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अंतः अस्ति प्रारंभ: कहते हैं अंत ही प्रारंभ है! लेकिन अंत है क्या...???
10 Comments

Rakesh Jangid3 years ago
जब हारी हुई बाज़ी मे हताशा और निराशा के मनोयोग से खुद को अपनी कल्पना मे कैद करना ही अंत हैँ लेकिन उसी कैद से फिर उस मनोदशा को त्याग कर उठ खड़े होने को प्रारम्भ कहाँ जाता हैँ

काव्य कुटीर3 years ago
🌷

अंकिता🍁3 years ago
जीवन-मृत्यु एक चक्र है जो निरंतर चलता रहता है। अंत एक काल का हो सकता है, अंतस के भाव का हो सकता है, एक उम्र का हो सकता है। शरीर का हो सकता है किंतु ये केवल एक भ्रम मात्र है। बस!! इससे अधिक कुछ नही। मैं ग़लत भी हो सकती हूँ।🙏😄 ये केवल मेरा मत था।।

Poetry Chor.3 years ago
बहुत बढ़िया 👌 ❤️

काव्य कुटीर3 years ago
🌷🙏

कविताओं का शहर3 years ago
अंत!!! अंत ही पूर्णता है और पूर्णता ही अंत...

Nilesh Soni3 years ago
🙏🙏🙏

काव्य कुटीर3 years ago
🌷

Vikash Bhagat3 years ago
Tik

Saurabh Upadhyay3 years ago
आरंभ तू अंत तू शून्य मैं अनंत तू
