Sensitive content

This media may contain sensitive content.

Video yükleniyor...

Video Yüklenemedi

Ana Sayfaya Dön

Natalie0632 @NatalieDought1 #natalie0632

66,561 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

0 Yorum

Yorum bulunmuyor

Orijinal gönderinin yorumları burada görünecek

Benzer Videolar

चुनाव ख़त्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से कहा • घर से काम करो • मेट्रो से चलो • पेट्रोल डीजल बचाओ • सोना मत ख़रीदो • विदेश मत जाओ • विदेशी ब्रांड का सामान मत ख़रीदो • खाने का तेल कम इस्तेमाल करो • खेत में खाद कम डालो यह कोई नेक सलाह या इमोशनल अपील नहीं है. यह असल में मोदी और उनकी सरकार की नाकामी का जीता जागता सबूत हैं ना energy security सुनिश्चित कर पाये, ना रुपया बचा पाये, ईंधन की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं - चुनाव खत्म होने पर सच स्वीकारने को मजबूर हैं इस सच के बारे में मोदी जी को राहुल गांधी जी ने मार्च के महीने में ही आगाह किया था, ईंधन की किल्लत के बारे में चेताया था. तब उनकी अनसुनी करने का नतीजा आज सबके सामने है लेकिन हिपोक्रेसी की भी सीमा होती है. देश को पेट्रोल डीजल बचाने की सलाह देने वाले मोदी जी ख़ुद काफिले के साथ बेमतलब का रोडशो कर रहे हैं. आपको विदेश यात्रा ना करने की नसीहत देकर ख़ुद गर्मी से बचने के लिए 15 तारीख को यूरोप निकल रहे हैं 12 साल सत्ता में काबिज रहने के बाद आज देश से कहना पड़ रहा है क्या ख़रीदें, क्या नहीं, कैसे चलें, कहाँ जाएँ, कहाँ नहीं इतने अच्छे दिन नहीं चाहिए थे मोदी जी. आप तो झोला उठा कर निकल लेंगे - लेकिन देश को तबाह करने में आपने कोई कसर नहीं छोड़ो है यह आपके compromised होने का नतीजा है - अब आपके बस की बात नहीं

Supriya Shrinate

94,297 görüntüleme • 3 ay önce

बेहद शर्मनाक 🥹 घंटा विश्व गुरु बनेंगे हमारे देश के पढ़े लिखे और सामाजिक मुद्दों को जड़ से उठाने वाले माननीय @raghav_cwhadha राघव चड्ढा जी को संसद से बाहर किया गया 🤬 क्योंकि ये जनता के हक में बात करते थे, उनके छोटे छोटे मुद्दे उठाते थे और पढ़ाई लिखाई से लेकर सिम कार्ड मामला और भ्रष्टाचार, महंगाई और टोल पर लूट, हवाई जहाज लूट जैसे बहुत मुद्दे इन्होंने गहराई से उठाया 🤯🥹🥹 जो जनता को लूटने वाले लोगों को अच्छा नहीं लगा 👇 चोरों को डर हो गया कि ये सब को जागरूक कर देगा तो हमारा धंधा नहीं चलेगा 👍 आज तक पहला व्यक्ति ये मुझे लगा कि देश का PM होना चाहिए 👇 लेकिन गिद्दों के झुंड में अकेला शेर फंस गया लेकिन ये समझदार जनता इनके साथ है और इनके लिए आवाज उठाना चाहिए 🤯 क्या आप लोग तैयार है ❓ सब लोग आवाज उठाए ताकि हमारे लिए लड़ने वाला निराश न हो ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और लोगों को जागरूक करें 👇 धन्यवाद 👏 #RaghavChadha #AAP

Raj Academy Prayagraj

32,188 görüntüleme • 5 ay önce

लाखों दर्शकों से कहता हूँ, जाकर कोई फैक्ट-चेक करे। 1896 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम् गाया गया, जिसकी अध्यक्षता मुस्लिम नेता रहमतुल्लाह अहमद सयानी ने की। वहाँ से लेकर 1923 तक कभी कोई आपत्ति नहीं हुई। 1923 के अधिवेशन में तो उस समय मोहम्मद अली जौहर ने उसकी अध्यक्षता की थी उन्होंने आपत्ति की फिर भी पूरा गाया। झूठ बोलते हैं ये लोग। मैं पूछना चाहता हूँ, 1896 से 1937 तक हर बार कांग्रेस पूरा गा रही थी, तो 1937 में क्या हुआ जो काट दिया? मुस्लिम लीग और जिन्ना ने कहा कि आपको यह वंदे मातरम् काटना पड़ेगा, आप एक के बाद एक सरेंडर कर रहे थे। 1905 में बंग-भंग के बाद उस समय सारे हिंदू-मुसलमान एक होकर वंदे मातरम् गाते थे, मगर ये कट्टरपंथियों के आगे झुक गए। 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र माँग लिया। फिर उनकी हिम्मत और बढ़ी। फिर 1920 में इन्होंने कहा, टर्की का खलीफा हट गया है, तो अब हम टर्की के खलीफा के लिए आंदोलन करेंगे और महात्मा गांधी ने अली का समर्थन किया। उनकी हिम्मत और बढ़ गई। उसके बाद जिन्ना ने कहा, मैं महात्मा गांधी को महात्मा नहीं बोलूँगा। इसलिए हर फिल्म में मिस्टर गांधी बोलता है। फिर उसने कहा, मैं वंदे मातरम् नहीं गाऊँगा और मैं इनको बताना चाहता हूँ, कोई दर्शक जाकर चेक करे। 6 अप्रैल 1938 को नेहरू को जिन्ना ने एक लेटर लिखा और Selected Works of Jawaharlal Nehru, Series One, Volume 22, Page Number 230 से 239 में लिखा है। क्या शर्मनाक लेटर लिखा है। लिखते हैं, हमने वंदे मातरम् हटा दिया है। पॉइंट नंबर नौ पर। फिर उसके बाद लिखते हैं, पॉइंट नंबर 12 पर, अगर आपको तिरंगे से आपत्ति है, तो हम मुस्लिम लीग के भी झंडे को बराबर सम्मान देने को तैयार हैं। और पॉइंट नंबर सात पर लिखते हैं, मुसलमानों को सरेआम गोहत्या करने का अधिकार होगा। क्या गजब का सरेंडर किया नेहरू ने।

Dr. Sudhanshu Trivedi

138,607 görüntüleme • 11 saat önce

केंद्र सरकार ने मानगढ़ धाम को पुरातात्विक प्रामाणिकता और अखंडता न रखने का हवाला देकर अंग्रेजी-सामंती व्यवस्था के विरुद्ध शहीद हुए 1,500 से अधिक भील आदिवासियों के बलिदान का अपमान किया है। इससे राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी समाज की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुँची है। एक ओर भाजपा सरकार जनजातीय गौरव की बात करती है, दूसरी ओर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय पहचान देने से इनकार करती है। मानगढ़ धाम आदिवासी अस्मिता, स्वाधीनता संग्राम और हजारों शहीदों के बलिदान का प्रतीक है। केंद्र सरकार से हमारी मांग स्पष्ट है कि आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान करे और मानगढ़ को राष्ट्रीय दर्जा दे।

Rajkumar Roat

12,205 görüntüleme • 18 gün önce