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Horizontal directional drilling (HDD), एक खाई रहित विधि है, जिसका उपयोग न्यूनतम सतह व्यवधान के साथ पाइप और केबल जैसी भूमिगत उपयोगिताओं को स्थापित करने के लिए किया जाता है। इस ड्रिलिंग तकनीक की वजह से खुली खाइयों को बनाने की आवश्यकता नहीं होती है।

325,468 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

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समस्त देशवासियों को भीमा कोरेगांव #शौर्य_दिवस की ढेर सारी बधाई ⚔️⚔️ यह सिर्फ एक युद्ध मात्र नहीं बल्कि मनुवादी सत्ता के खिलाफ दलित शौर्य की खुली चुनौती है 1 जनवरी 1818 के दिन 500 दलित योद्धाओं ने पेशवाओं की जातिवादी, ब्राह्मणवादी और गुलाम बनाने वाली व्यवस्था को धूल चटाते हुए 28000 जातिवादियों का जातीय घमंड चकनाचूर किया था भीमा कोरेगांव ने साबित किया कि जाति नहीं, साहस इतिहास बनाता है। यही वजह है कि आज भी विजय स्तंभ से जातिवादियों को जलन होती है क्योंकि यह स्तंभ सिर्फ पत्थर नहीं है, यह मनुस्मृति के खिलाफ संविधान की खड़ी हुई दीवार है 🔥🔥 #भीमा_कोरेगांव_शौर्य_दिवस

Priyanshu Kumar

11,340 次观看 • 7 个月前

18 सेकण्ड के इस वीडियो को देखिए। ये भाई रायबरेली से प्रयागराज परीक्षा देने पहुंचा है। रात में मां ने रोटी बनाकर दे दी थी। सुबह 7 बजे वही खाने के लिए निकाला लेकिन रोटी खराब हो गई है। यह किसी एक के साथ नहीं बल्कि लाखों विद्यार्थियों के साथ होता है। संघर्ष फेज में कभी सूखी रोटी मिलती है तो कभी साथ में अचार मिल जाता है। कई बार तो कुछ खाने का मन भी किया लेकिन जेब गवाही नहीं देता। भूखे ही रहना होता है। इसके लिए किसी की सीधी जिम्मेदारी नहीं होती। यह जीवन के संघर्ष का हिस्सा है। यही इंसान को मजबूत बनाता है। जिसने इस फेज को पार कर लिया, मेहनत करने से पीछे नहीं हटा वही आगे चमक जाता है। शुभकामनाएं दोस्त। सूखी रोटी खाकर तुम कामयाबी लिख दो। मां के सपनों को पूरा कर दो।

Rajesh Sahu

135,855 次观看 • 1 年前

आज सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल जी के आमरण अनशन का 24वां दिन है। उनका यह संघर्ष किसानों के हक और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी कानून की मांग के लिए है। यह मांग सिर्फ एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों की है, जिनका जीवन और रोज़गार सीधे इस मुद्दे से जुड़ा है। संसद की खेती-बाड़ी स्थायी समिति ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि MSP गारंटी कानून जरूरी है। यह साफ करता है कि यह मुद्दा केवल किसानों तक सीमित नहीं, बल्कि संसद की भी भावना है। जब संसद की स्थायी समिति जैसी जिम्मेदार इकाई इसे सही ठहरा रही है, तो केंद्र सरकार को इसे लागू करने में देरी क्यों? 24 दिनों से एक किसान नेता अनशन पर बैठे हैं, यह सिर्फ उनके शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। क्या सरकार संसद की भावना का सम्मान करेगी और किसानों की इस जायज़ मांग को पूरा करेगी? देश के अन्नदाता के प्रति यह उदासीनता न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि पूरे किसान वर्ग की उम्मीदों को भी चोट पहुंचा रही है। अब वक्त आ गया है कि सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाए और MSP गारंटी कानून बनाकर अपने वादों को निभाए। किसानों की मांगें न केवल जायज़ हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। सरदार डल्लेवाल जी जैसे नेता का संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि किसान अपने अधिकारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। अब केंद्र सरकार को भी यह दिखाना होगा कि वह अपने अन्नदाताओं के साथ खड़ी है।

