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अगर अपराधी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी का स्वजातीय ठाकुर है, खासमखास है, अपनी जाति वाला है तो उसे गोली चलाने, गुंडई करने की पूरी भाजपाई और आदित्यनाथी छूट है? वीडियो में आदित्यनाथ बिष्ट जी का भाषण और गोली चलाता और पिस्टल लहराता खुली जीप वाला स्वजातीय ठाकुर गुंडा और आदित्यनाथ...

16,243 views • 3 months ago •via X (Twitter)

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मुख्यमंत्री बिष्ट ठाकुर आदित्यनाथ बैठकर बिना वनस्पति लिए हुए चुनाव हारने के पश्चात की कल्पना करें ये गुजराती जोड़ी उन्हें कहीं का छोड़ेगी नहीं, भाजपा में बिष्ट जी स्वीकार्य हैं नहीं, 10 साल के मुख्यमंत्रित्व काल का भ्रष्टाचार और अपराध जब सामने आयेगा, काला कच्चा कुकर्म का चिट्ठा सामने आयेगा तब क्या होगा? विधायक सांसद छोड़ो BDC और प्रधानी के लाले हैं, भगवा कपड़ों की पीछे की हकीकत भी सत्ता के इन 10 सालों में खुलकर सामने आ चुकी है क्योंकि बंद मुट्ठी लाख की और खुल गई तो खाक की होती है जितने भी पुराने संगी साथी सहयोगी थे सब पिछले 10 साल में साथ छोड़कर जा चुके हैं, बाकी बचे भी साथ छोड़कर निकल लेंगे, जनता के बीच जब असलियत सामने आएगी तब क्या होगा? सोचा है कभी? इसीलिए कहते हैं कि इंसान को गड्ढा इतना ही खोदना चाहिए जितने के बाद वो अगर उसी गड्ढे में गिरे तो स्वयं से बाहर निकल सके लेकिन पाप का घड़ा भर चुका है

Samajwadi Party Media Cell

16,434 views • 7 days ago

फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह पर उर्स के दौरान फैली गंदगी का वीडियो केवल गंदगी नहीं, बल्कि गंभीर सरकारी विफलता है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के शासन में धार्मिक भेदभाव की पराकाष्ठा को उजागर करता है। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर की भी उपेक्षा की जा रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या कुछ विशेष धार्मिक स्थलों के प्रति जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। जिस स्थान पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं, वहां इस प्रकार की गंदगी और अव्यवस्था सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी धर्मों और आस्थाओं के स्थलों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे तथा उनकी स्वच्छता, सुरक्षा और गरिमा हर हाल में बनाए रखे—लेकिन मौजूदा हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। Government of UP CM Office, GoUP

Chandra Shekhar Aazad

25,082 views • 5 months ago

समस्या सुनने खुद मुख्यमंत्री गांव आएं ऐसे दृश्य हमने कभी नहीं देखे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीकर के गांव जाजोद में रात बिताने के बाद शुक्रवार सुबह गांव का दौरा किया। मॉर्निंग वॉक पर निकले तो लोग मिल गए। उनसे बातें भी की और अपनी समस्याएं भी बेझिझक बताई। राजस्थान में यह एक नयापन है। हमने इतनी उम्र में मुख्यमंत्री तो बहुत देखे हैं लेकिन जनता के बीच जाकर इस तरह समस्याओं को सुनने की कोई परंपरा नहीं देखी। कल भजनलाल जी प्रतापगढ़ के बंबोरी में थे और आज सीकर के जाजोद में। कल किस गांव में होंगे, वे ही जानें लेकिन राजस्थान के लोगों को अब यह उम्मीद तो रहेगी की कभी मुख्यमंत्री जी उनके गांव में भी आकर उनकी पीड़ाएं पूछ सकते हैं। जब प्रदेश का शीर्ष व्यक्ति खुद आपके गांव में आकर आपकी समस्याएं सुनता और देखता है तो उनके समाधान की उम्मीद भी बढ़ जाती है और संभावना भी। यह सिलसिला चलता रहे। समस्याएं अनंत है और कभी खत्म नहीं होती लेकिन कोई सुनने वाला हो और समाधान करवाने वाला हो, इतना भी बहुत है। Bhajanlal Sharma

