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अगर आप खुद या अपने बच्चों को कैडबरी चॉकलेट खिला रहे हैं, तो होश में आ जाइए। एक ग्राहक के अनुसार पैकेट खोलते ही उसमें कीड़े निकले। ये सिर्फ लापरवाही नहीं, जानलेवा जोखिम है। कंपनियाँ मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खेल रही हैं — और सिस्टम आंखें...

27,169 views • 10 months ago •via X (Twitter)

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अगर आप भाजपा के कट्टर समर्थक हैं, अगर आप भाजपा के लिए काम करते हैं, अगर आप भाजपा की सोशल मीडिया टीम में हैं अगर आप भाजपा का प्रचार करते हैं, अगर आप कट्टर अंधभक्त हैं, तो ये वीडियो पूरा देखिए और सोचिए कि पार्टी के लिए काम करने वालों की क्या हालात है? इस लड़की का नाम श्वेता है, ये इन्फ्लूएंसर है और अभी दो दिन पहले अपने भाई के साथ भाजपा के प्रचार के लिए कंटेंट इक्कठा करने एक मीटिंग में गई थी। ठीक दो दिन बाद इसके भाई का एक्सीडेंट हो गया तो ये अपने भाई को लेकर गोरखपुर AIIMS गई लेकिन वहां कोई डॉक्टर ही नहीं था। जबकि 4-4 डॉक्टर वहां नियुक्त हैं। अब ये सिस्टम को कोस रही है, रो रही है जबकि दो दिनों पहले ये प्रचार कर रही थी। सच्चाई आपके सामने है और फैसला आपके हाथ में है।

MANISH YADAV लालू

75,396 views • 2 months ago

मुंबई के राजस्थानी गुस्से में हैं राजस्थान में सरकार-विपक्ष नींद में हैं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के सिरफिरों द्वारा मराठी बोलने की बात पर आए दिन हो रही मारपीट की घटनाएं जब हद से ज्यादा बढ़ गई तो राजस्थानी समाज सड़कों पर उतर आया। आप इस जुलूस में शामिल लोगों के नारे सुनिए। यही नर राजस्थानियों के हैं और यही नारे महाराष्ट्र वालों के भी हैं लेकिन उन्हें अपना प्रभुत्व साबित करने के लिए जोर इन पर ही चलना है। खैर! जिसमें जितना जोर होगा वह चला लेगा क्योंकि हालात जंगल राज जैसे ही हैं और कोई ना कोई एक भारी भी पड़ जाएगा जिसमें जोर होगा। सवाल राजस्थान की सरकार और राजस्थान के विपक्ष से है। एक भाषा के नाम पर राजस्थान के लोगों से लगातार बदतमीजी हो रही है लेकिन राजस्थान सरकार का कोई कड़ा वक्तव्य अभी तक नहीं सुनने में आया। राजस्थान के विपक्ष ने भी राजस्थान की भाजपा सरकार या महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को घेरने जैसा अभी तक कोई उपक्रम नहीं किया है। मुंबई में रह रहे राजस्थानियों या कर्नाटक में रह रहे राजस्थानियों या तमिलनाडु में रह रहे राजस्थानियों से हर चुनाव में वोट मांगने राजस्थान के नेता जाते हैं। साफे पहनकर आते हैं। अच्छी आवभगत करवाकर आते हैं और अच्छे उपहार भी लेकर आते हैं। बदले में देते क्या है? सिर्फ भरोसा और वह भी झूठा। आज मुंबई में रहने वाला राजस्थानी समाज अपने खुद के दम पर अपनी लड़ाई लड़ रहा है। उनके साथ कोई नहीं आया है। आप सिर्फ एक साल पहले हुए लोकसभा चुनाव के वक्त के राजस्थान के नेताओं के ट्वीट खंगाल लीजिए। आपको यह सभी नेता महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में वोट मांगते हुए मिल जाएंगे लेकिन आज जब मुंबई के लोग संकट खेल रहे हैं तब कोई भी उनके बीच जाकर दखल देने की सहमत उठाने के लिए तैयार नहीं है। मुंबई या कहीं भी और जगह पर रहने वाले राजस्थानी समाज के लोगों को खुद को ही मजबूत करना होगा और अपनी लड़ाई लड़नी होगी। हां, अगली बार यह वोट मांगने आएं तो उनको द्वार से ही लौटा दीजिए। उनकी सभाओं में मत जाइए। उनको यह अहसास करवाइए कि आप सिर्फ वोट देने के लिए नहीं है।

Arvind Chotia

46,384 views • 1 year ago

सोचिए 👇 • आप 'वंदे भारत' से सफर कर रहे हैं • ट्रेन में आपके लिए खाना परोसा गया है • लेकिन आपके खाने में 'जिंदा' कीड़े रेंग रहे हैं हम आपको डरा नहीं रहे- ऐसा सच में हुआ है। 'वंदे भारत' ट्रेन का ये वीडियो इस घटना का गवाह है, जहां यात्रियों से मोटा किराया वसूलकर 'कीड़े वाला खाना' परोस दिया गया। ये पहली बार नहीं है। 'वंदे भारत' से लगातार घटिया खाने की शिकायतें आ रही हैं। कभी खाने में कीड़े निकलते हैं, कभी कॉकरोच, तो कभी बासी और बदबूदार खाना परोस दिया जाता है। ये न सिर्फ खुली लूट है, बल्कि लोगों की सेहत और सुरक्षा से गंभीर खिलवाड़ है- जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मोदी सरकार जनता से वसूली तो पूरी करती है, लेकिन सुविधा देने के नाम पर कन्नी काट जाती है।

Congress

81,475 views • 6 months ago

अब आप समझ लीजिए शिक्षा का सिस्टम क्यों नहीं सुधरता है? ये अनिल स्वरूप साहब हैं। भारत सरकार के कोयला और शिक्षा सचिव रह चुके हैं। यह खुद बता रहे हैं कि जब यह कोयला सचिव थे तब प्रधानमंत्री से हर महीने एक बार जरूर मिलते थे। जरूर कोयले से जुड़ी बातें ही होती होगी। कोयला भी देश के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन जब ये शिक्षा सचिव थे तो प्रधानमंत्री से सिर्फ एक बार मिले। और वह भी शिक्षा से जुड़े काम के लिए नहीं बल्कि हेल्थ इंश्योरेंस समझाने के लिए मिलना हुआ। हालांकि ये कितने समय शिक्षा सचिव रहे, यह नहीं बताया है। फिर ये बता रहे हैं कि शिक्षा का बजट कैसे हर साल कम होता गया। अब आप ही बताइए कि जब कोई सब्जेक्ट सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं होगा तो उसमें सुधार होगा कैसे? जिस विषय पर बात ही नहीं होगी, उसमें सुधार की उम्मीद आप कर कैसे सकते हैं? यह बहुत अच्छा हुआ कि शिक्षा में सुधार को लेकर एक बड़ा अनशन और बड़ा आंदोलन हुआ। शिक्षा व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में आई। प्रधानमंत्री खुद प्रतिदिन इस पर वीडियो बनाकर देश को अपडेट दे रहे हैं। जरूर अब देश के शिक्षा सचिव प्रधानमंत्री से फ्रिक्वेंटली मिलेंगे और शिक्षा सुधार पर बातें होंगी।

Arvind Chotia

64,872 views • 1 month ago