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अनुपम खेर कह रहे हैं कि अगर चोरी हुई है तो घर को मत कोसिए। अनुपम खेर जी, आप कहना क्या चाहते हैं? क्या आपका मतलब यह है कि भाजपा वाले, आरएसएस वाले, वीएचपी वाले, चाहे वे चोर हों, लुटेरे हों, डाकू हों या किसी भी तरह के अपराधी...

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आज दिन भर सत्ता के गलियारों में दो शीर्ष नौकरशाहों के कथित फ़ोन कॉल का ऑडियो रिकॉर्डिंग चर्चा का विषय बना रहा। मुझे भी यह ऑडियो प्राप्त हुआ है। हम इसकी इसकी सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, यह जाँच का विषय है। लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि किसने किससे क्या बात की। बड़ा सवाल यह है कि यदि राज्य के 'सत्ता शीर्ष' पर बैठे अधिकारियों के फोन सुरक्षित नहीं हैं, तो क्या झारखंड के मुख्यमंत्री समेत पक्ष-विपक्ष, मंत्री, विधायक और नौकरशाही के किसी भी व्यक्ति और आम नागरिकों की प्राइवेसी सुरक्षित है? अगर मुख्यमंत्री जी के नाक के नीचे इस तरह की घटियागिरी और नीचता चल रही रही है, तो प्रदेश की सुरक्षा तो भगवान भरोसे ही है न। क्या राज्य इसी तरह की जासूसी के दम पर चलाया जा रहा है, जहॉं किसी की भी निजता सुरक्षित नहीं है? मुख्यमंत्री Hemant Soren जी, क्या आप ऐसे लोगों के भरोसे ही राज्य का शासन चलाना चाहते हैं? जब शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी ही एक-दूसरे की जासूसी कर रहे हों या उनके फोन सुरक्षित न हों, तो आम जनता खुद को सुरक्षित कैसे समझे? झारखंड की जनता आपसे यह जानना चाहती है। यह आपके, मेरे और राज्य के लोगों के निजता की रक्षा के लिये जरूरी है कि एफ़आइआर दर्ज कर इस आडियो की जॉंच कराइये और यह नीच काम करने वाले को ऐसा दंड दीजिए कि फिर कोई ऐसा करने की सपने में भी नहीं सोचे। Office of Chief Minister, Jharkhand ANI Press Trust of India IANS ANI_HindiNews BJP JHARKHAND

