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chudaichudai

25,007 просмотров • 8 месяцев назад •via X (Twitter)

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फुटपाथ पर गाड़ी चलाते हुए स्कूटी वाले का कार से टकराना इसके बावजूद कार मलिक का पूरी तरह शांत बने रहना यह इंसान के स्वभाव और सोच को दर्शाता है गलती साफ स्कूटी चालक की थी लेकिन इंसानियत कार चालक ने दिखाई जो हुआ वह सच में देखने लायक है ऐसी प्रतिक्रिया शायद ही आपने पहले देखी हो। गुस्से से नहीं बल्कि धैर्य और संयम से भी दिल जीते जाते हैं और ऐसे हालात में यही सबसे बड़ी समझदारी होती है। कुल मिलाकर यह घटना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि एक और लापरवाही और ओर जल्दबाजी हे तो दूसरी और धैर्य और जिम्मेदारी है हमारा पिछला अनुभव कहता है कई बार ऐसी छोटी-छोटी बातों पर रोड पर झगड़ा हो जाता है जो बड़ा रूप ले लेता हे यह उन लोगों के लिए भी सीख हे कि कार मालिक ने विवाद को बढ़ाने की बजाय इंसानियत को प्राथमिकता दी है जो एक बेहतरीन उदाहरण है घटना बेंगलुरु की हे। आप वीडियो देखिए और तय कीजिए की गलती किसकी थी और समझदारी और संयम किसने दिखाया...

Rakesh Patidar

134,471 просмотров • 3 месяцев назад

दोबारा होने जा रहे नीट (NEET) एग्जाम तथा टेलीग्राम ऐप पर प्रतिबंध को लेकर मीडिया के प्रश्न का जवाब: "देखिए, सरकार ने सिर्फ टेलीग्राम को ही क्यों रोका? इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ऐसे और भी कई प्लेटफॉर्म्स और चैनल्स हैं। अगर सरकार को कोई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करनी ही थी, तो वह किसी एक ऐप को टारगेट करने की बजाय सभी के लिए समान रूप से (कॉमन) लागू होनी चाहिए थी। पर असल मुद्दा कुछ और है। अभी हाल ही में आपके ही मीडिया जगत के एक साथी मुझसे मिलने आए थे; जब हमारे बीच चर्चा हो रही थी, तब मैंने इस बात को बकायदा रेखांकित किया था कि देश में पेपर लीक का जो सिलसिला चल रहा है, वह किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। पेपर लीक राजस्थान में भी हुए, गुजरात में हुए, उत्तर प्रदेश में हुए और देश के अनेकों राज्यों में हुए हैं। मैंने तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और भारत सरकार को समय रहते चेताया था कि पूरे देश के भीतर एक बहुत बड़ी अपराधी गैंग (Inter-State Gang) सक्रिय हो चुकी है, जो हर जगह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए पेपर आउट करवा रही है। लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए, जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं वहाँ की बात करने की बजाय, जानबूझकर पूरा ध्यान केवल और केवल राजस्थान पर केंद्रित कर दिया। ये लोग ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि धरातल पर तो ये कोई काम कर नहीं रहे हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक भयंकर भ्रष्टाचार व्याप्त है। सुशासन (गवर्नेंस) नाम की कोई चीज़ बची नहीं है, चाहे पानी हो, बिजली हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या सड़कें, हर क्षेत्र बदहाल है। आज स्थिति यह है कि सरकार के किसी भी विभाग में पेमेंट नहीं हो पा रहे हैं; सारे सरकारी महकमे और ठेकेदार रो रहे हैं। बुजुर्गों और जरूरतमंदों को छह-छह महीने तक पेंशन नहीं मिल रही है, छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिल पा रही है। आज राजस्थान ऐसे बदतर दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जनता का ध्यान भटकाने के लिए इन लोगों ने केवल एक ही मुद्दा पकड़ रखा है। मैं तो कहता हूँ कि आपको किसने रोका है? जिसने भी गलती की है, जिसने भी अपराध किया है, आप उसे ढूंढिए और सख्त से सख्त सजा दीजिए। लेकिन आपके पास दूरदर्शिता नहीं है, इसलिए आप केवल पाँच साल तक इसी राजनीतिक द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप में अपना समय बर्बाद कर देंगे। इसके साथ ही, आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने राजस्थान की जनता के साथ एक बड़ी वादाखिलाफी की है। जब प्रदेश में चुनाव चल रहे थे, तब मैंने सार्वजनिक रूप से शंका जताई थी कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनी, तो हमारी तमाम शानदार जनकल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी। मेरी इस बात पर खुद प्रधानमंत्री जी ने मंच से प्रदेशवासियों को भरोसा दिलाते हुए वादा किया था कि 'अशोक गहलोत जो कह रहे हैं, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि हमारी सरकार आने पर आपकी कोई भी जनहित की स्कीम बंद नहीं होगी।' लेकिन सरकार में आते ही इन्होंने हमारी तमाम कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दीं। आज जब हम प्रधानमंत्री जी को उनका वह वादा याद दिलाते हैं, जब हम उनसे कन्हैयालाल हत्याकांड के वास्तविक न्याय को लेकर सवाल करते हैं, या जब हम ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) की कड़वी सच्चाई और हमारी बंद की गई योजनाओं को लेकर जवाब मांगते हैं, तो न तो माननीय मोदी जी के पास इसका कोई जवाब होता है और न ही गृह मंत्री अमित शाह जी कुछ बोलते हैं। अब ऐसे में क्या किया जाए? सच तो यह है कि ये लोग देश और प्रदेश की सत्ता को जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से अपने अहंकार और घमंड के बल पर चला रहे हैं। यही आज की सबसे बड़ी हकीकत है।"

Ashok Gehlot

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