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Chudaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

118,470 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

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UPSSSC PET के परीक्षा केंद्र 300-400 km दूर भेजकर चल रही मनमानी के विरोध में कल सुबह ट्विटर कैंपेन है....मुख्य मांग है कि 1- UPSSSC PET के परीक्षा केंद्र आसपास के जनपदों में अधिकतम 75 से 80 किलोमीटर की दूरी पर फिर से जारी किए जाएं 2- आने-जाने हेतु रोडवेज बस को फ्री किया जाए जिससे कि अभ्यर्थी अपना एडमिट कार्ड दिखाकर निशुल्क यात्रा कर सकें । 3-सरकार की ओर से बच्चों के लिए अल्प समय के लिए रुकने के इंतजाम भी जरूर किए जाएं क्योंकि बारिश का समय है। UPSSSC का यह कथन की दूर दराज सेंटर भेजने से नकल रूकती है तो यह उनकी संवेदनहीनता एवं प्रशासनिक कमियों को दिखाता है । नकल तो घर में भी रुक सकती है और नकल विदेश में भी नहीं रुक सकती है। अतः Government of UP & UPSSSC को विचार कर इन मांगों पर जल्दी से जल्दी कार्रवाई करनी चाहिए और माननीय मुख्यमंत्री से निवेदन है कृपया संज्ञान जरूर लें 🙏 #upsssc_free_bus_service #upsssc_hosh_m_aao #UPSSSCPET2025 Yogi Adityanath CM Office, GoUP Yogi Adityanath Office S.P. Goyal, Chief Secretary, GoUP 🙏

VIVEK KUMAR

87,566 次观看 • 11 个月前

6 जून से लगातार मैं #NEET एग्जाम में विवादों, आशंकाओं व गडबड़झाले को उजागर कर रहा हूँ। कल सुप्रीमकोर्ट में PIL के निर्णय से NEET के 24 लाख बच्चों को कोई लाभ बही हुआ। मोदी सरकार व NTA ने 1,563 बच्चों की दुबारा परीक्षा कराने की आड़ में पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया। असल सवाल ये हैं👇 1. क्या NEET पेपर लीक हुआ? क्या इसकी जाँच हुई? क्या ये सही नहीं कि पटना से पेपर लीक की खबर आई? कई अख़बारों में तो ₹60 करोड़ के लेन देन की खबरें भी आई। जब पटना में FIR दर्ज हुई, तो उसका क्या हुआ? 2. 67 टॉपर कैसे हो सकते हैं, जिनके 720/720 नंबर हों? अगर जिन 1,563 बच्चों की दुबारा परीक्षा हो रही है, उनमें से 6 टॉपर बच्चे निकाल भी दें, तो भी 61 बच्चे टॉपर कैसे हो सकते हैं? 3. मार्क्स V/S रैंक का खेल क्या है? हज़ारों बच्चों के इतने ज़्यादा नंबर कैसे आए कि NEET एग्जाम का पूरा समीकरण ही बिगड़ गया? क्या इसका कारण पेपर लीक है या कुछ और? इन सब बातों की जाँच होनी चाहिए, न की लीपापोती जो मोदी सरकार कर रही है। क्या NEET एग्जाम का टेक्निकल व फॉरेंसिक ऑडिट होगा, क्योंकि तभी दूध का दूध व पानी का पानी होगा। जबाब दें, हिसाब दें। #NEET_पेपर_रद्द_करो

Randeep Singh Surjewala

36,816 次观看 • 2 年前

आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया। रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है। हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा। हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया। इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है। कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।” यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी। यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है? हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है? यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है। यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे। #JantarMantar #StudentVoices #Delhi #NEET Press Trust of India ANI IANS The Wire The Indian Express ravish kumar Prakash Raj Cockroaches of India Congress BJP Delhi Congress Delhi Police Yogendra Yadav Abhijeet Dipke Saurav Das Srinivas BV Uday Bhanu Chib

Avani Bansal

707,250 次观看 • 23 天前