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Today RSS goons brutally attacked Ashutosh S Boddh (Vidrohi) dalit student leader in the evening at around 6pm, at Arts Faculty near gate no 4! पर वाइस चांसलर और प्रॉक्टर के कहने पर चाकू और डंडे से और लाठी से वह खोलते हुए गरम चाय उनके मुंह और शरीर...

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10 Kommentare

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Dr Ritu Singhvor 2 Jahren

सविता राय का कुछ नहीं बिगाड़ सकते तुम, अगला नंबर डॉक्टर रितु का है सविता राय को जानते नहीं तुम सालो रणवीर सिंह की है ऐसी धमकी दी।साथियों इसी तरह से तमाम अटैक हम पर हो रहे हैं। यह यूनिवर्सिटी दलितों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित जगह नहीं है।

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Adv. Ravi Ramveervor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu RSS फिर बैन होना चाहिए हमेशा हमेशा के लिए

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Shivam 🆇vor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu अभी भी समय है एक हो जाओ

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Opposition Lawyer ⚖️vor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu @AmitShah @narendramodi @HMOIndia @PMOIndia कृपया समय रहते हमला करने वाले गुण्डो आतंकियों पर तत्काल प्रभाव कार्यवाही करें अन्यथा दलित समाज यदि आपके खिलाफ उतर गया तो रोक नहीं पाओगे जनसैलाब और लोगों के गुस्से को। DU के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर भी कार्यवाही करें रितू सिंह को न्याय

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पंकज रायvor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu नौकरी नहीं नौटंकी चाहिए । चार जमूरे लेकर कहीं भी बैठ जाओ फिर आंदोलन चालू 🤨

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Shashi Induliavor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu ये साबित हो गया है कि आज़ादी के 75 वर्ष के बाद भी दलितों को अपने हक़ और हुक़ूक़ पाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी देनी होगी। मनुवादी सरकार आसानी से हमें हमारे अधिकार देने वाली नहीं है।

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Vinayaka,पाखंडवाद पर प्रहारvor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu दौलत राम कॉलेज की वाईस चांसलर है या गुंडी ऐसे लोगों को शिक्षा के मंदिर में नहीं जेल के सलाखों के पीछे होना चाहिए आरएसएस,ब्राह्मणवाद,मनुवाद,बीजेपी मुर्दाबाद ये लोग समाज के फ्रिंज एलिमेंट हैं इनके जैसे लोगों का उन्मूलन हीं एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए जरूरी है। 🙏🏿जय भीम जय बिरसा।

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Journalist B Kumarvor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu सत्ता में बैठा मदारी को तनिक लाज शर्म नहीं है एकदम बेशर्म ये सब इसी के आदेश पे हो रहा है

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Dr. Vikas | For RaGavor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu

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Hilly Monkvor 2 Jahren

@ashu_vidrohi @jigneshmevani80 @MehmoodPracha @RahulGandhi @Mayawati @priyankagandhi @BhimArmyChief @BBCHindi @AnandAkash_BSP @Manjeetsnotiyal @manojkjhadu आरोपियों की तत्काल गिरफ़्तारी हो, दलित चुप ना हो तो मार डालो बहुत हो गया 😡😡

