Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

“अच्छी बातचीत का एक ही पैमाना होता है कि वो पूरी होकर भी अधूरी लगे!” ♥️

25,413 просмотров • 5 месяцев назад •via X (Twitter)

Комментарии: 0

Нет доступных комментариев

Здесь появятся комментарии из оригинального поста

Похожие видео

गजब ओर अदभुत तरीका है सुंदर होने वाला💃 यह कौन सा फेशियल चल रहा है जिसको देखकर बड़ा ही आश्चर्य हो रहा है ऐसा तो पहली बार देख रहा हूं क्या आपने कभी ऐसा देखा है महिलाओं को सुंदर होना बहुत अति आवश्यक है क्योंकि सुंदरता ही एक महिला का पहचान होता है लेकिन उसके लिए मुझे लगता है कि नेचुरल तरीका ही बेहतर होता है इसमें मुझे लगता है कि कोई नेचुरल दालों का या बीजों का उपयोग किया जा रहा है जिस की त्वचा को बेहतर किया जा सके क्या ऐसा ट्रीटमेंट हमारे यहां भी होता है अगर हमारे यहां होता है अगर किसी को मालूम हो तो जरूर बताएं और यह कितना महंगा होता है क्योंकि महिलाओं के लिए पैसा इंपॉर्टेंट नहीं होता स्किन केयर बहुत इंपॉर्टेंट होती है स्कैन करे करने के लिए हमेशा नेचुरल चीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए कॉस्मेटिक उत्पादों का लगातार इस्तेमाल त्वचा को कहीं ना कहीं नुकसान तो पहुंचते ही है

KUNDAN PATEL

2,420,688 просмотров • 14 дней назад

गजेंद्र सिंह शेखावत बड़े ही दिलचस्प और पेचीले ढंग से अपने शब्दों का मंज़मून बाँधते हैं। जब भी रवींद्र सिंह भाटी उनके साथ मंच साझा करते हैं, तब अपने उद्बोधन में वे अक्सर उनका परिचय जेएनवीयू (JNVU) से जोड़कर ही कराते हैं। यह मात्र संयोग नहीं लगता, बल्कि एक तरह का राजनीतिक प्रयोग प्रतीत होता है। उन्हें छात्र राजनीति से जोड़कर वे जनता के बीच यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि रवींद्र सिंह भाटी को एक छात्र नेता की छवि से बाहर नहीं आने देना चाहते हैं। मगर जनता भी अपनी प्रतिक्रिया देने में पीछे नहीं रहती जैसे ही यह परिचय होता है, भीड़ दुगुने जोश के साथ नारे लगाने लगती है। दरअसल, राजनीति में शब्दों का यह खेल भी बड़ा कमाल का होता है, जहाँ एक ही वाक्य कई संदेश देने की क्षमता रखता है।

Dinesh Bohra

43,298 просмотров • 5 месяцев назад