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IIT BHU का Faculty Data Category-wise “स्वघोषित मेरिटधारियों” गौर से देखना। 🔹 प्रोफेसर (Professor) General: 92 OBC: 3 SC: 9 ST: 0 🔹 एसोसिएट प्रोफेसर (Associate Professor) General: 84 OBC: 5 SC: 6 ST: 1 🔹 असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) General: 97 OBC: 32 SC: 12 ST: 3 अब...

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BJP राज में ओबीसी आरक्षण पर हमला क्यों? RU में डॉ. अंबेडकर पीठ खत्म क्यों की गई? JNVU जोधपुर से SC/ST सेल खत्म क्यों? Bhajanlal Sharma जी Dr Prem Chand Bairwa जी Ashok Gehlot जी जवाब दो। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड–II / कनिष्ठ सहायक (LDC) भर्ती में OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है, जो सीधे-सीधे संविधान की भावना के खिलाफ है और बेरोज़गार युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात है। यह कोई एक भर्ती का मामला नहीं है। पूर्व में जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती और वनपाल भर्ती में भी OBC वर्ग को पूरा 21% आरक्षण नहीं दिया गया। इसी तरह RPSC 2nd Grade शिक्षक भर्ती 2024 की संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय के 538 पदों में OBC को मात्र 9% आरक्षण दिया गया। सवाल साफ हैं रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के अधिकार कब तक काटे जाते रहेंगे? SC/ST/OBC युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब रुकेगा? मुख्यमंत्री भजनलाल जी, यह मुद्दे केवल एक भर्ती, SC/ST वर्ग का नहीं है संवैधानिक न्याय और सामाजिक बराबरी का है। कृपया OBC को उसका पूरा 21% आरक्षण दिलवाएँ। सभी संदिग्ध भर्तियों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जाँच करवाएँ। उप मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा जी, आप उच्च शिक्षा मंत्री है फिर भी राजस्थान विश्व विद्यालय से डॉ. अंबेडकर पीठ को समाप्त किया गया? JNVU जोधपुर से SC/ST सेल खत्म कर दी गई? यदि आप अपने ही वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोत जी, आप OBC वर्ग से आते हैं। तीन बार मुख्यमंत्री रहे तब भी OBC आरक्षण खतरे में था, आज विपक्ष में हैं, तब भी खतरे में है। आप उस समय भी चुप थे आज भी चुप है? #ओबीसी_आरक्षण_बहाल_करों #रोस्टर_प्रकिया_में_सुधार_करों #डॉ_अंबेडकर_पीठ_बहाल_करो #JNVU_SC_ST_सेल_बहाल_करो

