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Lukaune Thauwai Chaina #newarnimaicha

28,831 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

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अमेरिका का गेर जिम्मेदार राष्ट्रपति Donald Trump भारत पर 25% Terrif और साथ में Russia से व्यापार करने के लिए पेनल्टी लगानें का ऐलान कर चुके हैं। आश्चर्य होता है की अमेरिका जैसे सुपर देश के पास राष्ट्रपति को सलाह देने वाले सिर्फ एकतरफा आर्थिक पहलू देखकर Trump को भारत पर Terrif लगाने का सलाह देते है या ट्रम्प अपनी मर्जी से फेसले लेते हैं? Canada के Business Tycoon हो - #Pakistan के Arif Jhakariya हो - पाकिस्तानी मिडिया की बेबाक पत्रकार Arzoo Qadri हो - या अमेरिका का राजनेता Nikki Haley हो, पुरा विश्व इस बात पर एक सुर में कह रहा की भारत पर टैरीफ लगाना ट्रम्प को भारी पड़ेगा।। भारत पर टैरीफ लगाने पर को सिर्फ खरोंच आयेगी, भारत का कोइ नुक़सान नहीं होगा किन्तु Asia में अमेरिका का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। आज Chaina पर अमेरिका का दबाव है, वो भारत के सशक्त बनने की वजह से है, अमेरिका अगर भारत को दुश्मन समझेगा तो उनका घाटा होगा। भारत के रुस से तेल खरीदने पर अमेरिका को आपत्ति है, पर नाटो देश आज भी गैस के लिए रुस पर निर्भर है। Trump चाहते हैं की भारत उसके दबाव में आये, लेकिन अमेरिका की Amazon - Microsoft - Google - Apple- Tesla जैसी कंपनियां भी ट्रम्प के दबाव को दरकिनार करके भारत में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है✅ 1965 - 1971 -1974 - 1998 में जब भारत कमजोर था, तब भी अमेरिका का दबाव में भारत नहीं आया था। आजका भारत सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि विश्व में शक्ति के रुप में स्थापित हो चुका है, तब ट्रम्प का ये Tariff Bomb अमेरिका को भारी नुक्सान पहुंचाएगा ।। अंत में सिर्फ इतना ही की भारत पर टैरीफ लगाकर ट्रम्प ने कुल्हाड़ी पर पैर मारा है, ट्रम्प सिर्फ एशिया में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में अप्रासंगिक हो जायेगा। जय हिन्द 🇮🇳

अखण्ड भारत संकल्प

21,278 просмотров • 11 месяцев назад

चीन सालों से दुनिया को प्रभावित करने और भारतीय माइंडसेट को मैनिपुलेट करने के लिए यह नैरेटिव चलाता रहा कि Chaina बहुत महान है, भारत से 100 साल आगे है और भारत में सब कुछ घटिया व बेकार है। लेकिन अब यह रणनीति उसी पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। 🇮🇳 पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर कई भारतीय यूजर्स ने चीन की उस चमकदार छवि पर सवाल उठाए हैं, जिसे वर्षों से दुनिया के सामने पेश किया जाता रहा। चीन ने अपनी सकारात्मक छवि बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया, इंफ्लुएंसर्स को बुलाया, ऊंची-ऊंची इमारतें, चमचमाते शहर और आधुनिक सड़कें दिखाईं। नतीजा यह हुआ कि कई लोग, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, यह मानने लगे कि चीन भारत से बहुत आगे निकल चुका है। आलोचकों का दावा है कि इस प्रचार के पीछे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने वर्षों तक मेहनत और संसाधन लगाए। वहीं कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने चीन की गरीबी, झुग्गियों, असमानता और सामाजिक चुनौतियों को सामने लाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार चीन में आज भी ऐसे क्षेत्र हैं जहां लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। विशेष रूप से चीन का हुकौ (Hukou) सिस्टम चर्चा का विषय बना है। इस व्यवस्था के तहत नागरिकों के अधिकार और सरकारी सुविधाएं काफी हद तक उनके पंजीकृत क्षेत्र पर निर्भर करती हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच बड़ा अंतर पैदा होता है। कई प्रवासी मजदूर शहरों में काम तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें और उनके परिवारों को समान सुविधाएं नहीं मिल पातीं। इसलिए जो लोग बार-बार कहते हैं कि "चीन हमसे 100 साल आगे है", उनके दावे पर अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि चीन की उपलब्धियां वास्तविक हैं, लेकिन उसकी चमकदार छवि के पीछे की चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अब जब सोशल मीडिया पर चीन की आंतरिक समस्याओं को लेकर चर्चाएं बढ़ी हैं, तो चीन के सरकारी मीडिया जैसे ग्लोबल टाइम्स की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस बहस का असर दिखाई देता है। कुछ लोगों का मानना है कि राहुल गांधी जैसे नेताओं के लिए अब चीन की खुलकर प्रशंसा करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। 🤔🇨🇳🇮🇳 🔥 निष्कर्ष: किसी भी देश का मूल्यांकन केवल उसकी ऊंची इमारतों और चमकदार शहरों से नहीं, बल्कि वहां के आम नागरिक के जीवन, अवसरों और समान अधिकारों से किया जाना चाहिए।

अखण्ड भारत संकल्प

23,101 просмотров • 20 дней назад

आज़म ख़ान जी बोल रहे थे~ “ मैंने जेल में सुना था एनकाउंटर हो रहे हैं ,और जब मुझे मेरे बेटे से अलग किया जाने लगा तो मैंने पूछा हम लोगों को अलग क्यों किया जा रहा, किस जेल ले जा रहे तो किसी ने कुछ बताया नहीं। तभी मैंने बेटे को गले लगा कर कहा कि ज़िंदा रहे तो बाहर मिलेंगे वरना ऊपर मिलेंगे” ये दर्द जो इस आवाज़ में है वो करोड़ों लोगों के भीतर है। कुछ चुप हैं कुछ डरे हुए , लेकिन उन सभी लोगों को और हमें ख़ुद आज़म ख़ान जी से सीखने की ज़रूरत है। कितना आसान होता उनके लिए एक “ हाँ ” भाजपा को कह देना और सब पीड़ा से मुक्ति पा जाना , लेकिन उन्होंने “ना” चुना है , जब यातनाएँ जान तक बन आए तो ना कहना मुश्किल है लेकिन आत्मा मार कर कौन ज़िंदा रहा है? दो तस्वीरें इसी भारत में हैं। अनंत सिंह पर जब दुलारचंद यादव ही हत्या के आरोप लगे उसके बाद भी ख़बरे आईं की अनंत सिंह से गिरफ्तारी देने के लिए “रिक्वेस्ट” की गई! उनका पंखा और ब्रीफ़केस तो पुलिस ने उठा रखा था! वहीं दो Pan Card पाए जाने पर जो सबसे कड़ी सज़ा 7 साल की थी वो आज़म ख़ान जी को सुना दिया गया। न्याय के लिए खड़ा रहना आसान नहीं पर आसान रास्ता चुन कर इतिहास में विलीन हो जाने से बेहतर है कठिन रास्ता चुनना और इतिहास में अमर हो जाना।

Priyanka Bharti

190,115 просмотров • 7 месяцев назад