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Your previous conversations displayed remarkable intelligence and ease. Amitabh Bachchan आप कितनी प्यारी बातें किया करते थे। #AmitabhBachchan #MannKiBaat

45,668 views • 3 years ago •via X (Twitter)

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रोहिड़ी म्यूज़िक फेस्टिवल को निरस्त करना राजस्थानी लोक संगीत का अपमान है आप राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला पहले ही दे सकते थे वो जगह ओर SDM साहब तो वही थे।ना जाने कितनी तैयारी की होगी इन कलाकारों ने।कम से कम दूसरी जगह तो कार्यक्रम आयोजित करते इन कलाकारों के लिए।ये बिल्कुल गलत है कि आप आयोजकों ओर कलाकारों की तैयारी पर पानी फेर दो।अच्छी पहल का स्वागत कीजिए सरकार।कलाकारों को उचित मंच दीजिए।शायद ये पहला मौका था जब किसी विधायक ने सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का फ़ैसला लिया था।विसंगतियों को दूर कर कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।Ravindra Singh Bhati जी आप फिर से तैयारी कर लीजिए शिव में करवाये पर कलाकारों को हताशा नहीं मिलने दें।हम मिलकर इसे सफल बनायेंगे फिर से। #थार_घातक_भाजपा

Thar_Desert_Photography

29,656 views • 1 year ago

Dr Manmohan Singh Fellows प्रोग्राम उद्घाटन समारोह में मेरे वक्तव्य के कुछ अंश — सबसे पहले मैं पहली बैच के फेलोज़ को बधाई देता हूं। आप की यह ज़िम्मेदारी भी है कि 140 साल पुरानी और गौरवशाली विरासत वाली कांग्रेस के विचारों को आप आगे बढाएंगे। इसलिए मैं आप सबका कांग्रेस परिवार में स्वागत करता हूँ। मुझे डा० मनमोहन सिंह के साथ काम करने का मौक़ा मिला। वो बातें कम, काम ज़्यादा करते थे। आज के PM बातें ज़्यादा, काम जरा कम करते हैं। मनमोहन सिंह जी हमेशा Parliament sessions के दौरान house में होते थे। सवालों का जवाब भी देते थे। विपक्ष के बातों को respond करते थे।आज के PM इसे अपनी तौहीन समझते हैं। जितना काम उनके जमाने में हुआ उसका 10% काम भी पिछले 11 सालों में नहीं हुआ।पढ़-लिख कर जो नेता बनते हैं उनको ज्ञान ज़्यादा होता है, वो काम ज़्यादा करते हैं। वो प्रचार में ज़्यादा ध्यान नहीं देते। हमारी आज़ादी की लड़ाई और राजनीति में प्रोफेशनल्स और बुद्धिजीवियों की हमेशा बड़ी भूमिका रही। 1885 में कांग्रेस बनी तो वकील, अध्यापक, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अफसर उसके केंद्र में थे। महात्मा गांधी, नेहरू जी, सरदार पटेल, सरोजिनी नायडू जैसे सैकड़ों नायकों ने अपना शानदार कैरियर छोड़कर देश की सेवा की। कांग्रेस ही अकेले पार्टी है जिसने हमेशा प्रोफेशनल्स को जगह दी और उनकी काबिलियत का सम्मान किया। डॉ. मनमोहन सिंह इसमें सबसे बड़ा उदाहरण हैं। राजीव गांधीजी भी राजनीति में आने से पहले पायलट थे। प्रधानमंत्री के रूप में उनका शानदार काम रहा। भारतीय इतिहास में 1990 के बाद UPA का शासनकाल सबसे अलग, बद्लाव का दौर था। सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में professionals की मदद से सूचना अधिकार कानून, मनरेगा, शिक्षा अधिकार, खाद्य सुरक्षा, वनाधिकार जैसे ऐतिहासिक फैसले किये। डॉ मनमोहन सिंह ने 2008 की वैश्विक मंदी की परछाई भारत पर नहीं पड़ने दी। भारत की औसत 8% जीडीपी वृद्धि दर रही। मैं बताना चाहूंगा कि उसी दौरान आधार कार्ड पर काम चालू हुआ था। 2014 तक आधे से भी ज्यादा ग्रामीण घरों में बैंक खाते खुल चुके थे। 1/2