Ashok Meghwal

60,477 views • 6 months ago

" मेरे ही ज़ख़्मों से पूछा गया सबब उनका तीर चलाने वाले से कोई सवाल न हुआ " 🔰 GEN ( अधिकांश सवर्ण ) : 80.09 🔰 जमींदार OBC : 75.55 🔰 भूमिहीन OBC : 75.55 🔰 SC : 69.24 🔰 ST : 69.00 🔰 EWS ( कुछ एक सवर्ण ) : 64.44 पूरा लेख पढ़ें... विशेषकर कुम्हार, राजभर, बिन्द नाई, सुथार, लुहार, छीपा, दर्जी, देवासी, रेबारी, वैष्णव, गोस्वामी, रावना आदि 'भूमिहीन OBC वर्ग' के लोग.... 👇 प्रिय बंधुओं... हम भारत के नागरिक हैं। यह देश हमारा है। हमें ही इसे मिलकर आगे बढ़ाना है। कुछ विषयों पर हमें जाति/मज़हब से ऊपर उठकर ईमानदारी दिखलाकर बोलना पड़ेगा। मैं GEN वर्ग से आता हूँ। और SC वर्ग के जातिगत आरक्षण का समर्थक हूँ। साथ ही अतिपिछड़ों का हक सुनिश्चित करने के लिए OBC वर्गीकरण का पक्षधर हूँ। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं EWS की कम कट-ऑफ़ का समर्थन करने भी लग जाऊँ। EWS की कठोर शर्त के कारण बहुत कम ब्राह्मण, बनिया, राजपूत व अन्य जनरल जाति केंडिडेट EWS आरक्षण का लाभ ले पाते हैं। फिर भी उनकी कट-ऑफ़ 'भूमिहीन OBC वर्ग' से कम जाना चिंतनीय है। कुम्हार, नाई, सुथार, लुहार, छीपा, दर्जी, वैष्णव, गोस्वामी, रावणा आदि से के बच्चे EWS से ज्यादा नंबर लाकर भी फेल हो जाते हैं तो यह वाकई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। लेकिन...यह स्थिति आई क्यों? और इसका स्थायी समाधान क्या है? आइए... ठंडे दिमाग़ से विमर्श करें... 👇👇👇 [ EWS की कम कटऑफ़ का कारण है - कम संख्या में EWS एप्लीकेशन...] देश में आबादी कुछ इस प्रकार है 👇 🔰 SC - 16% 🔰 ST - 8% 🔰 भूमिहीन OBC - 40% 🔰 जमींदार OBC - 12% 🔰 अनारक्षित - 24% ( OBC जमींदार 3% बताते 😂) EWS ≠ सवर्ण आरक्षण EWS = जातिगत आरक्षण से वंचित जातियों के गरीब तबके को आरक्षण। 24% अनारक्षित वर्ग आबादी वाले देश में से कठोर शर्त के कारण बहुत कम लोग ही EWS आरक्षण का लाभ ले पाते हैं। EWS Vs OBC क्रीमीलेयर देखिए 👇 🔺मकान सीमा : OBC में कोई मकान सीमा नहीं है। जबकि कोई कितना भी गरीब हो... उसके पास 1000 स्कवायर फ़ीट से बढ़ा मकान है तो उसे EWS नहीं मिलता। 🔺जमीन की शर्त : 5 एकड़ से अधिक जमीन पर आपको EWS का लाभ नहीं मिलता। वहीं OBC को मिलता है। जिसका फायदा 'जमींदार OBC वर्ग' को ही मिलता है। 🔺ग्रुप B, C व D की नौकरी की आय : OBC में 8 लाख की क्रीमीलेयर की बात झूठ है। ग्रुप B, C व D की नौकरियों से कोई परिवार भले 30 लाख सालाना कमाए तो भी वह नियमानुसार OBC आरक्षण का हकदार है। जबकि हर स्त्रोत से EWS परिवार 8 लाख कमाता है तो वह आरक्षण से बाहर है। 🔺 कृषि आय : OBC क्रीमीलेयर में कृषि आय गिनी ही नहीं जाती। जबकि EWS में गिनी जाती है। 🔺 परिवार की परिभाषा : OBC की परिवार की आय में केवल माता-पिता की आय जुड़ती है, खुद अभ्यर्थी की नहीं। जबकि EWS में अभ्यर्थी समेत सम्पूर्ण परिवार की आय जुड़ती है। 🔺 उम्रसीमा : OBC को उम्रसीमा छूट मिलती है। जबकि केंद्रीय सेवाओं में EWS को कोई उम्रसीमा छूट नहीं मिलती। इन सभी कारणों से 99. 99% OBC समाज के लोग OBC का लाभ लेने के लिए नियमानुसार पात्र हैं। जबकि अनारक्षित समाज का 90% तबका EWS आरक्षण की शर्त से बाहर है। लाभ नहीं ले पाता। इसी कारण EWS वर्ग में कम एप्लिकेशन आती हैं। और फलत: कट-ऑफ़ कम जाती हैं। लेकिन इसका समाधान क्या है? 🤔 🔰 OBC जमींदारों के अनुसार समाधान 👇 EWS आरक्षण की समाप्ति। ताकि OBC में उनके एकाधिकार पर प्रश्न उठना ही बंद हो जाए। ताकि वे निर्बाध रूप से OBC की सभी सीटें ले जाए। 🔰 मोहित भारत के अनुसार तार्किक समाधान 👇 1) EWS सरलीकरण 2) OBC से जमींदार बाहर ( ज़ी हाँ... 🙏 ) विस्तार से समझिए... 👇 1) EWS सरलीकरण ( अस्थायी हल ) : _____________________________ यदि EWS से मकान की शर्त हट जाए। और उम्रसीमा छूट मिलने लग जाए। क्रीमीलेयर में B, C व D ग्रुप की नौकरी की आय न जुड़े तो... EWS अभ्यर्थी कई गुना बढ़ जाएंगे। परिणामस्वरूप कटऑफ़ स्वतः नीचे आ जाएगी। 2) OBC से जमींदार बाहर (स्थायी समाधान ) : ___________________________________ ज़ब जाट, यादव, कुर्मी जैसी तमाम जमींदार जातियों को OBC से बाहर कर दिया जाएगा तो OBC की कटऑफ़ स्वतः गिर जाएगी। जिसका लाभ 'भूमिहीन OBC वर्ग' के लोगों को मिलेगा। दूसरी बात इन जमींदार जातियों के गरीब तबके को EWS का मलाईदार आरक्षण चखने का मौका भी OBC आरक्षण छोड़ने के अगले दिन से ही मिलने लग जाएगा। मैं हवा में बात नहीं करता... उदाहरण से समझा देता हूँ। 🔰 हरियाणा में जाट EWS में हैं। इसलिए EWS कटऑफ़ >>>> OBC कटऑफ़ 🔰 राजस्थान में जाट OBC में हैं। इसलिए OBC कटऑफ़ < EWS कटऑफ़ जमींदार वैसे भी ओवर-रीप्रिजेंटेड हैं। 🙏 EWS खुद वंचित है। Propaganda Exposed 😎

