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“अगर एक चायवाला हमारे देश का प्रधानमंत्री बन सकता है…”

71,444 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 8

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GoV Funny1 год назад

ये टकला कभी कश्मीरी पंडित को बसाने की बात करता है? धारा ३७० से क्या मिला? कितने हिन्दू बसे कश्मीर में? कभी ये तलवे चाटू नहीं बताएगा।

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Himanshi Hemu1 год назад

कभी कुछ काम करेगा तो थकेगा बे, हिंदुस्तान में पैदा होना श्राप माना जाता था ये तेरे अबू ने कहा था क्या। 2014 के बाद आजाद होगे तो ये ही हाल होगा।

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मर्दे मुजाहिद जी ACRF1 год назад

ये देख बे...🤣🤣 घांची जी के भाई क्या कह रहे हैं

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🇮🇳 BN Sharma, IG BSF (Retd)1 год назад

मोदी इसलिए प्रधानमंत्री नहीं बने क्योंकि वह एक साधारण परिवार में जन्मे और पिता के चाय बेचने के व्यवसाय में हाथ बंटाते थे, यह उनकी वर्षों तक संगठन में किए गए परिश्रम और उन्हें मिले अवसरों पर क्षमता दिखाने के कारण है। उनका स्वयं को चायवाला बोलना सच्चाई को स्वीकार करना दिखाता है।

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देवेन्द्र मिश्रा1 год назад

एक चाय वाला अगर देश का प्रधानमंत्री बन सकता है--- ---तो वह सिर्फ चाय ही नहीं पूरा देश भी बेच सकता है! ----वह सिर्फ चाय के ग्राहकों के सामने ही नहीं, ट्रंप के सामने भी झुक सकता है --वह रास्ता रोक कर सिर्फ चाय की टपरी ही नहीं लगा सकता, पूरे भारत की विकास रोक सकता है

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BrandUpMe Technologies Co LLC1 год назад

Anupam sir, aap ka interview accha hain, lekin har ck kay doh side hoti hain.

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Sanjay Agarwal1 год назад

प्रधान सेवक ।

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Siddharth aabhir1 год назад

Gajab dhol peetna he. The govt has failed on all front resign and other guy take your place

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हिंदी में भी प्रधानमंत्री का पुर्जी से पढ़ - पढ़ कर बोलना राष्ट्रीय शर्म का विषय है .. देश के लिए शर्म की बात है कि देश के प्रधानमंत्री बिना पुर्जी और टेलीप्रॉम्प्टर की मदद के एक शब्द हिंदी में भी नहीं बोल सकते l दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों से संवाद - वार्ता के दौरान भी अपनी भाषा हिंदी में भी प्रधानमंत्री का पुर्जी से पढ़ - पढ़ कर बोलना राष्ट्रीय शर्म का विषय है l देश - दुनिया में अपनी काबिलियत का ढोल पीटने वाले अगर वैश्विक मंचों पर भी अपनी ही भाषा में बिना किसी मदद के दो शब्द सहजता से न बोल पाएँ , तो ये देश की किरकिरी कराने जैसी ही बात है l हमारे देश की पहचान हमारी भाषाई विविधता है, ऐसे में अगर हमारे प्रधानमंत्री की हिंदी भी अगर पुर्जी की मोहताज हो जाए, तो सवाल उनके भाषाई ज्ञान और शैक्षिणक योग्यता का नहीं, देश की प्रतिष्ठता का बन जाता है।

Rohini Acharya

14,736 просмотров • 1 месяц назад