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"अतिथि देवो भवः"

139,009 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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Sk Mojammile2 лет назад

Desh ka koi baat nahi, baat ye hai ke, desh me sakar kiski hai? Jish sarkar ne balatkario ko sanskari kahkar ful mala ke sath Amrit utshab ke name par chor Diya jata hai, jish sarkar me babao se lekar mp, MLA tak balat Kari our balatkario ka samarthan ho, vala ush des me atithi?

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Solar Heavy1 год назад

space meets sound

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प्रभाकर श्रीवास्तव2 лет назад

जहां यह घटना हुई वहां कांग्रेस गठबंधन की सरकार है

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shadab Ahmad2 лет назад

ये आतंकी अब ज़ुब्बीयो का झुंड बन चुके है इनसे ना कोई औरत महफूज है ना कोई मुसलमान । इस सड़े हुए आतंकियों की हिम्मत तो देखो विदेशी हो या देशी सब पर गन्दी नजर डालते है

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S.A. Farooqui2 лет назад

Kya fayeda fir se Ek aur group niklega phool mala lekar inhe neyay dilwane Aur yeh ba izzat bari ho jayenge yahi to hamare Desh k kanoon ki khubsurti hai Jai ho Duggal sahab ki

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hindustani2 лет назад

Is toilet paper ko Afghanistan Jana chahiye

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Zeenat Sakhi 🦅2 лет назад

India k aurat hi yaha safe nii hai to atithi kaise save ho skte hai shayad Manipur k incidence bhool gaye the ye dono wrna kbi nii aate India

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Mohammed Nadeem Qadri 🇮🇳2 лет назад

कोई टूरिस्ट इंडिया घूमने नहीं आएगा इस खबर को देखकर यह कौन सी मजहब के लोग हैं जिन्होंने गैंगरेप किया

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Iqbal Saifi2 лет назад

इसकी वजह है जिस देश मे बलात्कारियों को माला पहनाकर स्वागत किया जाए तो बलात्कार तो होंगे ही।

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Shahid Khan2 лет назад

Sada hua samaj

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भोलेनाथ की नगरी में एक सीख सदैव गूंजती है — “अतिथि देवो भवः”। कहते हैं, महादेव स्वयं कभी साधु, कभी भिक्षुक, तो कभी एक साधारण यात्री का रूप धारण कर भक्तों के द्वार पर पहुँच जाते हैं। जो व्यक्ति प्रेम, विनम्रता और श्रद्धा से अतिथि का सत्कार करता है, उस पर शिव कृपा अवश्य बरसती है। भगवान शिव का स्वरूप हमें सिखाता है कि हर आने वाले में ईश्वर का अंश देखो। अतिथि केवल घर आने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वह अवसर है जहाँ मानवता, सेवा और संस्कार की परीक्षा होती है। जहाँ अतिथि का सम्मान होता है, वहाँ शिव का आशीर्वाद, सुख और शांति स्वयं निवास करते हैं। हर हर महादेव! 🔱

Kamal Narayan Mishra 🚩🕉️🚩

29,625 просмотров • 1 месяц назад

एक वक़्त था जब उत्तराखंड में लोग अपने घरों में ताले तक नहीं लगाते थे। मौसम में जो भी फल-सब्ज़ियाँ होती थीं, गांव के लोग आपस में बांटते थे। अगर किसी ने सेब रखे हैं और आप मांग लो तो बिना किसी हिचकिचाहट के पूरी पेटी दे दी जाती थी, बिना एक रुपये लिए। यही है उत्तराखंड का अपनापन। लेकिन अफ़सोस, अब कुछ “अतिथि” आते हैं और चुपचाप चोरी करना बेहतर समझते हैं। ये भी नहीं सोचते कि अगले ने वो फल गिन के रखे होंगे, शायद बेचने जा रहा हो, उसकी रोज़ी-रोटी उससे जुड़ी हो। चोरी सिर्फ सामान की नहीं होती, भरोसे की होती है, संस्कारों की होती है। “अतिथि देवो भवः” कहा था, लेकिन आजकल के कुछ “अतिथि” देवभूमि में देवता नहीं, सिर दर्द बनकर आ रहे हैं। #Uttarakhand #Chakrata

Kumaon Jagran

38,256 просмотров • 10 месяцев назад