिर्फ़ विशुद्ध मूर्ख ख़ुश हो सकते हैं। यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए ख़राब है कि इसे एक देशद्रोही ही सही ठहरा सकता है। इसीलिए BJP वालों को जश्न मनाते देख कोई आश्चर्य नहीं हुआ- वो राष्ट्र-विरोधियों का झुंड जो ठहरे। खैर इस ट्रेड डील के मुताबिक 👇 • अमेरिका भारतीय export पर 18% टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिकी सामान पर zero मतलब शून्य टैरिफ लगाएगा- जबकि अभी तक भारत अमेरिका पर 30-100% तक टैरिफ लगाता था • भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पादों और कोयला ख़रीदेगा और अन्य चीज़ों की खरीद बढ़ाएगा • भारत, रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा। इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल ख़रीदेगा अब कुछ ज़रूरी सवाल उठते हैं 👇 👉 सीजफायर की तरह, हमारी ट्रेड डील की घोषणा ट्रम्प ने पहले क्यों की? 👉 हमारे ऊपर औसतन 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% लगेगा। यह भारत की जीत कैसे है? 👉 जिन अमेरिकी चीज़ों पर भारत अभी तक 30-100% टैरिफ लगाता था, उस पर ज़ीरो टैरिफ लगाना हमारी जीत कैसे है? 👉 भारत ने अमेरिका के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई लगती है - इससे घरेलू भारतीय उद्योग और व्यापारियों की सुरक्षा कैसे होगी? 👉 ज़्यादा अमेरिकी सामान खरीदने से 'मेक इन इंडिया' और हमारी मैनुफैक्चरिंग का क्या होगा? 👉 जिस तरह से इस डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने ख़ुशी जताई है, उससे बिल्कुल साफ़ है कि अमेरिकी किसानों की तो बल्ले-बल्ले है, लेकिन हमारे किसानों पर इस तरह के हमले के लिए आप राज़ी कैसे हुए मोदी जी? 👉 अमेरिका कौन होता है, यह निर्णय करने वाला कि हम रूस से तेल ख़रीदेंगे या नहीं? 👉 ईरान के चाबहार पोर्ट में हम रहेंगे या नहीं? 👉 मोदी ने यह देशविरोधी डील इतना नतमस्तक होकर क्यों की है? : AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी

Congress

27,782 görüntüleme • 8 ay önce

ट्रेड डील में भारत की ऊर्जा सुरक्षा से खिलवाड़ ⦿ 6 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पेनल्टी टैरिफ के आदेश में लिखा- भारत ने अमेरिका से वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा ⦿ ट्रंप ने ये भी लिखा- अमेरिका ये निगरानी करेगा कि भारत प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर, रूस से कच्चा तेल न खरीदे। अगर ऐसा हुआ तो पेनल्टी दोबारा लगा दी जाएगी ⦿ 9 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा जारी फैक्ट शीट में भी भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल न खरीदने का वादा करने की बात दोहराई गई ⦿ 14 फरवरी, 2026 को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत ने रूस से कच्चा तेल न खरीदने का सशर्त वादा किया है ⦿ अमेरिका मई, 2024 में पाबंदी लगा चुका है कि भारत, ईरान से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकता, जिसे मोदी सरकार ने स्वीकार कर लिया है ⦿ भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, जो हमारी ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा है। हम 40% कच्चा तेल रूस और 11% कच्चा तेल ईरान से आयात करते थे। यानी कुल जरूरत का लगभग 51% ⦿ फरवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच भारत ने रूस से 15.24 लाख करोड़ रुपए का कच्चा तेल आयात किया और सस्ती दरों के कारण लगभग 1.81 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई अब ट्रंप के कहने पर मोदी सरकार अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगी, लेकिन रेट सस्ता नहीं होगा। ऐसे में मेरा सीधा सवाल है- क्या ये भारत की आत्मनिर्भरता के साथ खिलवाड़ नहीं है? : कांग्रेस महासचिव Randeep Singh Surjewala जी 📍 दिल्ली

