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OBC SC बहुजनो को महाकुम्भ में नहाने की जरूरत नही है
18,440 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)
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बुद्ध ने शांति के लिए संन्यास का मार्ग चुना बुद्ध भी अपने से ऊपर ईश्वर को मानते थे तभी वह हमेशा ईश्वर के ध्यान में लीन रहते थे पर आज करके झूठ अंबेडकरवादी और नवबोध बौद्ध धर्म की नई परिभाषा ही बनाने में लग गई है होगा कुछ नहीं सिर्फ जन्म व्यर्थ कर रहे हैं ऊपर वाले टकलू की तरह

अगर तुम्हें लगता है ओबीसी, sc, st का ठेका लिए बैठे हो इस भरम में मत रहो क्योंकि भीमटे और मिमटे तबतक एक हैं जबतक मिमटों की जनसंख्या भीमटो से अधिक नहीं है जैसे ही मिमटों कि जनसंख्या अधिक होगी बाबा साहब की ही मूर्ति सबसे पहले मिमटों द्वारा तोड़ी जाएगी!

हा हा हा

तो क्या ओ ज्ञानी नही थे, जाते ही क्यो थे नहाने,।। उन्हें नहाना था उन्हें नहाने नही दिया, तुम्हे नहाने दे रहे तो तुम्हे नहाना ही नही है,।। बड़े गन्दे लोग हो, और तुम्हारा विचार भी गन्दा है

ओबीसी समाज को अपने धर्म और महाकुंभ में आस्था है ओबीसी समुदाय के लोग महाकुंभ में स्नान करते हैं और करते रहेंगे। आप ओबीसी समाज के ठेकेदार ना बने तो ही अच्छा है

अरे मूढ क्या समस्त समाज तेरा चाकर है?यह तो सीख लेता तुम शब्द कहां और किन्हें स्बोधित होता? कितना अधम और अभिमानी है?

स्कूल विद्यालय यूनिवर्सिटीज मैं जाने की जरूरत नहीं है मेरे बहुजन भाइयोंहाथ जोड़कर निवेदन है बाबा जी का संविधान पढ़ोउसी से जीवन कल्याण होगा क्योंकि वह बाबा जी की देन हैकिसी देश की देन नहीं है(हम ऊपर वाले पर तो विश्वास ही नहीं रखते) जय बहुजन