Babulal Marandi

22,065 次观看 • 7 个月前

जालौर में मीडियाकर्मियों से बातचीत। (22 जून 2026) सवाल: सर, जोधपुर के पावटा में अभी संक्रमण के कारण प्रसूताओं की मौत की गंभीर घटना हुई है, इस पर आपका क्या कहना है? जवाब: क्या आज सुबह आपने मेरा ट्वीट देखा? अगर नहीं, तो ज़रूर देखिए। मैंने ट्वीट किया है कि मैं अभी कोटा का दौरा करके आया हूँ। यह जो घटना आप बता रहे हैं, यह बेहद गंभीर है। पहले यह कोटा में हुई, जहाँ पाँच महिलाओं की मौत हो गई। मैं वहाँ खुद पीड़ित महिलाओं से मिलकर आया हूँ, उन सबकी किडनियाँ फेल हो चुकी हैं। किसी का हफ्ते में तीन बार, तो किसी का दो बार डायलिसिस हो रहा है। ईश्वर करे कि किसी की किडनी ठीक हो जाए, ताकि उन्हें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत न आए। बीकानेर में भी ऐसी घटना हुई, जो एक अलग मामला था। अब आज सुनने में आया है कि जोधपुर में भी आठ महिलाओं को गंभीर रूप से इन्फेक्शन (संक्रमण) हो गया है। इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी सरकार पूरी तरह सोई हुई है! मैंने कोटा में भी कहा था कि सरकार को एक गारंटी लेनी चाहिए। हमारा सरकारी अस्पताल है, जहाँ हमने दवाइयाँ, जाँचें और सारे ऑपरेशन मुफ़्त कर दिए थे। मैं सिर्फ हिंदुस्तान की बात नहीं कर रहा, दुनिया के किसी भी देश में ₹25 लाख का इलाज इस तरह मुफ़्त नहीं होता, जैसा हमने करके दिखाया। अमेरिका में बराक ओबामा के नाम पर 'ओबामाकेयर' योजना शुरू हुई थी, लेकिन उन्हें भी उसे बंद करना पड़ा। हमारी योजना पूरी तरह कामयाब रही। लेकिन इसके बाद भी ये घटनाएँ हो रही हैं। सरकार की तरफ से वहाँ सिर्फ औपचारिकता के लिए इलाज चल रहा है, पर इससे क्या होगा? आप गारंटी लीजिए कि जिन महिलाओं की मौत हुई है, उनके परिवारों को क्या मुआवज़ा देंगे? जो महिलाएँ अभी अस्पताल में तड़प रही हैं, उनके पूरे परिवार चिंतित हैं। मैं उन सभी परिवारों से मिला हूँ। उनके पति और भाई कह रहे थे, 'अभी तो सब देख रहे हैं, लेकिन जब हम डिस्चार्ज होकर घर चले जाएँगे, तब इन डॉक्टरों को कहाँ ढूँढ़ते फिरेंगे? तब हमारी सुध कौन लेगा?' मैंने डॉक्टरों की मौजूदगी में उनसे कहा कि चिंता मत कीजिए, ये डॉक्टर आपकी प्राथमिकता पर देखभाल करेंगे। तीसरी बात मैं यह कहता हूँ: अगर इन पीड़ित महिलाओं की किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत आती है, तो सरकार ज़िम्मेदारी ले कि पूरा ट्रांसप्लांट सरकारी देखरेख और खर्च पर होगा। तब मैं मानूँगा कि इस सरकार में शासन करने की ईमानदारी और न्याय देने की नीयत है। अब आप बताइए, आठ महिलाओं को एक जैसी समस्या हो रही है, जो इतिहास में यहाँ पहले कभी नहीं हुई। इसका सीधा मतलब है कि कहीं न कहीं कोई गंभीर संक्रमण है, जिसे ये लोग पकड़ नहीं पा रहे हैं। अगर एफएसएल (FSL) की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है, तो इन्हें सैंपल तुरंत दिल्ली, बॉम्बे या कोलकाता जैसी जगहों पर भेजने चाहिए, जहाँ इसके एक्सपर्ट्स हों। इस काम को प्राथमिकता पर करना होगा, वरना और भी महिलाएँ इसी तरह पीड़ित होती रहेंगी। चौथी बात यह है: जो महिलाएँ अस्पतालों में प्रसव (delivery) के लिए जा रही हैं, वे अब इस बात को लेकर बेहद चिंतित और डरी हुई हैं कि कहीं उनकी स्थिति भी ऐसी ही न हो जाए। यह कितनी बड़ी विडंबना है! पूरे राजस्थान में हज़ारों महिलाओं को प्रसव के लिए मजबूरन अस्पतालों में जाना पड़ता है। वे जाएँ भी तो कहाँ? प्राइवेट अस्पतालों में बहुत ज़्यादा खर्च होता है। ये तमाम बातें मैं लगातार उठा रहा हूँ। सवाल: सर, इस संवेदनशील मुद्दे पर चिकित्सा मंत्री का जो बयान आया है, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? जवाब: देखिए, चाहे चिकित्सा मंत्री जी हों, शिक्षा मंत्री जी हों, वन मंत्री जी हों या दक साहब हों, स्थिति बड़ी अजीब है। कोई थाने में जाकर गाली-गलौज कर रहा है, कोई कलेक्टर को दुत्कार रहा है, तो कोई रोज़ बेतुकी बयानबाज़ी कर रहा है। सरकार में इस वक्त बेहद अजीब और चिंताजनक स्थिति बनी हुई है।

Ashok Gehlot

27,270 次观看 • 3 个月前

एक व्यक्ति किसी विश्वविद्यालय का कुलपति है, अल्पसंख्यक बोर्ड का अध्यक्ष है, ईरान में राजदूत है, भारत का उपराष्ट्रपति बनता है, एक बार नहीं, दो बार, लेकिन जैसे ही वह पद से हटता है, सारी मलाई खाने के बाद, उसे लगता है कि भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं। अगर उस धूर्त आदमी को लगता है कि भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं, तो उसे भारत-म्यांमार सीमा और बांग्लादेश सीमा पर जाकर यहाँ आने वाले रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशी मुसलमानों से कहना चाहिए कि वे यहाँ न आएँ, उन्हें कहना चाहिए कि मैं यहाँ सुरक्षित नहीं हूँ, भाई, मत आओ। 2015 में, एक बॉलीवुड ड्रामा कींग कहता है कि "उसकी पत्नी यहाँ डरी हुई है।" वह अभी भी भारत में रहता है और मलाई खा रहा है, हाँ, उसकी पत्नी डर के मारे उसे छोड़कर चली गई है। भारत में अधिकतर अपराध मुसलमान ही करते हैं, हैरानी की बात यह है की फिर भी वो कहते हैं कि वो यहाँ पीड़ित हैं।

