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अत्यंत दुखद समाचार 😭😭😭😭😭😭 अत्यंतदुखद सूचना यह है कि सुनील सिंह पुत्र स्व. बुधराज सिंह निवासी ग्राम मुरौवा , पोस्ट - मुरौवा बाजार,मुंसारी, महसी बहराइच जो कि प्राथमिक विद्यालय माधवपुरवा करेहना,बहराइच में कक्षा 6 का छात्र था उसको आज शाम घाघरा (सरयू) नदी के किनारे मगरमच्छ ने अपना निवाला...

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वाराणसी स्थित यूपी कॉलेज में हुई कथित गोलीबारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हम प्रशासन और पुलिस से निवेदन करते हैं कि इस घटना की सत्यता की जल्द से जल्द पुष्टि करें और आवश्यक कार्रवाई करें। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में शामिल बताए जा रहे युवक का नाम मंजीत चौहान बताया जा रहा है, जबकि मृतक छात्र का नाम सूर्य प्रताप सिंह बताया जा रहा है, जो गाज़ीपुर का निवासी था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनें हैं। यह घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। हम प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हैं। इस दुखद समय में हमारी संवेदनाएं सूर्य प्रताप सिंह के परिवार के साथ हैं।

The Thakur Force

12,932 Aufrufe • vor 6 Monaten

पिछले दिनों दिल्ली की एक आईएएस कोचिंग संस्थान में पानी के भराव से 3 होनहार अभ्यार्थियों का डूबने से दुखद देहांत हुआ। मैं अपने आराध्य से प्रार्थना करता हूं कि पुण्य आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करे और शोकाकुल परिवारों को यह वज्रपात सहन करने की क्षमता प्रदान करें। मैं सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि कोचिंग संस्थानों में इस तरह की घटना इन दिनों आम बात हो गई है। कुछ दिन पहले दिल्ली के ही एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी। कोचिंग संस्थान को नियमित और निर्देशित करने के लिए एक नियामक संस्थान की आवश्यकता है। संस्थान कमाई का जरिया मात्र नही है.... इसमें माता पिता अपनी खून पसीने की कमाई को निवेश करते हैं, होनहार विद्यार्थी अपनी मेहनत का निवेश करते हैं, परिवारजन और शुभचिंतक अपने सपनो का निवेश करते हैं। कोचिंग संस्थान के अतिरिक्त दबाव ने कोटा जैसे शहरों को आत्महत्या का हब बना दिया है। मेरा सरकार से विशेष निवेदन है कि इस विषय की गंभीरता को गहनता से समझे और एक संतुलित नीति बना कर कोचिंग संस्थानों हेतू नियामक संस्था का सृजन करें।

Ravindra Singh Bhati

36,866 Aufrufe • vor 2 Jahren

मां ने 2 मासूम बच्चों को नदी में डुबोकर मार डाला.. तीसरा लापता.. बोली - भूख से बिलखते थे, देखा नहीं जाता था.. क्या करती! UP के औरैया जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों को पानी में डुबाकर मार डाला। तीसरा लापता है। उसकी भी हत्या क़ी आशंका है। पुलिस ने मां को अरेस्ट कर लिया है। महिला का कहना था "पति क़ी मौत के बाद वह बच्चो का भरण पोषण नहीं कर पा रही थी.. भूखे बच्चे तड़पते रहते थे.. ऐसे में उसने बच्चो को मारकर उन्हे भूखा तड़पने से बचा लिया।" फफूंद थाना क्षेत्र के अटा बरौआ गांव की रहने वाली प्रियंका अपने चार बच्चों को लेकर सुबह घर से निकली…प्रियंका का पति डेढ़ साल पहले ही मर चुका था और वह अपने चचेरे देवर के साथ रहती थी… सुबह प्रियंका बच्चों को लेकर केशमपुर घाट पहुंची और उन्हें बंबा नदी में डुबोने लगी… इस घटना में 4 साल और 5 साल के दो मासूम बच्चों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई. प्रियंका ने इन शवों को नदी किनारे ही फेंक दिया… 6 साल का एक बच्चा किसी तरह बच गया. वहीं, डेढ़ साल का एक बच्चा भी प्रियंका के साथ था, जो अब लापता है। पुलिस ने प्रियंका को हिरासत में ले लिया है…शुरुआती पूछताछ में प्रियंका ने बताया कि उसने अपने बच्चों को इसलिए मार दिया क्योंकि वह उनका पालन-पोषण नहीं कर पा रही थी. प्रियंका का यह बयान सुन पुलिस भी हैरान रह गई… (TRUE STORY)

