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When you meet real sadhu
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33 Kommentare

@wisdom_walkss Mayavadi alert. Inse bachein . When fools like us have roop why won't the supreme personality have it.. Krishna, even when He was here, couldn't be under Maya as Maya is His power. Shaktimaan is above shakti always. Krishna has a body but it's not like us, it's transcendental.

"दृष्टि के सामने आने वाले विभिन्न पदार्थों में समान रूप से मूलतः वर्तमान रहने वाले किसी एक तत्त्व का अनुभव ज्ञान कहलाता है।" और "मूल में एक स्थायी नित्य तत्त्व मानकर--उसकी ही अनन्त पदार्थों के रूप में परिणति का वर्णन 'विज्ञान' कहलाता है"। 'जानन्ति, चेष्टन्ते च'-- अनुभवसहित चेष्टा (क्रिया) करने वाले को जीव अथवा प्राणी कहा जाता है। जिसकी ज्ञान-चेष्टा नष्ट हो गई है, अथवा जन्म से जिसमें ज्ञान-चेष्टा प्रकट नहीं हो पाती है-- व्यवहार में उसे 'शव' 'मुर्दा' वा 'जड़' कहा जाता है। अहित का परित्याग और हित का संग्रहरूप जो कर्म है-- वही चेष्टा है। शक्ति को ब्रह्म का सहकारी सभी श्रुति, पुराणादि ने माना है। उसके ही माया, प्रकृति, शक्ति आदि नाम अपनी-अपनी प्रक्रिया के अनुसार मिलते हैं। यही 'रसबलमय' वा 'ज्ञानकर्ममय' तत्त्व सब जगत का उत्पादक है। श्रवणायापि बहुभिर्यो न लभ्यः शृण्वन्तोऽपि बहवो यं न विद्युः । आश्चर्यो वक्ता कुशलोऽस्यलब्धाऽऽश्चर्यो ज्ञाता कुशालानुशिष्टः ।। संसार में बहुत से ब्रह्म की बात सुनना चाहते हैं--उनको ब्रह्मज्ञाता कोई नहीं मिलता और यदि कोई ब्रह्मज्ञानी मिल जाय--ब्रह्म प्रवचन करे--उस प्रवचन को ध्यान से सुनने वाले भी उस ब्रह्म को नहीं जान पाते। आश्चर्य की बात तो यह है कि कोई ब्रह्म का प्रवचन करता है ! जबकि ब्रह्म वाणी से अतीत है, और जो कहता है कि उसने ब्रह्म का पा लिया, तो मानना पड़ेगा कि वह महाकुशल है ! नीरूप को उसने कैसे पा लिया ! जो सोचता है कि मैं ब्रह्म-ज्ञाता हूँ, यह भी एक आश्चर्य ही है-- जो मनसातीत है उसका ज्ञान कैसे हो गया? और जिस शिष्य ने ब्रह्मज्ञान पाया वह कुशल सच्चे गुरु के अनुशासन में रहने वाला सम्यक् अनुशासित है। ब्रह्म श्रुतौ तद् रस इत्युदीरितं परास्य शक्तिर्बलमित्युदीर्यते । बलं रसाद् भिन्नमिदं न गण्यते न श्रौतमद्वैतमसौ विरुद्ध्यते ।। वेद में ब्रह्म को रस कहा गया है, इस ब्रह्म की अभिन्न पराशक्ति को बल कहा जाता है। परब्रह्म में पर का जो अर्थ है, वही पराशक्ति में परा का अर्थ है। यह बल (माया शक्ति) रस से भिन्न नहीं मानी जाती अतः वेद प्रतिपादित ब्रह्म के अद्वैततत्त्व का विरोध नहीं होता। [जिस ब्रह्म में कोई धर्म नहीं है--जिसमें कभी कोई परिणीति नहीं होती, जो सर्वत्र व्यापक है--वह ब्रह्म जगत् का उपादान कैसे हो जाता है? इस सन्देह की निवृत्ति के लिये वेद में तथा पुराणों में सर्वत्र ब्रह्म की अभिन्न शक्ति मानी गयी है। ऋषियों ने ध्यान योग में स्थित होकर परब्रह्म में छुपी हुई ब्रह्मशक्ति का दर्शन किया--अपने सत्त्व-रज-तम गुणों से जो सदा गुप्त रहती है। ब्रह्म न स्वयं कुछ करता है और न किसी का साधन बनता है, न कोई ब्रह्म के समान है और न कोई उससे बड़ा है। अनन्त रूपमयी इस ब्रह्म की सहज स्वाभाविकी पराशक्ति वेद में विवृत है---ज्ञान, बल और क्रिया ये उस शक्ति के व्यावहारिक रूप हैं। जिस परब्रह्म ने सारे विश्व को सदा से आवृत कर रखा है, जो एकमात्र चेतन रूप है, यह काल का भी काल है अर्थात् काल का निर्मापक और समापक यही है, सारे गुणों का नियन्ता--सर्वज्ञ यह ब्रह्म है--इसकी इच्छा से कर्म का विवर्त फैलता है--वह कर्म ही पृथिवी-जल-अग्नि-वायु-आकाश रूप में दृश्यमान् होता है। रस से भिन्न बल की स्वतन्त्र सत्ता कहीं नहीं मिलती। कार्य के द्वारा कारण सत्ता ही प्रधान मानी जाती है। इस प्रकार जैसे एक पदार्थ में अनेक की अनुस्यूतता रहने पर भी व्यवहार में प्रधान कारण रूप एकत्व की ही मान्यता होती है, वैसे ही रस की वास्तविक सत्ता है, रस की सत्ता से ही बल की सत्ता होती है। मूल में एकत्व ही है, द्वित्व नहीं है।]