Mallikarjun Kharge

12,845 views • 1 year ago

शुभंकर मिश्रा से बड़ा मौकापरस्त व्यक्ति मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा। सबसे पहले तो यह व्यक्ति जिस तरीके से अपने पॉडकास्ट में लोगों से बातें उगलवाता है, वो बहुत ही गलत तरीका है। उसके बाद आज जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर धब्बा लगा तो इस व्यक्ति ने अपने हाथ एकदम ऐसे खड़े कर लिए जैसे इसका उस यूनिवर्सिटी से कुछ लेना-देना ही नहीं है। अब आप देखिए कि एक पुरानी वीडियो है जहाँ शुभंकर मिश्रा गलगोटिया यूनिवर्सिटी की इतनी तारीफ कर रहे हैं कि तारीफ करते-करते थक नहीं रहे। लेकिन अब अपने हाथ खड़े करके इस यूनिवर्सिटी के बारे में बुरा-भला बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि "किसी की तरक्की में क्रेडिट नहीं लिया जाता।" अरे जनाब, आप ही वो थे जो कह रहे थे कि मैं जो कुछ हूँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी की वजह से हूँ। मैं कह रहा हूँ कि मान लीजिए कि आज गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने गलत किया है, तो आप उसे गलत बोलिए। आपका कर्तव्य है, आप पत्रकारिता के जाने-माने चेहरे हैं। लेकिन आप यह क्लैरिफिकेशन क्यों दे रहे हैं कि "उसके बनने में मेरा कोई योगदान नहीं है"? यह आपके ही शब्द हैं। आज यूनिवर्सिटी बेकार है? क्या पता कल तक वो काम सही करते थे जिसकी वजह से आप वहाँ बैठे हैं। कबीर का दोहा था - "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाँय।" आज शुभंकर मिश्रा ने केवल अपने गुरुओं का ही नहीं बल्कि अपने विद्यालय का अपमान कर दिया। ऐसे मौकापरस्त व्यक्ति से क्या ही उम्मीद की जा सकती है?

चाय, इश्क और राजनीति।

43,072 views • 6 months ago

जिस प्रकार की बातें इंडी गठबंधन और कांग्रेस पार्टी कर रही हैं, वह चोरी की बात नहीं, बल्कि पुरानी कहावत चोर मचाए शोर वाला काम कर रहे हैं। वास्तविक अर्थों में, भारत विरोधी शक्तियों के साथ मेलजोल के शक के दायरे में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोग पहले से ही रहे हैं। विदेश जाकर भारत विरोधी एनजीओ और भारत विरोधी नेताओं से मिलने के प्रमाण राहुल गांधी जी के खिलाफ पहले से मौजूद हैं। विदेशों में आप भारत के लोकतंत्र में हस्तक्षेप की बात करते हुए देखे जा चुके हैं। अब विदेशी घुसपैठियों के जरिए भारत के लोकतंत्र पर डाका डालने का प्रयास इंडी गठबंधन द्वारा किया जा रहा है। कितनी ही बार झूठ बोलते हुए राहुल गांधी देश की जनता के सामने एक्सपोज हो चुके हैं। एयर चीफ मार्शल ने कहा था कि हमने पाकिस्तान के 6 विमान गिराए थे, लेकिन ये पूछते थे कि भारत के कितने विमान गिराए गए थे? भारत–पाकिस्तान सीजफायर को लेकर इन्होंने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान सही है कि जो तथाकथित सीजफायर हुआ था, वह ट्रेड डील की वजह से था। लेकिन अब यह साबित हो चुका है कि कोई डील नहीं हुई थी। और जिस इकॉनमीको आप डेड इकोनॉमी कहने से नहीं हिचकते, वह आपकी मानसिक स्थिति को दर्शाती है। वहां महात्मा गांधी थे, जिनका सत्य के साथ प्रयोग था; और यहां राहुल गांधी जी हैं, जिन्हें असत्य का भयानक रोग है। नई दिल्ली में प्रेस संबोधन : -