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SIR पर अखंड थेथरोलॉजी, प्रचंड फेक न्यूज़ फैलाने वाले विपक्षी नेताओं को डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का करारा जवाब। ये दर्शकों को सुनना चाहिए कि ये वो लोग हैं जो घुसपैठियों के दम पर सरकार बनाने का ख्वाब देखते हैं। और ये बात मैं सब प्रमाण के साथ बोल रहा हूँ। क्यों इनके दिल पर चोट लग रही है? 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेताओं ने बांग्लादेश के अखबार 'डेली स्टार' में आर्टिकल लिखा—'Modi has to go'। क्यों? चुनाव तो भारत में हो रहे थे, बांग्लादेश में काहे आर्टिकल लिखा था? अब समझ में आता है कि बांग्लादेश में आर्टिकल क्यों लिखा था? इस देश में सबसे ज्यादा अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण demographic change हुआ है तो, बकौल असम के मुख्यमंत्री, धुबरी-बरपेटा के इलाके में हुआ है, सबसे ज्यादा धुबरी में हुआ है। और कांग्रेस को सबसे प्रचंड जीत 2024 में मिली तो असम की धुबरी सीट पर। कांग्रेस के रकीबुल हसन 10 लाख 25 हजार वोटों से जीते। अब दर्शकों को समझना चाहिए कि वोट की स्क्रीनिंग और SIR से इनको क्या प्रॉब्लम है? दूसरी बात, अभय दुबे जी आपने डॉक्टर अंबेडकर का नाम लिया। भाई साहब, भारत के इतिहास की पहली चुनावी धांधली का शिकार तो वही हुए थे। 1952 के चुनाव से जुड़े डॉ. अंबेडकर के चुनाव-पिटीशन रिकॉर्ड में 74,333 invalid votes का उल्लेख मिलता है। डॉ. अंबेडकर ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया था। अब आते हैं, इन्होंने जो दूसरी बात कही कि साहब चुनाव आयुक्त तो ऐसा होना चाहिए जो सरकार के थंब के नीचे हो। बिल्कुल। 1999 में एक वोट से अटल जी की सरकार गिरी थी। फिर चुनाव तुरंत क्यों नहीं हुए? चुनाव अक्टूबर तक क्यों ले गए? उस समय चुनाव आयोग की भूमिका और उसके संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठते हैं। अब मैं याद दिलाना चाहता हूँ, थंब के नीचे रहने वाले क्या होते हैं? भारत के चुनाव आयोग के इतिहास में अलग-अलग चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों और बाद की सार्वजनिक भूमिकाओं को लेकर भी बहस होती रही है। और अब पत्रकारिता पर आते हैं। मैं आपके कैमरामैन से कहूँगा—जरा इस पर फोकस करिए, चित्रा जी। अब जरा आशुतोष वर्मा जी और अभय दुबे जी आँखें फाड़ के देखें। ये न्यूज क्या है? इंडियन एक्सप्रेस की न्यूज है, 4 अप्रैल 2012। हेडलाइन थी कि जनवरी की उस रात रायसीना हिल पर हलचल मच गई थी और दो प्रमुख आर्मी यूनिट्स दिल्ली की ओर बढ़ी थीं, जिन्हें सरकार को पहले से सूचित नहीं किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जनवरी की रात हिसार से एक मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री यूनिट की दिल्ली की दिशा में अप्रत्याशित आवाजाही की सूचना मिली थी और आगरा स्थित 50 Para Brigade की गतिविधि का भी उल्लेख किया गया था। लेकिन यहाँ पूरा तथ्य भी सुनिए। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस रिपोर्ट को “alarmist” बताया था और कहा था कि इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने भी सेना के तख्तापलट की आशंकाओं को “absolutely baseless” बताया था। दूसरी तरफ, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट पर कायम रहते हुए कहा था कि उसकी रिपोर्ट कई सप्ताह की पड़ताल के बाद तैयार की गई थी। तो सवाल यही है— अगर खबर सही थी तो सरकार और रक्षा मंत्रालय ने उसे खारिज क्यों किया? और अगर वह महज सामान्य सैन्य अभ्यास था, तो इतनी बड़ी खबर क्यों बनी? यही तो पत्रकारिता का सवाल है। आज SIR पर ज्ञान देने वाले विपक्षी नेताओं से भी यही पूछा जाना चाहिए— जब वोटर लिस्ट की जांच और स्क्रीनिंग की बात आती है तो इतना विरोध क्यों? जब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो जवाब देने के बजाय लोकतंत्र खतरे में क्यों दिखाई देने लगता है? जनता को पूरी बहस सुननी चाहिए। दावे भी सुनिए, उनके प्रमाण भी देखिए और दूसरी तरफ का पक्ष भी सुनिए। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना भी जरूरी है और सवालों के जवाब देना भी। अब फैसला दर्शकों को करना है। #SIR #Congress #SudhanshuTrivedi #VoterList #ElectionCommission Dr. Sudhanshu Trivedi

banwari Maheshwari

15,024 Aufrufe • vor 14 Tagen

कानून, कानूनी तर्कों और सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश से बेखबर, जो असल में राहुल गांधी जी को राहत प्रदान करता है - एक हैरान परेशान BJP, जो उनके सवालों और उनकी निर्भीकता से डरती है - आज फिर अपनी असलियत पर उतर आई. लेकिन आज तो इन डरपोकों ने राहुल जी पर हमला करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सम्मानित नाम को भी धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. आज एक बार फिर यह साबित हो गया कि दुनिया की सबसे बड़ी फेक न्यूज़ फैक्ट्री, जिसे BJP के नाम से भी जाना जाता है एक से एक मक्कार झूठों से भरी हुई है. तथ्य पर तो दो राय नहीं हो सकती - और तथ्य यह हैं 👇 ▪️BJP-RSS की आदत बन गई है कि वे फ़र्ज़ी याचिकाकर्ताओं/वादी के माध्यम से पूरे देश में राहुल जी के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाते हैं. उनका लक्ष्य है अपनी निकम्मी सरकार के ख़िलाफ़ सबसे अडिग और सबसे ताकतवर आवाज़ को चुप कराना - जो उनके बस की बात नहीं है. ▪️आज, इन 30+ मामलों में से एक मामला राहुल जी द्वारा विशेष अनुमति याचिका (SLP) के रूप में सुप्रीम कोर्ट में लाया गया था, जिसमें लखनऊ में दर्ज आपराधिक मानहानि शिकायत को चुनौती दी गई थी - इस शिकायत का उद्देश्य उनकी आवाज को दबाना था. ▪️माननीय सुप्रीम कोर्ट ने राहुल जी की याचिका पर ना सिर्फ नोटिस जारी किया बल्कि लखनऊ ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक भी लगा दी - असल में उन्हें वह पूरी राहत प्रदान की गई जिसकी उन्होंने मांग की थी. ▪️आपको याद ही होगा कि इसी मामले में जब राहुल जी लखनऊ के ट्रायल कोर्ट जज के सामने गए थे, तब BJP की इसी फेक न्यूज़ फैक्ट्री ने माननीय ट्रायल कोर्ट जज की छवि को धूमिल करने और झूठ फैलाने की कोशिश भी की थी. एक वकील के साथ ली गई राहुल जी की तस्वीर को जज की फोटो बता कर चलाया गया था. यह दुखद है कि BJP के राष्ट्रीय पदाधिकारी और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री फर्जी खबरें फैला कर ट्रोल बने हुए हैं. लेकिन शायद यही उनकी एकमात्र उपयोगिता है! सच में, महा मूर्खों का यह गिरोह यह साबित करते नहीं थकता कि यह सब के सब कितने ढोर हैं!

