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When SPEED MATTERS 📈🚄
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Комментарии: 30

अरे मूर्ख,, जनरल ट्रेन का बता, जिसमें आम पब्लिक चल पाए, यहां 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर निर्भर हैं, वहां प्रीमियम ट्रेन कम चले और जनरल स्लीपर ज्यादा। इसकी तुलना कर, मोदी ने सामान्य लोगों के लिए कितनी ट्रेन दी @1mani1pbi @RebornManish सर, कभी इसपर लिखिए। @Dheeraj65560490

7.8% growth wala desh

Yes Speed Matters a Lot now tell 1. How many smart cities are operational out of 100 announced in 2014 2. Every year 2 crores jobs how many jobs Increased in last 12 years 3. Farmers income double by 2022 now i think it has become 5x 4. Clean Ganga Mission check?

क्यू बे दलाल महाराष्ट्र के छात्र नहीं दिख रहे क्या तुझे? तुम जैसे बिकाऊ जमीर क्या माँ बाप को भी बेच सकते है.. लानत है

दरबारी पहले भी होते थे, लेकिन आजकल के #गोदी_मीडिया वाले एक नंबर के दरबारी, गुलाम, चाटुकार, दलाल, चरणभाट, जाहिल, चरण चुंबक, गोदी गुलाम हैं 😀 ये इतने बेशर्म और मोटी चमड़ी के हैं कि दिन भर जनता से गालियां खाते हैं लेकिन सुधरने का नाम नही...

Gadhe ko blackboard mein likhte dekha hai kabhi?

चाटूकार है यार तू भाई बस कर

जब राजा अपनी व्यक्तिगत वासना को समाजसेवा का मुखौटा पहनाकर प्रस्तुत करता है, तो असल में वह राज्य को दांव पर लगा देता है। और यदि उस वासना को तृप्त करने वाले उसके समर्थक बेलगाम अंधभक्त हो जाएँ, तो यह संकेत है कि दुर्दिन आ चुके हैं।

Tere bache tujhe gali kyu nahi dete...esa chutiya hey tu Teri wagese contry ka press freedom index 157 ho chuka hey..and modi ki itna chatna band kar... Tujhe dekh ke ghin ati hey...Kuch acha bol..and reality dikha na ki khali chatte rahana.

गंगा यमुना नाकामी गंगा प्रोजेक्ट 23 हज़ारों करोड़ खर्च के बाद कैसा है गुरुजी

लौड़े लग गए लौड़े लग गए - अजीत भारती

एक छोटे बंदर ने देश को मधारी का मेदान बना दिया है। अच्छे दिन तो भूल जाओ, 2047 में अच्छे दिन लाएगा चाय वाला। मोदी को आज का पता नहीं यह गधा कल की सोच रहा है।

Desh ki 90% janta uska ticket bhi afford nhi kar sakti kabhi ticket book kar ke dekha hai 50%+ seats khali padi rahti hai hamesha jabki shatabdi me to aisa nhi hota

तू पत्रकार नहीं पत्रकारिता पर कलंक है

Tu to bjp ka dalla h

have you seen the 3rd class coach condition of normal train? breakfast krte ho ua boot liking se pet bhar jata h?

WHY ARE YOU SOOO SPINELESS नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने व्यवस्था को खोखला कर दिया है और भारत के भविष्य की निर्मम हत्या कर दी है।

@ImGharish seee

गुरुजी तब की बात कर रहे जब तक ना it boom आया था ना लोगों की सैलरी इतनी थी । गुरुजी हमारी फैमिली उस वक्त स्लीपर क्लास में चलतीं थी , हम जनरल डब्बे मैं तब प्राथमिकता आम जनता के लिए थी । जनता कितनी अफोर्ड कर सकती है कितनी जनता कैसे चल रही उस पे भी डिपेंड करता है।

Mseal se pul jod diya ye bhi dikha godi bhai

अपनी कमाई, बचत, कर्ज और भविष्य की योजनाओं के बारे में किसी को नहीं बताना चाहिए।

इस सरकार की बिदाई भी तय है 2029 में।

IRTC Website 😡🤡 train facility

बीजेपी के प्रवक्ता हाजिर हो। कोई इनको अंधभक्त नहीं बोलेगा। क्योंकि ये अंधभक्त से बढ़कर है। वो बंदे भारत जिनके आगे कांग्रेस के बनाए हुए डब्बों से उसको खींचा जा रहा है। ह्म्म बिल्कुल नाले से गैस बनाने में लगे रहो क्यों गैस से चाय बनाने में देर लगती है।

कुछ भी 😄😄😄😄

Aree chutiyaa lundbhakt chaat orr modi ke gotee

Aisi dalali mat kar ki jab log tumhe mare to dya na aaye

जनता तुम जैसों की क्लास बहुत ही शीघ्र लेने वाली है तब तक खुद की क्लास लगाकर खुद को अच्छे से तैयार कर लो 📝

