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SC-ST रिजर्वेशन में क्यों ज़रूरी है​ 'क्रीमी लेयर'

135,021 görüntüleme • 7 ay önce •via X (Twitter)

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एक बात तो साफ़ है। ये सरकार स्वर्ण विरोधी है। सुप्रीम कोर्ट में PIL लगी। सवाल सीधा था — “अगर SC/ST परिवार से कोई पहले ही उच्च सरकारी पद पर रह चुका है, तो क्या उसके बच्चों को भी आरक्षण मिलना चाहिए?” केंद्र सरकार का जवाब साफ है: — SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं होगा। OBC का सर्टिफिकेट हर 2-3 साल में नया बनवाना पड़ता है, क्योंकि क्रीमी लेयर चेक होती है। लेकिन SC-ST में? एक बार सर्टिफिकेट मिला, तो पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का हक। अमीर हो या गरीब, IAS हो या मंत्री, कोई फर्क नहीं। जो लोग सबसे ज्यादा लाभ ले चुके हैं, उन्हीं के परिवारों को हमेशा के लिए आरक्षण का लाइसेंस मिल गया है। सामाजिक न्याय का नाम लेकर एलिट कैप्चर को कानूनी संरक्षण।

RHA Reforms

31,882 görüntüleme • 25 gün önce

SC-ST आरक्षण में बंटवारा : SC-ST के आरक्षण पर आज देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले का दलितों और आदिवासियों के आरक्षण पर गहरा असर पड़ने वाला है और इस बात की भी आशंका है कि इस फैसले के साये में भविष्य में SC-ST के आरक्षण को खत्म करने की कोशिश भी हो सकती है। दरअसल आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि SC-ST को मिलने वाले कोटे के अंदर ही कोटा लागू हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC-ST के आरक्षण में उप-वर्गीकरण (बंटवारा) किया जा सकता है। इसका मतलब ये है कि SC-ST की कुछ जातियों को ज्यादा और कुछ जातियों को कम आरक्षण दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य चाहें तो SC-ST के आरक्षण में उप-वर्गीकरण कर सकते हैं। इस फैसले के क्या मायने हैं? ये फैसला SC-ST के आरक्षण पर क्या असर डालेगा? क्या इस फैसले से SC-ST के बीच बंटवारा हो जाएगा? और क्या इस फैसले के साये में SC-ST में क्रीमी लेयर लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा? आइये इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं।

Sumit Chauhan

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