Panchjanya

28,059 Aufrufe • vor 2 Jahren

जनपद हापुड़ के बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम मोहम्मदपुर आजमपुर निवासी गौरव त्यागी जी पुत्र फतेह सिंह त्यागी जी की निर्मम हत्या की खबर अत्यंत पीड़ादायक व विचलित करने वाली है। गौरव जी अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती रेशु, 11 वर्षीय पुत्र आरव, 7 वर्षीय पुत्री गोरा तथा पिता श्री फतेह सिंह त्यागी जी हैं। एक परिवार ने अपना बेटा, एक पत्नी ने अपना जीवनसाथी और दो मासूम बच्चों ने अपने पिता को खोया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति दें। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार लगातार हत्या और गंभीर आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं, वह कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। दिनदहाड़े इस प्रकार की निर्मम घटना होना अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को दर्शाता है। भाजपा सरकार और योगी सरकार को इस घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए सभी अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस कठिन समय में राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल परिवार दिवंगत गौरव त्यागी जी के परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है। न्याय की इस लड़ाई में पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग और समर्थन दिया जाएगा। Government of UP UP POLICE DGP UP DM Hapur HAPUR POLICE #गौरव_त्यागी #GauravTyagi #न्याय #JusticeForGaurav #Hapur #मोहम्मदपुर_आजमपुर #हापुड़ #उत्तरप्रदेश #UPCrime #कानून_व्यवस्था #shrikanttyagi #श्रीकान्त_त्यागी #संस्थापक_रानद #राष्ट्रीय_अध्यक्ष_रानद #TeamShrikantTyagi #tyagi_Bhumihar_samaj #rashtrawadinavnirmandal #राष्ट्रवादी_नवनिर्माण_दल #रा_न_द #ब्राह्मण_उत्पीड़न

Shrikant Tyagi

32,321 Aufrufe • vor 1 Monat

देखिए, मैं एकदम स्पष्ट करता हूं। इससे पहले भी अनेक छात्र आंदोलन हुए। इमरजेंसी का आंदोलन बहुत भयानक परिस्थितियों में था, सबको उठा-उठाकर जेल में डाल दिया गया था। लेकिन उस समय युवाओं के मन में अपने नेतृत्व के प्रति विश्वास था। इसलिए युवा जयप्रकाश नारायण जी, चौधरी चरण सिंह जी, चंद्रशेखर जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी के पास गए। आज सवाल यह है कि युवा विपक्ष के पास क्यों नहीं जा रहा? क्योंकि उसे विश्वास नहीं कि विपक्ष उनके विषय को ईमानदारी से उठाकर समाधान दिला सकता है। आज अगर यदि बच्चे गुमराह हो रहे हैं, तो समाज के साथ-साथ माता-पिता को भी सजग रहने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री जी ने परिवार के अभिभावक के रूप में भारतीय परंपरा की उस सूक्ति का पालन किया “क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।” आज जो गलती हुई है, वह नौजवान तो भटका हुआ नौजवान है। मगर उससे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत उस सत्ता की लालच में पक्की दाढ़ी वाले, लटके हुए नौजवान से है। लालच में लटका हुआ नौजवान ज्यादा खतरनाक है, इसलिए बच्चों को उनसे बहुत सावधान रहने की जरूरत है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

