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अगर आप सोच रहे हैं कि भाजपा झारखंड कैसे हार गई, तो यह देखिए.. उनकी पहचान एक आदिवासी की है, लेकिन वे ईसाई हैं, चर्च जाते हैं, ब्रिटिश शासन चाहते हैं और विदेशी मिशनरियों से प्यार करते हैं.. धर्मांतरण का मुद्दा हमारी कल्पना से भी बदतर है...

69,607 views • 1 year ago •via X (Twitter)

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राहुल गांधी चुनाव नहीं जीतते हैं, जीतने की चिन्ता नहीं करते हैं या प्रधानमंत्री बनने की जल्दी में नहीं हैं या चुनाव जीतने के लिए वह सब नहीं करते हैं जो आप चाहते हैं - तो यह आप की समस्या है, राहुल गांधी की नहीं। अगर राहुल गांधी को लगता है कि आरएसएस की पोल खोलना ज्यादा जरूरी है तो कोई नहीं कहता कि आप उनसे सहमत होइए या उनकी मदद कीजिए। वे अपना काम अपनी मर्जी से, जो साथ दे रहा है उसकी सहायता से अपनी योग्यता-क्षमता से कर रहे हैं। हो सकता है, नाकाम रहें लेकिन कोशिश कर रहे हैं और खुलकर कर रहे हैं। यह प्रशंसनीय है। आपको नरेन्द्र मोदी या भाजपा को सत्ता से हटाने की जल्दी है यह आपकी समस्या है। आप चाहते हैं कि राहुल गांधी जल्दी से जल्दी प्रधानमंत्री बन जाएं यह आपकी जरूरत हो सकती है। लेकिन इसके लिए उन्हें मजबूर नहीं किया जा सकता है। वैसे भी, एक नागरिक के रूप में देश को मोदी से आजाद कराने के लिए (अगर इसकी जरूरत या संभावना है) वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं या वे आपको सक्षम लगते हैं इसका मतलब नहीं है वे यही काम करें। वे अपना काम कर रहे हैं जो उन्हें पसंद है या जो उन्होंने चुना है। अगर आपको गांधी परिवार से ही उम्मीद है तो कुछ वरुण गांधी से भी रखिए। राहुल गांधी जो कर रहे हैं उसमें गलत हो सकते हैं लेकिन यह तो तय लगता है कि वे प्रधानमंत्री बनने के लिए नहीं कर रहे हैं। आप उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं तो आगे आइए, जुड़िए, सलाह दीजिए, काम कीजिए। चुनाव जीतने के लिए वोट चोरी, चुनाव चोरी, सीट चोरी, उम्मीदवार चोरी एक अलग (और भारत में नई) राजनीतिक शैली है। वे इस बारे में बता चुके हैं। इस पर दूसरों को, आपको-मुझे काम करना चाहिए। अगर सब राहुल गांधी को ही करना है तो प्राथमिकता उनकी ही होगी। पसंद ना पसंद का मामला भी है। हमें यह मान लेना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था में राहुल गांधी चुनाव नहीं जीत सकते हैं। व्यवस्था बदलने के लिए काम कर रहे हैं। आप शॉर्ट कट जानते हैं तो आगे आइए। राहुल गांधी को सत्ता दिला दीजिए या खुद ले लीजिए। मेरे लिए यह जैसे को तैसा है। - साथी संजोय कुमार सिंह

Awesh Tiwari

16,591 views • 12 days ago

लोग गलतफहमी में हैं अगर उन्हें लगता है कि Sonam Wangchuk झुक जाएंगे। 🚨 सोनम वांगचुक ज़िद्दी हैं, लेकिन अहंकार की वजह से नहीं—अपने सिद्धांतों और विश्वास के कारण। कई लोग CJP के साथियों से कहते हैं कि वे उनसे अनशन खत्म करने को कहें। साथियों ने उनसे कई बार आग्रह भी किया। लेकिन उनका सिर्फ एक सवाल होता है— "क्या सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं?" जब उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, तब भी वे जिद्दू कृष्णमूर्ति को पढ़ रहे हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि भूख हड़ताल का क्या अर्थ होता है। इतिहास में भगत सिंह और महात्मा गांधी ने भी इस रास्ते को अपनाया था। अगर आप चाहते हैं कि उनका अनशन खत्म हो, तो उनसे हार मानने की अपील मत कीजिए। जंतर-मंतर आइए और उनकी आवाज़ के साथ खड़े होइए।

