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अटल जी का मोदी को कड़ा संदेश।
11 条评论

56 इंच का सीना बोलने से कोई भी व्यक्ति बहादुर नहीं कहलाता । उसके कर्म और फैसले ही उसे बहादुर या कायर बनाते हैं

लगता है मालिक ने टिकट बेचने के आदेश को वापस ले लिया । देखना कहीं सिनेमा हाल में यह बाहर मिलेगा

Better off selling black tickets

take the journey

मोदी के बस की बात नहीं है

सवाल तो यह है कि चेला गुरु से कितना सीखेगा।

राष्ट्रीय स्वाभिमान बनाम विदेशी दबाव: क्या भारत अब भी स्वतंत्र निर्णय लेता है? क्या आज़ादी के 75 से अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी भारत जैसे संप्रभु राष्ट्र को अपने आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप सहन करना चाहिए? क्या एक अमेरिकी राष्ट्रपति का ट्वीट हमारे राष्ट्रीय निर्णयों का निर्धारण करेगा? हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम की सूचना सबसे पहले अमेरिका से, और वह भी डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट के माध्यम से विश्व को प्राप्त हुई। इससे न केवल भारत की विदेश नीति पर प्रश्नचिह्न लगा, बल्कि यह भी प्रतीत हुआ कि भारत और पाकिस्तान की कूटनीति अमेरिका के इशारों पर संचालित हो रही है। यदि वास्तव में संघर्ष विराम भारत की पहल थी, तो इसकी घोषणा भारत सरकार द्वारा क्यों नहीं की गई? क्या यह विदेश नीति की कमजोरी नहीं है? क्या यह आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना पर चोट नहीं है? क्या यह राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए घातक नहीं है? इसी के साथ अमेरिका में एक और उदाहरण सामने आया-यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का। जब अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप और जे.डी. वेंस ने ज़ेलेंस्की पर हथियार डालने का दबाव बनाया, तो वह झुके नहीं। उन्होंने कैमरों के सामने, वैश्विक मंच पर अपने देश के सम्मान की रक्षा की। उन्होंने कहा “देश से बड़ा कोई नहीं”। क्या यही रीढ़वाले नेता नहीं कहलाते? क्या भारत को भी ऐसे ही नेतृत्व की आवश्यकता नहीं है, जो विदेशी दबाव में निर्णय न ले, बल्कि देश के स्वाभिमान को सर्वोपरि रखे? जब हमारी सरकार विदेश में मौन हो जाती है और देश की जनता को संघर्ष विराम की सूचना विदेशी नेताओं के ट्वीट से मिलती है, तो यह केवल कूटनीतिक असफलता नहीं, राष्ट्रीय आत्मसम्मान की अवहेलना है। ऐसी स्थिति में, देशवासियों का अपने प्रधानमंत्री पर विश्वास स्वाभाविक है, परंतु यह विश्वास तभी सार्थक होगा जब निर्णय भारत लेगा, और उसका ऐलान भी भारत करेगा-not अमेरिका। आज आवश्यक है कि हम सवाल पूछें राष्ट्रहित में, स्वाभिमान की रक्षा हेतु। देशभक्ति का प्रमाण देना ज़रूरी नहीं, परंतु नेताओं को राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रमाण देना पड़ेगा। प्रश्न यह नहीं कि ट्रंप क्या बोले, प्रश्न यह है भारत ने क्या कहा? और कब कहा?

Ye hota hai atal faisla @Atalji atal hai

अटल जी बहुत अच्छी बात बोली थी मोदी जी ने कुछ नहीं किया।

@narendramodi kuch to seekh le gadhe kahi ke atal ji se Kitna gawar kayar fattu hai tu modi kuch seekh le atal ji se

Aabe behan ke laude ticket balckiye aapni aukat na bhul MC.
