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Conversion के बाद Reservation खत्म? सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय की परख! परख में आज बात देश की सर्वोच्च न्यायालय के उस अहम फैसले की, जिसने Conversion और अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण को लेकर चल रही बहस को एक नई दिशा दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया...

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SC-ST आरक्षण में बंटवारा : SC-ST के आरक्षण पर आज देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले का दलितों और आदिवासियों के आरक्षण पर गहरा असर पड़ने वाला है और इस बात की भी आशंका है कि इस फैसले के साये में भविष्य में SC-ST के आरक्षण को खत्म करने की कोशिश भी हो सकती है। दरअसल आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि SC-ST को मिलने वाले कोटे के अंदर ही कोटा लागू हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC-ST के आरक्षण में उप-वर्गीकरण (बंटवारा) किया जा सकता है। इसका मतलब ये है कि SC-ST की कुछ जातियों को ज्यादा और कुछ जातियों को कम आरक्षण दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य चाहें तो SC-ST के आरक्षण में उप-वर्गीकरण कर सकते हैं। इस फैसले के क्या मायने हैं? ये फैसला SC-ST के आरक्षण पर क्या असर डालेगा? क्या इस फैसले से SC-ST के बीच बंटवारा हो जाएगा? और क्या इस फैसले के साये में SC-ST में क्रीमी लेयर लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा? आइये इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं।

Sumit Chauhan

127,849 views • 2 years ago

धर्म छोड़ा है तो आरक्षण छोड़ो! आज 24 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने हमारी २० वर्षों की माँग को दोहराते हुए और मजबूत फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा: ✅ हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या इस्लाम अपनाने पर SC दर्जा तुरंत खत्म। ✅ धर्मांतरण के बाद भी SC/ST आरक्षण या Atrocities Act का संरक्षण नहीं मिलेगा। ✅ यह प्रतिबंध पूर्ण और बिना अपवाद का है — केवल हिंदू, सिख, बौद्ध ही SC का लाभ ले सकते हैं। ✅ आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए है, न कि धर्मांतरण का व्यापार करने के लिए। सुदर्शन न्यूज़ और मैं ( सुरेश चव्हाणके) ही एकमात्र ऐसे पत्रकार और चैनल थे जिन्होंने लगातार २० साल इस सच्चाई को बिना डरे उठाया। आज न्यायालय ने हमारी आवाज को एक बार फिर संवैधानिक मुहर लगा दी। धर्म छोड़ा तो आरक्षण भी छोड़ो — यही संविधान की भावना है! जय हिंद! जय भारत! #धर्म_छोड़ा_तो_आरक्षण_छोड़ो #SupremeCourt #SudarshanNews #Delisting

Dr. Suresh Chavhanke “Sudarshan News”

15,012 views • 5 months ago

तमिलनाडु में तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर दीप नहीं जलाने दिया जा रहा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद इसे जलाने नहीं दिया जा रहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि अब संविधान खतरे में है या नहीं? और यहां तक कि इस मामले को लेकर सीधे न्यायालय के न्यायाधीश को धमकाया जा रहा है, महाभियोग लाने की बात की जा रही है। यह वही कांग्रेस पार्टी है, जिसने जब सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो केस में ऐसा निर्णय दिया था जो शरिया के खिलाफ माना गया था, तो सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय रौंदकर शरिया को सुप्रीम कोर्ट से ऊपर रख दिया था। आज सत्ता से बाहर हैं, तो निर्णय को रौंदने की ताक़त नहीं है; इसलिए धमकाकर अपना एंटी-हिंदू एजेंडा पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। तमिलनाडु में 2022 में बाकायदा Eradication of Sanatana Dharma को लेकर कॉन्फ्रेंस हुई थी। इससे पहले 2021 में अमेरिका और दुनिया के बड़े-बड़े संस्थानों में भारत-विरोधी शक्तियों ने एक सेमिनार किया Dismantling Global Hindutva. उसके बाद भारत में यह कॉन्फ्रेंस हुई। इसके बाद हिंदू धर्म को कोरोना वायरस और अन्य बातें कहनी शुरू की गईं। इसलिए यह एक व्यापक वैश्विक षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसमें विपक्ष अगर जानकर फंसा है तो खतरनाक है, और अनजाने में फंसा है तो भी खतरनाक है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

55,397 views • 8 months ago

मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए 2023 में एक एक्ट आया- The Chief Election Commissioner And Other Election Commissioners Act इसके अनुसार- प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और नेता विपक्ष की समिति मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करती है, लेकिन उसमें बहुत सारी संवैधानिक और कानूनी समस्याएं हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने बात रखी गई और सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च 2023 को एक फैसला दिया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र और उसकी निष्पक्षता के लिए CEC और EC की चयन समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और नेता विपक्ष हों। लेकिन इस फैसले की आत्मा और उद्देश्य को बिना समझे, जल्दबाजी में The Chief Election Commissioner And Other Election Commissioners Act लाया गया। इस नए कानून में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के ठीक विपरीत काम किया गया, जिसमें पूरी तरह से कार्यपालिका मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का चयन कर रही है। : Abhishek Singhvi जी

