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Who is beyond selfish hunger?

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Bhagavad Gita 𑁍2 years ago

Reference: BG 2.69 या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी | यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुने:|| yā niśhā sarva-bhūtānāṁ tasyāṁ jāgarti sanyamī yasyāṁ jāgrati bhūtāni sā niśhā paśhyato muneḥ Translation: “What all beings consider as day is the night of ignorance for the wise, and what all creatures see as night is the day for the introspective sage.” Explanation: People with ordinary awareness see finding pleasure in material things as the main goal in life. They think enjoying worldly pleasures is success, like a bright "day," and not having those pleasures is like a dark "night." In contrast, those with spiritual wisdom see pursuing sensory pleasure as harmful to the Atma (soul), considering it a "night." They believe that abstaining from sensory desires uplifts the soul, which they see as a bright "day." Shree Krishna explains that what seems like night to a wise person appears as day to those focused on the material world, and vice versa. Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas 2.69।। व्याख्या-- 'या निशा सर्वभूतानाम्'--जिनकी इन्द्रियाँ और मन वशमें नहीं हैं, जो भोगोंमें आसक्त है, वे सब परमात्मतत्त्वकी तरफसे सोये हुए हैं। परमात्मा क्या है? तत्त्वज्ञान क्या है? हम दुःख क्यों पा रहे हैं? सन्तापजलन क्यों हो रही है? हम जो कुछ कर रहे हैं? उसका परिणाम क्या होगा?--इस तरफ बिलकुल न देखना ही उनकी रात है, उनके लिये बिलकुल अँधेरा है। यहाँ 'भूतानाम्' कहनेका तात्पर्य है कि जैसे पशु-पक्षी आदि दिनभर खाने-पीनेमें लगे रहते हैं, ऐसे ही जो मनुष्य रातदिन खाने-पीनेमें, सुख-आराममें, भोगों और संग्रहमें, धन कमानेमें ही लगे हुए हैं, उन मनुष्योंकी गणना भी पशु-पक्षी आदिमें ही है। कारण कि परमात्मतत्त्वसे विमुख रहनेमें पशुपक्षी आदिमें और मनुष्योंमें कोई अन्तर नहीं है। दोनों ही परमात्मतत्त्वकी तरफसे सोये हुए हैं। हाँ, अगर कोई अन्तर है तो वह इतना ही है कि पशु-पक्षी आदिमें विवेक-शक्ति जाग्रत् नहीं है इसिलिये वे खानेपीने आदिमें ही लगे रहते हैं; और मनुष्योंमें भगवान्की कृपासे वह विवेक-शक्ति जाग्रत है, जिससे वह अपना कल्याण कर सकता है, प्राणिमात्रकी सेवा कर सकता है, परमात्माकी प्राप्ति कर सकता है। परन्तु उस विवेक-शक्तिका दुरूपयोग करके मनुष्य पदार्थोंका संग्रह करनेमें एवं उनका भोग करनेमें लग जाते हैं, जिससे वे संसारके लिये पशुओंसे भी अधिक दुःखदायी हो जाते हैं। कारण कि पशु-पक्षी तो बेचारे जितनेसे पेट भर जाय, उतना ही खाते हैं, संग्रह नहीं करते; परन्तु मनुष्यको कहीं भी जो कुछ पदार्थ आदि मिल जाता है, वह उसके काममें आये चाहे न आये, उसका तो वह संग्रह कर ही लेता है और दूसरोंके काममें आनेमें बाधा डाल देता है। 'तस्यां जागर्ति संयमी'-- मनुष्योंकी जो रात है अर्थात् परमात्माकी तरफसे, अपने कल्याणकी तरफसे जो विमुखता है, उसमें संयमी मनुष्य जागता है। जिसने इन्द्रियों और मनको वशमें किया है, जो भोग और संग्रहमें आसक्त नहीं है, जिसका ध्येय केवल परमात्मा है, वह संयमी मनुष्य है। परमात्मतत्त्वको, अपने स्वरूपको, संसारको यथार्थ-रूपसे जानना ही उसका रातमें जागना है। 'यस्यां जाग्रति भूतानि'-- जो भोग और संग्रहमें बड़े सावधान रहते हैं, एक-एक पैसेका हिसाब रखते हैं, जमीनके एक-एक इंचका खयाल रखते है; जितने रूपये अधिकारमें आ जायँ वे चाहे न्यायपूर्वक हों अथवा अन्यायपूर्वक, उसमें वे बड़े खुश होते हैं कि इतनी पूँजी तो हमने ले ही ली है, इतना लाभ तो हमें हो ही गया है--इस तरह वे सांसारिक क्षणभङ्गुर भोगोंको बटोरनेमें और आदर-सत्कार, मान-बड़ाई आदि प्राप्त करनेमें ही लगे रहते हैं, उनमें बड़े सावधान रहते हैं यही उन लोगोंका जागना है। 'सा निशा पश्यतो मुनेः'-- जिन सांसारिक पदार्थोंका भोग और संग्रह करनेमें मनुष्य अपनेको बड़ा बुद्धिमान्, चतुर मानते हैं और उसीमें राजी होते हैं, संसार और परमात्मतत्त्वको जाननेवाले मननशील संयमी मनुष्यकी दृष्टिमें वह सब रातके समान है; बिलकुल अँधेरा है। वह मननशील संयमी मनुष्य परमात्माको, अपने स्वरूपको और संसारके परिणामको तो जानता ही है, वह पदार्थोंको भी अच्छी तरहसे जानता है कि कौन-सा पदार्थ किसके हितमें लग सकता है, इससे दूसरोंको कितना लाभ होगा। वह पदार्थोंका अपनी-अपनी जगह ठीक तरहसे सदुपयोग करता है। उनको दूसरोंकी सेवामें लगाता है। Sources:

Memes Buz's profile picture
Memes Buz2 years ago

🙏

Rajbali Manjhi's profile picture
Rajbali Manjhi2 years ago

Very inspirable.

हिंदू (Ex प्रजापत, left caste)'s profile picture
हिंदू (Ex प्रजापत, left caste)2 years ago

Thanks for sharing snippets.

आर्यवर्त:'s profile picture
आर्यवर्त:2 years ago

Very nice but स्थितप्रज्ञः की सोच ,व्यवहार और कर्म आत्मनिष्ठ होती है ,वस्तुनिश्ठ नही । आपका प्रयत्न सरहानिया है। 32 पहला का डायलॉग याद करवाया इस लिए आभार ।

BHUPENDRA JAY BHARAT's profile picture
BHUPENDRA JAY BHARAT2 years ago

🙏

Bhupendra's profile picture
Bhupendra2 years ago

🙏

Madhuria Dasi's profile picture
Madhuria Dasi2 years ago

Where can we find all these movies that you share ?? 🙏🙏🙏🙏

Pandit amit Sharma's profile picture
Pandit amit Sharma2 years ago

Hare Krishna hare Krishna Krishna Krishna hare hare hare ram hare ram ram ram hare hare 🌹🌷🇮🇳👏

modi amit ji RAKSHA KAVACH OF HINDUSTHAN's profile picture
modi amit ji RAKSHA KAVACH OF HINDUSTHAN2 years ago

Radhekrishna Sitaram narsimha Govinda

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