Congress

11,871 görüntüleme • 7 ay önce

“जो तुमको हो पसंद, वही बात कहेंगे तुम दिन को कहो रात, तो रात कहेंगे” यही गाना आजकल नरेंद्र मोदी ट्रम्प के लिए गा रहे हैं ▪️अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर दोनों सरकारों का joint statement आ गया है और इसमें ठीक वही बात कही गई है, जो ट्रंप ने आज से चार दिन पहले अपने ट्विटर पर कही थी - जिसके ख़िलाफ़ भारत सरकार ने कोई प्रतिकार नहीं दी थी. क्योंकि मोदी सरकार ने तो ट्रम्प के आगे दण्डवत प्रणाम करके पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर दिया है ▪️यह एक ज़बरदस्त, शानदार, लाजवाब ट्रेड डील है - लेकिन अमेरिका के लिए. ▪️भारत के किसानों, छोटे और बड़े व्यापारों, यहाँ पर होने वाले निवेश, हमारे वैश्विक ट्रेड की तो आहुति चढ़ाई गई है. मोदी ने अमेरिका के हाथों देश बेच दिया है. • बयान के मुताबिक- अमेरिका हमसे 18% टैरिफ वसूलेगा, जो पहले 3% से कम होता था. भारत अमेरिका से आने वाले सामानों पर से टैरिफ हटाएगा. • भारत के कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक कैमिकल, घर की सजावट के सामान, कारीगर उत्पाद, मशीनरी सब पर 18% टैरिफ लगेगा और इसका बहुत नुकसान भारत को होगा. • अमेरिका से आने वाले खेती से जुड़े बड़ी संख्या में सामानों पर टैरिफ नहीं लगेगा. अमेरिका के फल, dried distillers’ grains (DDGs), पशु चारा के लिए लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट पर टैरिफ हट जाएगा. • भारत अमेरिकी फूड और खेती के उत्पादों पर से नॉन-टैरिफ बैरियर को भी हटाएगा. मतलब भारत अपने बाजार को पूरी तरह अमेरिका के लिए खोल रहा है. • इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले खाने पीने के सामान पर भी टैरिफ हट जाएगा. • मोदी ने ट्रंप से ये भी समझौता किया है कि भारत अगले 5 साल में 500 बिलियन डॉलर का सामान अमेरिका से खरीदेगा, जैसे- ऊर्जा (तेल-गैस), विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट, खेती का सामान और कोयला. • रूस से तेल ना खरीदने की शर्त भी मानी गई है. रूस से तेल ख़रीदने पर जो 25% टैरिफ लगा था उसको हटाते हुए ट्रंप ने धमकाते हुए कहा है- हम भारत पर निगरानी रखेंगे. अगर ये लगा कि भारत फिर से रूस से तेल खरीद रहा है तो हम तुरंत टैरिफ ठोक देंगे. 👉मोदी ने भारत के आत्मसम्मान को मटियामेट किया है. यह साफ़ है कि अमेरिका में अडानी पर कसते कानूनी शिकंजे और ख़ुद अपना नाम Epstine Files में आ जाने के बाद मोदी जी भयंकर दबाव में हैं - और कुछ भी करके बचना चाहते हैं - फिर वो राष्ट्रहित का समझौता ही क्यों ना हो 👉👉एक compromised प्रधानमंत्री ने एक compromised डील करके देश का भारी नुक़सान किया है