जय हिंद मै सिपाही गौरव कुमार सविनय निवेदन है कि मैं आपके संज्ञान में अपने पैतृक गांव से संबंधित एक गंभीर विवाद एवं उसके पश्चात मेरे परिवार के साथ हुई घटनाओं को रखना चाहता हूँ। मैं वर्ष 2017 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। सेना में नियुक्ति के उपरांत भी मेरा और मेरे परिवार का संबंध अपने पैतृक गांव ग्राम रौनिया, दर्शनविघा, थाना महकार अब ( खिजरसराय) जिला गया, बिहार से निरंतर बना रहा। वर्ष 2019 में हमने अपने पैतृक गांव में एक मकान का निर्माण कराया। उक्त मकान से पानी की निकासी के लिए नाली निकालना आवश्यक था। नाली की निकासी को लेकर गांव के ही स्वर्गीय नुनू सिंह तथा उनके परिवार के अनंत कुमार एवं अजीत कुमार द्वारा आपत्ति की जाने लगी और नाली को निकलने नहीं दिया जा रहा था। इसी नाली विवाद को लेकर समय-समय पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी एवं विवाद होता रहा। प्रारंभिक स्तर पर यह विवाद मुख्य रूप से नाली की निकासी और रास्ते से संबंधित था तथा कई बार बातचीत और स्थानीय स्तर पर इसे सुलझाने का प्रयास भी हुआ। इसके पश्चात वर्ष 2020 के नवंबर माह में परिस्थितियां अचानक गंभीर हो गईं। दिनांक लगभग 14 से 16 नवंबर 2020 के बीच मेरे भाई की सेना भर्ती से संबंधित रनिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई थी। इसकी कॉपी हमने संलग्न कर रखा है । इसके कुछ ही दिनों बाद हमारे परिवार के साथ विवाद को जानबूझकर और अधिक बढ़ाया गया। दिनांक 21 नवंबर 2020 के आसपास विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और मेरे परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की घटना हुई। इस घटना में मेरे पिताजी एवं मेरे दादा जी के साथ मारपीट किया गया इसके बाबजूद मेरे पिताजी को ही कारावास में डाल दिया गया । महोदय, सबसे गंभीर बात यह है कि उक्त मामले में मेरे भाई को, जानबूझकर आरोपी बनाकर फँसाया गया,इसके बाद उसे मामले में आरोपी बनाया गया और उसके विरुद्ध गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई। और उक्त मामलों में पुलिस को गवाह न मिलने पर पुलिस के ऊपर राजनीतिक दबाब बनाया गया ओर चार ग्रामीण का नाम गवाह के तौर पर अनंत कुमार ओर अजीत कुमार के द्वारा दर्ज कर दिया गया । ओर इसका साक्ष्य ये है कि इन चारों गवाहों ने अपना एफिडेविट में बयान दिया है कि बिना हमारे जानकारी के गवाह के तौर पर मेरा नाम का उपयोग किया गया इस एफिडेविट का कॉपी भी संलग्न है। इसके बाद दिनांक 2 मई 2021 को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा इस मामले की जांच की गई। जांच में मेरे भाई सौरव कुमार को निर्दोष पाया गया तथा यह तथ्य सामने आया कि उसे जानबूझकर झूठे मामले में फँसाया गया था। नवंबर 2020 से मई 2021 के बीच मेरे भाई का मेडिकल एवं लिखित परीक्षा भी पूरा हो गया। उसे सेना में जॉइनिंग के लिए 28 जून 2021 की तिथि दी गई थी। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा की गई जांच में सौरव कुमार को निर्दोष पाए जाने के बाद उसका चरित्र प्रमाण-पत्र भी बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी के जारी कर दिया गया जिससे वह 28 जून 2021 को 1 EME ट्रेनिंग सेंटर सिकंदराबाद में ज्वाइन किया । और दिनांक 13 सितम्बर को सेना के द्वारा वर्फिकेशन रोल महकार थाना को भेजा गया परंतु महकार थाना ने वेरिफिकेशन रोल के जवाब देने के बजाय 6 माह तक थाना में निलंबित रखा और दिनांक 23 सितंबर 2021 को मामले का पुनः सुपरविजन कराया गया। उक्त पुनः सुपरविजन के दौरान कथित रूप से ऐसे व्यक्ति का नाम गवाह के रूप में दर्ज किया गया, जिसे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी अथवा जो वास्तविक गवाह नहीं था, तथा सौरव कुमार का नाम भी दोबारा मामले में जोड़ दिया गया। इस दौरान सेना के द्वारा बार बार गया जिला प्रशासन ओर महकार थाना को रिमाइंडर भी दिया गया है इसका कॉपी भी संलग्न है अंततः सेना को वेरिफिकेशन रोल प्राप्त नहीं हुआ या गलत वेरिफिकेशन रोल दिया गया जिसके कारण सौरव कुमार को सेना से मुक्त कर दिया गया । अगर पुलिस ने समय पर कम किया होता ओर दबाव में आकर दुबारा नाम नहीं जोड़ा होता तो आज मेरा भाई सेना में नौकरी कर रहा होता । इतना सब होने के बाबजूद मैं चुप रहा क्योंकि मैं कुछ कर भी नहीं सकता वो दबंग लोग है । इसके बाद हमलोगों ने इसका शियत लोक अदालत में किया लोक अदालत से फैसला आया कि अतिक्रमण को मुक्त करके वहां पर नाली गली का निर्माण किया जाए । इसके लिए CO ने NOC भी पंचायत प्रधान को दिया ओर पुलिस बल की मांग खिजरसराय थाना से किया परंतु थाना के द्वारा बल की व्यवस्था नि की गई अभी तक इसी क्रम में हमारे गांव में नाली गली के निर्माण कार्य को लेकर मेरे पिताजी लगातार संबंधित अधिकारियों से शिकायत एवं अनुरोध करते रहे हैं। इसी क्रम में वे कभी अंचल अधिकारी (सीओ) के कार्यालय तो कभी थाना जाते रहे हैं तथा मामले के समाधान के लिए जिलाधिकारी (डीएम) के पास भी जाने का प्रयास करते रहे हैं।

ऐसा लग रहा है ये देश के सभी पत्रकारों में सबसे ऊपर पहुंच चुके हैं चाटुकारिता वालों में । इनको तो अब अवॉर्ड दे देना चाहिए वो भी BJP सीट के रूप में । ये भूल चुके हैं कि मैं पत्रकार हूं। @SushantBSinha


