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बिहार में जिस तरह से पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बर्बरता की, वह बेहद निंदनीय है। पटना यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष शांतनु शेखर जी समेत हमारे NSUI के कई साथियों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। कई महिला साथियों के यहां रात दो बजे पुलिस ने दबिश दी और घर की तलाशी ली गई। हमारे ऐसे सैकड़ों साथी हैं, जिनके परिजनों को यह नहीं पता कि उनके बच्चे कहां हैं और उन्हें कहां पर रखा गया है। इतना ही नहीं, प्रदर्शन में जाने वाली महिलाओं को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं। सवाल है: • क्या देश में महिला होकर अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना गुनाह है? • क्या इस देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना अपराध बन गया है? : ऋचा सिंह जी

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सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार। मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास। "सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है। और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है। अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है। मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है। हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा। Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh @faeloreeah @lok_singh_

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