@wisdom_walkss True Advaitam. Only one thing is real. The rest is smoke & mirrors. Advaitam Paramartatah.

@wisdom_walkss fake sadhu : god appeared in a form according to my imagination, so i want to see his real form & will reject his visit real sadhu : if god can be everything, then his maya form is also his real form conclusion: The orator in the video is a fake sadhu real sadhu talk precisely

@wisdom_walkss Koi matlab hai is baat ka guru ji ….Bhagwad Geeta mai jab arjun ko virat roop dikhaya tha Shri Krishna ne tab unko divy dristi pradan ki thi Bhagwan ka roop sachidanandmay hai usko aap tabhi dekh sakte ho jab aap us level ke bhakt ban pao ….Radhey Radhey 🙏

@wisdom_walkss Maine inko suna hai, bahut high level आध्यात्मिक ज्ञान है इनका

@wisdom_walkss Ok so Sri Narsingh Bhagwan who came to save Sri Prahlad Maharaj and kill Hrinyakasipu was maya...Great!

@wisdom_walkss This is the philosophies of mayavadi. God has a form. Bhagwan is not formless. It is, we don't have the senses eligible to look him

@wisdom_walkss जय जय हो सत्य सनातन धर्म🙏

@wisdom_walkss जयतु सनातन धर्म संस्कृति

@wisdom_walkss @grok who is the sadhu in this video

@wisdom_walkss The tru definition

@wisdom_walkss @Gauripriya18 A great sadhu

@wisdom_walkss जय श्री राम

@wisdom_walkss @Gauripriya18 Very nice post

@wisdom_walkss Jay Ho Satya Suna tha

@wisdom_walkss @grok Swami ji details please

@wisdom_walkss जायतु सनातन 🙏🙏

@wisdom_walkss Jai Sanatan

@wisdom_walkss Jaytu Sanatan Dharma

@wisdom_walkss Jay Ho Satya sanatan

@wisdom_walkss @grok podrías transcribir en español lo que este Sr. está diciendo?

@wisdom_walkss It's AI generated look like tht

@wisdom_walkss Hey @grok pls explain in simple words

@wisdom_walkss @tweetbot download this

@wisdom_walkss Besically he means muslims are right!

@wisdom_walkss kaunhai yeh gyani

@wisdom_walkss

@wisdom_walkss

@wisdom_walkss 🙏

@wisdom_walkss His name ?

@wisdom_walkss जयतु सनातन धर्म

@wisdom_walkss @grok translate the speech to English.
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