Supriya Shrinate

143,588 Aufrufe • vor 1 Jahr

⦿ दिल्ली की सड़कों पर छात्रों के साथ जो हुआ, इससे मोदी सरकार की राजनीतिक साख को ऐसे घाव मिले हैं, जो कई साल तक नहीं भरने वाले ⦿ दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हमला किया गया। पुलिस और CRPF ने छात्रों को कील लगे डंडे मारे, उनके ऊपर पैलेट गन का इस्तेमाल किया ⦿ सरकार ने ऐसा माहौल बना रखा था, जैसे वो बच्चे नहीं आतंकवादी हैं और अगर वो संसद भवन के आसपास दिखे तो उन्हें गोलियों से भून दिया जाएगा ⦿ देश में 775 स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं, जहां 2 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं और जो 862 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्पेशल नहीं हैं, वहां 14 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं ⦿ पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई ⦿ सरकार के मंत्री ने अलग-अलग राज्यों में हुए पेपर लीक की बात की, लेकिन गुजरात का नाम नहीं लिया, जबकि वहां 4 दिन पहले ही पेपर लीक हुआ ⦿ सरकार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री और NTA ने कभी अपने मुंह से पेपर लीक शब्द नहीं निकाला, यानी जो गलती स्वीकार नहीं कर सकते, वो गलती कैसे सुधारेंगे ⦿ हाल ही में, Re-NEET एग्जाम हुआ, जिसके लिए पूरी सरकार को लगना पड़ा, इसलिए सरकार कमेटियां बनाकर देश और छात्रों को गुमराह करना बंद करे : राज्यसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर कांग्रेस महासचिव Mukul Wasnik जी का वक्तव्य-

Congress

41,997 Aufrufe • vor 2 Monaten

📚✨ Every teacher deserves at least one “Thank You.” 🙏🏻 माता-पिता हमारे पहले शिक्षक होते हैं, जो हमें संस्कार और जीवन-मूल्य देते हैं। और हमारे teachers and mentors हमें ज्ञान, आत्मविश्वास और जीवन में आगे बढ़ने की दिशा देते हैं। 🌱 मेरी अपनी journey में भी मेरे parents, teachers and mentors का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने मुझे हर कदम पर कुछ नया सीखने और बेहतर बनने की प्रेरणा दी।🌸 A teacher’s influence goes far beyond the classroom. उनकी सीख, उनका विश्वास और उनका प्रोत्साहन अक्सर पूरी ज़िंदगी हमारे साथ रहता है।🧡 आज Teachers’ Day पर अपने माता-पिता, सभी teachers और mentors के प्रति दिल से आभार।🙏🏻💕 Thank you for shaping our lives, inspiring us to grow and always believing in us. 🙏🏻🇮🇳 Happy Teachers’ Day 📚 #TeachersDay #Gratitude #EducationForAll #NationFirst 🇮🇳

Sonal Goel IAS 🇮🇳

10,488 Aufrufe • vor 1 Monat

मणिपुर में बीरेन सिंह का इस्तीफ़ा कोई मृत अंतरात्मा के जागने से नहीं दिया गया है, यह मजबूरी में लिया गया निर्णय है ▪️कल से मणिपुर असेंबली में सेशन की शुरुआत थी, बीरेन सिंह के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव आ रहा था - जो वह हर क़ीमत पर हारते, उनके ख़ुद के विधायक उनके साथ नहीं थे ▪️यही नहीं, जो 9 विधायक JDU और MPP से उनके साथ आए थे, वो भी अयोग्य (disqualify) घोषित होने की कगार पर हैं. यह मुँह छिपाने के अंदेशे से दिया इस्तीफ़ा है ▪️मणिपुर असेंबली सस्पेंड रहेगी, तो सवाल पूछने का कोई तरीका ही नहीं है बीरेन सिंह से ▪️एक और ज़रूरी बात - सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी को CFSL को बीरेन सिंह के कथित ऑडियो क्लिप की जांच करने का भी आदेश दिया था, जहां वह राज्य में हिंसा भड़काने का दंभ भरते सुनाई देते हैं. CFSL को एक महीने में सीलबंद कवर में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है ▪️सबको पता है कि मणिपुर में बीरेन सिंह के ख़िलाफ़ भारी आक्रोश है - यहाँ तक उनकी अपनी पार्टी में भी विद्रोह है. BJP विधायकों ने उनके ख़िलाफ़ लगातार शिकायतें की हैं, लेकिन तब भी वो अपने पद पर क़ायम रहे 👉लेकिन सबसे बड़ी असलियत यह है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जलते हुए मणिपुर को लगभग दो साल से अपने हाल पर छोड़ दिया है 👉प्रधानमंत्री के पास विदेश यात्रा के लिए वक्त है लेकिन मणिपुर वो एक बार भी नहीं गए 👉मणिपुर जाना तो छोड़िये, उन्होंने एक बार भी मणिपुर से आए सर्वदलीय लोगों से मुलाकात नहीं की. वो तो अपने विधायकों तक से नहीं मिले 👉जिस हिंसा ने मणिपुर में करोड़ों की संपत्ति तबाह कर दी, बच्चों का बचपन छीन लिया, लोगों की दर्दनाक मौतें हुईं, 60,000 लोगों को विस्थापित कर दिया, जहाँ 50,000 से ऊपर आज भी रिलीफ कैम्प में हैं, मणिपुर की सड़कों पर गोलियाँ और बम चले, सेना और राज्य सरकार में झड़प हुई, औरतों के साथ वो हैवानियत हुई कि रूह काँप जाये उस मणिपुर के असल ज़िम्मेदार नरेंद्र मोदी हैं 👉लेकिन मजबूरी में ही दिया बीरेन सिंह का यह इस्तीफा उन तमाम लोगों, मीडिया और BJP फेक न्यूज़ फैक्ट्री के मुँह पर करारा तमाचा है जो सब चंगा सी का घटिया खोखला दावा करते थे 👉👉👉मोदी जी, कुछ सीखिये राहुल जी से. वो तीन बार मणिपुर हो आए, लोगों को गले लगाया, आँसूँ पोंछे, उनको विश्वास दिलाया - लेकिन आप तो एक बार भी नहीं गए