Dr. Sudhanshu Trivedi

27,668 views • 1 year ago

अगर इस तरह की बातें कोई हिंदू व्यक्ति भारत के टीवी चैनलों पर करता तो मुस्लिम लोग उसके खिलाफ आंदोलन करते हैं उसे गिरफ्तार करने की मांग करते हैं सुप्रीम कोर्ट न जाने कितने नोटिस भेज देता लेकिन यह पाकिस्तान के चैनल पर पाकिस्तान का ही एक मुस्लिम मुसलमानो के इतिहास और वर्तमान को बखूबी बता रहा है आप लोग सुनिए यह खुलकर कह रहे हैं कि जब आपके पास ताकत थी तब सलाहुद्दीन अय्यूबी तैमूर गजनवी जैसे लोगों ने दुनिया के तमाम देशों पर हमला किया कत्लेआम किया आज इजरायल के पास ताकत है तो यदि वह हमला कर रहा है कत्लेआम कर रहा है तो आपको दुख नहीं होना चाहिए क्योंकि जब आप अपने लोगों के द्वारा किये कत्लेआम पर उसे गाजी का कर खुश होते हैं तो फिर दूसरे लोगों के कत्लेआम पर दुख क्यों मनाते हैं ? यह आगे कह रहे हैं कि हमारा पूरा इतिहास गद्दारी का है प्लासी की लड़ाई में हमने (मीर जाफर) गद्दारी की बक्सर की लड़ाई में हमने (शाह आलम) गद्दारी की और हमारे गद्दारी की वजह से इस खित्ते अभिभाजित भारत में अंग्रेज मजबूत हुए और अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा किया अगर हमारी कौम गद्दार नहीं होती तो अंग्रेज भारत पर कभी राज नहीं कर सकते थे यह आगे बता रहे हैं कि आपने यानी हम मुसलमानो ने दुनिया को कुछ नहीं दिया है हम एक सेफ्टी पिन तक नहीं बना सके आप यह पूरा वीडियो सुनिए बेहद शानदार वीडियो है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

35,823 views • 1 year ago

आज सब लोग कहते हैं कि मोदी तानाशाह है बीजेपी तानाशाही करती है लेकिन विपक्ष जब सत्ता में होता है तब कितनी तानाशाही होती है आप सोचिए जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने एक क्रिकेट मैच का आयोजन किया था मुख्यमंत्री 11 और आईएएस अधिकारी 11 जब अखिलेश यादव बल्लेबाजी करने उतरे तब उनके रन बनाने पर विपक्षी टीम ज्यादा ताली बजती थी मतलब आईएएस अधिकारी ज्यादा ताली बजाते थे और सारे बल्लेबाज आईएएस अधिकारी यह डर-डर कर बोलिंग करते थे कि कहीं मेरे बाल से अखिलेश यादव आउट ना हो जाए फिर अचानक एक आईएएस अधिकारी ने बाल फेंका और अखिलेश यादव आउट हो गए तो बजाए वह आईएएस अधिकारी खुशी मनाए वह अपना सर पकड़ लिया वह दुखी होकर रोने लगा और बाद में उस आईएएस अधिकारी का अखिलेश यादव ने बेहद महत्वहीन पद पर ट्रांसफर कर दिया मैं इसीलिए बार-बार कहता हूं कि सत्ता कैसे चलाई जाती है यह बीजेपी को विपक्ष से सीखना होगा असली तानाशाही क्या होती है वह बीजेपी को विपक्ष से सीखना होगा

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

20,873 views • 9 months ago

यह जो राहुल गांधी से बातचीत कर रहा है यह बांग्लादेश में तख्ता पलट और हिंदुओं के कत्लेआम का मास्टरमाइंड मोहम्मद यूनुस है यह बांग्लादेश के श्रमिक फंड में 2.2 मिलियन का घोटाला करके लंदन भाग गया क्योंकि इसके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए थे.... उसके बाद यह लंदन और पेरिस में रहकर अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मिलकर रॉकफेलर फाउंडेशन और जॉर्ज सोरेस के साथ मिलकर पाकिस्तान की ISI के साथ 1 साल से प्लानिंग करके बांग्लादेश सरकार का तख्ता पलट कर दिया राहुल गांधी जो कैमरे पर बातचीत कर रहे हैं आप उसे सुनिए कितनी खतरनाक बातचीत कर रहे हैं और यह तो कैमरे के सामने हैं*l आप कल्पना करिए जब कैमरे के सामने इतनी खतरनाक बातचीत हो रही है फिर पर्दे के पीछे राहुल गांधी और मोहम्मद यूनुस में कितनी खतरनाक बातें होती होगी राहुल गांधी और मोहम्मद यूनुस में दोस्ती बहुत पुरानी है 90 के दशक के से लेकर अब तक राहुल गांधी के मोहम्मद यूनुस के साथ सैकड़ो फोटो हैं फिर भी राहुल गांधी मोहम्मद यूनुस से अपनी दोस्ती होते हुए भी एक बार भी मोहम्मद यूनुस को फोन करके यह नहीं कह रहे कि आप बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्लेआम मत करिए क्योंकि जिस तरह से मोहम्मद यूनुस हिंदुओं से नफरत करता है इस तरह से राहुल गांधी भी हिंदुओं से नफरत करते हैं