Congress

80,416 views • 1 year ago

न्याय की जीत, जनता की जीत आज सुप्रीम कोर्ट के 2 फैसलों ने देश की जनता को बड़ी राहत दी है, और न्यायपालिका के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इन निर्णयों से स्पष्ट संदेश दिया है कि अरावली, पर्यावरण और पीड़ितों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा बदलने को लेकर पुराने फ़ैसले पर रोक लगाकर यह साबित कर दिया कि कोर्ट ने इस मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया है। साथ ही, पूर्व में की गई टिप्पणी पर भी रोक लगाकर न्यायालय ने निष्पक्षता और संतुलन का परिचय दिया है। यह फैसला जनता की आवाज़ का सम्मान है, अरावली की पुकार को सुनने का प्रमाण है और खनन माफियाओं के मंसूबों पर करारा प्रहार है। अरावली को बचाने के लिए आगे आने वाले संघर्ष और आंदोलन करने वाले प्रदेश के हर कांग्रेस कार्यकर्ता का दिल से धन्यवाद। मुझे पूर्ण विश्वास है कि जनवरी में आने वाला अंतिम निर्णय भी जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में ही होगा। नहीं तो बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर जी से हमें संविधान में संघर्ष और आंदोलन का अधिकार मिला है। जन भावना के साथ खड़े रहेंगे, कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge जी और नेता प्रतिपक्षRahul Gandhi जी के नेतृत्व में जनता की हर लड़ाई लड़ेंगे। साथ ही उन्नाव मामले में पूर्व भाजपा विधायक को दी गई जमानत को रद्द करने का फैसला केवल पीड़िता के साथ न्याय नहीं है, बल्कि यह पूरे देश को भरोसा दिलाने वाला संदेश है कि सत्ता कानून और न्याय से ऊपर नहीं हो सकती। यह निर्णय महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय के प्रति न्यायपालिका की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है। #SaveAravalli #JusticeForUnnaoVictim

Govind Singh Dotasra

14,428 views • 7 months ago

अब NEET के बच्चों की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ी जाएगी, और मैं इस लड़ाई को पूरी मजबूती से आगे बढ़ाऊंगा। साथियों नमस्कार, देश ने NEET परीक्षा में हुई धांधली को अपनी आंखों से देखा है। वर्ष 2018 के बाद से लगातार कई बार पेपर लीक होने की घटनाओं ने लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों के सपनों को तोड़ने का काम किया है। जिस संस्था पर देश के युवाओं के भविष्य की जिम्मेदारी थी, वही संस्था आज सवालों के घेरे में खड़ी है। NTA अब केवल एक परीक्षा एजेंसी नहीं रह गई, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का प्रतीक बन चुकी है। जिस तरह से लाखों छात्रों की मेहनत को भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ाया गया, वह केवल एक परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि देश के युवाओं के विश्वास पर हमला है। इसी अन्याय के खिलाफ, मैंने स्वयं हमारे अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा जी एवं उनकी धर्मपत्नी के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किया है। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कांग्रेस पार्टी लगातार सड़कों पर छात्रों की आवाज़ बनकर संघर्ष कर रही है, और माननीय राहुल गांधी जी भी पूरी मजबूती के साथ देश के बच्चों और युवाओं की आवाज़ उठा रहे हैं। जिस प्रतिबद्धता और साहस के साथ कांग्रेस पार्टी एवं राहुल गांधी जी NEET के छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, वह देश के युवाओं को उम्मीद देता है कि उनकी आवाज़ दबाई नहीं जाएगी। मैं व्यक्तिगत स्तर पर भी इस संघर्ष को अंत तक लड़ूंगा — सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, हर मंच पर। यह लड़ाई किसी एक student की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, उनके सम्मान और उनके सपनों की लड़ाई है। न्याय होगा, और युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वालों को जवाब देना होगा।

Alok Sharma

17,015 views • 3 months ago

• 5 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दो दिन बाद असम सरकार की मशीनरी ने पूरी ताकत के साथ एक NBW याचिका डाली, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था • जिस निर्णय के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट गए थे, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसमें ऐसे प्रावधानों का जिक्र है, जो शिकायतकर्ता, याचक और जांच एजेंसी ने नहीं कही है • सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि हम भूल जाते हैं कि अंतरिम जमानत के मामले में जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता है • इस मामले में कई प्रकार के पहलुओं को डाल दिया गया, ताकि यह मानहानि से एक अलग केस बन जाए। इसमें 9 प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया था, जिसे हमने साबित किया है- ये सभी प्रावधान जमानती हैं • हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी है और अगर राजनीतिक अभियान के दौरान एक राजनीतिक बयान को इतना बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा तो ये Article 19(1)(a) को खतरा होगा मैं इस निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहता हूं और इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी समेत सभी लोगों को बधाई देता हूं। : AICC-Law, Human Rights and RTI Department के Chairman Abhishek Singhvi जी 📍 दिल्ली

Congress

23,932 views • 3 months ago

सुप्रीम कोर्ट प्रायः दलित और पिछड़ों के मामलों में संसद और क़ानून बनाने वाली संस्थाओं द्वारा अधिकारों को कमजोर करने का निर्णय देता है । आज भी वही किया है । SC ने कहा केवल अपशब्दों का प्रयोग अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध नहीं है। यह कानून तभी लागू होगा जब अपशब्दों में जातिगत नाम का प्रयोग सार्वजनिक रूप से किया गया हो और उसका इरादा अपमानजनक हो।आज कल कितने हनी ट्रैप और ब्लैकमेल महिलायें कर रही हैं । दहेज कानून में एक तरफा बयानिया से जेल भेज दिया जाता है । इनके इकबालिया बयान किसी को बदनाम, जेल जाने के लिए पर्याप्त होता है लेकिन जब दलित- आदिवासी के लिए बने क़ानून की बात होती है तो उसको SC कमजोर करता है । अनुसूचित जाति आयोग और जनजाति आयोग की शक्तियों को बार बार कमज़ोर किया गया है ।

Dr. Udit Raj

20,196 views • 7 months ago