Supriya Shrinate

125,106 Aufrufe • vor 1 Jahr

एक संस्था है, जिसका नाम है Forum of Democratic Leaders in the Asia-Pacific. जिसके बारे में कहा जा रहा है- ये एक NGO है, जिसको Asia-Pacific क्षेत्र में डेमोक्रेसी के प्रचार प्रसार करने के लिए स्थापित किया गया था। इसमें चार लोग सह-अध्यक्ष Co-President हैं, इनमें एक श्रीमती सोनिया गांधी हैं। आज इस गंभीर विषय पर चर्चा करना चाहेंगे। ये संस्था भारत और कश्मीर के लिए विरोधी बाते करता है पाकिस्तान और इमरान ख़ान की प्रशंसा करता है। एशिया-पैसेफिक में डेमोक्रेटिक लीडर्स फोरम को जो वित्तीय सहायता मिल रही है, वह जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन के योगदान से है। सोरोस वही व्यक्ति हैं जिन्होंने खुले तौर पर कहा है कि उन्होंने मोदी सरकार को गिराने के लिए 1 बिलियन डॉलर निवेश किए हैं… विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहता। कांग्रेस का एशिया-पैसेफिक में डेमोक्रेटिक लीडर्स फोरम से क्या संबंध है? क्या इस फोरम में भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक बातें कांग्रेस की समझ से लिखी गई हैं? क्या कांग्रेस का जॉर्ज सोरोस जैसे भारत विरोधी ताक़तों से कोई संबंध है? देश को इसका सीधा जवाब चाहिए press conference today at the BJP headquarters

Dr. Sudhanshu Trivedi

81,466 Aufrufe • vor 1 Jahr

भारत के उप राष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। महान विद्वान डॉ. राधाकृष्णन, डॉ शंकर दयाल शर्मा, Justice Hidyatullah, K.R. Narayanan, समेत कई महान लोग इस पद पर रह चुके हैं। 1952 से अब तक किसी उप-राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ संविधान के Article 67 के अंतर्गत Resolution for removal of the Vice-President नहीं लाया गया। क्योंकि वो हमेशा निष्पक्ष, पूरी तरह राजनीति से परे रहे। बाबासाहेब डॉ आंबेडकर जी ने Draft Constitution में Officers of Parliament खंड में पेज नंबर 31 पर साफ लिखा था कि - The Vice President of India shall be ex-officio Chairman of the Council of States. भारत के पहले उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 16 मई 1952 को सांसदों से कहा थाः “मैं किसी भी पार्टी से नहीं हूं और इसका मतलब है कि मैं सदन में हर पार्टी से हूं।” लेकिन हमें अफसोस है कि संविधान के adoption के 75वें साल में Chairman की तरफ़ से हो रहे Biased और Partisan व्यवहार ने विपक्षी पार्टियों को उनके खिलाफ यह प्रस्ताव लाने पर मजबूर किया। पिछले 3 वर्षों में उनका आचरण, उनके पद की गरिमा के विपरीत रहा है। कभी वे सरकार के तारीफ़ में कसीदे पढ़ने लगते है। कभी खुद को RSS का एकलव्य बताने लगते है। इस तरह की बयानबाजी, उनके पद को शोभा नही देती। सभापतिजी सदन के अंदर प्रतिपक्ष के नेताओं को अपने विरोधियों की तरह देखते हैं। Senior-Junior कोई भी हो, दोनों सदनों के विपक्षी नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर उन्हें अपमानित करते हैं। सदन में vast experience वाले कई नेता है। कई दशकों तक मंत्री भी रहे है। उनका 40-40 और 50- 50 वर्षों का legislative अनुभव रहा है। ऐसे नेताओं की भी सभापतिजी headmaster की तरह schooling करते हैं। उनको प्रवचन सुनाते हैं। संसद में विपक्ष की तरफ़ से rules के तहत जो भी महत्त्वपूर्ण विषय उठाये जाते हैं, उन पर Chairman planned तरीके से संवाद, बहस, वाद-विवाद नहीं होने देते। बार-बार विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका जाता है। उनकी निष्ठा संविधान और संवैधानिक परंपराओं की जगह सत्ताधारी दल के लिए है। वे अपनी अगली Promotion के लिए सरकार के spokesperson बन चुके हैं। मुझे यह कहते हुए कोई संकोच नहीं कि the - biggest disruptor in Rajya Sabha is the Chairman himself. सदन अगर disrupt होता है तो उसका सबसे बड़ा कारण चेयरमैन साहब खुद हैं। Normally विपक्ष चेयर से protection मांगता है, वही विपक्ष का संरक्षक होता है। पर अगर खुद सभापति सत्तापक्ष और प्रधानमंत्री का खुला गुण-गान कर रहे हों तो विपक्ष की कौन सुनेगा? इसके लिए तो वही कहावत कही जा सकती है कि “बाड़ ही खेत को खा रही है।" जब भी विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है, तो मंत्रियों के जवाब देने से पहले ही, चेयरमैन खुद सरकार की ढाल बन कर खड़े होते है। उनके आचरण ने देश की गरिमा को बहुत नुकसान पहुंचाया है। देश के संसदीय इतिहास में ऐसी स्थिति ला दी है कि हमें उनके खिलाफ यह Resolution का Notice लाना पड़ा। उनके साथ हमारी कोई निजी दुश्मनी या राजनीतिक लड़ाई नहीं है। देश के नागरिकों को हम विनम्रता से बताना चाहते हैं कि हमने बहुत सोच विचार और मंथन करके देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के इरादे से मजबूरी में यह कदम उठाया है।