69,507 Aufrufe • vor 2 Monaten

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे पूर्व सांसद 61 वर्षीय मानवेंद्र सिंह जसोल द्वारा दूसरी शादी करने की खबरें सामने आने के बाद परिवार ने उनसे नाता तोड़ लिया है। परिवार (मां शीतल कंवर, भाई भूपेंद्र सिंह, और पुत्र हमीर सिंह) ने इस रिश्ते को व्यक्तिगत फैसला बताते हुए अस्वीकार कर दिया है और उनके इस दूसरे विवाह को मान्यता देने से मना किया है। हालही में मानवेन्द्र सिंह जसोल के पुत्र का विवाह समारोह था। उस विवाह में भी वे अपनी दूसरी पत्नी को लेकर पहुंचे थे। लेकिन परिवार ने विरोध किया और जैसे - तैसे बात टल गई। होली के दिन इस कहानी में ऐसा कुछ घटा कि अब जसोल परिवार को खुद आगे आकर मानवेन्द्र सिंह जसोल से अलगाव का रास्ता अख्तियार करना पडा। मानवेन्द्र सिंह जसोल होली के दिन शराब के नशे में उसी लड़की को जोधपुर स्थित अपने घर लेकर पहुंचे थे। बच्चों को यह बात मालूम हुई तो उन्होंने विरोध किया और स्वर्गीय जसवंत सिंह जसोल की पत्नी को फोन करके बुलाया। जब परिवार इकट्ठा हुआ तो मानवेन्द्र सिंह जसोल की अपनी मां और भाई से हॉट टॉक हो गई। लेकिन परिवार ने उस लड़की को घर से बाहर निकाल दिया। इस पूरे घटनाक्रम पर वह लडकी जोधपुर के महामंदिर थाना में स्वर्गीय जसवंत सिंह जसोल की 90 वर्षीय पत्नी, मानवेन्द्र सिंह जसोल के भाई और पुत्र हमीर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए पहुंचती है। लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट लेने से मना कर दिया। इस बात की शिकायत मानवेन्द्र सिंह जसोल मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से करते हैं। वी श्रीनिवास जोधपुर कमिश्नर से जानकारी लेते हैं तो कमिश्नर ने सब बात मुख्य सचिव को बता दी। उसके बाद वी श्रीनिवास जसवंत सिंह जसोल की पत्नी से बात करते हैं और वापस मानवेन्द्र सिंह जसोल को बोलते हैं कि जब तक जसवंत सिंह जसोल की पत्नी कुछ नहीं कहेंगी तब तक इस मामले में वे कोई एक्शन नहीं लेंगे और यह मामला पुलिसिया कार्यवाही से बचा रहता है। अगले दिन स्वर्गीय जसोल साहब की पत्नी भाजपा की लीडरशिप को फोन करके क्लियर करती हैं कि वे मानवेन्द्र सिंह जसोल से अलगाव का रास्ता अख्तियार कर रही हैं क्योंकि उन्होंने मालानी सहित जसोल परिवार की परंपराओं को तारतार किया है। संभव है प्रदेश और देश के बड़े नेताओं को उन्होंने फोन किया हो। इस कहानी में एक बात यह भी है कि मानवेन्द्र सिंह जसोल स्वर्गीय चित्रा सिंह की मौत के बाद क्लेम में मिले कोई दो - ढाई करोड़ रुपए उस लड़की पर खर्च कर चुके हैं जिसे उनका परिवार स्वीकार नहीं कर रहा है। अब इतना सबकुछ हुआ तो जसोल परिवार ने स्वर्गीय जसवंत सिंह जसोल की पत्नी के नेतृत्व में आखिर यह फ़ैसला लेकर अपना पक्ष साफ कर दिया है। स्वर्गीय जसोल साहब की 90 वर्षीय पत्नी का पक्ष यह है कि उनके जिंदा रहते जसोल परिवार में ऐसा कुछ भी नहीं होगा जो सामाजिक मर्यादाओं और मालानी की परंपराओं के खिलाफ है। प्रतिष्ठित परिवारों में पहले भी ऐसे मामले आए हैं लेकिन यहां एक 90 वर्षीय विधवा क्षत्राणी ने परंपराओं को महफूज रखने के लिए जो हिम्मत दिखाई है वह वंदनीय है। अब समाज तय करे कि वह मानवेन्द्र सिंह जसोल के साथ है या फिर उस क्षत्राणी के साथ है जो उम्र के इस पड़ाव में अपने पति, परिवार और समाज की परंपराओं को बचाने के लिए लड़ रही है। मैं स्वर्गीय जसोल साहब की पत्नी को प्रणाम करता हूं!

Jeetu Besla

160,107 Aufrufe • vor 7 Monaten

जिस एंबुलेंस में शहीद का पार्थिव शरीर जा रहा था, उसी एंबुलेंस में पूरा परिवार उजड़ गया… 😭💔 पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा हुआ। सुल्तानपुर में सड़क किनारे खड़े ट्रक से शहीद सूबेदार मेजर का शव लेकर जा रही एंबुलेंस टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि एंबुलेंस में सवार सूबेदार मेजर के बेटे, भाई, भतीजे और ड्राइवर की भी मौत हो गई। सबसे दर्दनाक बात ये है कि एंबुलेंस में सवार कोई भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा। एक तरफ देश ने अपना जवान खोया था, दूसरी तरफ उसके अंतिम सफर में परिवार के कई सदस्य भी हमेशा के लिए बिछड़ गए। ईश्वर सभी दिवंगत आत्माओं को शांति दे और परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दे। 🙏

