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Chudaiiiii......

51,862 views • 1 year ago •via X (Twitter)

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मां की ममता बच्चे का प्यार जीत गया एक शिकारी से यह घटना किसी वन्यजीव अभ्यारण की है एक शेरनी ,हिरण और उसके बच्चे पर हमला करती हैं हिरणी तुरंत ही अपना शरीर शेरनी के हवाले कर देती है बच्चे की जान को बचाने के लिए शेरनी तुरंत गर्दन दवा लेती है हिरणी का मासूम छोटा बच्चा शेरनी पर अपने सर से दो, तीन बार हमला करता है अपनी मां को छुड़ाने के लिए शेरनी के अंदर दया आ जाती है मां की ममता जग जाती है शेरनी हिरणी को तुरंत छोड़ के जंगल में चली जाती है इस घटना से हमें यह प्रेरणा मिलती है की मां की ममता हमेशा बच्चों के प्रति वफादार होती है जब एक बच्चे के लिए जानवर भी पीछे हट जा रहे हैं तो इंसान के अंदर इतनी क्रूरता कहां से आती है

premprakash

55,125 views • 10 hours ago

19 दिन, 7 राज्य, 17 BLO की मौत वोट चोरी अब लोगों की जान ले रही है ▪️युद्धस्तर पर वोट चोरी करने के लिए SIR का ज़बरदस्त प्रेशर है. BLO और Polling Officers की लगातार मौत की खबर ख़ासतौर से आत्महत्या करने को मजबूर BLO चिंता का विषय है • गुजरात: ऊषा बेन, सहायक BLO • गुजरात: कल्पनावेन, सहायक BLO • गुजरात: BLO अरविंद वाढ़ेर • गुजरात: BLO रमेश • पश्‍च‍िम बंगाल: BLO शांत‍ि मुनि • पश्‍च‍िम बंगाल: BLO रिंकू तरफदार • पश्‍च‍िम बंगाल: BLO नमिता • उत्तर प्रदेश: BLO विजय कुमार वर्मा • केरल: BLO अनीश जॉर्ज • मध्‍य प्रदेश: BLO उदयभान सिंह • मध्य प्रदेश: BLO भुवन सिंह • मध्य प्रदेश: BLO रमाकांत पांडे • मध्य प्रदेश: BLO सीताराम गोंड • राजस्‍थान: BLO मुकेश जांगिड • राजस्थान: BLO हरिओम • राजस्थान: SIR सुपरवाइजर संतराम • तमिलनाडु: BLO जहिता • तम‍िलनाडु: आंगनबाड़ी सेव‍िका, आत्‍महत्‍या की कोश‍िश 👉आख़िर SIR कराने की ऐसी क्या हड़बड़ाहट है? 👉ऐसी कौन सी जल्दी है जो लोगों की जान से ज़्यादा क़ीमती है? 👉इन निर्दोष BLOs की मौत के ज़िम्मेदार सीधे सीधे चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार और नरेंद्र मोदी हैं ▪️ऐसे ही तुग़लकी फरमान जारी करके नोटबंदी और लॉकडाउन लगा था, जिसकी इस देश ने भारी क़ीमत चुकायी ▪️वोट चोरी के लिए कोई अपनी जान गँवाये यह कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है ▪️और इस पर चुनाव आयोग खासतौर से ड्रामा करने वाले ज्ञानेश गुप्ता जी की चुप्पी अपने आप में सवाल खड़े करती है - मृतकों के परिवार से आँख मिलाने की हिम्मत है आपकी?

Supriya Shrinate

93,660 views • 7 months ago

लोकसभा चुनावों के उत्साहवर्धक परिणामों के बाद इंडिया गठबंधन व समाजवादी पार्टी को ये एक सुनहरा मौका मिला है कि वो ग़ाज़ियाबाद में अपने संगठन की ताक़त को दिखाएं और भाजपा के सबसे बड़े शहरी गढ़ में ही उसे हराए। अयोध्या की जीत ने दिखा दिया है कि कुछ भी असंभव नहीं है। किसान आंदोलन के गवाह ग़ाज़ियाबाद में आंदोलित किसान; आक्रोशित बेरोज़गार युवक-युवतियाँ; असुरक्षित महिलाएं; जीएसटी व भाजपाई चंदा वसूली से परेशान व्यापारी, कारोबारी, दुकानदार; अग्निवीर विरोधी युवा व जाम, धूल, धुएँ से परेशान आम जनता, बुजुर्ग और साथ ही पूरे प्रदेश से यहाँ आकर बसे हुए सेवा निवृत लोग पुरानी पेंशन को लेकर परेशान हैं। साथ ही जो ऊँची-ऊँची बिल्डिंगों में रहते हैं या ई-रिक्शा चलाकर अपना गुज़ारा करते हैं, वो सब भी हर चौराहे व विभाग में भ्रष्टाचार और महँगाई का शिकार हुए हैं। इस बार सिर्फ़ गली-मोहल्लेवाले ही नहीं बिल्डिंग-टॉवर वाले भी भाजपा के ख़िलाफ़ वोट डालने जा रहे हैं। अब तक भाजपा को वोट देनेवाले हर एक मतदाता से हम कहेंगे कि वो इस बार तार्किक रूप से ये सोचकर परिवर्तन के लिए वोट डाले कि जिस शहर ने भाजपा को हमेशा जिताया, उस शहर को भाजपा ने आख़िरकार दिया ही क्या है सिवाय तकलीफ़, परेशानी और दिक़्क़तों के। ये चुनाव भाजपा राज में ख़तरे में पड़े संविधान, लोकतंत्र, आरक्षण, प्रेस-मीडिया की आज़ादी, जातीय जनगणना की माँग व प्रभुत्ववादी सोच के 10% लोगों से 90% PDA को बचाने और PDA की एकजुटता और एकता दिखाने का भी चुनाव है। PDA के एक साथ आने से इंडिया गठबंधन का हर एक कार्यकर्ता जानता है कि ग़ाज़ियाबाद जीत का नया इतिहास लिखने जा रहा है, इसीलिए वो अपने बूथ पर 100% जीत सुनिश्चित करने का जी तोड़ प्रयास कर रहा है। सबको धन्यवाद व शुभकामनाएँ! आखिर में हमारी सपा, कांग्रेस व इंडिया गठबंधन के अन्य सभी सहयोगी दलों के जुझारू कार्यकर्ताओं से ये अपील है कि : - मतदान भी, सावधान भी! - जब तक जीत का प्रमाण नहीं, तब तक विश्राम नहीं!

Akhilesh Yadav

89,558 views • 1 year ago