Gen-Z of India

10,984 views • 2 months ago

हम सबके मन में यह सवाल उभर रहा है—कैसे सीखा जाए और कितना सीखा जाए? AI और Google के जमाने में सबकुछ उपलब्ध है। बस एक सर्च, एक प्रॉम्प्ट, और जवाब हाज़िर। तो फिर सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या सीखना अब भी उतना ही ज़रूरी है? हमारे जैसे लोग जो दशकों से सीखने और सिखाने के काम में लगे हैं, उनके सामने भी यही प्रश्न खड़ा है. इसका बेहद सटीक उत्तर प्रो. भारत आनंद ने दिया. वे MIT की एक स्टडी का ज़िक्र करते हैं— जो लोग AI से सीखते हैं, वे तेज़ी से आगे बढ़ते हैं, लेकिन जब नई परिस्थितियों में उसे लागू करने की बारी आती है, तो वे पिछड़ जाते हैं. दूसरी ओर, जो सिर्फ़ Google सर्च या अपनी मेहनत से गहराई से सीखते हैं, वे नई समस्याओं को बेहतर हल कर पाते हैं. असल में, सीखने की प्रक्रिया को ज़रूरत से ज़्यादा आसान नहीं बनाया जा सकता. इसमें समय और प्रयास दोनों लगते हैं. किसी भी चीज़ को सही मायनों में समझने के लिए एक तय समय लगना ही चाहिए. जितनी मेहनत करेंगे, उतनी गहरी समझ बनेगी. सबकुछ उपलब्ध है, लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं. टेक्नोलॉजी का सहारा लें, लेकिन उसे अपनी बैसाखी न बनने दें.

Ankit Kumar Avasthi

60,972 views • 1 year ago

70 के दशक में ही सैम पित्रोदा ईसाई बन गया था और ईसाई मिशनरियों का भारत में सबसे बड़ा दलाल था राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे तब भारत में ईसाई मिशनरियों को जो खुली छूट दी गई वह इसी चर्च के दलाल सैम पित्रोदा के कारण दी गई आज ये चर्च का दलाल सैम पित्रोदा अमेरिका में बैठकर किस तरह से हिंदुओं का मजाक उड़ा रहा है वह आप देखिए यह कह रहा है अमेरिका में दो तरह के n.r.i. रहते हैं एक जो भगवान को मानते हैं वह बीजेपी के समर्थक हैं और एक जो लोकतंत्र को मानते हैं वह कांग्रेस के समर्थक हैं और अंतिम सेंटेंस में यह बार-बार टेंपल गोइंग हिंदू कह कर हिंदुओं का मजाक उड़ा रहा है कभी यह मास्क गोइंग मुस्लिम या चर्च गोइंग ईसाई क्यों नहीं कहता यूट्यूब पर यह पूरा इंटरव्यू मौजूद है जिसमें यह हिंदुओं को इस बात के लिए कोच रहा है हिंदू अब मंदिर क्यों बना रहे हैं हिंदू मंदिर क्यों जाते हैं

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

18,667 views • 3 months ago

International EXCLUSIVE ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से मेरा सवाल : अमेरिकी राष्ट्रपति Donald J. Trump का कहना है कि वह अब अधिक संयम नहीं बरतेंगे… आपका उनके लिए क्या जवाब है? विदेश मंत्री अराग़ची का जवाब : ये मेरी ग़लती नहीं है कि वे अपना संयम खो रहे हैं। ये धैर्य होने ना होने का मसला नहीं है। हम एक गंभीर सवाल से डील कर रहे हैं। ये युद्ध और शांति का बहुत गंभीर सवाल है। इसलिए अगर वे वार्ताकारों के ज़रिए समाधान चाहते हैं तो उनको संयम दिखाना होगा। क्योंकि न्यायपूर्ण समाधान तक पहुँचने के लिए एक जटिल और व्यापक बातचीत की ज़रूरत है। अगर वे युद्ध फिर से चाहते हैं तो ये उन पर है। वे हमें परख चुके हैं। अगर फिर ऐसा करते हैं तो नतीजा पहले से अलग नहीं होगा Iran in India

Umashankar Singh उमाशंकर सिंह

65,296 views • 4 months ago