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Consistency नहीं बन पा रही पढ़ने में मन नहीं लगता नींद बहुत आती है लगता है हार चुका हूँ।

50,542 просмотров • 10 месяцев назад •via X (Twitter)

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पत्रकारों को अब ब्रेक लेने के बारे में सोचना चाहिए. कोई भी आकर पत्रकारों को उनका काम करने से रोक देता है. अधिकतर मामलों में पुलिस ऐसा करती है. पिछले कुछ सालों में यह इतना बढ़ गया है कि अब हमारे परिवारों और दोस्तों की सहानुभूतियों का कोटा पूरा हो चुका है. पहले मुझे लगता था कि इनको वीडियो बनाने से दिक्कत है, इसलिए अपने साथियों को बिन बताए पिछले दो साल से चुपचाप प्रिंट में काम करना शुरू कर दिया था. पर अब लगता है मामला वीडियो शीडियो का नहीं, मामला हमारे पेशे का ही है. पेशे के सीनियर उम्मीद करते हैं कि नौजवान हो इसलिए ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट करो. लेकिन माफ़ी के साथ कह रहा हूँ, “नब्ज़ पकड़ो” जैसे चालू वाक्य अब असर नहीं करते. ग्राउंड जीरो की ललक मर चुकी है. हमारा पेशा ख़ुद इतना दयनीय हो चुका है कि हमारे ख़ुद के पास इसको देने के लिए कोई सहानुभूति नहीं बची है. अब कुछ बचा भी नहीं है वैसे! एक ब्रेक ले रहा हूँ. कुछ दिन काम करने का बिल्कुल मन नहीं है. थोड़ा दर्शनशास्त्र पढ़ने का मन है. मिलते हैं एक ब्रेक के बाद. शुक्रिया (वीडियो आज ही की है. बिल्कुल बात करने का मन नहीं है. अब यह सब करना भी फालतू लगता है.)

Mandeep Punia

32,991 просмотров • 7 месяцев назад