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Kranti Kumar सच को सच कहने की हिम्मत होनी चाहिए ।
12 条评论

कमर का बेल्ट कस लिजिए. छाती पकड़कर रख लीजिए. सर दर्द की गोली बगल में तैयार रखिए. हो सकता पोस्ट पढ़ने के बाद धरती हिल जाए. 2013 में मुज्जफरनगर में बड़ा दंगा हुआ. पुलिस इस दंगे को रोकने में नाकामयाब रही. 50,000 लोगों को पलायन करना पड़ा, अधिकतर संख्या मुसलमानों की थी. कई दशक बाद राज्य में दंगा रोकने के लिए सेना बुलानी पड़ी. तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खामोश बनकर मिट्ठू बने रहे. अंत में क्या हुआ. सत्ता से बाहर हो गए. वही गलती अब ममता बनर्जी कर रही हैं. खामोश रहकर दोनों तरफ से मिट्ठू बन रही हैं. 2026 में जनता सबक सिखाएगी. शासक का काम है राज धर्म निभाना. सही को सही और गलत को गलत कहना चाहिए. दोनों तरफ से मिट्ठू बनने वाले किसी ओर के नही होते. राजनीति में जो भी दोनों तरफ से मिट्ठू बना रहा, बहुजन से सर्वजन बना है, उसकी राजनीति ICU में पहुंच गई है. सर दर्द हुआ तो अब आप लोग गोली खा सकते हैं.

@KraantiKumar एक काइयां मुल्ले का इंटरव्यू लेने एक सीधे सादे व्यक्ति को बिठा दिया, इनसे निपटने के लिए इनसे भी ज्यादा काइयां होना पड़ेगा, इसकी औकात नहीं है ये किसी भी बात का जवाब दे पाए पर सवाल ये है कि सवाल करने वाला जवाब भी देना जानता हो |

@KraantiKumar नहीं करते सिर्फ उत्सव करते हे उत्सव और प्रार्थना मे फर्क़ हे रही बात गणेशोत्सव जो मुसलमान प्रार्थना समजते हे वो असल मे उत्सव हे जो लोकमान्य टिळक ने चालू किया देश के लोगों को एकजुट करने हिन्दू धर्म मे इसका कोई उल्लेख नहीं

@KraantiKumar अबे साले भडवे मानसिक रोगी कांवडिया ही क्यों नहीं चलें हमारी सडकों पर तैनात तुम पिशाच भी चलते हो।सडक चलने के लिए ही बनी है।जाम के लिए नहीं।लेकिन कोई तलवार से डरकर इतनी पीढियों तक मानसिक संतुलन खो देता है क्या।

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@KraantiKumar jo sach ko swikar na kar sake wo anpadh pattalkar hai

@KraantiKumar नमाज मस्जिद या पार्क में पढ़ने का विकल्प है कांवड़ लेकर कही जाना है

@KraantiKumar नहीं हिन्दू रोड पे पूजा नहीं करते हैं

@KraantiKumar आयोजन कहीं भी हो और किसी का भी हो,बस इतना ख्याल रखें कि आमजन को कोई असुविधा न हो।

@KraantiKumar मूर्ख लोग हिंदू लोग सड़क का इस्तेमाल कही धार्मिक स्थल पर जाने के लिए रास्ते के रूप में करते हैं जबकि मुसलमान सड़क को ही मस्जिद समझते हैं ।

@KraantiKumar कानों यात्रा होती है और यात्रा हमेशा सड़क पर ही होती है. आराम के लिए रुकते भी है तो साईड मे ही रुकते है, रास्ता नहीं बदं करते. मुल्लाओं को अक्ल हो ही नहीं सकती.

@KraantiKumar All the blind followers are busy opposing this interview but no one is ready to accept that everyone is troubled by just 30 minutes of Namaaz