Mallikarjun Kharge

55,905 Aufrufe • vor 1 Jahr

⦿ 14 अगस्त को हम कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे, जहां हम से कहा गया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के सभी मामले संसद मार्ग पुलिस स्टेशन भेजे गए हैं ⦿ फिर जब हम संसद मार्ग पुलिस स्टेशन गए तो उन्होंने बताया कि घटना वाली जगह कनॉट प्लेस इलाके में है, इसलिए हमें वहां जाना चाहिए ⦿ हम वापस कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए और वहां अधिकारियों ने जैसे ही शिकायत पढ़ी, उन्होंने शिकायत हमें वापस कर दी और हमें वहां बहुत देर तक बिठाए रखा ⦿ SHO ने मुझसे फ़ोन पर बात की और कहा कि हम यह केस नहीं लेंगे, क्योंकि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं ⦿ आखिर में, हमने DCP क्राइम ब्रांच से संपर्क किया और हमें बताया गया कि शिकायतें सीधे यहां नहीं आती हैं- इस पर मैंने उन्हें पुलिस स्टेशन से जुड़े वाकये को बताया, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई ⦿ नेता विपक्ष राहुल गांधी जी के यहां आने के बाद, शिकायत पर सिर्फ मुहर लगाई गई है, लेकिन अभी भी FIR दर्ज नहीं की जा रही है 👉 ये साफ तौर पर एक अपराध है। हमारे पास लेडी हार्डिंग अस्पताल की MLC कॉपी है, जिसमें लिखा है कि शरीर में गहरे घाव हैं और उनसे खून बह रहा है History of the patient being hit by pellets fired by an unknown police officer near Jantar Mantar, Delhi, on 20-07-26 at about 3 PM, following which he came by self to the Accident and Emergency Department of LHMC and Smt. SK Hospital, Delhi. The patient is conscious and well-oriented to time, place, and person. Multiple puncture wounds, varying in size from 0.5 cm to 0.8 cm, are present over the right side of the face, chest, right upper limb, and right side of the neck. The margins of the wounds are clean, surrounded by contusion, and fresh blood is oozing from the wounds. हमारे पास छर्रे हैं, जो शरीर से निकले हैं। साहिल की आंख में भी 3 छर्रे हैं और अब इन्हें आंख से नहीं दिखेगा। हम सिर्फ FIR दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। : छात्र आंदोलन में पैलेट गन से घायल हुए साहिल की वकील का बयान-

Congress

33,453 Aufrufe • vor 1 Monat

बारिश ने सब कुछ उजाड़ दिया, मगर “रोटी जिम्मता जाइयो” की मीठी मनुहार को यह बरसात भी नहीं उजाड़ पाई। बारिश ने सब कुछ उजाड़ दिया, मगर “रोटी जिम्मता जाइयो” की मीठी मनुहार को यह बरसात भी नहीं उजाड़ पाई। 80 साल की उन बुजुर्ग दादी की आंखों से जब आंसू गिरे, तो मानों कलेजा मुंह को आ गया। उन्होंने सिसकते हुए बताया कि उनके बेटे और परिवार ने पहली बार बड़े अरमानों से खेत में ईसबगोल की फसल लगाई थी। पर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। रात के 3:00 बजे ऐसा भीषण तूफान आया कि चाहकर भी कोई घर से बाहर कदम नहीं रख सका; आसमान से बिजली इस कदर कड़क रही थी कि मौत का साया मंडरा रहा था। ​जब सुबह उजाला हुआ और परिवार खेत पर पहुंचा, तो वहां का मंजर देखकर सबकी चीख निकल गई। एक ही रात में पूरी मेहनत, सारा निवेश और सुनहरे सपने मिट्टी में मिल चुके थे। दादी रुंधे गले से बस यही कह रही थीं, "शायद यह हमारी तकदीर में ही नहीं था।" ​लेकिन इंसानियत की पराकाष्ठा देखिए—सब कुछ बर्बाद हो जाने के बाद भी, जब हम वहां से निकलने लगे, तो दादी ने हमारा हाथ थाम लिया। कहने लगीं, "बेटा, चाय तो पी ली, अब खाना खाकर ही जाना।" दिल भर आया यह सोचकर कि जिसका अपना सब कुछ उजड़ गया, उसका दिल दूसरों की खातिर आज भी कितना बड़ा है। ऐसी निस्वार्थ आत्मीयता आज सिर्फ हमारे ग्रामीण अंचलों में ही जीवित है। उनकी पीड़ा देखकर मेरी आंखें भी नम हो गईं।