Mohit Bharat

20,106 views • 1 month ago

आज के बांग्लादेश में बिना किसी वजह के हिंदुओं के जो कुछ हो रहा है और सिर्फ़ एक पृथक घटना नहीं है यह एक प्रवृत्ति है जिसका विस्तार इतिहास और भूगोल दोनों में बहुत व्यापक है। इस पर “सेक्युलर सन्निपात” से बाहर निकल कर तर्कसंगत ढंग से सोचने की ज़रूरत है । 1947 तक पाकिस्तान बांग्लादेश ही नहीं काबुल में भी हिंदुओं और सिक्खों की संख्या और स्थिति बहुत मज़बूत थी, लाहौर करांची ही नहीं काबुल में बिज़नेस में भी उनका भारी कंट्रोल था। लेकिन आज स्थिति क्या है सब जगहों से या तो ख़त्म हो गए या नाम मात्र के हिंदू सिख बचे है। बहुत दिन तक सुनाया गया “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी” अब काबुल रावलपिडी तो छोड़िये, “चिटगाँव से लेकर सिलहट तक, बस्ती दिखती नहीं तुम्हारी” CAA में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत की नागरिकता चाहने वालों में 80 % से ज़्यादा ओबीसी और ST SC समुदाय के लोग है जो राजनीतिक दल भारत में तो अपनी राजनीतिक रोटी SC ST & OBC के नाम पर नई नई सेक रहे है उन लोगों को दर्द समझ नहीं आता जो बांग्लादेश में मारे जा रहे हैं। वे CAA का विरोध करते हैं यानी हालात के मारे इन SC ST और OBC को भारत में शरण नहीं दी जाए । क्योंकि वोट बैंक के तराज़ू पर SC OBC से कहीं बड़ा नहीं पर अधिक तगड़ा और संगठित वोट बैंक दिखाई पड़ जाता है। झट से SC OBC के लिए दिल का सारा दर्द वोट के तराजू से ग़ायब हो जाता है