अखण्ड भारत संकल्प

19,322 次观看 • 1 年前

आपकी बात से साफ है कि यह स्थिति आपको मानसिक रूप से भारी लग रही है। 40 की उम्र के आसपास शादी न हो पाना कई बार सिर्फ “घरवालों की वजह से” नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अलग-अलग कारण मिलकर काम करते हैं—परिवार की सोच, जिम्मेदारियाँ, रिश्ते न आना, या फिर आपकी अपनी प्राथमिकताएँ और परिस्थितियाँ भी। सबसे पहले एक बात ज़रूरी है: शादी का फैसला अंततः आपका भी होता है, सिर्फ घरवालों का नहीं। अगर आपको सच में शादी करनी है, तो अब आपको “इंतज़ार” से आगे बढ़कर कुछ ठोस कदम सोचने होंगे। आप कुछ व्यावहारिक रास्ते देख सकती हैं: आप घरवालों से सीधी और शांत बातचीत करें—यह पूछें कि असली रुकावट क्या है: रिश्ता नहीं मिल रहा, या वे टाल रहे हैं, या उनकी कोई चिंता है। जब कारण साफ होगा तभी समाधान निकलेगा। अगर रिश्ते नहीं आ रहे, तो आप खुद भी पहल कर सकती हैं—रिश्ते देखने वाले प्लेटफॉर्म, परिचितों का नेटवर्क, या भरोसेमंद मैट्रिमोनियल सेवाएँ। अगर घरवाले भावनात्मक या सामाजिक कारणों से रोक रहे हैं, तो धीरे-धीरे अपनी financial और personal independence बढ़ाना जरूरी हो जाता है, ताकि फैसले आपके हाथ में भी हों। और एक अहम बात—अगर उम्र को लेकर समाज क्या सोचेगा यह दबाव है, तो उसे बहुत ज्यादा वजन देना जरूरी नहीं है। सही जीवनसाथी उम्र से ज्यादा समझ, सम्मान और compatibility पर मिलता है।

RIYA🌸🌸

38,943 次观看 • 3 个月前

मीडिया द्वारा रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा ऑपरेशन सिन्दूर को लेकर दिए बयान से संबंधित प्रश्न का जवाब : ये ट्रंप के तरह मज़ाक बना रहे हैं। ट्रंप अमेरिका में मज़ाक बना रहा है, ये लोग यहां बना रहे हैं। क्या तुक है? होने वाला है, होगा, अभी तो जारी है—ये क्या लेंग्वेज है? ट्रंप साहब भी ये लेंग्वेज बोलते हैं। मोदी जी मेरे दोस्त हैं, वो मुझे खुश करना चाहते हैं और मैं इनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूं—ये लैंग्वेज होती है क्या? एक देश के राष्ट्रपति की लेंग्वेज ये हो सकती है क्या? बताइए, दुनिया भर में क्या हो रहा है, वो आपको मालूम है। हम भी देखते हैं क्या हो रहा है। चिंता होनी चाहिए सबको कि देश की डेमोक्रेसी नहीं बचेगी, आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा? हमें चिंता यह है। मुझे खुद को चिंता है। अगर देश में डेमोक्रेसी नहीं बचेगी तो क्या होगा देश का? डेमोक्रेसी में सरकार बदलती रहती है। बदली भी है पहले और स्मूथली बदली है। कांग्रेस चाहे जो चुनाव हारी है, चाहे इंदिरा जी हों, चाहे राजीव गांधी जी हों या नरसिम्हा राव जी हों या मनमोहन सिंह जी हों। चुनाव हारे नहीं कि हमने सत्ता सौंपी नहीं इनको। लेकिन इनका जो तरीका है, मुझे लगता है कि इनकी मंशा में खोट है। ये खतरनाक खोट के साथ आगे बढ़ रहे हैं। परवाह नहीं कर रहे जनता क्या सोचेगी। जनता की परवाह ही नहीं, और जनता जो है, इनके खिलाफ भी है, इनसे नाराज भी है। चुनाव आते हैं तो हिंदुत्व के नाम पर वोट देते हैं। हिंदू धर्म एक ऐसी चीज है और कहते हैं कि हिंदू खतरे में है। इनको पूछो—ढाई सौ साल तक तो अंग्रेजों का राज था, पांच सौ साल तक राज था मुगलों का। तब हिंदू खतरे में नहीं था देश का। अब हमारे राज, हिंदुओं का राज है अभी देश में, फिर भी हम खतरे में हैं। सोच सकते हो किस प्रकार से, किस रूप में ये लोग जनता को गुमराह करने में कामयाब हो गए हैं। वोट पड़ जाते हैं इनको। मैं उम्मीद करता हूं, कभी न कभी जनता को समझ में आएगी।

