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Ana Sayfaya Dön

Yasmeen Ghauri

35,072 görüntüleme • 5 ay önce •via X (Twitter)

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भीड़ में कहीं खो जाती है इंसानियत: ट्रेन की फर्श पर बैठी माँ-बेटी ने दिखाया कड़वा सच। एक दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ एक माँ अपनी नन्ही बच्ची के साथ ट्रेन के फर्श पर बैठने को विवश दिख रही थी। उनके चेहरे पर साफ़ दिख रही थकान, लाचारी और मजबूरी किसी के भी दिल को पिघला सकती है। चारों तरफ लोग आराम से अपनी सीटों पर बैठे थे, लेकिन किसी में इतनी भी इंसानियत नहीं थी कि इस माँ-बेटी को बैठने के लिए थोड़ी सी जगह दे दे। यह दृश्य केवल एक घटना नहीं है, बल्कि हमारे समाज की बढ़ती संवेदनहीनता का दर्पण है। जब भीड़ बढ़ती है, तो इंसानियत अक्सर पीछे छूट जाती है। क्या हम इतने व्यस्त और असंवेदनशील हो चुके हैं कि किसी जरूरतमंद की मदद भी नहीं कर पाते? ये तस्वीर हम सबसे एक सवाल पूछ रही है — क्या हम सच में एक संवेदनशील समाज में जी रहे हैं, या बस अपने-अपने आराम में खो चुके हैं?

Adv. Divya Jakhar

16,881 görüntüleme • 1 ay önce

सिर्फ़ दो ही संभावनाएँ हैं। या तो रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने जब संसद को संबोधित किया तो उनकों यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है, तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं। या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना। यह उससे भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में, शपथ के साथ, देश से झूठ बोलती है। जो भी सच हो, कुछ तथ्य नहीं बदलते - हमारे छह वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। लेकिन उनके बलिदान को छिपाया गया। उन्हें वह सम्मान और मान्यता नहीं दी गई जिसके वे हकदार थे। और उनके परिवारों से वह पारदर्शिता भी छीन ली गई जिसकी वे अपेक्षा रखते थे। यह हमारे सैनिकों का अपमान है, और कोई भी सच्चा देशभक्त इस पर मौन या संतुष्ट नहीं रह सकता।

Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ

205,477 görüntüleme • 3 gün önce

बाबा साहेब अंबेडकर के चाहने वालों को स्वर्ग नहीं स्वर ही अवश्य चाहिए। संविधान के शिल्पकार के प्रति ऐसी घृणित सोच 𝐁𝐉𝐏 और 𝐑𝐒𝐒 की पाठशाला से ही पनपती है। देश के 𝟏𝟎𝟎 करोड़ से अधिक वंचित, उपेक्षित, उत्पीड़ित, शोषित, उपहासित, दलित, पिछड़े, गरीब, अल्पसंख्यक एवं समता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, बन्धुता और संविधान में यकीन रखने वाले न्यायप्रिय लोगों के लिए बाबा साहेब अंबेडकर भगवान से भी कम भी नहीं है। बाबा साहेब ने करोड़ों लोगों को नारकीय जीवन से छुटकारा दिलाकर इसी जीवन में जीते-जी ही मोक्ष प्रदान कर दिया। संविधान निर्माता के प्रति मा॰ गृहमंत्री की ऐसी संकीर्ण सोच की हम निंदा तथा माफ़ी की माँग करते है। #TejashwiYadav

Tejashwi Yadav

273,486 görüntüleme • 1 yıl önce