Jamwant Maurya

78,725 Aufrufe • vor 3 Tagen

रेस्क्यू के बाद भी साथ है ख़ाकी! आजमगढ़ के शम्भूपुर में हुई दर्दनाक घटना में अपने माता-पिता और भाई को खो चुकी दो मासूम बच्चियों के लिए आजमगढ़ पुलिस परिवार आगे आया है। एडीजी वाराणसी जोन श्री नवीन अरोड़ा एवं डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र श्री सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में करीब 8 घंटे तक चले संवेदनशील ऑपरेशन को एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने अपनी टीम के साथ कुशल रणनीति, धैर्य और साहस के साथ अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में दोनों बच्चियों को सकुशल बचाया गया। एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने एक अत्यंत सराहनीय पहल करते हुए अपना एक माह का वेतन बच्चियों के सुरक्षित भविष्य के लिए देने की घोषणा की है। उनके इस प्रयास में जनपद के समस्त पुलिसकर्मी भी अपना एक दिन का वेतन देंगे। यह राशि बच्चियों के नाम FD में जमा कराई जाएगी। पुलिस परिवार उनकी शिक्षा, पालन-पोषण और आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहयोग भी सुनिश्चित करेगा। घटना में जान गंवाने वाले दो अन्य व्यक्तियों के परिवारों को भी पात्रतानुसार सरकारी सहायता दिलाने की पहल की गई है। डीजीपी यूपी श्री राजीव कृष्ण ने पुलिस के कुशल ऑपरेशन और मानवीय पहल की सराहना की है। रेस्क्यू के बाद अब प्रयास है कि दोनों बच्चियों को एक सुरक्षित भविष्य और आगे बढ़ने का संबल मिल सके। #UPPolice #UPPCares #BeyondTheCallOfDuty

UP POLICE

39,081 Aufrufe • vor 11 Tagen

जहाँ अपने बच्चों को बचाने के लिए माँ अपनी जान तक दे देती है😭 वही एक तेलंगाना की हत्यारिन माँ जो अपने यंग ब्वॉयफ्रेंड के लिए अपनी ही कोख से जन्मी बच्ची को ,जो कि उसके नाजायज प्रेम में रोड़ा बन रही थी , उसको छत की टँकी पर ले जाती है और उसमें अपनी 6 साल की बच्ची को डाल कर ढक्कन लगा देती है 😭🙄,फिर उसमें पानी चालू कर देती है , बच्ची चिल्लाते चिल्लाते डूब कर दम तोड़ देती है😭 फिर चालू होता है माँ का नाटक की बच्ची लापता हैं🙄,फिर ढूढ़ने पर वह पानी की टँकी में बरामद होती है और पूछताछ पर उस पापी महिला के प्रेम प्रसंग वाली बात सामने आती है तब भेद खुलता है🙉 ऐसे हत्यारिन पापी डायन माँ को आप क्या कहेंगे?

PRARTHANA SINGH

203,732 Aufrufe • vor 2 Monaten

महाराष्ट्र के पुणे में एक हिंदू लड़की 2019 से लापता थी। लड़की तब 10वीं क्लास में थी और सिर्फ 16 साल की। वह अपनी अंतिम एसएससी परीक्षा से लौट रही थी जब एक 'अज्ञात व्यक्ति' द्वारा उसका अपहरण कर लिया गया था, साल बीत गए और लड़की के परिवार के लगातार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस लड़की को खोजने में नाकाम रही, कुछ समय बाद परिवार को पता चला कि उनकी बेटी को जावेद शेख ने अगवा कर लिया है। शर्म के डर से परिवार ने अपहरण के बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन सक्रिय रूप से लड़की की तलाश करने की कोशिश कर रहे थे, इस खोज में लड़की के भाई ने अपने दोस्त की मदद से पता लगाया कि जावेद उनके कस्बे मनचर का निवासी है, जिसके बाद उन्होंने पता लगाया। हफ्तों तक उसके घर की निगरानी की गयी। बाद में, पड़ोसियों से पूछताछ के बाद, उन्हें पता चला कि एक नई लड़की थी जो हाल ही में जावेद के घर में शामिल हुई थी। परिवार को लगा कि उनकी लड़की की मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती शादी की गई है, इसलिए उन्होंने 16 मई को घर में घुसने का फैसला किया। उन्होंने अपनी लड़की को हिजाब में एक कमरे में देखा, लड़की डर गई थी! परिवार की पहले की अटकलें थीं कि लड़की उनसे डरती है और उनकी मर्जी के खिलाफ उनकी शादी का गुस्सा है। लेकिन सच्चाई आपको झकझोर कर रख देगी। लड़की अपने परिवार से नहीं डरती थी, वह लोगों से, अपने आस-पास के हर व्यक्ति से डरती थी, क्योंकि वह आघात में थी, अवसाद में थी, परिवार द्वारा उसे बचाने के बाद उसने खुलासा किया कि- जावेद द्वारा उसका अपहरण किए जाने के बाद, जावेद और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा उसे बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और उसके साथ मारपीट की गई। उसने यह भी कहा कि उसके साथ बलात्कार किया गया और महीनों तक अपार्टमेंट में बंधक बनाकर रखा गया। उसे गंभीर अवसाद का पता चला है और, जैसा कि पहले कहा गया था, आघात के कारण, अपने परिवार के सदस्यों सहित अपने आस-पास के सभी लोगों से भी डरती है। उसकी मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती शादी की गई, उसके साथ बलात्कार किया गया, जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया, उसके पूरे शरीर पर सिगरेट के निशान थे, आरोप यह भी है कि उसे 6 महीने तक वेश्यावृत्ति के रैकेट में धकेला गया! अब बताओ, मनुष्य ऐसा कैसे कर सकता है? हिंदुओं के प्रति उनके मन में ऐसी कौन-सी घृणा हो सकती है कि वे इस हद तक गिर जाएं? Sayema Mohammed Zubair Arfa Khanum Sherwani क्या ये फैक्ट चैक करके कुछ बोलेंगे?