Ashok Gehlot

13,231 次观看 • 5 个月前

जामिया वाले बच्चों सावधान! आंदोलन जामिया से लगभग 20 किमी दूर चल रहा है, लेकिन Delhi Police की वर्दी में बिना नेम प्लेट वाले पुलिसकर्मी जामिया के छात्रों को रोक-रोककर उनके नाम लिख रहे हैं। आख़िर ऐसा क्यों किया जा रहा है? क्या इसका कोई आधिकारिक कारण बताया गया है? क्या यह उचित है? कुछ लोग आशंका जता रहे हैं कि भविष्य में इन छात्रों को परेशान किया जा सकता है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं फिर से मुस्लिम युवाओं पर NSA या UAPA जैसी कड़ी धाराओं के इस्तेमाल की तैयारी तो नहीं की जा रही। Note- इस तरह से अगर कोई भी पुलिस वाले आपको रोक कर आपका नाम पता पूछे तो उन्हें कुछ भी न बताएं जब तक कि पूछने का कोई ठोस वजह न हो! #CJPProtest #JamiaMiliaIslamia सुनिए, इस वीडियो को बनाने वाले छात्र क्या कह रहे हैं। 👇

Pooja Mathur

176,517 次观看 • 2 个月前

फिर विपक्ष की क्या ज़िम्मेदारी है? कि वो सरकार की ढोलक और मंजीरा पकड़े और बजाते रहे? लोकतंत्र का मतलब क्या है? लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ जनता की आवाज़ मानी जाती है। आज अगर जनता लाइन में लग रही है, बेहोश हो रही है, फिर बीजेपी के कोई नेता आ जाएंगे और कह देंगे कि देशभक्त हैं कतार में, लगी है भारी भीड़ — यह नोटबंदी की लाइन पर कहा गया था। फिर ऑक्सीजन सिलेंडर की लाइन लगी। अब एलपीजी गैस सिलेंडर की लाइन लगी है। जब लाइनें लग रही हैं, लोग बेहोश हो रहे हैं, हफ्तों तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, तो विपक्ष क्या करेगा? सवाल नहीं पूछेगा क्या? क्या यह नहीं पूछेगा कि हिंदुस्तान की आम जनता को यह सब क्यों देखना पड़ रहा है, जब आप विश्वगुरु बन रहे हैं? जब बीजेपी कहती है कि देश आज प्रगति कर रहा है आप दाम भी बढ़ा रहे हैं, जनता को कतारों में भी लगा रहे हैं, और विपक्ष सवाल भी न करे? कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता Dolly Sharma

M G

14,738 次观看 • 6 个月前

रिपोर्टर: पहलवान यौन शौषण का आरोप लगाई है। क्या सही है? बीजेपी की महिला कार्यकर्ता:- ब्रजभूषण शरण जी अगर महिला प्रेमी होते तो क्या हमलोगों को नही बुला लेते। क्या हमलोग पहलवान से खराब हैं। हमलोग तो कहीं बोलते भी नहीं। हमलोग तो बूढ़े भी नहीं हैं। क्या हमलोग को पिछवाड़े (घर के पीछे)में नहीं बुला लेते। हम लोग तो विरोध भी नहीं करते। पुरुष कार्यकर्ता: देखिए ! ये लोग क्या कम सुंदर हैं। क्या सांसद जी को कमी है। आमजन यह विडीयो देख सकते हैं में हैं कि ये बचाव कर रहे हैं या आमंत्रण दे रहे हैं। मति भ्रष्ट हो जाता है बीजेपी में जाने के बाद। और यह भी साबित हो रहा है कि कैसे बीजेपी में सैक्स रैकेट तरह चलता है।

Alok Chikku

344,106 次观看 • 3 年前