Arvind Chotia

61,161 views • 4 months ago

यह राजस्थान की सबसे सुंदर तस्वीर है! राजस्थान में अनेक नेता हैं। सदाशयी भी हैं; भले और भोले-भाले भी हैं; लेकिन कुछ मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कोई सानी नहीं। वे एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो बुजुर्गों और बीमारों की सुध लेना कभी नहीं भूलते। चाहे कोई हो। वयोवृद्ध हो या बीमार। नेता हो, पत्रकार हो या पुराना मित्र। काँग्रेस का हो या भाजपा का; गहलोत साहब उनसे मिलने अवश्य जाते हैं। यह उनका स्वभाव है और यह उनकी संवेदनशीलता है। वे मुख्यमंत्री रहते हुए भी यह काम कर लिया करते थे। हो सकता है, किसी को उन्होंने राजनीतिक रूप से बेकल भी किया हो; लेकिन वह भी बीमार पड़ा तो सबसे पहले वे ही पहुँचते हैं। इस काम को वे राज्य की सीमाओं से पार जाकर करते हैं। वे जब तीसरी बार सीएम थे तो उन्होंने एक अप्रत्याशित व्यक्ति के सहयोगी की पुत्रवधू के गंभीर इलाज में बिना किसी के कहे न केवल मदद की, उन्हें सब तरह की सुविधाएं मुहैया करवाईं। गहलोत ऐसे काम करते रहते हैं और उनकी चर्चा भी नहीं करते। आज उन्होंने शतायु पार पंडित रामकिशन जी से मुलाकात की। सौ से भी अधिक वसंत जी चुके इस अनुभवी व्यक्तित्व के साथ उनकी यह भेंट न केवल शिष्टाचार है, बड़ों के प्रति सम्मान की एक जीवंत मिसाल भी है। पंडित रामकिशन हमारे प्रदेश की राजनीति के लिए किसी थाती से कम नहीं हैं। इसलिए गहलोत साहब का यह क़दम उनके क़द को भी बढ़ाता है और दम को भी। लेकिन अफ़सोस कि कॉंग्रेस या भाजपा के किसी नेता में अब यह ख़ूबी नहीं दिखती। यह तस्वीर सुंदर है। यह मुलाक़ात बेहतरीन है। और यह इंसानियत अनमोल है। इस इंसानियत की कुछ कोंपलें हम भी अपने दिलों की मिट्टी में उगाएँ! बाक़ी नेता भी इस राह पर बढ़ें! 🙏

Tribhuvan_Official

18,661 views • 4 months ago

अब तो भाजपा का झूठा राष्ट्रवाद नकाब में भी नहीं है, असली चेहरा सबके सामने है। ICC का फैसला मानने के लिए हम बाध्य हैं? क्यों? यहां आंतरिक सुरक्षा के सबसे बड़े पद पर बैठा पिता आतंकवाद रोकने में नाकाम है, और ICC के सबसे बड़े पद पर बैठा पुत्र एक मैच रोकने में। फिर काबिलियत है ही क्या? अनुराग ठाकुर कहते हैं कि पॉइंट्स उन्हें न मिल जाए - सम्मान, स्वाभिमान से बड़े हैं ये 2 पॉइंट्स? क्या हमारे भारतीय भाई बहनों की शहादत से बड़े हैं आपके 2 पॉइंट्स? और तो और, भाजपा नेता हंसते हुए कह रहे हैं कि हमने खून और पानी साथ नहीं बहेगा, ये कहा था, क्रिकेट का कुछ नहीं कहा था। ऐसी बात सिर्फ वो ही कह सकते हैं जिनका खून पानी हो गया हो। भाजपा में न देशभक्ति है, न राष्ट्रवाद - आतंकवाद उनके लिए चुनावी मुद्दा है, और शहादत वोट मांगने का औजार।