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

20,577 views • 1 year ago

मोहन भागवत जी के लिए एक शेर है कि- 'इकबाल बड़ा मनमोहक है, मन बातों से मोह लेता है। गुफ्तार का गाज़ी बन तो गया, किरदार का गाज़ी बन न सका।' ये सब गुफ्तार के गाज़ी हैं। ये लोग बातचीत में ही सिर्फ बतोले फोड़ा करते हैं। अगर बातचीत में ये लोग बतोले नहीं फोड़ते हैं, तो आज की डेट में अमित शाह जी से माफी क्यों नहीं मंगवा देते? क्यों भगोड़े हो रहे हैं अमित शाह जी संसद के? क्यों भगोड़े हो रहे हैं नरेंद्र मोदी जी संसद के? अरे अभिनंदन का काम किया है तो संसद में अभिनंदन करा दो। पेलेट गन चलवाना अभिनंदन का काम है? लाठी चलवाना अभिनंदन का काम है? पुलिस के साथ सादी वर्दी में पता नहीं कौन आतंकवादी थे, गुंडे थे, संघ के कार्यकर्ता थे, या बजरंग दल के कार्यकर्ता थे, जिन्होंने छात्रों को लाठी-लाठी मार करके गिरा दिया? जिन्होंने महिलाओं के, बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए, जिन्होंने छोटी-छोटी बच्चियों के पीछे लाठी... क्या-क्या मतलब मैं कह नहीं पा रहा हूं क्या दुस्साहस किया उन लोगों ने। आंदोलन संवाद का माध्यम है, ये मोहन भागवत जी कह रहे हैं। लेकिन आंदोलन का अपमान कौन कर रहा है? आंदोलन का अपमान कर रही है भारतीय जनता पार्टी। बकायदा वीडियो कॉल पर बात की है। उनकी मांगों को समर्थन दिया है। और हेमंत सोरेन जी ने चार कैबिनेट मिनिस्टर की सदस्यीय समिति बना दी है। 11 सदस्यीय समिति छात्रों की बन गई है। हमने छात्रों से पूछा है कि बताइए, आपके धरना स्थल पर आकर के बात करनी है, कि आप कहां आएंगे, या आप न्यूट्रल जगह पर आएंगे? छात्रों ने कहा है कि हमें एक दिन का समय दीजिए। हम एक दिन के समय में आपको बताते हैं। बॉल छात्रों के कोर्ट में है। तो सारी की सारी बातें छात्रों के साथ संवाद चल रहा है। आप, आप बताइए कि जब यहां पर धरना, आमरण अनशन शुरू हुआ था, आमरण अनशन से पहले से लेकर के और 20 दिन तक, क्या एक भी बार भी छात्रों के साथ नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने संवाद किया क्या? जब आमरण अनशन के 20 दिन हो गए तब भी संवाद किया क्या? ये असंवेदनशील सरकार है। कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता Surendra Rajput ‏ जी

M G

21,915 views • 11 days ago

हमारे संविधान ने आर्थिक न्याय की नींव डाली, किसानों, गरीबों और जरूरतमंदों को जमीन बांटी। जवाहरलाल नेहरू जी ने HAL, BHEL, SAIL, GAIL, ONGC, NTPC, RAILWAYS, IIT, IIM... जैसे तमाम PSUs और संस्थाएं बनाई। उनका नाम पुस्तकों से मिटाया जा सकता है, लेकिन राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को इस देश से कभी नहीं मिटाया जा सकता। • 75 साल में जनता का भरोसा रहा कि नीतियां, उनकी भलाई के लिए बनेंगीं। • आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन का अधिकार मिला। • इंदिरा जी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण करवाया। • कांग्रेस की सरकारों में शिक्षा और भोजन का अधिकार मिला। किसान और आदिवासी भाई-बहन ये भरोसा करते थे कि अगर कानून में संशोधन होगा तो उन्हीं की भलाई के लिए होगा। हमारे संविधान ने महिलाओं की शक्ति को वोट में परिवर्तित किया, जिससे आपको पता चल रहा है कि नारी शक्ति के बिना सरकारें नहीं बन सकतीं। इसलिए आज आप नारी शक्ति की बातें दोहरा रहे हैं, लेकिन नारी शक्ति के लिए जो अधिनियम लाए हैं, उसे लागू नहीं कर रहे। आप उस अधिनियम को आज लागू क्यों नहीं करते? : लोक सभा में कांग्रेस महासचिव श्रीमती Priyanka Gandhi Vadra जी