Ach. Ankur Arya Official

237,901 Aufrufe • vor 3 Jahren

यह घटना यूपी के शामली के लिलौन गांव की है। लिलौन निवासी मोमीन के परिवार से इसी गांव का निवासी शिवम नामी एक शख्स रंजिश रखता है। रंजिश महज़ चुनावी है। लेकिन इस चुनावी रंजिश में शिवम ने ऐसी क्रूरता दिखाई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। बीते महीने मार्च की 10 तारीख को मोमीन के दो बच्चे घर से यह कहकर निकले कि वो खेलने जा रहे हैं। इन बच्चों को शिवम और उसके साथी नितिन और गोलू दोनों बच्चो को बहला फुसलाकर बडी नहर पर ले गए। आरोप है कि इन तीनों ने दोनों बच्चों को पहले बेरहमी से पीटा और फिर नहर में फेंक दिया, चूंकि एक बच्चा तैरना जानता था तो वह अपने छोटे भाई को भी किसी तरह नहर से निकाल लाया। इसके बाद शिवम और उसके साथियों तीनों ने दोनों बच्चों को अपने घर में बन्धक बना लिया, और उन्हें निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीट। बच्चों के साथ हो रहे अमानवीय एवं क्रूरता की सूचना पाकर मोमीन मौके पर पहुंचे, तो शिवम और उसके साथियों द्वारा उनके साथ भी गाली गलौज की गई। जिसके बाद मोमीन द्वारा Call 112 पर कॉल कर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। आरोप है कि पुलिस द्वारा आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रावाई नहीं हुई है। अब यहां से कई सवाल हैं। क्या DGP UP की UP POLICE बच्चों के साथ अमानवीय एवं क्रूर रवैया अपनाने वाले शिवम और उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त ऐसी कार्रावाई करेगी जो नज़ीर बने? इस घटना को एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन आरोपितों पर कोई कार्रावाई तक नहीं हुई है, ऐसा क्यों? Yogi Adityanath की Government of UP में बच्चों के साथ क्रूरता करने वालो के साथ पुलिस इतना ढुल मुल रवैया क्यों अपनाए हुए है। इस मामले का NCPCR को संज्ञान लेना चाहिए, दोषियों को ऐसी सज़ा मिले जो नज़ीर बन जाए।

Wasim Akram Tyagi

279,212 Aufrufe • vor 5 Monaten

बेबी तू आया नहीं मुझे लेने... तूने कहा था तू आएगा' यह शब्द हैं शहीद फ्लाइट लेफ्टीनेंट सिद्धार्थ यादव की मंगेतर सोनिया के, जो सिद्धार्थ के पार्थिव शरीर के सामने रो-रो कर चीखते हुए कह रहीं थी। सिद्धार्थ यादव और सोनिया की शादी इसी साल होने वाली थी मगर प्लेन क्रैश में वह शहीद हो गए 😞 अगर वो चाहते तो अपनी भी जान बचा सकते थे लेकिन अपनी जान से ज्यादा उस देशभक्त को अपने देश के नागरिकों की जान की परवाह थी। इसलिए उस जेट को आबादी से दूर ले जाकर उन सबको बचाया और खुद शहीद हो गए ।। जो प्लेन वो उड़ा रहे थे जगुआर 80 के दशक से पहले का है सब देश उस प्लान को छोड़ चुके हैं लेकिन भारत आज भी उन प्लेनों का use कर रहा है ।। बहुत तकलीफ होती ये सोचकर कि नए भारत में आज भी पुराने फाइटर जेट की वजह से हमारे वीर जवान शहीद हो रहे हैं😭