Dr. Sudhanshu Trivedi

75,476 views • 1 year ago

▪️हाल ही में पेश हुए Budget में कर्नाटका की कांग्रेस सरकार ने SC, ST, OBC, Category I, Category II A, Category II B के ठेकेदारों के लिए आरक्षित ठेके की सीमा बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दिए 👉ये उनकी आर्थिक मज़बूती और सामाजिक उत्थान के लिए बेहद ज़रूरी है ▪️लेकिन आदत से मजबूर BJP इन ठेकों में 4% muslim reservation को लेकर फिर से भ्रम फैला रही है 👉तो असलियत क्या है? ▪️सबसे बड़ा सच: कांग्रेस की सरकार ने SC, ST के लिए ₹50 करोड़ तक ठेकों में आरक्षण दिया था ▪️दूसरा बड़ा सच: कांग्रेस सरकार ने OBC को ठेकों के आरक्षण दिया ▪️अब ठेकों में आरक्षण • SC: 17.15% • ST: 6.95% • Category I: 4%, 95 जातियों को फायदा • Category II A: 15%, 102 OBC जातियों को फ़ायदा • Category II B: 4% मुस्लिम आरक्षण ▪️यह आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर ▪️कर्नाटका में पहले से ही शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को 4% आरक्षण मिलता है ▪️2006, 2008, 2019 में BJP की सरकार रही, तब मुसलमान आरक्षण पर कोई सवाल नहीं उठा ▪️अगर BJP को सामाजिक आर्थिक कारणों से मिल रहे आरक्षण से दिक्कत है तो क्या उसे , ST, OBC आरक्षण से भी परेशानी है? 👉👉BJP भ्रम फैलाना बंद करे और आरक्षण पर अपना रूख साफ़ करे

Supriya Shrinate

20,681 views • 1 year ago

"UPSC vs UPPSC — कटऑफ और माइग्रेशन नीति का खुला अंतर!" आज UPPSC ने एक नोटिस जारी करके ये बताया है कि वो UPSC के बनाए नियमो का पालन करता है इसलिए कटऑफ,रिवाइज्ड आंसर की इत्यादि फाइनल रिजल्ट्स के पहले जारी नहीं कर सकता। UPPSC आयोग द्वारा जारी इसी नोटिस पर मेरे कुछ सवाल है - UPSC में जब कोई आरक्षित वर्ग (OBC / EWS / SC / ST) का अभ्यर्थी अनारक्षित (UR) वर्ग के सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे UR में माइग्रेट कर दिया जाता है — यानी उसे अनारक्षित सूची में शामिल कर परखा और चयनित किया जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि UPSC में आरक्षित वर्गों के कट-ऑफ कभी-कभी UR से ऊपर नहीं जाते, क्योंकि उच्च अंक प्राप्त आरक्षित अभ्यर्थियों को UR के तहत ही गिना जाता है। आइए पिछले पांच वर्षों में UPSC प्री परीक्षा का जो कटऑफ रहा है उसका अवलोकन करते है-- UPSC प्री 2020 — UR: 92.51 | OBC: 89.12 | SC: 74.84 | ST: 68.71 | EWS: 77.55 UPSC प्री 2021 — UR: 87.54 | OBC: 84.85 | SC: 75.41 | ST: 70.71 | EWS: 80.14 UPSC प्री 2022 — UR: 88.22 | OBC: 87.54 | SC: 74.08 | ST: 69.35 | EWS: 82.83 UPSC प्री 2023 — UR: 75.41 | OBC: 74.75 | SC: 59.25 | ST: 47.82 | EWS: 68.02 UPSC प्री 2024 — UR: 87.98 | OBC: 87.28 | SC: 79.03 | ST: 74.23 | EWS: 85.92 UPSC प्री परीक्षा के पिछले पांच वर्षों के कटऑफ का अवलोकन करने पर साफ पता चलता है कि इन वर्षों में OBC/EWS/SC/ST का कट-ऑफ UR से ऊपर नहीं गया — और इसका एक बड़ा कारण UPSC की माइग्रेशन पॉलिसी है। लेकिन अब सवाल UPPCS (यूपीपीएससी) का है — UPPCS में वही माइग्रेशन नीति लागू नहीं दिखती और राज्य-स्तर के कट-ऑफ काफी ऊँचे आ रहे हैं जिसे नीचे दिए गए उदाहरण से समझा जा सकता है👇 UPPCS प्री 2023 में कटऑफ UR ≈ 125, EWS ≈ 129,OBC~128 UPPCS प्री 2022 में कटऑफ UR~111,EWS ~114,OBC ~114 इसका मतलब यह है कि अगर यूपी लोकसेवा आयोग भी UPSC की तरह माइग्रेशन लागू करता तो आरक्षित वर्गों का कट-ऑफ UR से ऊपर कभी भी नहीं जाता। UPPCS में माइग्रेशन की कमी और केंद्र/रिलीज़ पॉलिसी में पारदर्शिता न होने के कारण आरक्षित वर्गों के लिए वास्तविक अवसर और भी कम हो जा रहे हैं। यदि उत्तर प्रदेश लोकसेवा खुद को UPSC के मानदंडों के अनुरूप बताता है, तो कम से कम माइग्रेशन तथा समतुल्य पारदर्शिता लागू करना चाहिए,नहीं तो लाखो अभ्यर्थियों,विशेषकर आरक्षित वर्गों के लिए असमानता और अनुचितता बनी रहती है। 📢 आइए आवाज़ उठाएँ: #15_दिसंबर_महाआंदोलन_प्रयागराज_चलो — सही और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की माँग करें। ✍️ मुकेश वर्मा