Dinesh Bohra

17,829 Aufrufe • vor 6 Monaten

For months, my mother, sister and I have been expressing that we are under threat. We have consistently requested lawfulness and protection. We recently filed a complaint at Safdarjung Police Station seeking registration of an FIR. The night before my mother’s scheduled court hearing at MP MLA Court Rouse Avenue, our car and front gate were set on fire in Green Park. CCTV footage shows an unidentified man outside our gate handling a pistol, attempting to climb over and ultimately burning our swift car and gate. We are three women alone in this house, and these attacks cannot be ignored. I appeal for urgent attention from the authorities. Our safety should not be negotiable. Delhi Police CP Delhi #DilKiPolice DCP South Delhi DCP West Delhi पिछले कई महीनों से, और सच कहूँ तो पिछले कई सालों से, मैं सोशल मीडिया पर लगातार लिखती आ रही हूँ कि मेरी माँ, मेरी बहन और मैं ख़तरे में हैं। हमने हमेशा कानून के रास्ते पर चलकर सुरक्षा और न्याय माँगा है। पुलिस से मदद भी माँगी, शिकायतें भी कीं…कभी मिश्रित प्रतिक्रिया मिली, कभी बस आश्वासन। हाल ही में हमने सफ़दरजंग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दी। लेकिन मेरी माँ की MP–MLA कोर्ट, राउस एवेन्यू में सुनवाई से एक रात पहले, हमारे घर ग्रीन पार्क के बाहर हमारी कार और मुख्य गेट को आग लगा दी गई। CCTV फ़ुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति को हमारे गेट के बाहर हथियार जैसा कुछ पकड़े, गेट पार करने की कोशिश करते हुए और अंत में हमारी स्विफ्ट कार व गेट को जलाते हुए देखा जा सकता है। हम इस घर में तीन अकेली महिलाएँ हैं। इस तरह के हमले नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते। सालों का यह डर, यह दहशत…अब भी उम्मीद बस इतनी है कि न्याय मिलेगा और हमें जीने की मूलभूत सुरक्षा मिलेगी। मैं संबंधित अधिकारियों से तुरंत ध्यान देने की अपील करती हूँ। हमारी सुरक्षा कोई सौदा नहीं है, यह हमारा अधिकार है। CCTV footage is attached here.