Gagan Pratap 🇮🇳

32,545 Aufrufe • vor 1 Jahr

भाजपा के “डबल इंजन” राज में बहुजन समाज न्याय के लिए अपनी जान देने को मजबूर है। 17 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में हिमांशु जाटव के साथ जातंकवादी द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। पीड़ित द्वारा पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह प्रशासन की संवेदनहीनता और मिलीभगत को उजागर करता है। हिमांशु ने इंसाफ की उम्मीद में आरोपी के परिजनों से भी दो बार शिकायत की। वहाँ से निराश होने पर 17 अप्रैल की ही रात तीसरी बार आरोपी के घर पहुँचकर उसने खुद को आग लगा ली। दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 22 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यह मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक हत्या है, जिसमें दोषी केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि वह तंत्र भी है जिसने समय पर न्याय नहीं दिया। यह घटना अत्यंत दुखद और दंडनीय है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। Government of UP से हमारी माँगें:- सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सुरक्षा प्रदान की जाए। CM Office, GoUP

Chandra Shekhar Aazad

21,165 Aufrufe • vor 5 Monaten

इस दौर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज के parents सबसे ज़्यादा भ्रम में है। वह यह तय नहीं कर पा रहा कि बच्चे उसके अधूरे सपनों को पूरा करने का साधन हैं, या अपने स्वतंत्र सपनों और सोच के साथ एक अलग व्यक्तित्व। अक्सर अनजाने में माता-पिता अपने अधूरे सपनों का बोझ बच्चों पर डाल देते हैं और इसे उनका भविष्य संवारना समझ लेते हैं। जबकि पालन-पोषण का अर्थ बच्चों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें समझना, उन पर भरोसा करना और उन्हें अपना रास्ता चुनने की हिम्मत देना है। असली परवरिश सुविधाओं की संख्या से नहीं आँकी जाती, बल्कि उस आत्मविश्वास से आँकी जाती है जो हम बच्चों के भीतर पैदा करते हैं ताकि वे अपनी पहचान खुद बना सकें। एक बार ठहरकर सोचने की ज़रूरत है कि क्या हम बच्चों को सिर्फ़ संसाधन दे रहे हैं, या उन्हें उड़ान भरने की ताक़त भी दे रहे हैं?

Manish Sisodia

12,916 Aufrufe • vor 9 Monaten

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता व नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में राज सिंह का नाम भी जोड़ा जा रहा है, जबकि घटना के समय वह अपने घर पर था और उसके पहले-बाद में भी बलिया/लखनऊ में मौजूद दिख रहा है। बताया जा रहा है कि उसने सिर्फ परिचितों के कहने पर लखनऊ से टोल प्लाज़ा के QR पर पैसे भेजे थे, उसी आधार पर उसे आरोपी बनाया जा रहा है। बिना ठोस सबूत के मीडिया राज सिंह को सबसे बड़ा अपराधी दिखाने में लगी है। यह पहली बार नहीं है जब क्षत्रिय समाज के लोगों को बदनाम करने की कोशिश हुई हो, वीरेंद्र तोमर का मामला भी लोगों को याद है, जहां अदालत ने उन्हें बेकसूर मानकर बरी कर दिया था।