Mukesh Kumar Verma

12,344 views • 7 months ago

यह अंकित अवस्थी है यूट्यूब पर उनके लाखों सब्सक्राइबर है जिसमें सबसे अधिक दलित पिछड़े हैं यह खुलकर SC/ST/OBC के खिलाफ जहर फैला रहे हैं। इनका मानना है कि रोहित वेमुला के साथ कोई जातिगत भेदभाव नहीं हुआ,रोहित वेमुला ने फर्जी SC सर्टिफिकेट बनाया। राजनीति के लिए रोहित वेमुला के मामले को जातिगत भेदभाव से जोड़ा गया। UGC के मामले में भी अंकित अवस्थी SC/ST/OBC के ख़िलाफ़ हैं। रोहित वेमुला के पिता OBC और उनकी माता SC समुदाय से हैं. रोहित वेमुला के माता-पिता का तलाक हो गया था । रोहित की परवरिश उनकी माता ने की. वो अपने ननिहाल में बड़े हुए. उनकी पहचान माता की जाति से हुई. जातीय भेदभाव का घुट पीना पड़ा. मौका मिलते ही उन्हें हर पल एहसास दिलाया वो SC समुदाय से हैं. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पति पत्नी तलाक होने पर अगर बच्चे पत्नी के साथ रहेंगे तो फिर वह माँ की जाति से जाने जाएंगे।

Gaurav Pal

44,783 views • 6 months ago

BJP ही नहीं मोदी सरकार के मंत्री और सांसद भी लगातार झूठ बोलते हैं आज कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जी को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश में जुटे रहे कर्नाटका में मुसलमान आरक्षण के बारे में भी निरंतर आपको झूठ बताया गया है- तो उसका सच सुन लीजिए👇 ▪️हाल ही में पेश हुए Budget में कर्नाटका की कांग्रेस सरकार ने SC, ST, OBC के लिए सरकारी ठेकों में आरक्षित ठेके की सीमा ₹1 करोड़ लाख से बढ़ाकर ₹2 करोड़ की ▪️कांग्रेस सरकार ने ही 2015 में SC, ST को ₹50 लाख तक के सरकारी ठेकों में 24% आरक्षण दिया ▪️जुलाई 2023 में SC/ST आरक्षित ठेकों की सीमा को ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दिया गया ▪️जून 2024 में सरकारी ठेकों में OBC को भी आरक्षण दिया गया • Category-I में पिछड़े वर्ग को 4% आरक्षण दिया गया • Category-IIA में अति पिछड़े वर्ग को 15% आरक्षण मिला ▪️इस समय सरकारी ठेकों में आरक्षण • 24% SCs/STs • 4% OBC Category I, 95 पिछड़ी जातियों को फायदा • 15% OBC Category IIA, 102 पिछड़ी जातियों को फ़ायदा • 4% OBC Category IIB, मुस्लिम पिछड़ों को आरक्षण ▪️पिछड़े वर्गों की category सितंबर 1994 में तय की गई थी, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय के पिछड़ों को शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक सर्वे के बाद पिछड़ों की IIB श्रेणी में डाला गया ▪️यह आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं बल्कि केवल पिछड़ेपन के आधार पर था ▪️कर्नाटका में इसी के आधार पर शिक्षा और सरकारी नौकरी में IIB श्रेणी के तहत पिछड़े वर्ग के मुसलमानों के लिए 31 सालों से 4% आरक्षण लागू है ▪️न तो राज्य में पहले BJP सरकारों (2006, 2008, 2019) ने और ना ही पिछले 11 वर्षों से सत्ता में रही मोदी सरकार ने इस आरक्षण पर सवाल उठाया ▪️क्या BJP को सरकारी ठेकों में मिल रहे आरक्षण से दिक्कत है या फिर उसे सामाजिक आर्थिक कारणों से SC, ST, OBC के आरक्षण से ही तकलीफ़ है? कांग्रेस के खिलाफ अनर्गल झूठ फैलाने के बजाय BJP आरक्षण पर अपना रूख साफ़ करे - जहाँ उनकी नियत में हमेशा से खोट रही है