Raghavi Kumari

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जब बजट दावों की आई बारी खोखली निकली घोषणाएं सारी वित्त विनियोग विधेयक पर जवाब का सार सिर्फ इतना है कि मुख्यमंत्री जी ने RSS की वाहवाही में कसीदे गढ़कर अपनी #पर्ची कायम रखने लुभावना प्रयास किया है। इतना ही नहीं RSS की शाखाओं से निकली नफ़रत की जड़ों को आदर्श विद्या मंदिर स्कूलों में ताकत से बढ़ावा देने के लिए MLA लेड में 10 लाख की जगह 25 लाख रुपए की सहायता का षड्यंत्र रचा है, लेकिन कामयाब नहीं होंगे। प्रधानमंत्री मोदी 'पकोड़ा तलने' को रोजगार बताते हैं, तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने गुरू से एक क़दम आगे 'ढाबे पर काम' करने को रोजगार कहते हैं। मुख्यमंत्री जी ने आज सदन में कहा कि "कांग्रेस को बड़े-बडे़ काम करने की आदत है" मुख्यमंत्री जी आपने ठीक फरमाया... ▪️25 लाख का मुफ्त इलाज ▪️कर्मचारियों को OPS ▪️200 यूनिट फ्री बिजली ▪️500 रुपए में गैस सिलेंडर ▪️किसानों को कृषि के लिए 2 हजार यूनिट बिजली फ्री ▪️21 लाख किसानों का 14 हजार करोड़ का कर्ज माफ ▪️अस्पताल में फ्री इलाज, फ्री जांच और फ्री दवाई ▪️10 लाख रुपए का चिरंजीवी दुर्घटना बीमा ▪️करीब 3 लाख युवाओं की सरकारी नौकरी ▪️1 करोड़ परिवार को मुफ्त फूड पैकेट ▪️गरीबों को 8 रुपए में भरभेट भोजन ▪️गरीब, कमजोर हर आय वर्ग के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूल ये कांग्रेस का दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति ही थी कि हमारी सरकार ने ये सब काम करके दिखाएं हैं, क्योंकि हम किसी की लकीर काटते नहीं हैं। कांग्रेस अपनी लकीर इतनी बड़ी खींचती है कि विरोधी भी हमारी उपलब्धियों का गुणगान करने को मज़बूर हो जाते हैं। लेकिन भाजपा सरकार की लोकलुभावन बजट घोषणाओं का कोई वास्तविक आधार नहीं है, इनकी घोषणाएं झूठी और पब्लिसिटी का पुलिंदा हैं। मुख्यमंत्री जी सदन को गुमराह करके भले ही कागजों में घोषणाएं पूरी होने का दावा करे लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। 2047 की संकल्पना कर रहे मुख्यमंत्री जी, धरातल पर हालात ये हैं कि भाजपा सरकार के मंत्री आपके ही विभाग पर भ्रष्टाचार में शामिल होने, भाजपा के कार्यकर्ता ट्रांसफर-पोस्टिंग में लूट के प्रमाण देने और आपके छात्र संगठन ABVP के युवा राज्यपाल के सामने कुलपति पर सरकार की मिलीभगत से चोरी के आरोप लगा रहे हैं। ▪️हर दिन 7 करोड़ की बजरी चोरी, अवैध खनन, ध्वस्त कानून व्यवस्था, आए दिन पुलिसवालों व वन विभाग पर हमला, हर दिन औसतन 19 महिलाओं से रेप, नाबालिगों को रिकॉर्ड दरिंदगी, पिछले 3 साल में सबसे ज्यादा पॉक्सो एक्ट के मामले, कॉलेज-यूनिवर्सिटी के पेपर लीक, अस्पतालों में दवाई नहीं, बेरोजगारों को भत्ता नहीं, असहायों को पेंशन नहीं, 500 रुपए में उज्ज्वला वाले सिलेंडर की सब्सिडी नहीं, किसानोंं को 6 घंटे बिजली नहीं और ऊपर से महंगी बिजली की लूट इस सरकार की उपलब्धि है। भाजपा सरकार की इससे बड़ी नाकामी क्या होगी कि मुख्यमंत्री के मुंह पर लोग इनके मंत्रियों को NPA बताते हैं। ▪️भाजपा ने किसान सम्मान निधि 12 हजार रुपए करने की घोषणा की गई लेकिन सिर्फ 8 हजार रुपए किए। भाजपा सरकार का डेढ़ साल पूरा होने को है, लेकिन किसान सम्मान निधि 12 हजार करने, गेहूं की MSP पर बोनस देकर 2700 रुपए में खरीदने, बाजरा को MSP पर खरीदने पर मुख्यमंत्री जी ने एक शब्द नहीं बोला। आज राजस्थान के 1.05 करोड़ किसानों पर 1.74 लाख करोड़ का कर्ज है लेकिन मुख्यमंत्री जी ने उनको राहत देने के लिए एक शब्द नहीं बोला। सिंचाई के पर्याप्त पानी, ओलावृष्टि के मुआवजे, बकाया बीमा क्लेम, समर्थन मूल्य पर मूंग-मूंगफली की खरीद नहीं होने से किसानों को हुए 9 हजार करोड़ के घाटे और फसल पर MSP की क़ानूनी गारंटी पर मुख्यमंत्री जी ने एक शब्द नहीं बोला। ▪️युमना जल समझौते पर 4 महीने में डीपीआर बनाने वाली भाजपा सरकार को टास्क फोर्स बनाने में ही 1 साल बीत गया। शेखावाटी की जनता को कब और कितना पानी मिलेगा, मुख्यमंत्री जी ने एक शब्द नहीं बोला। क्योंकि यमुना के जल में छल के सिवा कुछ नहीं है। ▪️राजस्थान में बेरोजगारी देश में दूसरे नंबर है। सरकार युवाओं को एक नई नौकरी नहीं दे पा रही और मुख्यमंत्री गुमराह करने के लिए हर दूसरे दिन नौकरी की हवाई घोषणा करते हैं। पहले साल 1 लाख नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ पिछली कांग्रेस सरकार की नौकरियों को अपना बताकर खानापूर्ति कर ली। अकेले शिक्षा विभाग में 1 लाख से अधिक पद रिक्त हैं लेकिन मुख्यमंत्री जी ने सिर्फ 10 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा करके रात-दिन तैयारी कर रहे युवाओं के साथ मजाक किया है। ▪️राजस्थान के बेरोजगारों को 1 साल से बेरोजगारी भत्ते का इंतजार है, युवा दर-दर की ठोकरें खा रहे लेकिन मुख्यमंत्री जी ने उनके लिए एक शब्द बोला। ▪️आज भी राजस्थान की जनता पड़ोसी राज्य हरियाणा और गुजरात के मुकाबले पेट्रोल 10 रुपए प्रति लीटर महंगा खरीद रही है लेकिन मुख्यमंत्री जी ने पेट्रोल के दाम घटाने और महंगाई कम करने पर एक शब्द नहीं बोला। ▪️सरकार के 1.5 साल होने वाले हैं लेकिन नकल माफियाओं एवं 'मगरमच्छों' की जांच करके कब पकड़ेंगे और कब SI भर्ती पर फैसला लेंगे? इस पर मुख्यमंत्री जी के मुंह से कुछ नहीं निकला। युवाओं को भ्रमित करके सत्ता में तो आए गए, लेकिन अब युवाओं को जवाब नहीं दे पाएंगे। ▪️भाजपा सरकार ने विदेश में विदेश में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली स्कॉरशिप योजना का आते ही नाम बदल दिया। लेकिन शर्म की बात है कि 1 साल से बच्चों को स्कॉलरशिप बंद करके बैठे हैं और बच्चे भीख मांगने को मजबूर हैं। ▪️सतत विकास का ढिंढोरा पीट रहे मुख्यमंत्री जी, सच्चाई ये है कि सदन में आपके मंत्री, साथी विधायकों के सवालों का जवाब तक नहीं दे पाते। मुद्दों से हटकर सिर्फ इधर-उधर का झूठा वाचन और दोषारोपण करते हैं। ▪️सनातन के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों ने आईफा पर 100 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए लेकिन भगवान गोविन्द देव जी, खाटूश्याम जी और सालासर बालाजी के लिए के लिए 1 पैसा नहीं दिया। ये ही धूर्त भाजपाईयों के सनातनी होने की सच्चाई।