Congress

16,239 views • 1 year ago

जया बच्चन जी आप निस्संदेह भारतीय सिनेमा की बेहतरीन अदाकाराओं में से एक रही है…अभिनय, संवाद, अभिव्यक्ति… सब कुछ लाजवाब लेकिन दिक्कत ये है कि कैमरे के बाहर आते ही आपका व्यवहार अक्सर अभिनय जैसा उम्दा नहीं रह जाता। आप कभी-कभी पत्रकारों के सामने नाराज़गी दिखाते-दिखाते यह भूल जाती हैं कि पत्रकार भी अपना काम कर रहे होते हैं, और वह भी उतनी ही मेहनत से जितनी आप अपनी फिल्मों के दिनों में करती थीं। पत्रकारों को “गंदी पैंट पहनने वाले” कह देना… यही बताता है कि समस्या दूसरों की पैंट में नहीं, बल्कि आपके नज़रिये में गंदगी खोजने की आदत में है। मज़े की बात यह है कि आप गर्व से बताती हैं कि आपके पिता जर्नलिस्ट थे। लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने रिपोर्टिंग करते हुए, सफ़र करते हुए, ग्राउंड पर काम करते हुए न जाने कितनी बार उनकी पैंट धूल-मिट्टी में सनी होंगी। लेकिन तब किसी ने उनके हुनर को कपड़ों से नहीं तोला। उनके शब्दों को पढ़ा गया, उनके काम को समझा गया, उनके व्यक्तित्व को सम्मान दिया । आपके पिता ने पत्रकारिता की मिट्टी में रहकर काम किया… और आपने पत्रकारों को उसी मिट्टी में काम करने के लिए अपमानित कर दिया। यह विडंबना नहीं तो और क्या है? जया जी, अभिनय की चमक हमेशा बनी रहती है, लेकिन व्यवहार की छाया उससे भी लंबी होती है। आप कभी पर्दे की मां बनीं, कभी नायिका बनीं, लेकिन असल जिंदगी में पत्रकारों के प्रति आपका व्यवहार देखकर यही लगता है कि शायद अब आपको अपने रियल-लाइफ़ रोल पर थोड़ा रिहर्सल कर लेना चाहिए। क्योंकि सम्मान दिए जाने से मिलता है छींटाकशी से नहीं। आशुतोष त्रिपाठी #JayaBachchan #Paparazzi #photographer #Bollywood #bollywoodnews

Ashutosh Tripathi

34,192 views • 8 months ago

#MyModiStory जब नरेंद्र मोदी जी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री थे, तब वे अक्सर मध्यप्रदेश आया करते थे। उन्होंने पूरे प्रदेश का व्यापक दौरा किया और असंख्य कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वर्षों बाद भी वे उन कार्यकर्ताओं को याद रखते हैं, उनके बारे में पूछते हैं और उनके योगदान को सम्मान देते हैं। मुझे एक प्रसंग हमेशा याद रहता है। एक बार मोदी जी ने मुझसे लक्ष्मी नारायण गुप्ता जी के बारे में पूछा, जो कभी मंत्री भी रहे थे। बाद में जब मोदी जी भोपाल एक कार्यक्रम में आए, तो मैंने उनसे अनुरोध किया कि वे लक्ष्मी नारायण जी से मिलें। उन्होंने तुरंत सहमति दे दी। हमने लक्ष्मी नारायण जी को मोदी जी से मिलने के लिए आमंत्रित किया। हमें लगा था कि मोदी जी उनसे बस हालचाल पूछेंगे और आगे बढ़ जाएंगे। लेकिन जो हुआ, उसने सबको भावुक कर दिया। जैसे ही मोदी जी वहाँ पहुँचे, उन्होंने सबसे पहले झुककर लक्ष्मी नारायण जी के चरण छुए। वह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। भारत के प्रधानमंत्री, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, और फिर भी उन्होंने पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के प्रति इतना सम्मान प्रकट किया। इससे साफ दिखता है कि मोदी जी पार्टी के विस्तार में योगदान देने वालों को कितनी श्रद्धा और मान देते हैं। जब मोदी जी उनसे मिले तो लक्ष्मी नारायण जी भी भावुक हो गए। मोदी जी ने धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुनीं। चूँकि लक्ष्मी नारायण जी को ठीक से सुनाई नहीं देता था, इसलिए मोदी जी ने ऊँची आवाज़ में उनसे बातचीत की ताकि वे सब समझ सकें। उनसे आत्मीय वार्तालाप करने के बाद ही मोदी जी मंच की ओर बढ़े। उस मुलाकात के कुछ दिन बाद ही लक्ष्मी नारायण जी का निधन हो गया। ऐसा लगा मानो वे केवल मोदी जी से एक बार मिलने के इंतज़ार में थे। इस घटना ने मेरे मन में एक गहरी छाप छोड़ी।