T S Singhdeo

14,605 views • 11 months ago

नाथ संप्रदाय में ‘आदेश’ का मतलब और महत्व: नाथ योगी एक-दूसरे से मिलते वक्त ‘नमस्ते’ या ‘राम-राम’ नहीं, बल्कि *“आदेश”* बोलते हैं। इसका अर्थ है: आ = आत्मा, दे = देव/परमात्मा, श = शरीर यानी: _“आत्मा, देव और शरीर एक हैं”_ या _“मैं तुम्हारे भीतर स्थित शिव को प्रणाम करता हूं।” गोरखनाथ जी ने कहा है: “आदेश आदेशे सब कोई, आदेश कहे सो योगी होई।” मतलब जो ‘आदेश’ का मर्म समझ ले, वही सच्चा योगी है! अभिवादन नहीं, उद्घोष है: ये साधारण हैलो-हाय नहीं। ये गुरु-परंपरा को नमन है। आदिनाथ शिव, मत्स्येंद्रनाथ और गोरखनाथ को याद करना है। जब नाथ योगी ‘आदेश’ बोलता है तो वो सामने वाले के अहंकार को नहीं, उसके भीतर के शिव-तत्व को प्रणाम करता है। ‘आदेश’ सुनते ही पता चल जाता है कि सामने वाला नाथ पंथी है। ये उनकी पहचान है। योगी आदित्यनाथ जी को ‘आदेश’ करते कई बार देखा गया है! योगी आदित्यनाथ जी सिर्फ UP के CM नहीं हैं। वो गोरखनाथ मठ के महंत और 'नाथ संप्रदाय के सबसे बड़े "पीठाधीश्वर" हैं। गोरक्षपीठ की परंपरा:गोरखनाथ मंदिर में सुबह गोरक्षनाथ जी की आरती के बाद, या किसी भी नाथ योगी से मिलते वक्त वो हाथ जोड़कर “आदेश” बोलते हैं। ये 1000 साल पुरानी परंपरा है। जब भी कोई नाथ योगी, नागा साधु या संत उनसे मिलने आता है, तो योगी जी पहले ‘आदेश’ करते हैं। कई बार रैली में संत समाज के सामने वो मंच से ‘आदेश’ का उद्घोष करते हैं। ये जनता को बताता है कि उनकी जड़ें कहां हैं। इसीलिए जब योगी जी ‘आदेश’ करते हैं तो वो CM की कुर्सी नहीं, गोरक्षपीठ की गद्दी का धर्म निभा रहे होते हैं। आदेश...🙏🔥

Thakur Saurabh Singh

19,905 views • 4 months ago

रोजाना भाजपा शासित आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर की सरकार में विपक्षी नेताओं पर, उनके परिजनों पर, बेटे बेटियों पर अनर्गल अभद्र अश्लील टिप्पणियां बातें कहीं और लिखी जाती है खुद भाजपा के तमाम नेता, मंत्री, विधायक, सांसद ऐसी अभद्र टिप्पणियां करते हैं, भाजपा के लोग पोस्टर बाजी करते हैं, कोई कार्यवाही नहीं होती लेकिन अगर कोई सामान्य नागरिक, आम आदमी, सामाजिक कार्यकर्ता या विपक्षी दल का नेता कार्यकर्ता कोई भी टिप्पणी "भले ही वह बात सही ही क्यों न हो" कर दे तो तुरंत जेल भेज दिया जाता है, प्रताड़ना दी जाती है, मुकदमा दर्ज हो जाता है यह कौन सा न्याय है? बताएं आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर? ऐसी परंपरा को भाजपाइयों को भी भोगना पड़ेगा ये याद रखें