Vinesh Phogat

168,475 次观看 • 1 年前

न्यूटन का तीसरा नियम कहता है,हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है.. इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली जाती है..दबाव आता है.. पोस्ट हटाने से इनकार कर दिया जाता है..फिर अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया जाता है.. ओडिशा से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सारंगी छात्र आंदोलन के सपोर्ट में अपनी Instagram Story पोस्ट करती हैं पोस्ट हटाने के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है लेकिन वह पोस्ट हटाने से इनकार कर देती हैं अब उनका Instagram अकाउंट डिएक्टिवेट हो गया है.. सिर्फ पोस्ट डिलीट नहीं की, इसलिए अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया गया? बड़े नेताओं की बनावटी छवि और इज़्ज़त को बचाने के लिए ऐसा किया जाता है... जब भाजपा सांसदों के बच्चों को नहीं बख्शा जा रहा, हम आप तो फिर खेत की मूली भी नहीं मूली के पत्ते ही हैं.. जब चाहो उखाड़ दो.. लाठी वाले को भैंस मिल गई..सत्ता को दबंगई मिल गई.. और जनता को? बस हर पाँच साल में एक उंगली पर स्याही मिल गई.. 😏 वॉयस ओवर की एक और छोटी सी कोशिश 😊👇

𝑺𝒉𝒂𝒉𝒆𝒆𝒏🌺

27,556 次观看 • 22 天前

अगर आपके पास भी बेटी है तो 1 मिनट का समय निकाल कर जरूर पढ़ें इस खबर को और शेयर करें। 10 साल की एक मासूम बच्ची का माँ बन जाना सिर्फ़ एक खबर नहीं बल्कि हमारे समाज की सामूहिक विफलता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अपराध किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं बल्कि घर के भीतर से ही किया गया। जिस उम्र में बच्चों को सुरक्षा प्यार और शिक्षा मिलनी चाहिए उसी उम्र में अगर उन्हें डर और दर्द झेलना पड़े तो यह पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। ऐसे मामलों में चुप्पी भी अपराध के बराबर होती है। ज़रूरत है कि हम बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें समय पर आवाज़ उठाएँ और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह पोस्ट किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि जागरूकता फैलाने और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चर्चा शुरू करने के लिए साझा किया जा रहा है। ऐसे लोगों को क्या सजा मिलनी चाहिए कमेंट में अपनी राय जरुर दें आपका एक शेयर दोषियों को सजा दिलवा सकता है ।

Rahul chetry

71,618 次观看 • 7 个月前

कैराना सांसद इकरा हसन के साथ यूपी पुलिस को इस तरह का व्यवहार बिल्कुल नहीं करना चाहिए था जैसा किया गया और किया जा रहा है, इकरा हसन मृतक मोनू कश्यप के लिए जो कि धर्म से हिंदू हैं उसके परिजनों के साथ इंसाफ मांगने के लिए सहारनपुर के DIG के कार्यालय गई थी, इकरा के मुताबिक़ DIG ने उनके सामने ही मृतक के परिजनों को कह दिया कि जो करना है करिए, बाद में पुलिस इकरा को डिटेन करके थाने ले जाती हैं और उनको पकड़ा जाता है और कुछ देर बाद शहर से बाहर छोड़ दिया जाता है। थोड़ी देर बाद सांसद इकरा को जानकारी मिलती है कि पुलिस ने उनके साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है जिसके बाद इकरा वापस थाने जाती हैं और पुलिस को खरी खोटी सुनाते हुए रिहाई की मांग करते हुए साफ़ कह देती हैं कि "क्या करोगे फांसी चढ़ाओगे? गोली मारोगे मार दीजिए!" अब Iqra Hasan साथियों की रिहाई के लिए थाने के बाहर धरने पर बैठी हुई है और पुलिस तानाशाही के खिलाफ डटी हुई है, हालांकि पुलिस ने इकरा के आरोपों का खंडन भी किया है लेकिन पुलिस के खंडन और नागरिकों की औकात, हैसियत हम अच्छे से जानते ही कि इस लोकतंत्र में क्या रह गई हैं, एक चुनी हुई सांसद के साथ पुलिस का इतना घटिया व्यवहार हो सकता हैं तो आम नागरिकों की क्या औकात?

Zakir Ali Tyagi

10,114 次观看 • 3 个月前