The Thakur Force

33,141 Aufrufe • vor 4 Monaten

आज आयोग में काम करने का मेरा आखिरी दिन है। आज मैं इतने दिनों के मेरे अनुभवों को निश्चित रूप से आपसे साझा करना चाहूंगा। आयोग में काम करते हुए मुझे प्रोफेशनल और व्यक्तिगत दोनों तरह के अनुभवों के साथ गुजरना पड़ा। लगभग एक दशक का समय इस आयोग में मेरा निकला है। मनुष्य का जीवन नश्वर है और इसका नष्ट होना तय है। हम किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जीवन को नष्ट कर रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है। आयोग में आने के बाद बच्चों के साथ काम करते हुए मेरा जो व्यक्तिगत व्यक्तित्व विकास हुआ है वो मैं साझा करना चाहूंगा। मेरे अंदर एक आध्यात्मिक चेतना का विकास हुआ है और इस अध्यात्मिक चेतना ने मेरे स्वभाव को बदलने का काम किया है। जो लोग मुझे 20-25 वर्षों से जानते हैं उनको पता है कि एक दशक पहले मेरे स्वभाव में कमजोरियां थी और क्रोध मेरी सबसे बड़ी कमजोरी थी। आज यह कहते हुए मैं देश भर के बच्चों के प्रति कृतज्ञता से भर जाता हूं। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रति मेरा मन श्रद्धा से भर जाता है कि उन्होंने ये काम मुझे सौंपा और देश के बच्चों के साथ काम करने का मुझे अवसर दिया। मेरे मन का विकार खत्म हो गया, चित्त निर्मल हो गया औऱ मुझे क्रोध आना बंद हो गया। जब हम उन लोगों की पीड़ा देखते हैं जो संसार के सबसे दुश्वार कष्टों का सामना कर हैं, आनाथ बच्चे, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चे, बलात्कार जैसे यौन शोषण का शिकार बच्चे, ट्रैफिकिंग, दासता, बाल श्रम में लगे हुए बच्चे, मानसिक विकारों से जूझ रहे बच्चे, स्कूल जाने का रास्ता खोज रहे बच्चे, वो लडकियाँ जिनको बराबरी का हक हासिल नहीं हैं, उनके कष्टों को जब हम देखते हैं और कोशिश करते हैं कि उनके कष्टों के सहभागी बनकर उस पीड़ा को कम करने का प्रयास करें। यह कार्य व्यक्तिगत रूप से आपको बदल कर रख देगा और यही मेरे जीवन का अनुभव है जो जीवन भर मेरे साथ चलेगा। मेरा स्वभाव बदला, मेरा व्यक्तित्व बदला गया। प्रधानमंत्री जी के बारे में सब लोग यह बात जानते हैं कि उनके स्पर्श मात्र से लोगों के जीवन बदल गए हैं। मैंने इस बदलाव को अपने अंदर महसूस किया है। मेरे प्रधानमंत्री जी का ही मेरे ऊपर विश्वास है ना केवल मेरा जीवन बदला बल्कि उन्होंने मुझे वो माध्यम बनने का अवसर प्रदान किया है कि मैं देश के बच्चों के कष्टों को उन तक पहुंचा पाया और फिर प्रधानमंत्री जी ने देश के लाखों बच्चों के जीवन को बदलने का काम किया। यह once in a life opportunity है, मैं कृतज्ञता से भरा हुआ हूं। आयोग में यहां के अधिकारी यहां के सहयोगी एक परिवार की तरह हम लोगों ने साथ काम किया। मैं मगर पीछे जाकर याद करूं तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में ऐसे दिन भी है जब हमारे आयोग परिवार के किसी सदस्य ने अपने निकट परिजन में से किसी को खोया। त्रासदियों का सामना किया, उसके बावजूद उस दिन भी बच्चों का काम करने के लिए वह व्यक्ति खड़ा रहा। बच्चों के प्रति जिसके मन में संवेदना, सद्भावना और उनकी पीड़ा को कम करने का जज्बा है वही लोग इस आयोग में टिक के काम कर पाए और आयोग इसी जज्बे के साथ ऐसे ही चलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि जो संसाधन हमने आयोग के रूप में डेवलप किया है वह माननीय प्रधानमंत्री जी की सीधी निगरानी में देश के बच्चों के कल्याण का काम करने के लिए तत्पर हैं। 2014 से जिस नए भारत के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है, उस प्रक्रिया में सहभागिता निभाने के लिए यह आयोग तैयार है। देश के सभी बच्चों को आज मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हमने कानूनी, सामाजिक, व्यवस्थागत कमियों का सामना किया, संघर्ष किया और सफलता प्राप्त की है । जीवन में जो प्रवाह है वह नदी के समान होना चाहिए और मोक्ष के सागर में मिलने तक नदी का प्रवाह ऐसे ही बना रहे,इसी कामना के साथ देश के बच्चों को, देशवासियों को बहुत-बहुत धन्यवाद। आदरणीय प्रधानमंत्री जी का मनपूर्वक बहुत बहुत आभार। भारत माता की जय 🇮🇳🙏 PMO India Narendra Modi NCPCR

