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Hello Grok क्या सही में नागपंचमी के नाम पर सांपों पर अत्याचार किया जाता है!! अगर एसा है तो इस पाखंड त्यौहार पर रोक लगाने से लाखों जीवों की जान बचाई जा सकती है 👌

12,741 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

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हल्द्वानी में हुयी हिंसा के बाद हिंसा ग्रस्त इलाकों में दौरे पर गयी फैक्ट फाइंडिंग टीम ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि वहां का स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा जाँच के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। मुस्लिम महिलाओं और युवाओं को करवाई के नाम पर वहां अस्थायी डिटेंशन कैंप में प्रताड़ित किया जा रहा है। गिरफ़्तारी तो केवल 27 लोगों की दिखाई गयी है मगर 5000 अज्ञात के नाम FIR की बुनियाद पर किसी भी व्यक्ति उठा कर पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। हल्द्वानी की डीएम वंदना सिंह का रोल सबसे संदेह से भरपूर है। अगर ठीक से जाँच की जाये तो सबसे पहले डीएम महोदया पर ही करवाई होगी। full video:

Ansar Imran SR

39,563 просмотров • 2 лет назад

गलती तो हुई है सवर्णों से............ अगर एससी-एसटी एक्ट का विरोध किया होता तो आज यूजीसी न आता ... 2018 में फर्जी केसों की बढ़ती संख्या देखकर उच्चतम न्यायालय ने एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोक लगाकर एंटीसिपेटरी बेल की इजाजत दे दी, लेकिन कोर्ट के फैसले को मोदी सरकार ने संसद पटल में पलट दिया ..... अगर उसी समय सवर्ण समाज सड़कों पर उतरा होता तो आज यूजीसी रेगुलेशंस देखने की नौबत न आती। लेकिन नहीं हमने उन्हें लोकसभा में तीन सौ से अधिक सीटें जिता दी । जाहिर है उन्हें लगा कि इन गुलामो पर तो कोई असर पड़ना नहीं है तो एससी-एसटी एक्ट मजबूत करने से भी पक्ष में न आए दलितों को यूजीसी के नाम पर पक्ष में कर लिया जाए और यूजीसी रेगुलेशंस ले आए लेकिन उस पर कोर्ट ने रोक लगा दी अब क्या करें तो दलित एक्ट लगाने वालों की ईनामी राशि 40% बढ़ाने जा रहे हैं । कहावत है बच्चा न रोये तो मां भी दूध नहीं पिलाती है अगर विरोध किया होता तो बजट में भी कुछ हासिल हो जाता, दमन को बर्दाश्त करने पर दमनकारी के हौंसले बुलंद हो जाते हैं। "मोदी है तो मुमकिन है" highlight

सूर्य प्रकाश मिश्र

11,634 просмотров • 16 дней назад