Video wird geladen...

Video konnte nicht geladen werden

Zur Startseite

15,029 Aufrufe • vor 2 Jahren •via X (Twitter)

0 Kommentare

Keine Kommentare verfügbar

Kommentare vom Original-Post werden hier angezeigt

Ähnliche Videos

Brishti Samaddar🔥🥵🍑
0:32

Sensitive content

Brishti Samaddar🔥🥵🍑

Mr.NITHYANANDA

52,123 Aufrufe • vor 3 Jahren

तो हमारी माँग यह थी कि आप जो है पद्धति जो है, जो अपनाई है आपने वो गलत अपनाई है। उससे कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि आप सबको मालूम होगा, आप तो मीडिया के लोग हैं, पहले भी एसईसीसी का एक सर्वे हुआ था। सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस, यूपीए गवर्नमेंट के वक्त में हुआ था और वो कास्ट सेंसस जो हुआ, तो 46 लाख जातियों के नाम आ गए, 46 लाख क्योंकि देश के अंदर तो जातियाँ जो केंद्र सरकार की और राज्यों की है, सब मिला के 4,200 हैं। तो 4,200 जातियाँ हैं, उनकी जनगणना करवाने की बात होनी चाहिए। उसकी बजाय उन्होंने करवा दिया कि जो जिसके घर पे गए, उसको कहते हैं ओपन एंडेड। जो आप जाओ, वो जो बोलेगा वो लिख दो खाली, स्पेलिंग कुछ भी हो। एग्जांपल के रूप में मेरी सरनेम गहलोत है, और मैं खुद भी ओबीसी से आता हूँ। अब गहलोत जो है, जनरल कास्ट के अंदर कई लोग लगाते हैं, गहलोत तो ओबीसी में भी है, गहलोत शेड्यूल कास्ट के अंदर भी है, गहलोत राजपूतों में भी है, जाटों के अंदर भी है। तो यह क्या हुआ कि गहलोत के सरनेम में जी-ई-एच-एल-ओ-टी लिखता हूँ। और कुछ लिखते हैं जी-ए-एच-एल-ओ-टी लिखते हैं, तो दो हो गई। भाई 46 लाख कैसे हो गई? जितनी जातियाँ हैं, उनके गोत्र हैं, उनकी स्पेलिंग है, कुछ भी हो लिख दो खाली आप तो। जब जाएगा जनगणना वाला, जो जाति बोल गया, स्पेलिंग बोल गया, वो लिखा जाएगा। तो 46 लाख हो गए थे। तो सुप्रीम कोर्ट के अंदर इसी भारत सरकार ने, एनडीए गवर्नमेंट ने उनको कहना पड़ा कि यह जो सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मंत्रालय ने हलफनामा दिया कि यह कास्ट सेंसस के लिए तो ड्रॉप-डाउन जो सिस्टम है, जिसमें जाति का वर्ग बन जाता है। उन जातियों में भी आपको पहले फिक्स रहती हैं 4,200 जातियाँ। उसमें पूछा जाएगा हर राज्य के अंदर अलग-अलग ओबीसी कमीशन बना हुआ है, जाति फिक्स है ओबीसी। पूछा जाएगा जैसे शेड्यूल कास्ट, शेड्यूल ट्राइब में होता है, वहाँ यह प्रॉब्लम नहीं आती, वहाँ भी गोत्र बहुत होते हैं। उसी सिस्टम को आप यह भी करवाओ, यह कांग्रेस की माँग है, राहुल गांधी जी की माँग है, खड़गे साहब की माँग है, हम सब की माँग है। उसके बगैर जो यह करवा रहे हैं, उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा करवाने के बावजूद भी, गलतफ़हमी और अलग से होगी। हमारी माँग है कि जो प्रश्नावली बनाई है, वो नई बनाई जाए। उसमें एक्सपर्ट की राय ली जाए, पॉलिटिकल पार्टीज की राय लें और पब्लिक की राय लें, उसके बाद में प्रश्नावली बनाएँ, फिर आप काम शुरू करें, तब जा करके यह जो एक चुनौती सामने आ गई है, प्रॉब्लम आ गई है, उसको हल कर पाएँगे।

Ashok Gehlot

20,788 Aufrufe • vor 2 Tagen