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RSS-BJP में नेहरू और गांधी के दीवाने ❤️

62,518 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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Citizens of India1 год назад

आरएसएस-बीजेपी का ख़ुद का कुछ मॉडल हो तो फॉलो भी किया जाए , एक ही मॉडल है उनका तो कि देश को अदानी को दे दो और ख़ुद मज़े करो

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M P Singh1 год назад

@DineshKaushik_ पलटीमार। इतने दिनों तक मुंह में दही जमा हुआ था। धीरे-धीरे सब बोलेंगे।

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OnlineBookClub.org1 год назад

New TikTok-alternative by our creator @EckhartAurelius that pays much more per view than TikTok, Meta, and YouTube. ☑️ Supports Free Speech ☑️ Much Better Privacy for Users ☑️ No Political Bias ☑️ Won't sell your data to the government, any government. Any questions??

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Iliyas_malik_ 2.01 год назад

और कांग्रेस के 80% नेता RSS के दीवाने 😂 जब तक कांग्रेस अपने अंदर फैले छुपसंघियो को नही निकाल देती सत्ता से दूर ही रहेगी

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Hahakar HaHaHa1 год назад

लगे हाथ मीडिया को भी आईना दिखाया

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Sandhya Chaturvedi.1 год назад

आखिर कब तक! लौट के नेहरू ,गांधी पर ही आना है, यदि देश बचाना है!👍 कुछ अड़ियल, ढीठ ,अहंकारी और अंधभक्तों को छोड़कर 😒🙄

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shashikant Gosavi1 год назад

Tathastu.

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DK sherikar1 год назад

#StockMarketIndia

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Avinash Kanda, CPA1 год назад

कुछ ही बचे हैं

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Victory light (Gyan Vyaapi MANDIR wapis do)1 год назад

Savarkar ki diwani dekhi hai? @RahulGandhi kaha se dhund ke lata hai aise chaman

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वोट चोरी RSS सभी को वोट के अधिकार के ख़िलाफ़ थी।लेकिन नेहरू जी सभी व्यस्क नागरिकों के लिए वोट के अधिकार को मौलिक अधिकार बनवाने में सफल हो गए। तब RSS की पत्रिका Organiser में लिखा गया कि ‘नेहरू अपने इस फैसले पर बहुत पछताएगें’। लेकिन नेहरू सफल रहे। दरअसल RSS और महात्मा गाँधी-नेहरू की विचारधारा का टकराव RSS के जन्म से ही शुरू हो गया था। भविष्य के भारत की परिकल्पना से जुड़ी तीन ऐसी बातें थी, जो अलग अलग थी: गाँधी-नेहरू भारत के सभी नागरिकों लिए संवैधानिक बराबरी चाहते थे। RSS आज भी सभी नागरिकों को बराबर नहीं मानना चाहती। गांधी-नेहरू की कांग्रेस 1931 के कराची अधिवेशन से ही अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में मुखर थी। लेकिन RSS के जन्म से लेकर संविधान बनने तक, पच्चीस सालों में इस संगठन ने कभी अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात नहीं की। और तीसरा, गाँधी-नेहरू की कांग्रेस 1928 से ही सबको वोट का बराबर अधिकार की बात करने लगी थी। लेकिन RSS कभी ऐसा नहीं चाहती थी। वो universal adult franchise के ख़िलाफ़ थी। अब तय कीजिए कि आपको आगे कैसा भारत चाहिए। गाँधी-नेहरू का या RSS का!

Gurdeep Singh Sappal

16,903 просмотров • 10 месяцев назад