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Jayaatheeeeee....

38,527 просмотров • 4 месяцев назад •via X (Twitter)

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Attention 📢 >ब्रो का नाम देवेन्द्र कुमार महतो है >ब्रो राजनैतिक झारखंड की क्षेत्रीय पार्टी JKLM का नेता है >ब्रो छात्र मूवमेंट में खुद को मेन कैरेक्टर साबित करने में लगा है >ब्रो प्रोटेस्ट साईट में ही टेंट और कुर्सियां लगाकर बैठा हुआ है, >असली छात्र आन्दोलन का इस व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है >असली छात्रों की प्रोटेस्ट साइट भी उसी पार्क में दूसरी तरफ है जहां सारे छात्र भारी संख्या में उपस्थित हैं >छात्रों ने पहले दिन से हर राजनैतिक पार्टी से किनारा कर लिया था >इस व्यक्ति की मेन कैरेक्टर बनने की जिद्द की वज़ह से ही छात्रों को दो दिन बिना टेंट के पानी में भीग के निकालने पड़े, क्यूंकि उनको दूसरे टेंट की परमिशन नहीं मिली >हमारी टीम और अन्य influencer द्वारा भेजा गया खाना, चादरें और अन्य सामान भी इनके द्वारा इधर से उधर किया गया, >भाई जान बूझकर छात्र मूवमेंट को खराब और भटका कर रहा, >भाई अपनी विधायक बनने की जिद्द में छात्रों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा >नोएडा में बैठा भांड मीडिया भी इसको जबरदस्ती सोनम वांगचुक का भतीजा साबित करने में लगा है

खुरपेंच

515,962 просмотров • 28 дней назад

Wo log enjoy kar rahe hai !
3:06

Sensitive content

Wo log enjoy kar rahe hai !

Dr. Tim Guptill

978,786 просмотров • 11 дней назад

यह एक बेहद दुर्लभ और डरावना वीडियो है.तिब्बत के इसी जिझांग ग्लेशियल लेक के फटने से नेपाल में भीषण बाढ़ आई... Nyalam काउंटी में स्थित जिझांग ग्लेशियल लेक के मोराइन डैम के अचानक टूटने और भीषण जलप्रलय की यह घटना कैमरे में कैद हो गई. चीन ने भारत और नेपाल से सटे तिब्बत बॉर्डर और ऊंचे पर्वतीय इलाकों में रिमोट सेंसिंग स्टेशन,ऑटोमेटेड ड्रोन आदि तक इक के साथ काफी हाई-टेक निगरानी नेटवर्क बनाया हुआ है. झील के पास लगे सेंसर जो जलस्तर बढ़ते ही कंट्रोल रूम और ड्रोन सिस्टम को अलर्ट भेज देते हैं. चीन का Tibet Autonomous Region Authorities और स्थानीय वैज्ञानिक टीम इन झीलों पर लगातार नजर रखती है. वे समय-समय पर ऑटोमेटेड ड्रोन उड़ाकर या झीलों के पास स्थापित कैमरोंऔर ड्रोन स्टेशन से झील का जलस्तर, दरारें और ग्लेशियर पिघलने की स्थिति रिकॉर्ड करते हैं. चीन की एजेंसियों और वैज्ञानिक शोधकर्ताओं को इस बात की खबर पहले से थी कि यह झील High Risk और खतरनाक स्थिति में है. लेकिन चीन की तरफ से नेपाल को Real-time warning बहुत देरी से मिली जिसकी वजह से निचले इलाकों में भारी तबाही हुई. हालांकि दोनों देशों के बीच आपदा डेटा साझा करने के समझौते हैं,लेकिन नेपाली अधिकारियों का कहना है कि झील टूटने के दौरान तुरंत सटीक जानकारी या वॉटर-लेवल अलर्ट नहीं भेजा गया. हालांकि International Centre for Integrated Mountain Development ने पहले से चेतावनी दी गई थी कि यह झील कभी भी फट सकती है. लेकिन इस तरह की "सामान्य चेतावनी" और बाढ़ आने के 1-2 घंटे पहले मिलने वाले "लाइव अर्ली वार्निंग" में फर्क होता है, जो नेपाल को समय पर नहीं मिल सका. पूर्व सूचना के अभाव में नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका नहीं मिला.

Ruby Arun रूबी अरुण

1,243,091 просмотров • 6 дней назад