Govind Singh Dotasra

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Trading का काला सच 🖤📉 बाज़ार आपको एक ही दिन में ऐसा झटका दे सकता है, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी। अचानक कोई बड़ी news आ सकती है। Market gap-up या gap-down हो सकता है। आपका Stop Loss expected price पर execute न होकर उससे काफी दूर लग सकता है। और जिस दिन आपने confidence में Position Size बढ़ाया, उसी दिन बड़ा नुकसान आपकी पूंजी को हिला सकता है। बाज़ार में risk के हजारों रूप हैं। इसीलिए Trading को Quick Money Machine समझना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। Intraday हो, Scalping हो या Crypto — जितना तेज़ पैसा बनाने का प्रयास, उतना ही तेज़ risk exposure भी हो सकता है। हमने ऐसे उदाहरण भी देखे हैं जहाँ लंबे समय से market में पैसा बनाने वाले traders ने एक बड़े market crash में अपनी बड़ी पूंजी गंवाई और उस financial shock को संभाल नहीं पाए,और उस नुकसान के मानसिक दबाव को संभाल नहीं पाए और अपनी जीवन-लीला समाप्त कर बैठे। इससे सीख क्या मिलती है? 👉 Market में कोई भी strategy 100% safe नहीं है। 👉 Capital protection, position sizing और risk management बेहद जरूरी हैं। “और कभी भी ऐसा पैसा दाँव पर नहीं लगाना चाहिए, जिसे खोने पर आपकी ज़िंदगी या आपकी financial stability प्रभावित हो जाए।” 👉 Quick money के पीछे भागने से पहले यह समझना जरूरी है कि क्या आप loss को emotionally और financially handle कर सकते हैं? Trading हर किसी के बस की बात नहीं है। आजकल हर दूसरा व्यक्ति किसी Influencer से Influenced होकर सोचता है — “मैं भी Trader बन जाऊँगा।” लेकिन शायद यही सबसे बड़ा Trap है। ⚠️ Trading हर किसी के लिए नहीं है। इसके पीछे सिर्फ Charts, Profit और Strategies नहीं हैं… बल्कि Psychology, Discipline, Risk, Losses, Patience और Capital Protection की एक पूरी दुनिया छिपी है। और इन चीज़ों के बारे में शायद ही कोई Influencer आपको पूरी सच्चाई बताए। अब कुछ ज्ञानी लोग कहेंगे — “नहीं, Influencers ये सब बताते हैं।” बिल्कुल, हो सकता है कुछ बताते हों। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि अगर उनका पूरा trading capital भी चला जाए, तो क्या उनकी पूरी ज़िंदगी प्रभावित हो जाएगी? हो सकता है उनके पास backup capital, दूसरा income source या मजबूत financial cushion हो, जिसकी वजह से बड़ा loss होने पर भी उनकी जिंदगी पर उतना असर न पड़े। लेकिन क्या आपके पास भी वही backup है? यही सवाल आपको खुद से पूछना चाहिए। किसी Influencer को — चाहे वह कोई भी हो — आँख बंद करके Follow करने के बजाय उसके approach को समझिए, खुद Research कीजिए और अपनी financial capacity के हिसाब से फैसला लीजिए। Influencer को भगवान मत बनाइए। अपने दिमाग का इस्तेमाल कीजिए। 🧠📉 क्योंकि Market में आखिरकार profit या loss आपका होगा, किसी Influencer का नहीं। Trading शुरू करने से पहले खुद से एक सवाल पूछिए — क्या आप सच में Trading के लिए बने हैं, या सिर्फ दूसरों को देखकर Influenced हुए हैं? 🫢📉 पहले Risk समझिए, फिर Return के बारे में सोचिए। ⚠️ Market में अपनी पूंजी का जोखिम समझकर ही कोई निर्णय लें। और सबसे बड़ी बात — पहले अपनी मानसिकता को समझिए। आप खुद कौन हैं? आपका Risk Appetite क्या है? आपकी Personality कैसी है? आपके लिए कौन-सा Trading Style सही है? दूसरों को देखकर अपनी Trading Personality तय मत कीजिए। खुद को समझना Trading सीखने से भी ज्यादा जरूरी हो सकता है। अगर इस विषय को गहराई से समझना चाहते हैं, तो “Trading in the Zone” जैसी किताब पढ़ सकते हैं। यह आपको Trading Psychology और अपनी मानसिकता को समझने के नजरिए से काफी कुछ सोचने पर मजबूर कर सकती है। Market को समझने से पहले खुद को समझिए। 🧠📊 #Trading #TradingPsychology #TraderMindset #TradingInTheZone #StockMarket #PriceAction

Pankaj Jain SEBI RESEARCH ANALYST

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