प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo

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जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री की 'रीढ़' है 'झवेरी बाजार' मुंबई में आज भारत की पारंपरिक कारीगरी, रत्नों और आभूषणों की चमक को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले ‘झवेरी बाजार जेम्स एंड ज्वेलरी फेस्टिवल 2025’ का उदघाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य जनों को संबोधित करने का अवसर मिला। मुंबई के झवेरी बाजार की एक समृद्ध परंपरा रही है। देश-दुनिया के लोग यहाँ की कारीगरी के सानी हैं। इसी के कारण जेम्स एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री का रीढ़ यह हमारे झवेरी बाजार को कहा जाता है। तमाम चुनौतियों, जगह की कमी और नई अड़चनों के बावजूद, झवेरी बाजार ने अपनी जीवंतता को हमेशा कायम रखा है, उसके लिए आप सभी लोग बहुत-बहुत अभिनंदन के पात्र हैं। झवेरी बाजार वेल्फेयर असोसिएशन ने इंडिया गोल्ड मेटावर्स के साथ समझौता ज्ञापन किया है, जो व्यापार में नई तकनीक को अपनाने का संकेत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों को व्यापार का हिस्सा बनाना यह सुनिश्चित करेगा कि झवेरी बाजार अपने ग्राहकों को और भी बेहतर और सुंदर चीजें प्रदान कर सके, जिससे यह उद्योग समय के साथ कदम मिला कर चल सके। हम भारतीयों के लिए 5000 साल पहले भी रत्नों और आभूषणों का महत्व उतना ही था, जितना आज है। जब तक मानव की आकांक्षाएँ हैं, तब तक इसका मूल्य कम नहीं होगा। लोगों के लिए यह केवल रत्न और आभूषण नहीं हैं, बल्कि यह अगली पीढ़ियों के लिए निवेश भी है और उसके चलते मैं ऐसा मानता हूं कि यह बाजार कभी समाप्त नहीं होने वाला, यह बढ़ने ही वाला है। इस अवसर पर मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा जी एवं अन्य मान्यवर उपस्थित थे। Mangal Prabhat Lodha Zaveri Bazaar Welfare Association #Maharashtra #Mumbai #JewelleryFestival

Devendra Fadnavis

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गंगाराम: एक मगरमच्छ जिसने इंसानों को प्रेम, विश्वास और सह-अस्तित्व का अर्थ सिखाया अपने अंतिम समय में हर उस इंसान को रुलाया जो जीव जंतु से डरते थे😭 कहते हैं कि प्रेम की भाषा शब्दों की नहीं, बल्कि विश्वास की होती है। यह कहानी उसी विश्वास की है, जिसने इंसान और एक मगरमच्छ के बीच ऐसा रिश्ता बना दिया कि उसकी विदाई पर पूरा गाँव रो पड़ा। यह सच्ची घटना छत्तीसगढ़ के एक गाँव की है, जहाँ एक तालाब में रहने वाले मगरमच्छ को गाँव वालों ने प्यार से "गंगाराम" नाम दिया था। बताया जाता है कि गंगाराम ने लगभग 193 वर्ष तक जीवन जिया। इतने लंबे जीवन में उसने कभी किसी इंसान, पशु या पक्षी को नुकसान नहीं पहुँचाया। उसी तालाब से गाय, भैंस, बकरियाँ, पक्षी और गाँव के लोग निडर होकर पानी लेते थे, लेकिन गंगाराम ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। समय के साथ गंगाराम गाँव के परिवार का हिस्सा बन गया। जब वह गाँव की ओर निकलता, तो लोग डरते नहीं थे। बच्चे मुस्कुराकर कहते, "गंगाराम आ गए!" और घरों से दाल-चावल निकालकर उसे खिलाते। पूरा गाँव उसे अतिथि नहीं, अपने परिवार के सदस्य की तरह अपनाता था। यह रिश्ता किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि वर्षों से बने विश्वास और स्नेह का था। फिर एक दिन वह क्षण आया जिसने पूरे गाँव की आँखें नम कर दीं। गंगाराम की मृत्यु हो गई। उसकी अंतिम विदाई किसी जंगली जीव की तरह नहीं, बल्कि परिवार के प्रिय सदस्य की तरह की गई। गाँव के लोगों ने नम आँखों से उसे विदा किया। उस दिन हर व्यक्ति को ऐसा लगा जैसे उसने अपना कोई अपना खो दिया हो। गंगाराम की कहानी केवल एक मगरमच्छ की कहानी नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि इंसान प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ प्रेम, सम्मान और विश्वास का व्यवहार करे, तो वे भी उसी प्रेम का उत्तर देते हैं। हिंसा हर जीव का स्वभाव नहीं होती; परिस्थितियाँ और व्यवहार उसे वैसा बनाते हैं। आज भी गंगाराम की कहानी लोगों को यह संदेश देती है कि धरती केवल इंसानों की नहीं, बल्कि हर जीव की है। प्रेम और विश्वास की डोर सबसे शक्तिशाली होती है—इतनी शक्तिशाली कि वह इंसान और एक मगरमच्छ के बीच भी अटूट रिश्ता बना सकती है।

Shivam Yadav

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