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CJP की ये हिम्मत देखिए। कई बाप वाला सौरव दास कह रहा है — “स्वतंत्र UP का है… चंद्रशेखर रावण उसे पकड़ लेगा।” पुलिस स्टेशन और मीडिया के सामने खुद को कानून का पालन करने वाले बताते हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही है। चंद्रशेखर रावण कौन होता है...

33,228 views • 13 days ago •via X (Twitter)

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उत्तराखंड की इस घटना को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन और पुलिस का रवैया बेहद नरम रहा। पुलिस अधिकारियों द्वारा बातचीत में जमानत, समझौते और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिए जाने से यह सवाल उठता है कि क्या कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से हो रहा है। अगर किसी भी समूह के सामने पुलिस हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे और कानून लागू करने के बजाय समझौते की अपील करती नज़र आए, तो आम जनता के मन में निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं। लोकतंत्र में कानून सर्वोपरि होना चाहिए और किसी भी संगठन या व्यक्ति के साथ कानून के अनुसार समान व्यवहार होना चाहिए। उत्राखंड की जनता को क्या मेसेज जाए गा इस घटना के बाद?

𝕄𝔾™

11,872 views • 2 months ago

बेहद शर्मनाक ! भीलवाड़ा की सुभाष नगर पुलिस का यह रवैया कानून का मजाक उड़ाना है। एक बेटा अपने जीवित पिता का 'फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र' बनवाकर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ न्याय मांग रहा है, और पुलिस उसे ही जेल में डाल रही है? पुलिस को शायद पता नहीं कि 1 जुलाई 2024 से कानून बदल चुका है। जिसे पुलिस 151 कह रही है, वह अब BNSS की धारा 172 है। इसका इस्तेमाल केवल 'बड़ा अपराध' रोकने के लिए होता है, किसी पीड़ित की आवाज दबाने के लिए नहीं। थाने में बहस करना गिरफ्तारी का आधार नहीं है। वीडियो में पुलिस अधिकारी जिस तरह लड़के को 'कान के नीचे देने' की धमकी दे रहे हैं, वह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। जीवित व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट बनाना BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 336 और 340 के तहत संगीन जुर्म है, लेकिन पुलिस अपराधियों को संरक्षण दे रही है और आवाज उठाने वाले को सलाखों के पीछे।

Arvind Chotia

30,724 views • 3 months ago

एक मासूम बच्चे की पुकार मेरे अबू के कातिलों को फांसी दो, ये शब्द किसी नेता या बड़े आदमी का नहीं, बल्कि उस मासूम बच्चे के हैं जिसने अपने पिता को खो दिया है, तोहिद खान के परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए, अगर किसी के साथ अन्याय हुआ है, तो निष्पक्ष और तेज़ जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसे कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए, एक मासूम की आंखों के आंसू और उसके दिल का दर्द पूरे समाज से ये सवाल पूछ रहा है कि आखिर उसे अपने पिता का साया क्यों खोना पड़ा? हम मांग करते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिले। #JusticeForTohidKhan #इंसाफ_दो #मासूम_की_आवाज़

𓂆 ᵐᵗᵠ

10,732 views • 3 months ago

आज मैं वक्फ बिल के विषय पर बोलने जा रहा हूं, जिसमें न्याय कम और पक्षपात ज्यादा है। संविधान ने जो दिया है, ये बिल उसे छीनने की कोशिश कर रहा है। ये कानून नहीं, कानूनी भाषा में लिपटी हुई मनमानी है। वक्फ बिल हमारे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है। बता दें- • किसी भी मजहब या धर्म का कोई रीति-रिवाज अगर उसका एक अभिन्न अंग बन जाता है, तो उसे अनुच्छेद 25 और 26 का पूरा संवैधानिक सुरक्षा चक्र मिलता है। • ऐसे धर्म और समुदायों द्वारा अपनी संस्थाओं को स्वचालित करने का अधिकार- अगर बड़े पैमाने पर किसी कानून के जरिए घटाया गया हो, तो वो कानून खुद असंवैधानिक करार किया जाएगा। वक्फ संशोधन बिल पर Abhishek Singhvi जी का राज्य सभा में पूरा वक्तव्य-

Congress

14,832 views • 1 year ago

सुहाना साहिब गुरुद्वारा में एक युवक पर हमला किया गया और उस पर बेअदबी का आरोप लगाया गया… लेकिन क्या जिस #Sikh के सिर पर बाल नहीं हैं, उसे सच बोलने का अधिकार नहीं है.. अगर नक़ली निहंग जसदीप जैसे बहरोपिये पर गंभीर आरोप हैं लेकिन वो गुरु के बाने में है तो उसे कुछ वी ग़लत करने का लाइसेंस मिल गेया है… अगर किसी नौजेवान ने उसका जवाब मांगा तो उस पर बेअदबी का आरोप लगाकर उसके साथ हिंसा करना किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता… यदि इस घटना में किसी ने कानून अपने हाथ में लिया है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए…धर्म के नाम पर डर का माहौल बनाना और हर असहमति को बेअदबी का नाम देना समाज और धर्म दोनों के लिए नुकसानदायक है… हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है, और किसी भी आरोप का फैसला भीड़ नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और कानून को करना चाहिए… #Justice #TruthMatters #StopViolence #RuleOfLaw #HumanRights #SpeakTheTruth #FreedomOfSpeech #NoToViolence #EqualJustice #Accountability #JusticeForAll #PeaceAndJustice

Manvir Singh Mani Gill

121,089 views • 2 months ago

📍 राजीव चौक, दिल्ली सिर्फ़ शक की बुनियाद पर एक गरीब मुस्लिम युवक को घेरकर बेरहमी से पीट दिया गया। खुद को गौरक्षक और हिंदू संगठन से जुड़ा बताने वाले विक्की और उसके साथियों ने उस पर लड़कियों का पीछा करने और तस्वीरें लेने का आरोप लगाया। विडंबना देखिए, जिन लड़कियों के नाम पर उसे पीटा जा रहा था, वही बार-बार कहती रहीं, "भैया छोड़ दो, जाने दो।" लेकिन भीड़ पर कोई असर नहीं हुआ। अगर सच में शक था, तो पुलिस किसलिए है? कानून हाथ में लेकर किसी की इज़्ज़त और जान दोनों को रौंद देने का अधिकार किसने दिया? आज कुछ हिंदूवादी संगठनों के लोगों के लिए सबसे आसान शिकार एक गरीब मुसलमान नज़र आता है। सिर्फ़ शक की बुनियाद पर उसे मारो, पीटो, वीडियो बनाओ और फिर खुद को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा रक्षक बताने लगो। इसके बाद मुसलमानों से नफ़रत करने वाले लोग ऐसे लोगों को अपने कंधों पर बैठाकर हीरो बना देते हैं।

Muslim Voice Cell

11,615 views • 2 months ago