Supriya Shrinate

67,208 görüntüleme • 8 ay önce

👉 ट्रेड डील पर मोदी इतनी जल्दी में क्यों थे? ▪️20 फरवरी 2026, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के ‘reciprocal tariffs’ पर रोक लगा दी ▪️इसके जवाब में ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का हवाला देकर सभी देशों से आयात पर 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगाया 👉 भारत पर प्रभाव ▪️अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भारत पर 10% टैरिफ दर पड़ेगा ▪️फरवरी की शुरुआत में अमेरिका और भारत ने व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसमें भारतीय सामानों पर टैरिफ 18% तय किया गया था ▪️लेकिन भारत ने तमाम अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 0% करने और 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने का वादा किया ▪️भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद करने का भी वचन दिया 🔺व्यापार समझौते के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई, सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर का इंतज़ार क्यों नहीं किया? 🔺व्यापार समझौता महीनों से लंबित था, अचानक मोदी ने इसे क्यों आगे बढ़ाया और सिर्फ 30 मिनट की फोन कॉल पर सहमति क्यों दी? 🔺अमेरिका से इतने बड़े पैमाने पर आयात क्यों मंजूर किए, और उसके उत्पादों पर टैरिफ 0% क्यों किया? 🔺किसानों के हितों का बलिदान क्यों दिया? 🔺अपना सारा डेटा अमेरिका को थाली में रखकर क्यों परोसा? 🔺रूसी तेल न खरीदने का वादा कर एनर्जी सुरक्षा से समझौता क्यों किया? 🔺हम मूर्खता में 3% टैरिफ के 6 गुना बढ़कर 18% हो जाने पर जश्न क्यों मना रहे थे? 👉 इन सभी सवालों और अन्य सवालों का जवाब है ‘COMPROMISED प्रधानमंत्री’ - जो भारत के हितों के साथ समझौता करके बैठा है 👉 एपस्टीन फाइलों में PM और उनके मंत्रियों के नाम आने के बाद वो दबाव में झुक गए 👉 अमेरिका में अडानी के गले में फंदा कसने के बाद PM डर गए 👉 इसलिए उन्होंने भारत के हितों और हमारी गरिमा का बलिदान करते हुए एक बार भी नहीं सोचा : AICC- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी 📍 दिल्ली

Congress

37,247 görüntüleme • 7 ay önce

👉 ट्रेड डील पर मोदी इतनी जल्दी में क्यों थे? ▪️20 फरवरी 2026, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के ‘reciprocal tariffs’ पर रोक लगा दी ▪️इसके जवाब में ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का हवाला देकर सभी देशों से आयात पर 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगाया 👉 भारत पर प्रभाव ▪️अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भारत पर 10% टैरिफ दर पड़ेगा ▪️फरवरी की शुरुआत में अमेरिका और भारत ने व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसमें भारतीय सामानों पर टैरिफ 18% तय किया गया था ▪️लेकिन भारत ने तमाम अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 0% करने और 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने का वादा किया ▪️भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद करने का भी वचन दिया 🔺व्यापार समझौते के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई, सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर का इंतज़ार क्यों नहीं किया? 🔺व्यापार समझौता महीनों से लंबित था, अचानक मोदी ने इसे क्यों आगे बढ़ाया और सिर्फ 30 मिनट की फोन कॉल पर सहमति क्यों दी? 🔺अमेरिका से इतने बड़े पैमाने पर आयात क्यों मंजूर किए, और उसके उत्पादों पर टैरिफ 0% क्यों किया? 🔺किसानों के हितों का बलिदान क्यों दिया? 🔺अपना सारा डेटा अमेरिका को थाली में रखकर क्यों परोसा? 🔺रूसी तेल न खरीदने का वादा कर एनर्जी सुरक्षा से समझौता क्यों किया? 🔺हम मूर्खता में 3% टैरिफ के 6 गुना बढ़कर 18% हो जाने पर जश्न क्यों मना रहे थे? 👉इन सभी सवालों और अन्य सवालों का जवाब है ‘COMPROMISED प्रधानमंत्री’ - जो भारत के हितों के साथ समझौता करके बैठा है 👉एपस्टीन फाइलों में PM और उनके मंत्रियों के नाम आने के बाद वो दबाव में झुक गए 👉अमेरिका में अडानी के गले में फंदा कसने के बाद PM डर गए 👉इसलिए उन्होंने भारत के हितों और हमारी गरिमा का बलिदान करते हुए एक बार भी नहीं सोचा

Supriya Shrinate

64,268 görüntüleme • 7 ay önce

⚡रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव. 📍भारत ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 🗣️ Randhir Jaiswal ने कल हीं एक सवाल के जवाब में कहा था : "हमने अमेरिकी प्रशासन को स्पष्ट रूप से बताया है कि इस कदम का भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल इस विषय पर इससे अधिक कुछ नहीं कहना है।" 📍चीन ने भी अमेरिकी फैसले का विरोध किया था. ⚡लेकिन ट्रंप ने तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुई 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाले बिल पर हस्ताक्षर कर दिए। अब देखना ये है कि आगे इस कानून का उपयोग और दुरुपयोग ट्रम्प कैसे करते हैं।

Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार

17,240 görüntüleme • 16 gün önce