Supriya Shrinate

93,326 views • 1 year ago

देश मे असली आरक्षण तो मुगलो और अंग्रेजो के जमाने से ब्राह्मण ही ले रहे है. जब SC, ST, OBC पढने लगे,उन्होने अपना हर स्थान पर हक और प्रतिनिधित्व मांगा तो यही ब्राह्मण आरक्षण का रोना रोने लगे. डॉ बाबासाहेब आंबेडकर जी ने संविधान के माध्यम से आपको वो हक और अधिकार दिलाए. जय भीम 💙🙏🏻 ब्राह्मणो का आरक्षण.... देश के हर उचे पद पर ब्राह्मण आरक्षण है.देश के आजादी से लेकर अब तक सर्वोच्च न्यायालय पर सिर्फ ब्राह्मण आरक्षण रहा है .दो या तीन SC वर्ग से होंगे. विद्यापीठो मे प्रोफेसर, HOD पदो पर सब ब्राह्मण आरक्षण. कोलेजियम, लेट्ररल एन्ट्री आरक्षण से ब्राह्मणो की नियुक्ती होती है. फिर भी आरक्षण के विरुद्ध दिन रात ब्राह्मण ही रोते रहते है. क्यूँकी ब्राह्मणो के सामने जिनको खडे रहने का हक नही था वो आज उनके बराबरी में आकर बैठ गये है. इसी दर्द के कारण 52 आरक्षण का रोना रोते है. आरक्षण ये आपका हर स्थान पर प्रतिनिधित्व है. जिसपर सिर्फ ब्राह्मण कब्जा जमाये बैठे है. Thank you Dr Babasaheb Ambedkar 🙏🏻💙 We are because, he Was

Pinky 🪷⛩️☸️

38,773 views • 7 months ago

देश में ST/SC, OBC और अल्पसंख्यक वर्गों के लिए कई स्कॉलरशिप में आय सीमा 2.5 लाख रुपये निर्धारित है, जबकि EWS श्रेणी के लिए यह सीमा 8 लाख रुपये है। ये पक्षपात है, इसीलिए हम सामाजिक वर्गों को साथ लेकर एक मजबूत मंच तैयार करेंगे, ताकि उनकी आवाज़ को कोई अनसुना न कर सके। जरूरत पड़ने पर हम इस लड़ाई को न्यायालय में भी ले जाएंगे और हर स्तर पर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे। एक ओर सर्वोच्च न्यायालय का सिद्धांत है कि "Bail is the rule, jail is the exception" लेकिन ST/SC और OBC समुदायों से जुड़े कई मामलों में इस सिद्धांत का समान रूप से पालन नहीं होता। ऐसे में, हम इस मुद्दे को भी उठाएंगे और समान न्याय व्यवस्था की मांग करेंगे। : Dalit Congress 🇮🇳 के चेयरमैन (समण) Rajendra Pal Gautam जी 📍 दिल्ली

Congress

113,106 views • 1 month ago