Shivraj Singh Chouhan

54,364 views • 11 months ago

दुनिया के महशूर फुटबॉलर रोनाल्डो एक इंटरव्यू में बैठे बात कर रहे थे, वहा उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में वो अपने घर से दूर एक स्टेडियम में रहते थे। इस स्टेडियम के बगल में एक मैकडोनाल्ड था। रोनाल्डो और उनके दोस्त रात के दस ग्यारह बजे, मैकडोनाल्ड के पीछे वाले गेट पर खड़े हो जाते और अंदर काम कर रही तीन लड़कियों से बचा हुआ हैम बर्गर मांगते थे। वो लड़किया अक्सर रोनाल्डो और बाकी बच्चो को फ्री में बर्गर खाने के लिए देती थी। आगे जाकर रोनाल्डो बहुत कामयाब हुए, अकूत दौलत कमाई, उन्होंने उन लड़कियों को ढूंढने की कोशिश की पर उन्हे मिली नही। उन तीन लड़कियों में से एक लड़की एडना अपने बच्चो को अक्सर रोनाल्डो और बर्गर वाली बात बताया करती थी। बच्चे यकीन करते थे या नही पता नही। पर रोनाल्डो इतनी ऊंचाई पर पहुंच चुका थे कि एडना के लिए रोनाल्डो के आस पास पहुंचना नामुमकिन था। उस इंटरव्यू में बात करते हुए रोनाल्डो ने इच्छा जताई कि वो इन तीनों औरतों से मिलना चाहते है,उन्हे बस एक लड़की एडना का नाम याद है, वो उन तीनो को अपने घर डिनर पर बुलाना चाहते है, जो उन्होंने रोनाल्डो के लिए किया, रोनाल्डो उस उपकार को वापस लौटाना चाहते थे। इस इंटरव्यू के बाद रोनाल्डो ने एडना को ढूंढ लिया और अपने वादे के मुताबिक एडा से मुलाकात, उनका हाथ चूमा। ये भी कहा जाता है कि रोनाल्डो ने एडा को पुर्तगाल का सबसे बड़ा रेस्त्रा गिफ्ट किया था पर इसमें कितनी सच्चाई है मालूम नही। एडना ने एक इंटरव्यू में कहा कि रोनाल्डो उनके साथ दोस्त के जैसा सलूक करते है, और वो उनके साथ कॉफी पीने भी जा चुकी है। कृष और सुदामा की दोस्ती द्वापर युग की है, और रोनाल्डो और एडा का रिश्ता 21वी सदी की बात हैं। इसलिए जिंदगी में जितने लोगो के साथ आप अच्छा सुलूक कर सकते है करिए, उन्हे संभाल सकते है संभालिए,सहारा दे सकते है सहारा दीजिए, क्युकी मदद करने वाले लोग कभी भुलाए नहीं जाते, चाहे वो द्वापर युग हो, प्रियदर्शन की फिल्म हो, या दुनिया के सबसे बड़े एथलीट रोनाल्डो की मदद करने वाली एडना हो।

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

38,692 views • 1 month ago

शरद पवार के घर विवाह समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मोबाइल पर कुछ चीज दिखाते और उन्हें कुछ बताते यह मिथलेश देसाई है यह महाराष्ट्र के रत्नागिरी के रहने वाले हैं यह जर्मनी में इंजीनियर थे उसके बाद यह भारत आकर जैकफ्रूट कटहल यानी फनस की वैज्ञानिक तरीके से बड़े पैमाने पर खेती करनी शुरू की पर आज यह 86 तरह का कटहल यानी जैकफ्रूट उगाते हैं इन्होंने कटहल में कलम बनाकर एक्सटर्नल पोलीनेशन करवा कर 86 तरह के कटहल के पौधे की प्रजाति विकसित कर दिए जो अब तक दुनिया में किसी ने नहीं किया और उन कटहल को प्रोसेस करके कई तरह की चीज बनाकर पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट करते हैं इन्हें कटहल किंग यानि जैकफ्रूट किंग भी कहा जाता है इसके अलावा दुनिया की कई रिसर्च लैब भी इसे कटहल लेती है क्योंकि आजकल कटहल कैंसर के इलाज में क्या योगदान दे सकता है इस पर दुनिया के कुछ लैब रिसर्च कर रहे हैं अब आप सोचिए एक व्यक्ति जो किसी विवाह समारोह में गया है वहां भी जब इसे पता चला कि यह व्यक्ति भारत के विकास में योगदान दे रहा है तो उनसे बातें करते हैं उनसे डिस्कस करते हैं और उनसे नई जानकारी लेते हैं ताकि देश के दूसरे किसानों को भी इसका फायदा मिल सके