Samajwadi Party Media Cell

18,811 views • 1 month ago

ये प्यार नहीं है – प्यार कभी ऐसा हो ही नहीं सकता। यह किसी खतरनाक अपराधी का स्वार्थ, पागलपन और उसकी हिंसक मानसिकता का प्रमाण है। बिहार के बक्सर में शादी के दौरान स्वार्थी प्रेमी दीनबंधु द्वारा दुल्हन आरती को गोली मारने की घटना ने एक बार फिर समाज को झकझोर दिया है। ऐसी वारदातें साफ बता देती हैं कि इसे प्यार कहना, प्यार का अपमान है। प्यार में सम्मान होता है, विश्वास होता है और दूसरे की खुशी की सच्ची कामना होती है – न कि स्वार्थ, अधिकार जताना, अपने तथाकथित प्रेम को कष्ट पहुँचाना या हिंसा का रास्ता चुनना। अगर कोई व्यक्ति किसी के “ना” को स्वीकार नहीं कर पाता और गुस्से या जुनून में जान लेने या नुकसान पहुँचाने पर उतर आता है, तो वह प्रेम नहीं बल्कि खतरनाक मानसिकता और घोर अपराध है। सच्चा प्यार कभी किसी की जिंदगी छीनने की कोशिश नहीं करता; वह तो सामने वाले की सुरक्षा और खुशी चाहता है, चाहे रास्ते अलग ही क्यों न हों।

NCIB Headquarters

18,568 views • 6 months ago

भीड़ में कहीं खो जाती है इंसानियत: ट्रेन की फर्श पर बैठी माँ-बेटी ने दिखाया कड़वा सच। एक दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ एक माँ अपनी नन्ही बच्ची के साथ ट्रेन के फर्श पर बैठने को विवश दिख रही थी। उनके चेहरे पर साफ़ दिख रही थकान, लाचारी और मजबूरी किसी के भी दिल को पिघला सकती है। चारों तरफ लोग आराम से अपनी सीटों पर बैठे थे, लेकिन किसी में इतनी भी इंसानियत नहीं थी कि इस माँ-बेटी को बैठने के लिए थोड़ी सी जगह दे दे। यह दृश्य केवल एक घटना नहीं है, बल्कि हमारे समाज की बढ़ती संवेदनहीनता का दर्पण है। जब भीड़ बढ़ती है, तो इंसानियत अक्सर पीछे छूट जाती है। क्या हम इतने व्यस्त और असंवेदनशील हो चुके हैं कि किसी जरूरतमंद की मदद भी नहीं कर पाते? ये तस्वीर हम सबसे एक सवाल पूछ रही है — क्या हम सच में एक संवेदनशील समाज में जी रहे हैं, या बस अपने-अपने आराम में खो चुके हैं?

Adv. Divya Jakhar

16,886 views • 4 months ago

भाजपा की 'एनिमेटेड' राजनीति बनाम हेमंत सोरेन जी का 'धरातल' पर विकास! फर्क साफ है। भाजपा ने बिहार के फ्लाईओवर का एक ग्राफिक्स/AI वीडियो डालकर श्रेय लेने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही जनता ने झूठ पकड़ा, डरकर ट्वीट डिलीट करना पड़ा। दूसरी तरफ, हमारे झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren जी के नेतृत्व में रांची में बनकर तैयार हुआ भव्य 'कार्तिक उरांव फ्लाईओवर' कोई कंप्यूटर का ग्राफिक्स नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा हुआ सच है, जो आज रांची की लाइफलाइन बन चुका है। झारखंड की अबुआ सरकार विज्ञापन और फर्जी रील बनाने में नहीं, बल्कि जनता को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और रियल विकास करने में विश्वास रखती है। भाजपा केवल वीडियो डिलीट कर सकती है, लेकिन हेमंत सोरेन जी के काम को जनता के दिलों से डिलीट नहीं कर सकती। बाहरी ताकतों के झूठ पर झारखंड का सच भारी है। जो काम सालों से अटका था, उसे हेमंत सोरेन जी ने पूरा करके दिखाया। जय झारखंड!✊

Brahmdeo Paswan

14,175 views • 3 months ago