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अगर बीबी नहीं दे रही है तो बेटी की ले सकते है :मौलवी शाहब
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बेचारे मुसलमान शर्म के मारे कमेंट भी नहीं कर रहे।

ये अन्तर है हिन्दू और मुस्लिम धर्म गुरुओं में-- जरा देखो

कानो से सुना भी नहीं जा रहा,,थूकता हू मैं इसके और इसको मानने वालो के मुंह पर,,आक थू

इस्लाम की यहीं तो ख़ूबसूरती हैं

ये यही तो असली सुन्नत है...अरबी ठरकी से सुरु हुई सुन्नत...

इनको सिर्फ़ एक ही चीज दिखती हैं.. चाहें बहन बेटी कुछ भी हो....रिश्ते नातों का कोई मतलब नहीं। बहन बेटी के साथ कोई कैसे इतनी गंदी सोच रख सकते है, समझ से परे है। बहन बेटी के साथ सेक्स करने से इनको घृणा क्यों नहीं होती? फिर जानवर और ऐसे इंसानों में क्या फर्क है, शर्म हया कुछ नहीं।

Only sex वो कोई भी वो क्या साले पाठ पढा रहा है अपने खुद के कौम को. ना कोई बहेन , ना कोई बेटी जो मिले उसके साथ शुरु. आख मिलाते भी होंगे क्या ये लोग ये सब करने के बाद मरने से पहले भी और मरने के बाद भी sex ही चाहिए, 72 हूर के साथ

इसे कहते हैं न्याय

ये बहुत अच्छी बात कही आपने लुल्ला जी अपने मज़ा हब की खातूनों को ऐसे ही मजा देते रहिए ये तरकीब पाकिस्तान से बाहर नहीं जानी चाहिए।