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

135,331 views • 7 days ago

सु्ल्तानपुर जिले के अरुण कुमार प्रजापति जूनियर हाई स्कूल में टीचर हैं। 2022 में जिले से 29 बच्चों का सिलेक्शन राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में सिलेक्शन हुआ। इसमें 8 अरुण सर के स्कूल के थे। इस परीक्षा को पास करने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों को 9वीं से लेकर 12वीं तक सलाना 12 हजार रुपए की स्कॉलरशिप मिलती है। बच्चे खुश हुए। इस खुशी को देखकर अरुण सर को लगा कि क्यों न और बच्चों को ऐसी छात्रवृत्ति दिलवाकर खुश किया जाए। अरुण सर ने कोचिंग खोल ली। एकदम फ्री। खुद के पैसे से किताब-कॉपी अरेंज किया। देखते ही देखते बच्चों की भरमार हो गई। ये वो बच्चे थे जो जीवन में कुछ करना चाहते थे लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते कुछ कर नहीं पा रहे थे। 8-10 किलोमीटर दूर से आने लगे। अरुण सर ने पढ़ाना शुरू किया। एक के बाद एक सिलेक्शन, अलग-अलग स्कॉलरशिप प्रोग्राम में सैकड़ों बच्चों का सिलेक्शन हो गया। अरुण सर से हमने पूछा कहां से मैनेज करते हैं सर? अरुण सर बोले, एक लाख सैलरी है। घर में तीन बच्चे हैं। बड़ा वाला ताइवान में है, छोटा वाला लखनऊ में यूपीएससी की तैयारी कर रहा। बिटिया भी 12वीं करके भाई के पास पढ़ने जाना चाहती है। इन्हीं में खर्चा है, बाकी तो सब बचता है, उसी से सब हो जाता है। आज यह करके खुश हूं। शायद मुझसे ज्यादा कोई खुश नहीं होगा। अरुण सर की यह बातें सुनकर हम तो धन्य हो गए। बच्चो से बात की। किसी के पिता नहीं तो किसी के यहां पैसा नहीं। सब सरकारी स्कूल के बच्चे। कभी कहीं कोचिंग नहीं कर पाए। यहां एक अवसर मिला और आज चमक रहे। दैनिक भास्कर पर आप पूरी स्टोरी देख व पढ़ सकते हैंः

Rajesh Sahu

19,260 views • 9 months ago

हम चाहते थे कि इस सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री जी भी आएं और संक्षिप्त में अपनी बात रखें कि किस तरह भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक्शन लिया और हमारे जवानों ने हिम्मत दिखाई। हम हमारे जवानों को सलाम करते हैं और उनका अभिनंदन करते हैं। हम चाहते थे कि प्रधानमंत्री खुद आकर सारी बातें बताते, जिससे सभी को उसका लाभ मिलता। वे पिछली सर्वदलीय बैठक में भी नहीं आए थे, ये बड़े दुख की बात है। INDIA गठबंधन के साथ ही सारी विपक्षी पार्टियों ने एक आवाज में सरकार से कहा है कि आप आगे बढ़िए, हम आपकी पूरी मदद करेंगे, हम आपके साथ हैं। हम सभी भारतीय सेना के साथ हैं। प्रधानमंत्री जी ने भी कहा है कि मैं आर्मी को संपूर्ण अधिकार देता हूं, वे कोई भी एक्शन लें, हम उनके साथ हैं। बैठक में रक्षा मंत्री जी ने कहा कि इस वक्त ऐसे प्रश्न न पूछे जाएं जो डिफेंस सीक्रेट से जुड़े हैं, ऐसे वक्त में हम उन्हें सार्वजनिक करना नहीं चाहते। हम सभी पार्टियों ने भी देशहित में इसे गंभीरता से लेकर इस विषय में कोई प्रश्न नहीं पूछा। हम सभी ने एक मुद्दा उठाया है कि बॉर्डर पर हमारे लोगों को पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए। कश्मीर में जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, उनके परिवारों की देखभाल होनी चाहिए। हमने सरकार से आग्रह किया है कि वे नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। सर्वदलीय बैठक में सरकार ने बताया है कि हमने कोई मिलिट्री एक्शन नहीं लिया है। हमने सिर्फ उन्हीं जगहों पर हमला किया है, जहां टेरेरिस्ट कैंप हैं और आतंकियों को पनाह दी जाती थी। हमने इस संकट की घड़ी में सरकार को पूरा समर्थन दिया है। सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी बातें रखीं और कहा कि हम सैन्य बलों के साथ हैं। इस बैठक में राहुल गांधी जी ने एक मांग रखी कि सरकार को संसद सत्र बुलाना चाहिए ताकि दुनिया में एक अच्छा संदेश जाए और देश को भरोसा मिले।

Mallikarjun Kharge

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स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब : जोधपुर की बात छोड़ो, मेरे संबंध उनसे अच्छे हो गए थे। वो बत्तीस पर आ गए, मैं 156 पर आ गया। तब भी हमारा उस वक्त से ही संबंध अच्छे रहे। सीधा मैं शपथ लेकर उनके घर गया। वो लंबी कहानी छोड़ दो। मैं कह चुका हूं। मीडिया द्वारा पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को डिले करने को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब: आज फिर खबर पढ़ी मैंने कि OBC का जो रिकमेंडेशन है उसके लिए तो अपने हिसाब से करेंगे। नीयत खराब है, हाईकोर्ट दो बार कह चुका, इस सरकार को भंग करने लायक सरकार है ये। मैंने पहले भी कहा, ऐसी सरकार जो संविधान की पालना नहीं कर रही है। हमने प्रयास किया, नहीं माना स्ट्राइक के वक्त में हमें चुनाव करवाने पड़े। हम भी कोई बहाना ढूंढ लेते। आज ये चुनाव नहीं कराने के बहाने ढूंढते हैं। इतनी घबराई हुई है कि साफ हो जाएंगे हम नगर निकायों में, पंचायतों में। को-ऑपरेटिव में चुनाव नहीं करवा रहे। कल आए को-ऑपरेटिव वाले मेरे पास में। राजस्थान के अंदर स्थिति बड़ी गंभीर है, हर वर्ग असंतुष्ट है। ऐसी सरकार आजादी के बाद में कभी आई नहीं होगी, यह मैं कह सकता हूं। ये मंत्री जी हैं न आपके जो इनको मैं कहना चाहूंगा अगर आप ये दस साल में मेरे साथ दो-तीन बार चाय पी लेते तो इनको कम से कम मैं सुझाव देता काम कैसे कराए जाते हैं। ब्रॉड गेज आ गई जोधपुर के अंदर, दो ट्रेन चलती थी, अब पचास चलती होंगी। हिंदुस्तान भर में जुड़ गए हम लोग, पानी लेकर हम आ गए। क्या-क्या काम उस वक्त नहीं हुआ बताइए आप। एयरपोर्ट भी उस वक्त बना था। सब कुछ हमारे वक्त में काम हुए और काम भी इस प्रकार से हो गए जो लोग कल्पना नहीं करते थे। लोग मांग नहीं करते थे, उसके पहले काम हो जाते थे। यह हमारी अप्रोच थी। अब यह पता नहीं अपने को तीस मार खां समझते होंगे कि सब अक्ल मेरे में ही है इसलिए किसी को सलाह करते नहीं हैं। अरे हम भी यहां के एमपी रहे हुए हैं। हमसे बातचीत करते, बैठ के बातचीत करते, चाय पर बुलाते, चाय पर आते, कुछ करते तो हम भी अपने जो अनुभव थे, शेयर करते हम लोग। हो सकता है राजस्थान का या जोधपुर का भला ज्यादा होता। ये अपनी भूमिका पूरे राजस्थान में निभा सकते थे। पर ये तो ये तो यही हैं। बड़ी-बड़ी मीठी बातें करते रहते हैं और काम पास कर रहे हैं। तो भाई इनको समझाओ कम से कम जोधपुर में आपकी बारह साल में क्या उपलब्धि है। बारह साल हो गए मोदी जी को, बारह साल इनको हो गए। इनको बताओ एक उपलब्धि, बताएं कि मेरे वक्त में उपलब्धि हो गई। ये ओवर ब्रिज बन रहा है, पता नहीं कब बनेगा, वो भी मैंने गडकरी जी को कह करके इसको सेंक्शन करवाया। ठीक है वो केंद्रीय मंत्री हैं तो मुझे एतराज नहीं है। पर मेरा सुझाव था क्योंकि मैंने कहा स्टेट गवर्नमेंट से एक हज़ार करोड़ के मैंने सेंक्शन कर दिए इसके लिए, तो मुझे पता था कि ये जो आपका एरिया है, क्या बिल्डिंग का नाम क्या है, हैदर बिल्डिंग, यहां हमें तकलीफ आएगी क्योंकि अंडर ब्रिज बन सकता है ओवर ब्रिज भी हो सकता है, तो मैंने कहा ये काम, ये एक्सपर्टाइज़ करते हैं गडकरी जी और इनका डिपार्टमेंट। वो बनाएं इस बात को लेकर, डीपीआर करवा दी और मेरे ख्याल से मोदी जी ने शिलान्यास भी कर दिया, मैंने सुना है। पता नहीं आगे काम कितना बढ़ रहा है।

Ashok Gehlot

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